स्ट्रोक

प्रस्तावना

स्ट्रोक एक जानलेवा चिकित्सीय स्थिति है, जो मस्तिष्क के हिस्से में रक्त-संचार बाधित होने पर पैदा होती है।

स्ट्रोक एक चिकित्सीय आपात-स्थिति है जिसका तत्काल उपचार अनिवार्य है।

स्ट्रोक का उपचार जितनी जल्दी हो, नुकसान की संभावना उतनी कम हो जाती है।

आपको या किसी अन्य व्यक्ति को स्ट्रोक के संदेह होने पर तत्काल आपातकालीन सेवाओं और एम्बुलेंस को फोन करें।

स्ट्रोक के लक्षण

स्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों को F.A.S.T शब्द के साथ याद रखा जा सकता है:

  • चेहरा - चेहरा एक तरफ झुका हुआ हो, व्यक्ति मुस्कुराने में अक्षम हो, या उसका चेहरा उतरा हो।
  • हाथ - स्ट्रोक का संदिग्ध व्यक्ति किसी एक हाथ में कमजोरी या सुन्नता के कारण दोनों हाथों को उठाने और उन्हें स्थिर रखने में अक्षम हो सकता है।
  • वाणी - व्यक्ति की वाणी धीमी हो सकती है, तुतला सकती है, या व्यक्ति के जगे होने के बावजूद उसे बोल पाने में परेशानी हो सकता है; और उन्हें आपकी बात समझने में भी परेशानी हो सकती है।
  • समय - ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत आपातकालीन सेवाओं को फ़ोन करें।

स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें

स्ट्रोक के कारण

शरीर के अन्य अंगों की तरह, मस्तिष्क को भी सुचारु रूप से कार्य करने के लिए रक्त द्वारा प्रदान की जाने वाली ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।

रक्त की आपूर्ति बाधित या बंद हो जाने पर मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लगती हैं। इससे मस्तिष्क की क्षति, विकलांगता और संभवतः मृत्यु भी हो सकती है।

स्ट्रोक के दो प्रमुख कारण हैं:

  • स्थानिक-अरक्तता सम्बन्धी (इस्केमिक) - स्ट्रोक के 85 % मामलों में रक्त के थक्के के कारण मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति बंद हो जाती है।
  • रक्तस्रावी (हैमरेजिक)- इन मामलों में मस्तिष्क को आपूर्ति करने वाली कमजोर पड़ गयी रक्त वाहिका फट जाती है।

एक संबंधित स्थिति ट्रांसिएंट इस्कीमिक अटैक (टीआईए) है, जहां मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित हो जाती है।

इसे मिनी-स्ट्रोक के रूप में जाना जाता है। ऐसी स्थिति महज कुछ मिनटों से 24 घंटे तक बनी रह सकती है।

TIA का अविलम्ब इलाज किया जाना चाहिए, क्योंकि ये अक्सर संभावित पूर्ण स्ट्रोक के संकेत होते हैं ।

लक्षणों के ख़त्म हो जाने पर भी अविलम्ब चिकित्सीय परामर्श लें।

निम्नलिखित स्थितियों में स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है:

स्ट्रोक के कारणों के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें

स्ट्रोक का उपचार

स्ट्रोक का उपचार स्ट्रोक के प्रकार, प्रभावित मस्तिष्क का हिस्सा और स्ट्रोक के कारणों पर निर्भर करता है।

आमतौर पर स्ट्रोक का उपचार दवा से किया जाता है। इसमें रक्त के थक्कों को रोकने और गलाने, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने वाली दवाएं शामिल हैं।

कुछ मामलों में, रक्त के थक्कों को हटाने के लिए अन्य प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है। रक्तस्रावी स्ट्रोक की स्थिति में मस्तिष्क की सूजन और भविष्य के रक्तस्राव के जोखिम को कम करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

स्ट्रोक की पहचान और उपचार के बारे में यहाँ पढ़ें।

स्ट्रोक से उबरना

स्ट्रोक से बचने वाले लोगों को मस्तिष्क में परेशानी होने के कारण अक्सर दीर्घकालिक समस्याएं होती हैं।

कुछ लोगों को पहले जैसी स्थिति में वापस आने में लम्बा समय लगता है, जबकि कई लोग कभी भी पूरी तरीके से ठीक नहीं हो पाते, और उन्हें अपने जीवनशैली को स्ट्रोक के प्रभाव के साथ समायोजित करना पड़ता है।

स्थानीय अधिकारियों द्वारा जरूरतमंद व्यक्तियों को स्वास्थ्य लाभ के लिए नि:शुल्क सेवाएं उपलब्ध कराना चाहिए।

ये सुविधाएँ किसी व्यक्ति को स्ट्रोक से उबरने के दौरान स्वतंत्र दिनचर्या के लिए आवश्यक उपाय सीखने में मददगार साबित होती हैं।

कुछ लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए किसी न किसी सहायता पर निर्भर रहेंगे।

जैसे, एक देखभाल कर्मी उस व्यक्ति के घर कपडे धोने और पहनने में मदद करने, या साथ प्रदान करने के लिए आ सकता है।

निम्नलिखित तथ्यों के बारे में विस्तार से पढ़ें:

स्वयं स्ट्रोक से उबरने या किसी ऐसे व्यक्ति की देखभाल करने की स्थिति में, गाइड को पढ़ना आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकता है।

इस गाइड को देख-रेख और सहयोग की आवश्यकता वाले व्यक्तियों के साथ साथ उनके देखभाल-कर्मियों और रिश्तेदारों के लिए तैयार किया गया है।

स्ट्रोक से बचाव

रोजमर्रा की जीवनशैली में निम्नलिखित चीजें शामिल कर स्ट्रोक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है:

  • स्वस्थ आहार लेना
  • नियमित व्यायाम करना
  • शराब के सेवन से सम्बंधित अनुशंषित दिशानिर्देशों का पालन करना (सप्ताह में 14 इकाइयों से अधिक शराब का सेवन नहीं करना)
  • धूम्रपान नहीं करना

स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाली स्थितियों का प्रभावी तरीके से प्रबंधन आवश्यक है, जैसे कि दवा के माध्यम से उच्च रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करना।

यदि आपको पहले कभी स्ट्रोक या TIA हुआ है, तो उपर्युक्त उपाय महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि आपके दूसरे स्ट्रोक होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

स्ट्रोक से बचाव के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

बच्चों में स्ट्रोक

स्ट्रोक से सिर्फ वयस्क ही प्रभावित नहीं होते। स्ट्रोक एसोसिएशन के मुताबिक, ब्रिटेन में हर साल तक़रीबन 400 बच्चों को स्ट्रोक होने की संभावना है।

स्ट्रोक एसोसिएशन की वेबसाइट पर बचपन में होने वाले स्ट्रोक के बारे में विस्तार से पढ़ें।

लक्षण

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आपको या किसी अन्य व्यक्ति को स्ट्रोक के संदेह होने पर तत्काल आपातकालीन सेवाओं और एम्बुलेंस को फोन करें।

एम्बुलेंस के प्रतीक्षा के दौरान लक्षण ख़त्म हो जाने पर भी जांच हेतु अस्पताल जाना आवश्यक है।

प्रारंभिक जाँच के पश्चात आपको गहन जाँच के लिए अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ सकता है। आवश्यकता पड़ने पर, विशेषज्ञ द्वारा उपचार शुरू किया जा सकता है।

