टिटेनस

टिटेनस जीवाणु द्वारा होने वाला एक चिंताजनक लेकिन विरला संक्रमण है।

प्रमाणित डॉक्टरों द्वारा लिखित और समीक्षा की गई जानकारी।

अंतर्वस्तु

भूमिका

टिटेनस जीवाणु द्वारा होने वाला एक चिंताजनक लेकिन विरला संक्रमण है। आम तौर पर यह शारीरिक घाव के दूषित होने से होता है।

बिना उपचार के, टिटेनस के परेशानियां बढ़ सकती हैं, जो जानलेवा हो सकती हैं।

टिटेनस के कारण

टिटेनस एक क्लोस्त्रीदिउम नामक जीवाणु की प्रकार से होता है। यह जीवाणु निम्न सहित कई भिन्न पदार्थों में जीवित रह सकता है:

  • मिट्टी
  • घरेलू धूल
  • पशु और मानवीय अवशेष, जैसे की खाद

आम तौर पर टिटेनस का जीवाणु शरीर में किसी त्वचिय घाव अथवा चिंताजनक जलन के माध्यम से प्रवेश करता है। एक बार प्रवेश करने पर, उसकी संख्यावृद्धि होती है और वह एक शक्तिशाली विष को निर्मुक्त करता है जिसे न्यूरोटोक्सिन कहते हैं

निउरोटॉक्सिन नसों के आम काम-काज को अस्त-व्यस्त करता है जिससे अकड़न और मांसपेशीय ऐंठन जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं।

अधिक जानकारी और किसको खतरा हो सकता है, के लिये टिटेनस के कारण पढ़ें।

टिटेनस के लक्षणों में निम्न समिल्लित हैं:

  • जबड़ों की मांसपेशीयों में अकड़न और ऐंठन – जिन्हें अक्सर लॉकजाँ के नाम से संबोधित किया जाता है
  • निगलने में परेशानी (डिस्फागिया)

टिटेनस का रोग-निदान

आम तौर पर यह जानकर कि किसी व्यक्ति को हाल ही में कोई घाव अथवा ऐसी कोई चोट लगी हो अथवा पीड़ादायक मांसपेशीय ऐंठन और अकड़न हुई हो, एक निश्चित रोग-निदान किया जा सकता है।

टिटेनस के रोग-दान में किसी प्रकार के शक को मलहम लगाने के औज़ार से परीक्षण करके दूर किया जा सकता है। इस क्रिया में मलहम लगाने के औज़ार को जीभ के पिछले भाग से गले के भीतर डाला जाता है। मलहम लगाने के इस औज़ार से गला घुंटने जैसा महसूस करेंगे व इस औज़ार को अपने मुँह से बाहर की ओर फेकने का प्रयास करेंगे। यदि आपको यह संक्रमण है तो, यह मलहम लगाने का औज़ार आपकी माँसपेशियों में ऐंठन पैदा करेगा और आप इस औज़ार को काटने का प्रयास करेंगे।

टिटेनस का उपचार

यदि आपको कोई गहरा घाव है जो टिटेनस के जीवाणु से दूषित हो सकता है और आपने टीका लगवाया है, तो एहतियातन आपको टिटेनस इम्मुनोग्लोबुलिन (टीआईजी) नामक औषधि दी जायेगी।

यदि आपने टीका नहीं लगवाया है और टिटेनस संक्रमण हो गया है, तो आपको उपचार के लिये किसी अस्पताल में भर्ती होना होगा। आम तौर पर संक्रमण के प्रभावों का सामना करने के लिये कई प्रकार की ऐंटीबायोटिक्स, मांसपेशी शिथिलकर्ता और ऐंटीटोक्सीनों जैसी औषिधियों के मिश्रण से उपचार किया जाता है।

घुटन को रोकने में सहायता के लिये एक वेंटीलेटर (सांस लेने की प्रक्रिया में सहायता हेतु मशीन) का प्रयोग किया जा सकता है।

अधिकांश लोग संक्रमण से बच जाते हैं हालांकि पूर्णत: ठीक होने में चार महीनों तक का समय लग सकता है।

टिटेनस का उपचार की अधिक जानकारी लें।

टिटेनस का इंजेक्शन

टिटेनस इंजेक्शन के पूरे कोर्स में पाँच ख़ुराकें होती है। लगभग दो, तीन और चार महीने की आयु के बच्चों को पहली तीन ख़ुराकें 5-इन-1 इंजेक्शन से दी जाती हैं।

