पार्किंसन रोग

परिचय

पार्किंसन रोग एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें मष्तिष्क का हिस्सा कई वर्षों के दौरान क्षतिग्रस्त होता जाता है (एक क्रमिक मनोवैज्ञानिक बीमारी)।

पार्किंसन रोग के तीन प्रमुख लक्षणों का संबंध शारीरिक गतिविधि से है:

  • शरीर के विशिष्ट हिस्सों का अनैच्छिक रूप से हिलना – जिसे कँपकँपी कहते हैं
  • मांसपेशियों में कड़ापन जिससे दैनिक कार्य जैसे कुर्सी से उठना बहुत मुश्किल हो जाते हैं – इसे अकड़न कहते हैं
  • शारीरिक गतिविधियाँ बहुत धीमी हो जाती हैं – इसे ब्रैडीकाइनेशिया कहते हैं

पार्किंसन रोग से ग्रसित एक व्यक्ति कई दूसरे लक्षणों का भी अनुभव कर सकता है जिनका संबंध गतिविधि से नहीं होता है (नॉन-मोटर लक्षण), जैसे:

पार्किंसन रोग के लक्षणों के बारे में अधिक जानें।

पार्किंसन रोग का उपचार करना

वर्तमान समय में पार्किंसन रोग का कोई उपचार मौजूद नहीं है, हालांकि लेवोडोपा (Levodopa) नाम की एक दवाई लक्षणों में आराम देने में कारगर सिद्ध हुई है।

दुर्भाग्यवश, 3 से 5 साल के इस्तेमाल के बाद लेवोडोपा का असर कम होने लगता है।

इस समय के बाद लोग लक्षणों की अचानक वापसी (इसे एक ‘ऑफ़ एपिसोड’ के रूप में जाना जाता है) और मांसपेशियों में अनैच्छिक रूप से झटके लगने का अनुभव कर सकते हैं (डिस्किनीशिया)। इस बिंदु पर आम तौर पर अतिरिक्त दवाइयों की आवश्यकता पड़ती है।

साथ ही कई औषधि-रहित उपचार भी उपलब्ध हैं जिनका इस्तेमाल लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है, जैसे कि वाक और भाषा थैरेपी और फ़िजियोथैरेपी

पार्किंसन रोग के उपचार के बारे में अधिक पढ़ें।

पार्किंसन रोग किससे होता है?

पार्किंसन रोग सब्सटैंशिया नीग्रा (substantia nigra) नामक मष्तिष्क के हिस्से में तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति होने की वजह से होता है। इसके परिणामस्वरूप मष्तिष्क में डोपामाइन नामक रसायन की मात्रा कम हो जाती है।

शरीर की गतिविधि को नियंत्रित करने में डोपामाइन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है और डोपामाइन की यह कमी पार्किंसन रोग के कई लक्षणों के लिए जिम्मेदार होती है।

तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति वास्तव में किस कारण होती है, स्पष्ट नहीं है। अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए आनुवांशिक और पर्यावरणीय घटकों का एक संयोजन जिम्मेदार है।

पार्किंसन रोग के कारणों के बारे में अधिक पढ़ें।

कौन प्रभावित होता है

लक्षणों के शुरू होने की औसत उम्र लगभग 60 होती है; हालाँकि 20 में से लगभग 1 मामले में ये 50 से कम उम्र के लोगों में पहली बार विकसित होते हैं।

महिलाओं की तुलना में पुरुषों को पार्किंसन रोग होने की संभावना डेढ़ गुना अधिक होती है।

श्वेत लोगों में पार्किंसन रोग के विकसित होने की सर्वाधिक संभावना होती है। अश्वेत और एशियाई मूल के लोगों में इसकी दर काफ़ी हद तक कम है।

नज़रिया

पार्किंसन रोग जानलेवा नहीं होता है किंतु इस बीमारी की वजह से शरीर पर बहुत दबाव पड़ सकता है।

कुछ लोगों पर उपचार का अच्छा असर होता है और वे केवल हल्की से मध्यम स्तर की अक्षमता का अनुभव करते हैं, वहीं अन्य लोग गंभीर अक्षमता का अनुभव करते हैं।

उपचार में हुई प्रगतियों के कारण, पार्किंसन रोग से ग्रसित लोगों की जीवन प्रत्याशा अब सामान्य या लगभग सामान्य हो गई है।