तुरंत से लेकर 24 घंटे से कम समय में ख़त्म हो जाने वाले स्ट्रोक के लक्षण इस बात के द्योतक हैं कि यह एक ट्रांसिएंट इस्कीमिक अटैक (TIA) था।

इन लक्षणों को भी संभावित स्ट्रोक के जोखिम को कम करने हेतु एक चिकित्सीय आपातस्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए।

स्ट्रोक के संकेतों की पहचान

स्ट्रोक के संकेत और लक्षण प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न होते हैं, लेकिन आमतौर पर ये लक्षण अचानक ही शुरू होते हैं।

आपके मस्तिष्क के विभिन्न भाग आपके शरीर के विभिन्न हिस्सों को नियंत्रित करते हैं, इसलिए आपके स्ट्रोक के लक्षण आपके मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से और क्षति की सीमा पर निर्भर करेंगे।

स्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों को F.A.S.T शब्द के साथ याद रखा जा सकता है:

  • चेहरा - चेहरा एक तरफ झुका हुआ हो, व्यक्ति मुस्कुराने में अक्षम हो, या उसका चेहरा उतरा हो।
  • हाथ - स्ट्रोक का संदिग्ध व्यक्ति किसी एक हाथ में कमजोरी या सुन्नता के कारण दोनों हाथों को उठाने और उन्हें स्थिर रखने में अक्षम हो सकता है।
  • वाणी - व्यक्ति की वाणी धीमी हो सकती है, तुतला सकती है, या व्यक्ति के जगे होने के बावजूद उसे बोल पाने में परेशानी हो सकता है; और उन्हें आपकी बात समझने में भी परेशानी हो सकती है।
  • समय - ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत आपातकालीन सेवाओं को फ़ोन करें।

इन संकेतों और लक्षणों को जानना हर किसी के लिए आवश्यक है, खासकर यदि आप ऐसे लोगों के बीच रहते हैं या ऐसे लोगों की देखभाल करते हैं, जिन्हें स्ट्रोक का जोखिम अधिक है, जैसे बुजुर्ग या ऐसे लोग जिन्हें मधुमेह या उच्च रक्तचाप की समस्या है।

अन्य संभावित लक्षण

F.A.S.T के अंतर्गत लगभग सभी लक्षण आते हैं, लेकिन कभी-कभी स्ट्रोक के विभिन्न लक्षणों भी हो सकते हैं।

निम्नलिखित लक्षणों को अन्य संकेतों में शामिल किया जा सकता है:

  • शरीर के एक तरफ का पूरा पक्षाघात
  • अचानक दिखना बंद हो जाना या दृष्टि का धुंधला हो जाना
  • चक्कर आना
  • भ्रम की स्थिति पैदा हो जाना
  • दूसरों की बातों को समझने में कठिनाई होना
  • संतुलन और समन्वय सम्बन्धी समस्याएं
  • निगलने में कठिनाई (डिस्फेजिया)
  • पहले से अनुभव की गई किसी भी चीज़ के इतर अचानक और बहुत तेज़ सिरदर्द महसूस करना
  • चेतनहीनता

हालाँकि इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं।

ट्रांसिएंट इस्कीमिक अटैक (TIA)

TIA, जिसे मिनी-स्ट्रोक के रूप में भी जाना जाता है, के लक्षण स्ट्रोक के लक्षणों जैसे ही होते हैं, लेकिन ये लक्षण कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों में ख़त्म हो जाते हैं।

हालांकि समय के साथ लक्षणों में सुधार हो जाता है, परन्तु TIA को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि यह आपके मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति की समस्या से सम्बंधित एक गंभीर चेतावनी का संकेत है।

इसका अर्थ है कि आपको निकट भविष्य में स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ गया है।

आपको या किसी और को TIA या स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत आपातकालीन सेवाओं को फोन कर एम्बुलेंस बुलाना आवश्यक है।

एम्बुलेंस के प्रतीक्षा के दौरान लक्षण ख़त्म हो जाने पर भी जांच हेतु अस्पताल जाना आवश्यक है।

यदि आपको लगता है कि आपको पहले TIA हो चुका है, लेकिन लक्षण ख़त्म हो चुके हैं और आपने ससमय चिकित्सक से परामर्श नहीं किया है तो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें ।

आवश्यकतानुरसर वे आपको जाँच के लिए अस्पताल में भेज सकते हैं।

कारण

स्ट्रोक प्रमुख रूप से दो प्रकार के होते हैं: इस्केमिक स्ट्रोक और रक्तस्रावी स्ट्रोक। वे मस्तिष्क को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करते हैं और उनके अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

स्थानिक-अरक्तता सम्बन्धी (इस्केमिक स्ट्रोक)

स्थानिक-अरक्तता सम्बन्धी (इस्केमिक) स्ट्रोक सबसे आम प्रकार के स्ट्रोक होते हैं। ये तब होते हैं जब रक्त का थक्का मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन के प्रवाह को अवरुद्ध करता है।

ये रक्त के थक्के आमतौर पर उन क्षेत्रों में बनते हैं, जहां प्लाक या चर्बी जमे होने के कारण समय के साथ धमनियां संकुचित या अवरुद्ध हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को ऐथिरोस्क्लेरोसिस के रूप में जाना जाता है।

उम्र बढ़ने के साथ धमनियां स्वाभाविक रूप से संकीर्ण हो सकती हैं, लेकिन कुछ चीजें खतरनाक रूप से इस प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं।

इसमें शामिल हैं:

दिल की अनियमित धड़कन जिसे अलिंद तंतुविकंपन भी कहते हैं, इस्केमिक स्ट्रोक का एक अन्य संभावित कारण है।

इससे ह्रदय में रक्त के थक्के बन सकते हैं जो टूट कर ह्रदय से निकल मस्तिष्क को रक्त आपूर्ति करने वाले रक्त वाहिकाओं में फंस जाते हैं।

रक्तस्रावी स्ट्रोक

रक्तस्रावी स्ट्रोक (जिसे सेरेब्रल हैमरेज या इंट्राक्रैनील हैमरेज भी कहा जाता है) इस्केमिक स्ट्रोक से कम आम है।

रक्तस्रावी स्ट्रोक में दिमाग के भीतर एक रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क में और उसके चारों ओर खून बहने लगता है।

उच्च रक्तचाप रक्तस्रावी स्ट्रोक का मुख्य कारण है, जो मस्तिष्क में धमनियों को कमजोर कर उन्हें विभाजित करने या टूटने का खतरा बना सकता है।

उच्च रक्तचाप के खतरे को बढ़ाने वाली चीजों में शामिल हैं:

  • अधिक वजन या मोटापा
  • अधिक मात्रा में शराब पीना
  • धूम्रपान
  • व्यायाम की कमी
  • तनाव, जो रक्तचाप में अस्थायी वृद्धि के कारण हो सकते हैं

रक्तस्रावी स्ट्रोक रक्त वाहिका (मस्तिष्क धमनीविस्फार) के गुब्बारे के समान विस्तार या मस्तिष्क में असामान्य रूप से निर्मित रक्त वाहिकाओं के फटने के परिणामस्वरूप भी हो सकता है।

स्ट्रोक के खतरे को कम करना

स्ट्रोक को पूर्णतः रोक पाना असंभव है, क्योंकि कुछ चीजें जिनसे इनका खतरा बढ़ता है, उन्हें बदल पाना संभव नहीं है।

इसमें शामिल हैं:

  • आयु - यदि आपकी आयु 65 वर्ष से अधिक है, तो आपको स्ट्रोक होने की अधिक संभावना है, हालांकि लगभग एक चौथाई स्ट्रोक कम उम्र के लोगों में होते है।
  • पारिवारिक इतिहास - यदि किसी करीबी रिश्तेदार (माता-पिता, दादा-दादी, भाई या बहन) को कोई दौरा पड़ा हो, तो आपको स्ट्रोक होने की संभावना अधिक होती है।
  • नस्ल - यदि आप दक्षिण एशियाई, अफ्रीकी या कैरिबियन हैं, तो आपको स्ट्रोक का खतरा अधिक है, क्योंकि आंशिक रूप से इन समूहों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दर अधिक होती है।
  • आपका मेडिकल इतिहास - यदि आपको पूर्व में स्ट्रोक, ट्रांसिएंट इस्कीमिक अटैक (टीआईए) या दिल का दौरा पड़ चुका है, तो आपको स्ट्रोक का खतरा अधिक है।

जीवन शैली में बदलाव करके एथेरोस्क्लेरोसिस और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से बच के स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम करना संभव है।

दिल की धड़कन के अनियमित होने की संभावना पर आपको चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

यह आलिंद तंतुविकम्पन का संकेत हो सकता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

स्ट्रोक के खतरे को कम करने के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

रोग-निर्णय

आमतौर पर स्ट्रोक्स की पहचान शारीरिक परीक्षण और स्कैन के दौरान उत्पन्न मस्तिष्क की तस्वीरों का अध्ययन करके किया जाता है।

पहली बार संदिग्ध स्ट्रोक होने की स्थिति में अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर यथासंभव आपके लक्षणों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे।

रोग की पहचान और स्ट्रोक के कारण को निर्धारित करने के लिए कई प्रकार के जांच किये जा सकते हैं।

इनमें निम्नलिखित जाँच शामिल हो सकते हैं:

  • आपके कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर के निर्धारण के लिए रक्त जांच
  • अनियमित धड़कन के लिए अपनी नाड़ी की जाँच
  • रक्तचाप मापना
  • मस्तिष्क स्कैन

अगर स्ट्रोक के शारीरिक लक्षण स्पष्ट हैं, तो ब्रेन स्कैन निम्नलिखित पहलुओं के निर्धारण के लिए किया जाना चाहिए :

  • स्ट्रोक धमनी के अवरुद्ध होने (इस्केमिक स्ट्रोक) या रक्त वाहिका के फटने (रक्तस्रावी स्ट्रोक) के कारण हुआ है
  • मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा प्रभावित हुआ है
  • स्ट्रोक कितना गंभीर है

संदिग्ध स्ट्रोक वाले व्यक्ति को अस्पताल पहुंचने के एक घंटे के अंदर ब्रेन स्कैन करवाना चाहिए।

प्रारंभिक ब्रेन स्कैन उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो:

  • क्लॉट-बस्टिंग ड्रग्स (थ्रोम्बोलिसिस) जैसे कि एल्टेप्लेस या शुरुआती स्कन्दनरोधी उपचार लिए हैं
  • पहले से ही स्कन्दनरोधी उपचार पर हैं
  • जिनके चेतना का स्तर निम्न है

इन्ही कारणों की वजह से स्ट्रोक को एक चिकित्सकीय आपात-स्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए, और स्ट्रोक के संदेह पर आपातकालीन सेवाओं को फ़ोन किया जाना चाहिए - ऐसे में डॉक्टर से समय लेने में इंतजार नहीं करना चाहिए।

संदिग्ध स्ट्रोक वाले लोगों के मस्तिष्क जाँच के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के स्कैन हैं:

  • सीटी स्कैन
  • एमआरआई स्कैन

सीटी स्कैन

सीटी स्कैन एक्स-रे की तरह होता है, लेकिन इसमें मस्तिष्क की अधिक विस्तृत त्रि-आयामी चित्र बनती है, जिसका उपयोग डॉक्टर द्वारा समस्या वाले क्षेत्रों की पहचान करने के लिए किया जाता हैं।

सीटी स्कैन के दौरान, चित्र की बेहतर स्पष्टता और मस्तिष्क को रक्त आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं को देखने के लिए आपकी बांह की नसों में एक विशेष डाई की सुई लगाई जा सकती है।

आपके द्वारा स्ट्रोक अनुभव करने के संदेह की स्थिति में सीटी स्कैन आमतौर पर यह दिखाने में सक्षम होता है कि आपको इस्केमिक स्ट्रोक या रक्तस्रावी स्ट्रोक हुआ है या नहीं।

यह आमतौर पर एमआरआई स्कैन की तुलना में जल्दी हो जाता है और इसका मतलब है कि आपको जल्दी ही उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।

एमआरआई स्कैन

एमआरआई स्कैन आपके शरीर के अंदर की एक विस्तृत चित्र उपलब्ध कराने के लिए एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का उपयोग करता है।

इसका उपयोग सामान्यतः उन लोगों के लिए किया जाता हैं, जिनके लक्षण अधिक जटिल होते है, एवं क्षति की सीमा और स्थान ज्ञात नहीं होते।

ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) से उबरने वाले लोगों के लिए भी इसे उपयोग में लाया जाता है।

एमआरआई स्कैन से मस्तिष्क के ऊतकों का अधिक विस्तार होता है, जिससे छोटे या अधिक असामान्य रूप से स्थित, स्ट्रोक से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है।

सीटी स्कैन की तरह, एमआरआई स्कैन में भी तस्वीरों को बेहतर बनाने के लिए विशेष डाई का उपयोग किया जा सकता है।

निगल परीक्षण

निगल परीक्षण स्ट्रोक हुए व्यक्ति के लिए आवश्यक है, क्योंकि आमतौर पर स्ट्रोक होने के तुरंत बाद निगलने की क्षमता प्रभावित होती है।

व्यक्ति द्वारा ठीक से नहीं निगल पाने की स्थिति में भोजन एवं जल के श्वासनली एवं फेफड़ों में जाकर निमोनिआ जैसे सीने से सम्बंधित संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसे चूसन कहा जाता है।

यह जाँच सरल है। व्यक्ति को कुछ चम्मच पानी पीने के लिए दिया जाता है। यदि वे इस पानी को बिना खांसी या साँस रुके निगल लेते हैं, तो उन्हें आधा गिलास पानी पीने के लिए कहा जाएगा।

यदि उन्हें निगलने में कोई कठिनाई होती है, तो उन्हें विस्तृत जाँच के लिए स्पीच थेरेपिस्ट के पास भेजा जायेगा।

आमतौर पर चिकित्सक द्वारा देखे जाने से पहले उन्हें खाने या पीने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कई स्थितियों में तरल पदार्थ या भोजन को सीधे हाथ की एक नस में (अंतःशिरा) या नाक से होते हुए उनके पेट में डाली गई एक ट्यूब के माध्यम से देने की आवश्यकता हो सकती है।

ह्रदय और रक्त वाहिका की जाँच

स्ट्रोक के कारणों का पता लगाने के लिए बाद में ह्रदय और रक्त वाहिकाओं से सम्बंधित जाँच किया जा सकता है।

किए जाने वाले कुछ जाँच निम्नलिखित हैं:

ग्रीवा धमनी सम्बन्धी (कैरोटिड) अल्ट्रासाउंड

कैरोटिड अल्ट्रासाउंड स्कैन मस्तिष्क तक जाने वाली गले की धमनियों में किसी प्रकार के संकुचन या रुकावट को दिखाने में मदद कर सकता है।

अल्ट्रासाउंड स्कैन में शरीर में उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों को भेजने के लिए एक छोटी सलाई (ट्रांसड्यूसर) का उपयोग किया जाता है।