इसके पश्चात लगभग चार वर्ष की आयु पर 5-इन-1 प्री-स्कूल बूस्टर जैब के रूप में टिटेनस इंजेक्शन दिया जाता है।

और फिर बच्चों को टिटेनस का अंतिम बूस्टर 13 और 18 वर्ष की आयु के बीच 3-इन-1 टीनेजर बूस्टर के रूप में दिया जाता है।

पाँच इंजेक्शनों के पूरे कौर्स के पश्चात आप टिटेनस से आजीवन प्रतिरक्षा पा सकते हैं। परन्तु, यदि आपको अथवा आपके बच्चे को कोई गहरा घाव है तो चिकित्सीय राय लेना अति उत्तम होगा।

यदि आप सुनिश्चित नहीं है कि आपने पूरा कोर्स लिया है कि नहीं, उदाहरणार्थ आपने किसी अन्य देश में जन्म लिया हो, तो उचित सलाह लेने के लिये अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

यात्रा हेतु टिटेनस इंजेक्शन

टिटेनस पूरे विश्व में पाया जाता है। यदि आप किसी अतिक्षतिमय माने जाने वाले क्षेत्र मैं चोटिल हो जाते हैं तो वहां चिकित्सीय सहायता उपलब्धता में कठिनाई हो सकती है।

प्राय: निम्न प्रकार के उन व्यक्तियों को टिटेनस इंजेक्शन लेने की सलाह दी जाती है, जिन्होंने:

  • पहले इंजेक्शन नहीं लिया हो
  • इंजेक्शन का पूरा कोर्स नहीं लिया हो
  • सीमित चिकित्सीय सेवा उपलब्धता वाले देश में यात्रा कर रहें हो, और जिनकी टिटेनस इंजेक्शनों की अंतिम ख़ुराक 10 वर्षों से पहले ली गई हो

यात्रा इंजेक्शनों की अधिक जानकारी लें।

लक्षण

अक्सर क्लोस्त्रीदिउम जीवाणु से टिटेनस के लक्षण संक्रमण के 4 से 21 दिनों (रोगोद्भवन अवधि) के भीतर विकसित होते हैं। औसत रोगोद्भवन अवधि लगभग 10 दिनों की होती है।

अधिकतर उन लोगों में टिटेनस घटित होता है जिन्होंने:

  • पहले कभी संक्रमण की रोक-थाम के लिये इंजेक्शन नहीं लिया हो
  • इंजेक्शन का कोर्स पूरा नहीं किया हो (प्रारंभिक तीन इंजेक्शनों के पश्चात 10 वर्षों के अंतराल पर दी जाने वाली दो बूस्टर ख़ुराकें न ली हों)
  • हीरोइन जैसी गैर-कानूनी नशीली दवाओं का इंजेक्शन लिया हो

मांसपेशीय ऐंठन और अकड़न

आम तौर पर टिटेनस के विकसित होने का प्रथम लक्षण आपके जबड़ों की मांसपेशीयों में अकड़न होता है। कभी-कभी इसे लॉकजाँ के नाम से भी जाना जाता है। यह आपको मुंह खोलने में परेशान कर सकता है।

मांसपेशीय ऐंठन और अकड़न आपके जबड़े से गले तक फैलती है और 24 से 72 घंटों तक रहती है।

गले में मांसपेशीय ऐंठन से निगलने में कठिनाई (डिस्फागिया) हो सकती है। अति चिंताजनक मामलों में, सांस लेने में विकट कठिनाई भी उत्पन्न हो सकती है। इससे घुटन हो सकती है।

अन्य लक्षण

टिटेनस संक्रमण से जुड़ें अन्य लक्षणों में निम्न समिल्लित हैं:

यदि टिटेनस का उपचार नहीं किया जाता है तो यह विकट समस्यायें उत्पन्न कर सकता है जो जानलेवा हो सकता है, उदाहरनार्थ हृदय गति रुकने के कारण

cटिटेनस की जटिलताओं की अधिक जानकारी लें।

कारण

क्लोस्त्रीदिउम टेटानि जीवाणु से टिटेनस होता है।

क्लोस्त्रीदिउम टेटनीके बीजाणु शरीर के बाहर लंबी अवधि के लिये जीवित रह सकते हैं और वातावरण में दूर-दूर तक फैले हुये होते हैं। प्राय: यह घोड़ों और गाय जैसे पशुओं की खाद और दूषित मिट्टी में पाये जाते हैं।