लक्षण

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पार्किंसन रोग के लक्षण आम तौर पर धीरे-धीरे शुरू होते हैं और थोड़ा-थोड़ा करके विकसित होते जाते हैं, अक्सर इनका कोई विशेष क्रम नहीं होता।

विभिन्न प्रकार के लक्षणो और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया के साथ पार्किंसन रोग लोगों को कई अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करता है। लक्षणों की गंभीरता भी लोगों के हिसाब से अलग-अलग होती है।

यह असंभाव्य है कि कोई व्यक्ति इस खंड में सूचीबद्ध सभी लक्षणों का अनुभव करेगा।

लक्षणों के प्रकार

संभावित लक्षण काफी अलग-अलग हो सकते हैं किंतु तीन मुख्य श्रेणियों में होते हैं:

  • शारीरिक गतिविधि को प्रभावित करने वाले लक्षण – जिन्हें मोटर लक्षण कहते हैं
  • मिजाज़, सोच और व्यवहार को प्रभावित करने वाले लक्षण – जिन्हें न्यूरोसाइकिएट्रिक लक्षण कहते हैं
  • आपके स्वचालित तंत्रिका तंत्र (आपके ‘स्वचालित’ कार्यों जैसे सांस लेना और मूत्रोत्सर्ग को नियंत्रित करने वाला तंत्रिका तंत्र) को प्रभावित करने वाले लक्षण जिन्हें स्वचालित दुष्क्रिया (ऑटोनॉमिक डिसफ़ंक्शन) के नाम से जाना जाता है – अधिक विवरण के लिए नीचे देखें

सामान्य मोटर लक्षण

निम्नलिखित तीन लक्षण सबसे सामान्य मोटर लक्षण होते हैं:

कँपकँपी

सबसे सामान्य शुरुआती लक्षण होता है अनियंत्रित ढंग से शरीर का हिलना, जिसे कँपकँपी कहते हैं। आम तौर पर कँपकँपी हाथ या भुजा में शुरू होती है। हाथों के आराम की मुद्रा में होने पर इसके होने की अधिक संभावना होती है और मरीज के तनावग्रस्त, चिंतित या थके होने पर यह अधिक स्पष्ट हो सकती है। हाथ का उपयोग होने के दौरान आम तौर पर कँपकँपी कम हो जाती है।

कँपकँपी का मतलब यह नहीं होता है कि आपको निश्चित रूप से पार्किंसन रोग है। कँपकँपी अन्य बीमारियों का भी लक्षण होती है और आम तौर पर यह एक हानिरहित स्थिति के कारण होती है जिसे अनिवार्य कँपकँपी भी कहते हैं।

गतिविधि का धीमा होना (ब्रैडीकाइनेशिया)

पार्किंसन रोग आपकी शारीरिक गतिविधियों को सामान्य की तुलना में बहुत धीमा कर सकता है, खास तौर से तब जब आप गति करना शुरू करते हैं। गतिविधि धीमे होने को चिकित्सकीय शब्दों में ब्रैडीकाइनेशिया कहते हैं।

लोग बताते हैं कि वे शरीर के प्रभावित हिस्से को सामान्य गति से हिलाने कि कोशिश करते हैं लेकिन ‘संदेश वहाँ तक पहुँचता हुआ प्रतीत नहीं होता’।

अक्सर ब्रैडीकाइनेशिया का पहला संकेत यह होता है कि पैदल चलते समय आप अपनी कोई भुजा हिलाने में सक्षम नहीं होते हैं।

दैनिक जीवन के कार्य, जैसे कि कपड़ों के बटन लगाना, एक पेन से लिखना और ढक्कनों को खोलना, कठिन हो सकते हैं और इनमें समय लग सकता है।

ब्रैडीकाइनेशिया आपके पैरों को प्रभावित करता है जिसके परिणामस्वरूप आपकी चाल स्पष्ट रूप से धीमी और घसीटती हुई हो जाती है। और कभी कभार, अधिक गंभीर मामलों में, व्यक्ति कुछ देर के लिए चलने की क्षमता गंवा सकता है और उसके पैर ‘धरती में जम जाते हैं’।