ध्वनि तरंगों के वापस आने पर उनका उपयोग शरीर के अंदर का चित्र तैयार करने के लिए किया जा सकता है।

कैरोटिड अल्ट्रासोनोग्राफी की आवश्यकता पड़ने पर इसे 48 घंटों के भीतर कराना चाहिए।

इकोकार्डियोग्राफी

इकोकार्डियोग्राम की सहायता से ह्रदय के चित्र तैयार किये जाते है, जिसका इस्तेमाल स्ट्रोक से सम्बंधित किसी भी समस्या की जांच करने के लिए किया जा सकता है।

इसमें सामान्य रूप से आपके सीने के चारों ओर अल्ट्रासाउंड किया जाता है (ट्रान्सथोरासिक इकोकार्डियोग्राम)।

इकोकार्डियोग्राम का एक वैकल्पिक प्रकार जिसे ट्रान्सोसेफेजियल इकोकार्डियोग्राफी (टीओई) कहा जाता है, को कभी-कभी इस्तेमाल किया जा सकता है।

भोजन नली के चारों ओर आमतौर पर बेहोश कर के अल्ट्रासाउंड किया जाता है।

अल्ट्रासाउंड सलाई को दिल के ठीक पीछे रखने की सुविधा के कारण यह रक्त के थक्कों और अन्य असामान्यताओं का एक स्पष्ट चित्र तैयार करता है जो ट्रान्सथोरासिक इकोकार्डियोग्राम द्वारा संभव नहीं हो पाता है।

उपचार

स्ट्रोक के प्रभावी उपचार से दीर्घकालिक विकलांगता को रोका जा सकता है और जीवन बचाया जा सकता है।

अनुशंसित विशिष्ट उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि स्ट्रोक के कारण क्या हैं:

  • मस्तिष्क में रक्त के थक्के के कारण रक्त प्रवाह बाधित होना (इस्केमिक स्ट्रोक)
  • मस्तिष्क में या उसके आसपास रक्तस्राव (रक्तस्रावी स्ट्रोक)

आमतौर पर उपचार में एक या एक से अधिक विभिन्न दवाएं लेना शामिल होता है, हालाँकि कुछ लोगों को सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है।

इस्केमिक स्ट्रोक का उपचार

आमतौर पर इस्केमिक स्ट्रोक होने की स्थिति में, उपचार और पुनः होने से बचाव के लिए दवाएं लेने की अनुशंषा की जाती है।

इनमें से कुछ दवाओं को तुरंत और अल्पकालिक अवधि में लेनी होती है, जबकि अन्य दवाएं स्ट्रोक के उपचार होने के पश्चात शुरू कर लंबे समय तक लेनी होती है।

थ्रंबोलाइसिस

इस्केमिक स्ट्रोक का उपचार अक्सर alteplase नामक दवा के इंजेक्शन का उपयोग करके किया जा सकता है, जो रक्त के थक्कों को तोड़ कर मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को पुनर्स्थापित करता है।

इस "क्लॉट-बस्टिंग" दवा के उपयोग को थ्रोम्बोलिसिस के रूप में जाना जाता है।

स्ट्रोक होने के बाद जितनी जल्दी alteplase लेना शुरू किया जाये, यह उतना ही अधिक प्रभावी सिद्ध होता है।

आमतौर पर यह दवा साढ़े चार घंटे से अधिक समय बीत जाने पर लेना अनुशंसित नहीं है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि इतने समय बीतने के बाद इसका उपयोग कितना फायदेमंद है।

alteplase का उपयोग करने से पहले, इस्केमिक स्ट्रोक की पुष्टि करने के लिए एक मस्तिष्क स्कैन किया जाना बेहद महत्वपूर्ण है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि यह दवा रक्तस्रावी स्ट्रोक में होने वाले रक्तस्राव को और बदतर बना सकती है।

थ्रोम्बेक्टोमी

गंभीर इस्केमिक स्ट्रोक के एक छोटे से हिस्से का उपचार थ्रोम्बेक्टोमी नामक आपातकालीन प्रक्रिया द्वारा किया जा सकता है।

यह रक्त के थक्कों को हटाता है और मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को सुचारु करने में मदद करता है।

थ्रोम्बेक्टोमी केवल मस्तिष्क में बड़ी धमनी में रक्त के थक्के के कारण हुए इस्केमिक स्ट्रोक के उपचार में प्रभावी है।

स्ट्रोक के बाद जितनी जल्दी हो सके शुरू हो सके यह उतना ही अधिक प्रभावी है।

इस प्रक्रिया में धमनी में, अक्सर कच्छ में, एक नलिका लगाना शामिल है। मस्तिष्क के धमनी में नलिका की सहायता से एक छोटा उपकरण डाला जाता है।

फिर डिवाइस की मदद से या खींच कर रक्त के थक्के को हटाया जा सकता है। प्रक्रिया को स्थानीय या सामान्य निश्चेतक दे कर किया जाना चाहिए ।

एंटीप्लेटलेट

अधिकांश लोगों को एस्पिरिन की एक नियमित खुराक की अनुशंषा की जाती है। दर्द निवारक होने के साथ-साथ एस्पिरिन एक एंटीप्लेटलेट भी है, जो और थक्का बनने की संभावनाओं को कम करता है।

एस्पिरिन के अलावा अन्य एंटीप्लेटलेट दवाएं जैसे क्लोपिडोग्रेल और डिपाइरिडामोल भी उपलब्ध हैं।

स्कन्दनरोधी

कुछ लोगों को संभावित रक्त-थक्कों के विकास के जोखिम को कम करने में मदद करने के लिए स्कंदनरोधी की सलाह दी जा सकती है।

स्कन्दनरोधी रक्त के रासायनिक संरचना को बदलकर रक्त में थक्का होने से रोकता है।

Warfarin, apixaban, dabigatran, edoxaban और rivaroxaban दीर्घकालिक उपयोग के लिए स्कन्दनरोधी के कुछ उदाहरण हैं।

हेपरिन्स नामक अन्य स्कन्दनरोधी भी हैं, जो केवल अल्पावधि में एवं सुई द्वारा दिए जा सकते हैं।

आपको स्कन्दनरोधी की सलाह दी जा सकती है यदि आप:

  • एक तरीके का अनियमित दिल की धड़कन महसूस कर रहे हैं, जिसे अलिंद तंतुविकंपन कहा जाता है, जिससे रक्त के थक्के बन सकते हैं
  • पूर्व में रक्त के थक्कों की समस्या से परेशान रहे हैं
  • के पैर की नसों में रक्त का थक्का बन रहा हो (डीप वीन थ्रोम्बोसिस, या DVT) क्योंकि स्ट्रोक आपको एक पैर हिलाने में असमर्थ कर दिया है

एंटीहाइपरटेनसीव्स

रक्तचाप बहुत अधिक होने पर इसे कम करने के लिए दवा लेने की सलाह दी जा सकती है।

ऐसी स्थिति में आमतौर पर उपयोग में आने वाली दवाओं में शामिल है:

  • थियाजाइड मूत्रवर्धक दवा
  • एंजियोटेंसिन-परिवर्तित एंजाइम (ACE) अवरोधक
  • कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स
  • बीटा ब्लॉकर्स
  • अल्फा ब्लॉकर्स

उच्च रक्तचाप के इलाज के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

स्टैटिन

रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होने पर आपको स्टैटिन नामक दवा लेने की सलाह दी जाएगी।