शरीर में प्रवेश करने के पश्चात, टिटेनस जीवाणु जल्द ही वृद्धि करते हैं और तेतानोंस्पासमिन (निउरोटॉक्सिन नाम के जहर की प्रकार) का निस्तार करते हैं। यदि तेतानोंस्पासमिन रक्त-प्रवाह में प्रवेश कर लेता है तो यह शरीर के इर्द-गिर्द फैलता है और टिटेनस के लक्षण विकसित करता है।

निउरोटॉक्सिन नसों के संकेतों को रोकता है और दिमाग से मेरुदंड तक और फिर मांसपेशीयों तक भेजता है। इस प्रकार टिटेनस से संबन्धित मांसपेशीय ऐंठन और अकड़न उत्पन्न होती हैं।

चोटें और घाव

टिटेनस जीवाणु का शरीर में प्रवेश करने के कारणों में से चोट अथवा छिद्र घाव एक माध्यम है। गुलाब के कांटे से त्वचा में छिद्र करवाने जैसा भी कोई छिद्र घाव जीवाणु को आपके शरीर में प्रवेश करवाने में सहायक हो सकता है।

टिटेनस के जीवाणु कम ऑक्सिजन वाले स्थानों में पनपते और बढ़ते हैं। इसीलिये गहरी चोटों और घावों में अक्सर संक्रमण होता है। टिटेनस के जीवाणुओं को विकसित होने देने से रोकने के लिये यह सदैव सुनिश्चित करें कि चोटें और घाव पूरी तरह से साफ किये गये हैं।

अन्य प्रवेश बिन्दु

चोटों और घावों के माध्यम से प्रवेश करने के अतिरिक्त टिटेनस के जीवाणु निम्न माध्यमों से भी प्रवेश कर सकते हैं:

  • लंगड़ा-लूला करना – त्वचा पर चोट से उत्पन्न चीरें और फटन अथवा किसी चक्कू अथवा टूटे शीशे जैसी धारदार वस्तु से सीधे अभिघात के कारण
  • खरोंचे – साइकल से गिर कर और घुटने पर रगड़ आने जैसे आघात से होने वाले घाव
  • जलन
  • पशु द्वारा काटना
  • शरीर में छिद्र और टैटू (यदि गैर-विसंक्रमित उपकरणों का प्रयोग किया गया हो)
  • आंखो में चोट

जोखिम ग्रुप

नशीली दवाओं का इंजेक्शन लेने वाले यात्रियों और लोगो के कुछ ग्रुप टिटेनस बढ़ने के जोख़िम को बढ़ावा देते हैं।

यात्रीगण

यदि आप विदेश यात्रा पर है तो यह सुनिश्चित करें की आपने अप-टू-डेट टीकाकरण करवा लिया है। आपको यात्रा करने वाले देश अथवा क्षेत्र के आधार पर कुछ टीकों की अतिरिक्त खुराकें लेने की आवश्यकता हो सकती है।

यात्रा हेतु टीके की अधिक जानकारी लें।

यदि आप किसी दूरस्थ क्षेत्र मैं यात्रा पर है जहां चिकित्सीय सेवायें सरलता से उपलब्ध न होने की संभावना हो, और आपने 10 वर्ष से पूर्व टिटेनस के इंजेक्शन लिये हों, तो आपको बूस्टर खुराक लेने की आवश्यकता होगी (चाहें आपने पहले ही पाँच खुराकों का की पूरी खुराक ली हो)। यदि आपको कोई घाव हो गया है जिससे टिटेनस होने की संभावना हो और चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो यह कदम सावधानी के तौर पर लेना चाहिये।

नशीली दवाओं के उपयोगकर्ताओं को इंजेक्शन

हीरोइन अथवा मेथफेटामिन जैसी गैर-कानूनी नशीली दवाओं का इंजेक्शन लेने वाले व्यक्तियों में टिटेनस होने के अधिक खतरे होते हैं। नशीली दवाओं का विक्रेता अक्सर इस प्रकार की नशीली दवाओं में कुनैन नाम का रसायन मिलाता हैं। कुनैन टिटेनस के जीवाणु से दूषित हो सकता है।