ब्रैडीकाइनेशिया चेहरे और आवाज को भी प्रभावित कर सकती है जिससे चेहरे की सामान्य अभिव्यक्तियों का ह्रास होता है। व्यक्ति की झपकियाँ भी सामान्य से कम हो जाती हैं।

मांसपेशियों का कड़ापन (अकड़न)

पार्किंसन रोग से ग्रस्त व्यक्ति अपने हाथ और पैरों की मांसपेशियों में कड़ापन और तनाव भी महसूस करते हैं। इसे अकड़न कहते हैं।

पार्किंसन रोग से ग्रस्त व्यक्तियों की जाँच करते समय, चिकित्सक दो अलग-अलग प्रकार की अकड़न महसूस कर सकती हैं:

  • ‘लीड-पाइप अकड़न’ – जिसमें प्रभावित मांसपेशियों में लगातार प्रतिरोध का अनुभव होता रहता है
  • ‘कॉगव्हील अकड़न’ – जिसमें प्रभावित मांसपेशियों में अकड़न के बाद आराम हो जाता है; जैसे कि आप एक कॉगव्हील घुमा रहे हों

अन्य मोटर लक्षण

डिस्टोनिया

पार्किंसन रोग से ग्रस्त कुछ लोग मांसपेशियों में अनैच्छिक मरोड़, ऐंठन या जकड़न महसूस कर सकते हैं। यह स्वतंत्र रूप से हो सकता है लेकिन यह डोपामाइन स्रवित करने वाली दवाइयों के कारण भी हो सकता है।

पार्किंसन रोग के मामलों में डिस्टोनिया आम तौर पर पिंडलियों और टांगों की मांसपेशियों को प्रभावित करता है, हालाँकि कभी-कभार शरीर के दूसरे हिस्से प्रभावित हो सकते हैं, जैसे:

  • हाथ
  • सर
  • गर्दन
  • पलकें

डिस्टोनिया के बारे में अधिक पढ़ें।

शारीरिक मुद्रा की अस्थिरता

अधिक उन्नत अवस्था के पार्किंसन रोग के कुछ मामलों में व्यक्ति अपना संतुलन का प्राकृतिक बोध खो सकता है। इसे शारीरिक मुद्रा की अस्थिरता कहते हैं और यह गिरने और चोट लगने का प्रमुख कारण हो सकता है।

न्यूरोसाइकिएट्रिक लक्षण

अवसाद

यह माना जाता है कि पार्किंसन रोग से ग्रसित आधे लोगों को अवसाद प्रभावित करता है और कई जटिल और आपस में संबंध रखने वाले घटकों की वजह से उत्पन्न होता है, जैसे:

  • मष्तिष्क के भीतर डोपामाइन और अन्य रसायनों की कमी होना (डोपामाइन मिजाज़ को बहुत अधिक प्रभावित कर सकता है)
  • पार्किंसन रोग के साथ जीवन का तनाव
  • दूसरों के साथ आपके संबंधों पर पार्किंसन रोग की वजह से पड़ने वाले प्रभाव

आपके अवसादग्रस्त होने के संकेतों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • पिछले महीने के दौरान हतोत्साहित, उदास, या निराश महसूस होना
  • पिछले महीने के दौरान आपकी रुचिकर चीज़ों में बहुत कम रुचि या मज़ा होना

अवसाद आपके जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है; यदि यह होता है तो अपने डॉक्टर के साथ इसके उपचार की चर्चा करें।

अवसाद के बारे में अधिक पढ़ें।

चिंता

पार्किंसन रोग से ग्रसित लोगों को चिंता भी प्रभावित कर सकती है, खास तौर से तब, जब लेवोडोपा का उपचार कम असरदार हो जाता है और वे ‘ऑफ़ एपिसोड’ (मोटर लक्षणों की अचानक वापसी) का अनुभव करने लगते हैं।

लक्षणों की अचानक वापसी से लोग चिंतित महसूस कर सकते हैं, और सर्वाधिक गंभीर मामलों में, यह पैनिक अटैक का कारण बन सकता है।

चिंता के बारे में अधिक पढ़ें।

माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट और डिमेंशिया

यदि आप पार्किंसन रोग के शुरुआती चरणों में हैं तो आप एक विकार का अनुभव कर सकते हैं जिसे माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट कहते हैं।