स्टैटिन यकृत में कोलेस्ट्रॉल का उत्पादन करने वाले रसायन (एंजाइम) को अवरुद्ध करके रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं।

कोलेस्ट्रॉल का स्तर विशेष रूप से अधिक नहीं होने पर भी स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए आपको स्टैटिन लेने की सलाह दी जा सकती है।

कैरोटिड एंडारटेरेक्टॉमी

कुछ इस्केमिक स्ट्रोक मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली गले की एक धमनी जिसे कैरोटिड या ग्रीवा धमनी कहा जाता है, के संकीर्ण होने के कारण होते हैं।

कैरोटिड स्टेनोसिस या संकीर्णता धमनियों में चर्बीदार प्लाक जमने के कारण होता है।

गंभीर कैरोटिड स्टेनोसिस की स्थिति में धमनी से प्लाक हटाने के लिए सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।

सर्जरी कैरोटिड एन्डर्टरेक्टमी नामक ऑपरेशन की मदद से किया जाता है।

इसमें कैरोटिड धमनी को खोलने और चर्बीदार प्लाक को हटाने के लिए सर्जन द्वारा गले में एक चीरा लगाया जाता है।

रक्तस्रावी स्ट्रोक का उपचार

इस्केमिक स्ट्रोक की तरह ही रक्तस्रावी स्ट्रोक के मरीजों के रक्तचाप को कम करने और संभावित स्ट्रोक को रोकने के लिए दवा की सलाह दी जाती है।

यदि आप स्ट्रोक से पूर्व स्कन्दनरोधी दवा ले रहे थे, तो आपको दवा के प्रभावों को हटाकर संभावित रक्तस्राव के जोखिम को कम करने के लिए उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

सर्जरी

कभी-कभी, मस्तिष्क से रक्त को हटाने और फटी रक्त वाहिकाओं के इलाज के लिए आपातकालीन सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। ऐसा साधारणतः क्रानिओटोमी नामक सर्जिकल प्रक्रिया का उपयोग करके किया जाता है।

क्रैनियोटॉमी के दौरान, मस्तिष्क के एक हिस्से को काट कर निकाल दिया जाता है ताकि सर्जन रक्तस्राव के कारण का पता लगा सके।

सर्जन क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं का इलाज कर यह सुनिश्चित करता है कि कोई रक्त के थक्के वहां मौजूद न हों जिससे मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो।

रक्तस्राव रुकने के पश्चात मस्तिष्क से हटाए गए हड्डी के टुकड़े को आमतौर पर एक कृत्रिम धातु की प्लेट से बदल दिया जाता है।

जलशीर्ष (हाइड्रोसेफ़लस)

जलशीर्ष या हाइड्रोसेफालस नामक रक्तस्रावी स्ट्रोक का इलाज करने के लिए सर्जरी भी की जा सकती है।

इस स्थिति में स्ट्रोक के परिणामस्वरूप होने वाली क्षति मस्तिष्क के छिद्रों (निलय या ह्रदय के निचले भाग का कोष) में मस्तिष्कमेरु द्रव का निर्माण करती है, जिससे सिरदर्द, अस्वस्थता, सुस्ती, उल्टी और संतुलन खोने जैसे लक्षण दिखते हैं।

हाइड्रोसिफ़लस का उपचार सर्जरी द्वारा मस्तिष्क में मस्तिष्कमेरु द्रव को ठीक से निकालने के लिए एक कृत्रिम नलिका जिसे शंट भी कहा जाता है डाल कर किया जाता है।

जलशीर्ष या हाइड्रोसेफालस के इलाज के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

सहायक उपचार

उपरोक्त उपचारों के साथ-साथ, स्ट्रोक से प्रभावित लोगों के अन्य समस्याओं के निदान के लिए अल्पकालिक उपचार की भी आवश्यकता हो सकती है।

उदाहरण के तौर पर, आपको निम्नलिखित चीजों की आवश्यकता हो सकती है:

  • निगलने में कठिनाई (डिसफैगिया) होने पर शरीर को पोषण प्रदान करने के लिए आपकी नाक (नासोगैस्ट्रिक ट्यूब) से आपके पेट में एक फीडिंग ट्यूब डाली जा सकती है।
  • कुपोषण की स्थिति में पोषक तत्त्व से भरपूर खुराक दिए जा सकते हैं
  • निर्जलीकरण का खतरा होने पर तरल पदार्थ सीधे नस (अंतःशिरा) में दिए जाते हैं
  • रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर नाक की नली या फेस मास्क के माध्यम से ऑक्सीजन दिया जा सकता है
  • पैर में रक्त के थक्के (गहरी शिरा थ्रोम्बोसिस, या DVT) को रोकने के लिए कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स दिए जा सकते हैं

स्ट्रोक से उबरने के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

स्वास्थ्य लाभ

स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क में होने वाली क्षति से व्यापक और लंबे समय तक चलने वाली समस्याएं हो सकती हैं।

हालांकि कुछ लोग काफी जल्दी ठीक हो सकते हैं, लेकिन स्ट्रोक के कई मरीजों को सामान्य दिनचर्या में आने के लिए दीर्घकालिक देखभाल और सहयोग की आवश्यकता होती है।

पूर्वस्थिति में आने की प्रक्रिया लक्षणों और उनकी गंभीरता पर निर्भर करती है।

स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया अक्सर अस्पताल में ही शुरू होती है और घर पर या समुदाय में स्थित स्थानीय क्लिनिक में तब तक जारी रहता है, जब तक आप पर्याप्त रूप से ठीक नहीं हो जाते हैं।

निम्नलिखित तथ्यों के बारे में विस्तार से पढ़ें:

आपके पूर्वस्थिति में वापस लाने में सहयोग के लिए फ़िज़ियोथेरेपिस्ट, मनोवैज्ञानिक, अनुभवी चिकित्सक, स्पीच थेरेपिस्ट, आहार विशेषज्ञ और विशेषज्ञ नर्स और डॉक्टरों की एक टीम उपलब्ध होती है।

आपको पूर्वस्थिति में वापस लेन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सक्रिय रूप से भाग लेने और अपनी देखभाल टीम के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

स्ट्रोक के कारण होने वाली कुछ मुख्य समस्याओं के लिए विभिन्न उपचार और स्वास्थ्य लाभ की विधियों को नीचे वर्णित किया गया है। HYPERLINK "http://www.stroke.org.uk/about/common-problems"

मनोवैज्ञानिक प्रभाव

निम्नलिखित दो मनोवैज्ञानिक समस्या स्ट्रोक के बाद लोगों को सबसे अधिक प्रभावित कर सकती है:

  • अवसाद - बहुत से लोग कई बार गंभीर रूप से भावुक और आशाहीन महसूस करते हैं इसकी वजह से वे सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पाते हैं
  • चिंता - कई लोग भय और चिंता की सामान्य भावनाओं का अनुभव करते हैं, साथ ही अत्यधिक चिंतित होकर अनियंत्रित रूप से भावोत्तेजक हो जाते हैं

क्रोध, हताशा और घबराहट होना भी आम है।

स्ट्रोक के तुरंत बाद स्वास्थ्य सेवा टीम के सदस्य द्वारा भावनात्मक स्तर पर किसी भी प्रकार की समस्या का जाँच किया जायेगा।

स्ट्रोक के मनोवैज्ञानिक प्रभाव से निपटने में मदद के लिए सलाह दी जानी चाहिए। इसमें परिवार के अन्य सदस्यों के साथ और अन्य यौन संबंध पर पड़ने वाले प्रभाव भी शामिल हैं।