रोग-निदान

टिटेनस का रोग-निदान अक्सर सीधा-साधा होता है क्योंकि इसके लक्षण सरलता से पहचान में आ जाते हैं। कुछ अन्य हालात टिटेनस जैसी मांसपेशियों में पीड़ादायक ऐंठन उत्पन्न कर सकते हैं।

यदि किसी को हाल ही में कोई घाव अथवा चोट लगी हो व मांसपेशियों में ऐंठन और अकड़न हो, तो अक्सर विश्वासपूर्ण रोग-निदान किया जा सकता है।

मलहम लगाने के औजार द्वारा परीक्षण

टिटेनस के रोग-दान में किसी प्रकार के शक को मलहम लगाने के औज़ार से परीक्षण करके दूर किया जा सकता है। इस क्रिया में मलहम लगाने के औज़ार को जीभ के पिछले भाग से गले के भीतर डाला जाता है।

मलहम लगाने के इस औज़ार से गला घुंटने जैसा महसूस करेंगे व इस औज़ार को अपने मुँह से बाहर की ओर फेकने का प्रयास करेंगे। यदि आपको यह संक्रमण है तो, यह मलहम लगाने का औज़ार आपकी माँसपेशियों में ऐंठन पैदा करेगा और आप इस औज़ार को काटने का प्रयास करेंगे।

उपचार

जटिलताओं को विकसित होने से बचने के लिये टिटेनस का जल्द उपचार महत्वपूर्ण है।

टिटेनस उपचार दो प्रकार से किया जाता है:

  • रोगनिरोधी उपचार – उन व्यक्तियों के लिये जिन्होंने पूर्ण अथवा आंशिक रूप से टिटेनस निरोधक इंजेक्शन लिया हो और जिन्हें कोई चोट टिटेनस संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील बनाती है
  • रोगसूचक उपचार : उन व्यक्तियों के लिये जिनमें एक सक्रिय टिटेनस संक्रमण के लक्षण विकसित हो गये हैं

रोगनिरोधी उपचार

टिटेनस संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील होने वाले घावों को टिटेनस-प्रवृत्त घाव कहते है।

टिटेनस-प्रवृत्त घाव

टिटेनस-प्रवृत्त घावों में निम्न साम्मिलित हैं:

  • वह घाव जिन्हें ठीक करने के लिये सर्जरी की आवश्यकता होती है लेकिन सर्जरी की पहुंच में छ: अथवा अधिक घंटों की देरी हो गई हो
  • घाव अथवा जलन जिनमें मांस-तंतुओ का काफी नुकसान हुआ हो
  • छिद्र से पैदा हुए घाव, विशेष रूप से यदि वह मिट्टी या खाद से दूषित हुए हों
  • छिद्र धाव जिनमें पशुओं के दांत जैसे बाहरी तत्व समिल्लित हों
  • विकट अस्थि-भंग जिन्होंने हड्डीओं को संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील बना दिया हों
  • रोगियों में घाव अथवा जलन जिनमें नियमित घाव का सड़ना होता हो (चिंताजनक जीवाणु संक्रमण के कारण रक्त चाप में गिरावट)

यदि आपका घाव टिटेनस-प्रवृत्त है और इसके टिटेनस जीवाणु से दूषित होने का उच्च जोखिम है, तो इम्मूनोंग्लोबुलिन (टीआईजी) नामक दवाई की सिफ़ारिश की जाती है। यह घाव द्वारा मिट्टी अथवा पशु- अवशेष के संपर्क में आने से हो सकता है।

यदि आपके द्वारा लिये गये इंजेक्शन अप-टू-डेट है तब भी आपको टीआईजी का प्रयोग करना चाहिये क्योंकि ऐसा हो सकता है कि टीके ने आपको टिटेनस से पूरी प्रतिरक्षा प्रदान न की हो।

टिटेनस इम्मूनोंग्लोबुलिन

टिटेनस इम्मूनोंग्लोबुलिन (टीआईजी) दवाई में रोग-प्रतिकारक समिल्लित होते हैं जो टिटेनस संक्रमण को समाप्त करते हैं। रोग-प्रतिकारक संक्रमण-रोधक सैल होते हैं। टिटेनस इम्मूनोंग्लोबुलिन को मांसपेशी में इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है और यह तुरंत प्रभाव से टिटेनस से अल्पावधि में सुरक्षा प्रदान करती है। इसे गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली स्त्रियों के लिये सुरक्षित माना जाता है।