इसका अर्थ यह होता है कि आपके सोच का स्वरूप बाधित हो सकता है और आपको उन गतिविधियों में समस्याएँ आती हैं जिनमें नियोजन और व्यवस्था करने की आवश्यकता होती है।

उन्नत पार्किंसन रोग से ग्रस्त लगभग 40% लोगों में कॉग्निटिव इंपेयरमेंट का एक अधिक गंभीर रूप विकसित हो जाता है जिसे डिमेंशिया कहते हैं।

पार्किंसन रोग से ग्रस्त लोगों में डिमेंशिया के लक्षण निम्नलिखित होते हैं:

  • याददाश्त, नई जानकारी ग्रहण करने और लिखित और मौखिक भाषा समझने में उल्लेखनीय समस्याएँ
  • गुस्से, उत्साह और कुंठा जैसी भावनाओं का अचानक आवेग
  • पहले से जान-पहचान वाले लोगों और जगहों को पहचानने में परेशानी
  • एकाग्रता कम होना और कम समय तक ध्यान दे पाना
  • दृष्टि भ्रम (ऐसी चीज़ें देखना जो वास्तविक नहीं हैं)
  • भ्रांति (ऐसी चीज़ों में भरोसा करना जो सत्य नहीं हैं)

दृष्टि भ्रम और भ्रांति दोनों का होना और अपनी कल्पना और वास्तविकता के मध्य अंतर बताने में असमर्थ होना साइकोसिस कहलाता है।

नींद में बाधा

यह माना जाता है कि पार्किंसन रोग से ग्रस्त लगभग आधे लोगों को अनिद्रा (सोने में समस्या) प्रभावित करती है।

बीमारी के दौरान अनिद्रा की अवधियाँ आ-जा सकती हैं।

अनिद्रा के कारण अक्सर जटिल होते हैं। इनमें मष्तिष्क में परिवर्तन, पार्किंसन रोग का उपचार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाओं के साइड-इफ़ेक्ट्स, सोने के दौरान साँस लेने में समस्या, सोने के दौरान असाधारण ढंग से हिलन-डुलना और उम्र बढ़ने के प्राकृतिक प्रभाव शामिल हो सकते हैं।

अनिद्रा के बारे में अधिक पढ़ें।

इसकी वजह से आपको दिन में उनींदापन रह सकता है और दिन के दौरान आप अचानक सो सकते हैं। पार्किंसन रोग का उपचार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाएँ भी आपको दिन के दौरान निंदासा महसूस करा सकती हैं।

ऑटोनॉमिक डिसफ़ंक्शन

आपका स्वचालित तंत्रिका तंत्र आपके मष्तिष्क और तंत्रिका तंत्र का हिस्सा होता है जो आपके शरीर के उन कार्यों को नियंत्रित करता है जिनके बारे में आपको सोचन नहीं पड़ता, जैसे, साँस लेना, निगलना, खाना पचाना और मूत्र त्याग करना।

पार्किंसन रोग में मष्तिष्क की रासायनिक संरचना में होने वाले परिवर्तन इन कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं और निम्नलिखित का कारण बन सकते हैं:

  • मूत्र त्याग में समस्या – जैसे कि रात में मूत्र त्याग के लिए बार-बार उठना और, या अलग से, यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस (अनैच्छिक रूप से मूत्र का निकलना)
  • कब्ज़
  • पुरुषों में – लिंग में कड़ापन पाने या बनाए रखने में असमर्थता (स्तंभन दोष)
  • महिलाओं में – यौन रूप से उत्तेजित होने और चरम प्राप्त करने में मुश्किल
  • बैठने या लेटने की मुद्रा से अचानक उठने की मुद्रा में आते समय रक्त दाब में अचानक कमी (आर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन) – इसकी वजह से सिर चकरा सकता है, चीज़ें धुंधली दिखाई दे सकती हैं और कुछ मामलों में, व्यक्ति बेहोश हो सकता है
  • अत्यधिक पसीना (हाइपरहाइड्रोसिस)
  • निगलने में कठिनाई (डिस्फ़ेगिया) – जो कुपोषण (आपके आहार में पर्याप्त पोषक तत्त्वों का न होना) और डिहाइड्रेशन (पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना) का कारण बन सकता है
  • लार का अत्यधिक निर्माण (ड्रूलिंग)