अवसाद और चिंता, और मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक स्तर पर दिखने वाले लक्षणों की भी आम तौर पर जाँच होनी चाहिए।

समय के साथ ये समस्याएं ख़त्म हो सकती हैं, लेकिन गंभीर समस्या या समस्याओं के लंबे समय तक रहने पर डॉक्टर मनोचिकित्सक या नैदानिक मनोवैज्ञानिक (क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट) से विशेषज्ञ परामर्श लेने की सलाह दे सकता है।

कुछ लोगों के लिए, दवाएं और मनोवैज्ञानिक उपचार, जैसे परामर्श या संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT), मददगार साबित हो सकते हैं।

CBT एक ऐसी थेरेपी है जिसका उद्देश्य आपके सोचने के तरीके को बदल उसे सकारात्मक विचार की ओर लाना होता है।

संज्ञानात्मक प्रभाव

संज्ञानात्मक शब्द वैज्ञानिकों द्वारा मस्तिष्क की जानकारी को संसाधित करने वाली कई प्रक्रियाओं और कार्यों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।

स्ट्रोक के कारण एक या एक से अधिक संज्ञानात्मक प्रकार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है:

  • संवाद
  • स्थानिक जागरूकता - आपके शरीर में आपके परिवेश के संबंध में स्वाभाविक जागरूकता होना
  • स्मृति
  • एकाग्रता
  • प्रबंधन- स्थितियों के बारे में योजना करना और समस्याओं को हल करने की क्षमता
  • क्रिया कलाप - कुशल शारीरिक गतिविधियों को अंजाम देने की क्षमता, जैसे कपड़े पहनना या चाय बनाना

उपचार में, आपके संज्ञानात्मक प्रकार्यों में से प्रत्येक कार्य का जांच किया जाएगा, और उसके अनुसार उपचार और स्वास्थ्य-लाभ की योजना तैयार की जाएगी।

आपको एक विस्तृत तकनीक सिखाई जाएगी ताकि आप संज्ञानात्मक प्रकार्यों को फिर से सिख सकें, जैसे स्पीच थेरेपिस्ट के माध्यम से अपने संचार कौशल को ठीक करना।

संज्ञानात्मक प्रकार्य की समस्याओं को कई तरीके से पुनः पाया जा सकता है, जैसे कि दैनिक कार्यों की सहायता के लिए मेमोरी एड्स, डायरी और दिनचर्या का उपयोग करना।

अधिकांश संज्ञानात्मक प्रकार्य समय और स्वास्थ्यलाभ के पश्चात् वापस आ जाएंगे, लेकिन आप ऐसा महसूस कर सकते हैं कि वे पहले की तरह नहीं हो पाए।

स्ट्रोक द्वारा मस्तिष्क को पहुंचे आघात से संवहनी मनोभ्रंश विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

यह स्ट्रोक के तुरंत बाद हो सकता है या स्ट्रोक होने के कुछ समय बाद हो सकता है।

गतिविधि में समस्याएं

स्ट्रोक से शरीर में एक तरफ कमजोरी या पक्षाघात और इसके परिणामस्वरूप समन्वय ओर संतुलन बनाने में समस्या हो सकती है।

बहुत से लोग स्ट्रोक के पश्चात् शुरू के कुछ हफ्तों में अत्यधिक थकान का अनुभव करते हैं, साथ ही उन्हें सोने में भी कठिनाई हो सकती है, जो उनके थकान को और भी अधिक बढ़ा देता है।

आपके स्वास्थ्य लाभ के दौरान आपको एक फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा देखा जाना चाहिए, जो उपचार की योजना बनाने से पहले किसी भी प्रकार की शारीरिक विकलांगता एवं उसकी स्थिति का आकलन करेगा।

फिजियोथेरेपी में सप्ताह में कई सत्र शामिल होते हैं, जहाँ आपकी मांसपेशियों की ताकत में सुधार करने और चलने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए व्यायाम आदि पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

फिजियोथेरेपिस्ट आपके स्वास्थ्य पर एक लक्ष्य निर्धारित करके कार्य करेगा। शुरुआत में ये लक्ष्य आसान हो सकते हैं, जैसे कि किसी वस्तु को उठाना।

आपकी स्थिति में सुधार होने के साथ अभ्यास की जटिलता भी बढ़ती जाएगी, जैसे खड़ा होना या टहलना।

एक देखभालकर्ता जैसे कि आपके परिवार के किसी सदस्य को फिजियोथेरेपी के सेशन में आपके साथ होने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा।

फिजियोथेरेपिस्ट आपको घर पर किया जा सकने वाले आसान व्यायाम सिखा सकता है।

यदि आपको गतिविधियों करने में समस्या है, जैसे कि नहाना और कपड़े पहनना, तो आपको व्यावसायिक चिकित्सक की मदद भी उपलब्ध कराई जा सकती है। वे किसी भी प्रकार की कठिनाइयों के हल खोज सकते हैं।

इस थेरेपी में रोजमर्रा की गतिविधियों को आसान करने के लिए आपके घर को आपके अनुकूल किया जा सकता है, या उसमें उपकरणों का उपयोग करना शामिल हो सकता है, और ऐसे कार्यों के लिए वैकल्पिक तरीकों ढूंढा जाता है जिसमें आपको समस्याएँ हैं।

संवाद सम्बन्धी समस्याएं

स्ट्रोक के पश्चात बहुत लोगों को बोलने-समझने ओर पढ़ने-लिखने में भी परेशानी होती है।

यदि भाषा के लिए जिम्मेदार मस्तिष्क के भाग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो इसे वाचाघात (अपासिया) या डिस्पैसिया कहा जाता है।

यदि मस्तिष्क में समस्या के परिणामस्वरूप बोलने से सम्बद्ध मांसपेशियों में कमजोरी होती है, तो इसे डिसअर्थ्रिया के रूप में जाना जाता है।

इसकी जांच एवं संवाद में आवश्यक सहायता अविलम्ब शुरू करने के लिए आपको जितनी जल्दी हो सके एक स्पीच थेरेपिस्ट से मिलना चाहिए।

इसमें निम्नलिखित चीजें शामिल हो सकती हैं:

  • बोलने की क्रिया में शामिल मांसपेशियों आपके नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक अभ्यास करना
  • संचार के माध्यमों का इस्तेमाल करना - जैसे पत्र सूची और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम
  • संचार के वैकल्पिक तरीकों का उपयोग करना - जैसे इशारे से या लिख कर

वाचाघात के उपचार के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।

आप देखभाल और संवाद सम्बन्धी समस्याओं पर हमारी गाइड को भी पढ़ सकते हैं।

निगलने सम्बन्धी समस्याएं

स्ट्रोक आपके सामान्य निगलने की क्रिया को भी बाधित कर सकती है, जिससे भोजन के छोटे कणों आपके श्वासनली में प्रवेश कर सकते हैं।

निगलने में कठिनाई को डिस्पैगिया नाम से जाना जाता है। डिस्पैगिया आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे आपके फेफड़ों में संक्रमण (निमोनिया) हो सकता है।

ऐसी परेशानियों से बचने के लिए स्वास्थ्य लाभ के शुरुआती दौर में आपको एक ट्यूब के द्वारा खिलाया जा सकता है।

ट्यूब को साधारणतः आपकी नाक के माध्यम से आपके पेट (नासोगैस्ट्रिक ट्यूब) में डाला जाता है, या स्थानीय निश्चेतक का उपयोग कर एक छोटे से सर्जरी द्वारा ट्यूब को सीधे आपके पेट में डाला जाता है (पर्क्यूटेनियस इंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टोमी, या PEG)।