टिटेनस इम्मूनोंग्लोबुलिन लेने के पश्चात आपको इंजेक्शन के स्थान पर कुछ अल्पावधि परेशानी हो सकती है। अन्य दुष्प्रभाव ग़ैरमामूली हो सकते हैं लेकिन उनमें निम्न समिल्लित हो सकते हैं:

  • छाती में दर्द
  • सांस लेने में कमी
  • चक्कर आना
  • चेहरे पर सूजन
  • मुंह के छालें
  • कंपन
  • जोड़ो में दर्द

यदि आप में उपरोक्त में से कोई भी दुष्प्रभाव विकसित होता है तो अपने स्वास्थ्य के लिये प्रभारी डॉक्टर से बात करें।

आपके टीके अप-टू-डेट है या नहीं, के आधार पर आपको टिटेनस के टीके की बूस्टर खुराक भी दी जा सकती है।

टिटेनस लक्षणों का उपचार

यदि किसी व्यक्ति में टिटेनस के लक्षण विकसित होते हैं, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है।

टिटेनस के लक्षणों के उपचार के लिये मुख्यत: निम्न तीन प्रकार की दवाईयों का प्रयोग होता है:

  • शांतिकर औषधी
  • मांसपेशी शिथिलकर्ता
  • नीउरो-मांसपेशीय रोधक एजेंट (एनबीए)

शांतिकर औषधियां

शांतिकर औषधि जैसी दवाईयां आपको शारीरिक और मानसिक रूप से शांत कर सकती हैं। वह मांसपेशियों को शांत करती हैं जो मांसपेशी में अकड़न को शांत और रोक सकती हैं।

शांतिकर औषधियों के दुष्प्रभावों में निम्न समिल्लित होते हैं:

  • झपकी आना
  • चिड़चिड़ापन
  • निराशा
  • कंपन हरकतें और लड़खड़ाती चाल (गतिविभ्रम)
  • अतिक्रियाशीलता
  • अवास्तविक वस्तुयें देखना और सुनना (भ्रम)

मांसपेशी शिथिलकर्ता

मांसपेशी शिथिलकर्ता जैसी दवाईयां आपकी मांसपेशियों को शांत करने में सहायता करती हैं। अक्सर उनका प्रयोग शांतिकर औषधियों को हटाने के पश्चात किया जाता है (शांतिकर औषधियां लत लगाने वाली हो सकती है; इसलिये सामान्यतः दीर्घावधि उपचार के लिये उनके प्रयोग की सिफ़ारिश नहीं की जाती है)।

जब मांसपेशी शिथिलकर्ता दवाईयां कम की जाती हैं तो टिटेनस लक्षणों को लोटने से रोकने के लिये आपको इन्हें दिया जाता हैं।

नीउरो-मांसपेशीय रोधक एजेंट (एनबीए)

नीउरो-मांसपेशीय रोधक एजेंट (एनबीए) उस प्रकार की दवाईयां हैं जो दिमाग से मांसपेशियों तक नसों के संकेतों को रोकती हैं। यह कुछ विशेष अंगो की हलचल असक्षम (लकवा) कर देती हैं, जो विकट मांसपेशीयों में ऐंठन और अकड़न सहने वाले व्यक्तियों के लिये सहायक होती हैं।

सामान्यतः वेकुरोंनिउम नाम का नीउरो-मांसपेशीय रोधक एजेंट का नुस्खा दिया जाता है। वेकुरोंनिउम से सांस लेने वाली मांसपेशियों का लकवा होता है; इसलिये इसे देने से पूर्व सांस लेने में सहायता प्रदान की जाती है।

नेऊरोंटॉक्सिनों का और फैलाव रोकना

टिटेनस इम्मुनोंग्लोबुलिन को टेटनोस्पसमिन नीउरोटॉक्सिन रोकने के लिये किया जाता है जिससे आपके तंत्रिका तंत्र में विघ्न आता है। किसी भी प्रकार के छोड़े का रहें जीवाणुओं को समाप्त करने और वृद्धि रोकने के लिये पेनिसिलिन (अथवा मेत्रोनिदाज़ोल, यदि आपको पेनिसिलिन से ऐलर्जी है) जैसे ऐन्टीबाइयोटिक का भी प्रयोग किया जाता है।

सर्जरी

यदि टिटेनस-प्रवृत्त घाव अत्यंत बड़ा है तो अधिक से अधिक संभव क्षतिग्रस्त और दूषित मांसपेशी के भाग को क्षतशोधन नामक सर्जरी प्रक्रिया से हटाना आवश्यक होगा।

क्षतशोधन में मिट्टी और खाद जैसे बाहरी तत्वों और किसी मृत मांस-तंतु को खुले घाव से हटाना होता है। टिटेनस संक्रमण के केस में क्षतशोधन से कोई भी बचा हुआ टिटेनस जीवाणु हटाया जाता है।

आहार और सांस लेना

टिटेनस द्वारा प्रभावित मांसपेशी की बढ़ी गतिविधि का अर्थ है कि किसी संक्रमण ग्रसित व्यक्ति को अधिक मात्रा में कैलोरी का उपभोग करना होगा। अक्सर 3,500 से 4,000 कैलोरी और 150 ग्रा. प्रति दिन की आवश्यकता होती है।

यदि निगलने में परेशानी हो अथवा संभव न हो, तो पेट से जुड़ी एक ट्यूब अथवा नस में लगी ड्रिप के माध्यम से तरल आहार देना आवश्यक हो सकता है। एक वेंटीलेटर (सांस लेने की प्रक्रिया में सहायता हेतु मशीन) के प्रयोग से सांस लेने में सहायता भी आवश्यक हो सकता है।

जटिलतायें

यदि टिटेनस संक्रमण विकट है, तो कई अन्य जटिलतायें पैदा हो सकती हैं।

अकस्मात ह्रदयघात से मृत्यु

अकस्मात ह्रदयघात से मृत्यु टिटेनस की अत्यंत चिंताजनक जटिलता है। यह व्यक्तियों की टिटेनस से मृत्यु का मुख्य कारण है।

अकस्मात ह्रदयघात से मृत्यु में एक दम से ह्रदय की धड़कन बंद हो जाती है। यह कई कारणों से होती है और सामान्यतः टिटेनस रोग से गंभीर पीड़ित लोगो की मृत्यु इंटैन्सिव केयर यूनिट में होती है।

अकस्मात ह्रदयघात मृत्यु और दिल का दौरे में अंतर है जिसमें ह्रदय के रक्त प्रवाह में रुकावट एक कारण होता है और जिसमें ह्रदय की मांसपेशियां नष्ट हो जाती हैं।

पल्मोनरी एम्बोलिस्म

अत्यंत बीमार व्यक्तियों की भांति, टिटेनस के रोगी पल्मोनरी एम्बोलिस्म के जोखिम से पीड़ित होते हैं।

पल्मोनरी एम्बोलिस्म एक गंभीर और संभावित खतरनाक हालात है। यह फेफड़ों की रक्त-वाहिका में रुकावट के कारण होता है जो सांस लेने और प्रवाह को प्रभावित करता है। अत: यह अत्यावश्यक है कि तुरन्त ऐंटी-क्लोटिंग दवाईयां और आवश्यक्तानुसार ऑक्सिजन थेरेपी दी जाये।

पल्मोनरी एम्बोलिस्म का उपचार की अधिक जानकारी लें।

ऐस्पिरेशन निमोनिया

चूंकि मांसपेशी अकड़न और ऐंठन के कारण टिटेनस के रोगियों में निगलने (डिस्फागिया) की कठिनाई होती है, इस कारण थूक की थोड़ी मात्रा का उनके फेफड़ों पर गिरने का जोख़िम बना रहता है। इस कारण ऐस्पिरेशन निमोनिया नाम का संक्रमण होने की संभावना होती है।

ऐस्पिरेशन निमोनिया का उपचार ऐंटी बायोटिक्स से किया जाता है।

विकट किडनी विफलता

टिटेनस संक्रमण से संबन्धित विकट मांसपेशी ऐंठन रब्दोम्योलेसिस नाम के हालात उत्पन्न कर सकती है।

रब्दोम्योलेसिस में मांसपेशी के मांस-तंतु टूट जाते है और माइयोलोबिन नाम के प्रोटीन का पेशाब में रिसाव हो जाता है। इस कारण विकट किडनी विफलता हो जाती है जिसमें अचानक ही किडनीयां अपने अधिकतर कार्य करना छोड़ देती हैं।

द्वारा उपलब्ध कराई गई विषय वस्तु NHS Choices