दीर्घावधि में आपको अपनी निगलने की समस्याओं के उपचार के लिए स्पीच थेरेपिस्ट से सप्ताह में कई बार मिलना होता है।

इस उपचार में निगलने की प्रक्रिया को आसान करने के लिए विभिन्न युक्तियां शामिल हो सकती हैं, जैसे कि भोजन के छोटे टुकड़े काटने और खाने के दौरान आसान से सम्बंधित सलाह और निगलने की क्रिया में शामिल मांसपेशियों के नियंत्रण में सुधार के लिए व्यायाम।

अपच के उपचार के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।

दृष्टि सम्बन्धी समस्या

स्ट्रोक कभी-कभी मस्तिष्क के उन हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकता है जो आंखों द्वारा भेजे गए जानकारी को प्राप्त करते हैं, संसाधित करते हैं और विवेचना करते हैं।

इसके परिणामस्वरूप दृष्टि का आधा क्षेत्र खो सकता है - उदाहरण के तौर पर आप सामने रखे वस्तु का केवल बायां या दाहिना पक्ष देख पाएंगे।

स्ट्रोक आंख की मांसपेशियों के गतिविधियों पर आपके नियंत्रण को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसा दोहरी दृष्टि का कारण बन सकता है।

स्ट्रोक के पश्चात दृष्टि से सम्बंधित समस्या होने पर आपको नेत्र विशेषज्ञ या ओर्थोपिस्ट के पास परामर्श हेतु भेजा जाएगा, जो आपकी दृष्टि जाँच कर समुचित और संभावित उपचार के बारे में बताएगा।

उदाहरण के तौर पर यदि आप अपने दृष्टि क्षेत्र का हिस्सा खो चुके हैं, तो आपको आई मूवमेंट थेरेपी की सलाह दी जा सकती है। इसमें कम दृष्टि में हिस्सों को देखने में आपकी सहायता के लिए अभ्यास शामिल हैं।

आपको ऐसे कार्यों को करने के लिए विशेष तरीके भी बताये जा सकते हैं जो एक तरफ की दृष्टि कम हो जाने पर साधारणतः करने में मुश्किल हो सकती है, जैसे कि कपड़े पहनना।

मूत्राशय और आंत पर नियंत्रण

कुछ स्ट्रोक मस्तिष्क के उस हिस्से को नुकसान पहुंचाते हैं जो मूत्राशय और आंत को नियंत्रित करता है।

इसके परिणामस्वरूप मूत्र में असंयमित और मल त्याग में कठिनाई हो सकता है।

कुछ लोगों का मूत्राशय और आंत नियंत्रण काफी जल्दी ठीक हो जाता है, लेकिन अस्पताल छोड़ने के पश्चात भी यह समस्या बने रहने पर आपको डॉक्टर और विशेषज्ञ सलाहकारों से मदद मिल सकती है।

ऐसी समस्या होने पर जरा भी शर्मिंदा न हों - कोई समस्या होने पर सलाह लें, क्योंकि ऐसे कई उपचार हैं जो मददगार साबित हो सकते हैं।

इसमें शामिल हैं:

असंयम मूत्र से सम्बंधित उपचार के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

स्ट्रोक के पश्चात सहवास

सहवास के कारण आपके स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ता नहीं है। इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आपको स्ट्रोक नहीं होगा, लेकिन ऐसा कोई कारण नहीं है कि सहवास के दौरान स्ट्रोक होना चाहिए।

यहां तक कि अगर स्ट्रोक के कारण आपको गंभीर विकलांगता भी हो गयी हो तो आप विभिन्न अवस्थाओं के साथ प्रयोग कर सकते हैं और अपने साथी के साथ अंतरंग होने के नए तरीके खोज सकते हैं।

ध्यान रहे कि कुछ दवाएं आपके सेक्स ड्राइव (कामेच्छा) को कम कर सकती हैं, इसलिए सुनिश्चित करें कि आप डॉक्टर को अपनी समस्या के बारे में बताएं, ताकि वो दवाएं बदल सके जो आपके लिए मददगार साबित हो।

कुछ पुरुष स्ट्रोक के पश्चात स्तम्भन दोष अर्थात इरेक्टाइल डिसफंक्शन महसूस कर सकते हैं।

ऐसी स्थिति होने पर आप अपने डॉक्टर या देखभाल करने वाली टीम से बात करें, क्योंकि इसके लिए कई उपचार उपलब्ध हैं।

अच्छे सेक्स और स्तंभन दोष के उपचार के बारे में यहाँ विस्तार से पढ़ें।

स्ट्रोक के पश्चात ड्राइविंग

स्ट्रोक या TIA के बाद एक महीने तक आप गाड़ी नहीं चला सकते। पुनः ड्राइविंग करना इस बात पर निर्भर करता है कि स्ट्रोक के बाद किस प्रकार की दीर्घकालिक विकलांगता हो सकती है और आप किस प्रकार के वाहन चला सकते हैं।

आपके लिए ड्राइविंग को खतरनाक होने की वजह अक्सर शारीरिक समस्याएं नहीं होती हैं बल्कि स्ट्रोक के बाद होने वाली एकाग्रता, दृष्टि, प्रतिक्रिया समय और जागरूकता सम्बन्धी समस्याएं हैं।

आपका डॉक्टर आपको यह सलाह दे सकता है कि आप स्ट्रोक के एक महीने के बाद पुनः ड्राइविंग शुरू कर सकते हैं या नहीं, या आपको विस्तृत जांच के लिए मोबिलिटी सेण्टर जाने की आवश्यकता है।

भविष्य के स्ट्रोक से बचाव

आपको एक बार स्ट्रोक होने पर दूसरे स्ट्रोक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

आपको आमतौर पर स्ट्रोक के अंतर्निहित जोखिम के कारकों में सुधार के लिए दवाओं से दीर्घकालिक उपचार की आवश्यकता होती है।

उदाहरण के लिए:

  • दवा - अपने रक्तचाप को कम करने में मदद करने के लिए
  • थक्कारोधी या एंटीप्लेटलेट्स - रक्त के थक्कों बनने के जोखिम को कम करने के लिए
  • स्टैटिन - आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए

आपको स्ट्रोक के जोखिम को कम करने एवं एक स्वस्थ जीवन जीने के उद्देश्य से जीवन शैली में बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा, जैसे:

  • स्वस्थ आहार लेना
  • नियमित रूप से व्यायाम करना
  • अगर आप धूम्रपान करते हैं तो धूम्रपान छोड़ दें
  • अनुशंसित सीमा में शराब पीना

स्ट्रोक से बचाव के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

स्ट्रोक झेलने वाले व्यक्ति की देखभाल करना

स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया को बेहतर एवं तीव्र बनाने के लिए ऐसे कई तरीके हैं जिससे आप किसी ऐसे दोस्त या रिश्तेदार को सहायता प्रदान कर सकते हैं, जिसे स्ट्रोक हुआ था।

इसमें शामिल हैं:

  • फिजियोथेरेपिस्ट के सत्रों के बीच फिजियोथेरेपी अभ्यास करने में उनकी मदद करना
  • भावनात्मक समर्थन और आश्वासन प्रदान करने से उनकी स्थिति में समयानुसार सुधार होगा
  • उनके दीर्घकालिक लक्ष्यों तक पहुँचने में मदद के लिए उन्हें प्रेरित करना
  • जरुरत के मुताबिक उन्हें अनुकूल बनाना जैसे: संवाद संबंधी समस्या होने पर उनके साथ धीरे-धीरे बोलना

स्ट्रोक के पश्चात किसी की देखभाल करना एक निराशाजनक और अकेलापन वाला अनुभव हो सकता है। निम्नलिखित परामर्श ऐसी स्थिति में मददगार साबित हो सकते हैं।

उनके बदले हुए व्यवहार के लिए तैयार रहें

स्ट्रोक के मरीजों के बारे में आप अक्सर ऐसा महसूस कर सकते हैं कि उनके व्यक्तित्व में बदलाव आया है और वे कई बार तर्कहीन कार्य करते हैं।

ऐसा स्ट्रोक के मनोवैज्ञानिक और संज्ञानात्मक प्रभाव के परिणामस्वरूप होता है।

वे आपसे नाराज हो सकते हैं। चाहे जितनी भी परेशानी आये इसे आप व्यक्तिगत रूप से नहीं लेने का प्रयास करें।

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि वे अक्सर स्वास्थ्यलाभ के प्रक्रियाओं के प्रगति के साथ फिर से पहले जैसे हो जाते हैं ।

धैर्य बनाये रखने और सकारात्मक बने रहने का प्रयास करें

स्वास्थ्यलाभ एक धीमी और निराशाजनक प्रक्रिया हो सकती है, और कभी कभी ऐसा लग सकता है कि प्रगति काफी कम हुई है।

छोटी से छोटी प्रगति को प्रोत्साहित करना और उसकी प्रशंसा करना उनके दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने में मदद कर सकता है।

खुद के लिए समय निकालें

किसी ऐसे व्यक्ति की देखभाल, जिसे स्ट्रोक हुआ था, के दौरान यह महत्वपूर्ण है कि आप खुद के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें।

दोस्तों के साथ मेलजोल करने से और बीच-बीच में अवकाश लेने से आपको स्थिति का बेहतर तरीके से सामना करने में मदद मिलेगी।

मदद के लिए पूछें

स्ट्रोक से उबरने वाले लोगों, उनके परिवारों और देखभाल करने वालों के लिए विभिन्न प्रकार की सहायता सेवाएँ और संसाधन उपलब्ध हैं।

उपलब्ध सहायता में उनके आने-जाने हेतु साधन से लेकर देखभाल करने वाले और परिवार के लोगों के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से सहयोग शामिल है।

स्वास्थ्यलाभ प्रक्रिया से सम्बंधित अस्पताल के कर्मचारी आपको आवश्यक सलाह और प्रासंगिक संपर्क जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

बचाव

स्ट्रोक से बचाव का सबसे अच्छा तरीका स्वस्थ आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, धूम्रपान और अत्यधिक शराब पीने से बचना है।

जीवनशैली उपरोक्त परिवर्तन आपकी निम्नलिखित समस्याओं के जोखिम को कम कर सकती हैं, जैसे:

जीवनशैली में परिवर्तन पहले से स्ट्रोक हुए व्यक्तियों को भविष्य में स्ट्रोक होने के जोखिम से बचाव करता है।

आहार

अस्वास्थ्यकर आहार से आपके रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि हो सकती है, जिससे आपको स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ सकती है।

इसलिए कम वसा एवं उच्च फाइबर वाले आहार लेने की सलाह दी जाती है, जिसमें ताजे फल और सब्जियां (5 प्रतिदिन) और साबुत अनाज शामिल हैं।

आहार में संतुलन सुनिश्चित करना आवश्यक है। एक तरीके के भोजन का अधिक सेवन न करें, विशेष रूप से अधिक नमक और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ।

आपको एक दिन में ली जाने वाली नमक की मात्रा अधिकतम 6g (0.2oz) तक सीमित करना चाहिए क्योंकि अधिक नमक आपके रक्तचाप बढ़ा देता है: 6g नमक लगभग 1 चाय के चम्मच के बराबर होता है।

स्वस्थ आहार और वजन कम करने के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

व्यायाम

दिनचर्या में स्वस्थ आहार के साथ साथ नियमित व्यायाम को शामिल करना स्वस्थ वजन बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है।

नियमित व्यायाम आपके कोलेस्ट्रॉल स्तर को कम करने और आपके उत्तम रक्तचाप के लिए भी मददगार साबित हो सकता है।

अधिकांश लोगों के लिए, प्रति हफ्ते कम से कम 150 मिनट (2 घंटे और 30 मिनट) मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि करने की सलाह दी जाती है, जैसे कि साइकिल चलाना या तेज चलना।

यदि आप एक स्ट्रोक से उबर रहे हैं, तो आपको अपने स्वास्थ्यलाभ टीम के सदस्यों के साथ संभावित व्यायाम से सम्बंधित योजनाओं पर चर्चा एवं विमर्श करनी चाहिए।

स्ट्रोक के पश्चात पहले हफ्तों या महीनों में नियमित व्यायाम संभव नहीं है, लेकिन आपके स्वास्थ्यलाभ में प्रगति होने के साथ आपको व्यायाम शुरू करने में सक्षम होना चाहिए।

स्वास्थ्य और फिटनेस के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

धूम्रपान छोड़ दें

धूम्रपान से आपको स्ट्रोक होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि धूम्रपान आपकी धमनियों को संकीर्ण करता है और आपके रक्त के थक्का जमने की संभावना को बढ़ाता है।

आप धूम्रपान छोड़कर स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकते हैं।

धूम्रपान से दूरी आपके सामान्य स्वास्थ्य में भी सुधार लाएगा और अन्य गंभीर बीमारियां जैसे फेफड़ों के कैंसर और हृदय रोग के जोखिम को कम करेगा।

धूम्रपान छोड़ने के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

शराब का सेवन कम कर दें

अत्यधिक शराब का सेवन उच्च रक्तचाप और अनियमित धड़कन (आलिंद तन्तुविकम्पन) का कारण बन सकता है, और ये दोनों आपके स्ट्रोक जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

मादक पेय कैलोरी में अधिक होने के कारण वजन बढ़ाने के कारण भी बनते हैं। शराब के अत्यधिक सेवन से स्ट्रोक का खतरा 3 गुना से भी अधिक बढ़ जाता है।

यदि आप शराब पीना चुनते हैं और पूरी तरह से ठीक हो गए हैं, तो आपको सुझाए गए सीमा से अधिक शराब नहीं पीने का ध्यान रखना चाहिए:

  • पुरुषों और महिलाओं को सप्ताह में 14 यूनिट से अधिक शराब नियमित रूप से नहीं पीने की सलाह दी जाती है
  • यदि आप सप्ताह में 14 यूनिट या उससे अधिक शराब पीते हैं तो उस सीमा को 3 या उससे दिनों में बाँट दें

स्ट्रोक से पूरी तरह से नहीं उबर पाने की स्थिति में आप खुद को शराब के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील पा सकते हैं, यहां तक कि अनुशंसित सुरक्षित सीमाएं भी आपके लिए बहुत अधिक हो सकती हैं।

शराब पीने के बारे में यहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त करें

अंतर्निहित स्थितियों की देखभाल

स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाली स्थितियां पायी जाने पर इन स्थितियों का अच्छी तरीके से नियंत्रण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि संभावित स्ट्रोक से बचाव किया जा सके।

जीवन शैली में उपरोक्त परिवर्तन इन स्थितियों को काफी हद तक नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकते हैं, लेकिन आपको नियमित रूप से दवा लेने की भी आवश्यकता हो सकती है।

अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें:

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