कारण

तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति

पार्किंसन रोग सब्सटैंशिया नीग्रा (substantia nigra) नामक मष्तिष्क के हिस्से में तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति होने की वजह से होता है।

मष्तिष्क के इस हिस्से की तंत्रिका कोशिकाएँ डोपामाइन नामक एक रसायन के निर्माण के लिए जिम्मेदार होती हैं। डोपामाइन मष्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के मध्य एक संदेशवाहक का काम करता है, और शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने और संयोजित करने में सहायता करता है।

यदि ये तंत्रिका कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं या मर जाती हैं, तो मष्तिष्क में डोपामाइन की मात्रा घट जाती है। इसका मतलब होता है कि गतिविधियों को नियंत्रित करने वाला मष्तिष्क का हिस्सा इतने अच्छे से काम नहीं कर पाता है जिसकी वजह से गतिविधियाँ धीमी और असामान्य हो जाती हैं।

तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति एक धीमी प्रक्रिया है। मष्तिष्क में डोपामाइन का स्तर समय के साथ गिरता है। सब्सटेंशिया नीग्रा में 80% तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति होने के बाद ही पार्किंसन रोग के लक्षण सामने आते हैं और धीरे-धीरे अधिक गंभीर होते जाते हैं।

यह ज्ञात नहीं है कि पार्किंसन रोग से जुड़ी तंत्रिका कोशिकाओं की क्षति क्यों होती है।

संभावित कारणों की पहचान करने के लिए अनुसंधान जारी है।

अनुवांशिकी

विरले मामलों में पार्किंसन रोग परिवारों में पाया जाता है; इन परिस्थितियों में इसके लिए असामान्य जीन जिम्मेदार होती हैं, लेकिन सामान्य (आम तौर पर पाए जाने वाले) पार्किंसन रोग में अनुवांशिकी की भूमिका अस्पष्ट है।

अब तक ऐसे नौ अनुवांशिक म्यूटेशन पहचाने गए हैं जो व्यक्ति में पार्किंसन रोग के विकसित होने का खतरा बढ़ा देते हैं (अनुवांशिक म्यूटेशन तब होता है जब सभी जीवित कोशिकाओं में उपलब्ध निर्देश किसी कारणवश अव्यवस्थित हो जाते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप शरीर की एक या अधिक क्रियाएँ अपने सामान्य रूप से नहीं होतीं)।

हालाँकि यह माना जाता है कि अधिकांश मामलों में केवल अनुवांशिकी ही पार्किंसन रोग के लिए जिम्मेदार नहीं होती है और अनुवांशिकीय रूप से रोग की संभावना वाले लोगों के लिए पर्यावरणीय घटक ट्रिगर का काम करता है।

पर्यावरणीय घटक

कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि विषाक्त पदार्थों (नुकसानजनक रसायनों) के साथ संपर्क में आना पर्यावरणीय ट्रिगर हो सकता है। संभावित विषाक्त पदार्थों में शामिल हैं:

  • कृषि में इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक और शाकनाशक
  • औद्योगिक इकाइयों द्वारा उत्सर्जित किए जाने वाले विषाक्त पदार्थ
  • सड़क यातायात से जुड़ा वायु प्रदूषण

विवादास्पद रूप से, विषाक्त पदार्थों की भूमिका का सबसे दमदार सबूत यह है कि नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों द्वारा हेरोइन के समान एमपीटीपी का इंजेक्शन लेने के बाद उनमें जल्द ही पार्किंसन रोग के समान लक्षण देखने को मिले।

यह पता चला कि मष्तिष्क में प्रवेश करने के बाद एमपीटीपी ने मष्तिष्क की कोशिकाओं को मारना शुरू कर दिया। यह संभव है कि दूसरे विषाक्त पदार्थों का भी समान प्रभाव हो सकता है।

रोग की पहचान

कोई भी टेस्ट निर्णायक रूप से नहीं दिखा सकता है कि आपको पार्किंसन रोग है। आपका डॉक्टर आपके लक्षणों, चिकित्सकीय इतिहास और एक क्लीनिकल जाँच के आधार पर रोग की पहचान करेगा।

आपका डॉक्टर आपसे प्रश्न पूछेगा और आपको कुछ काम करने या पैदल चलने को कह सकता है। इससे रोग पहचानने में सहायता मिलेगी

इन शुरुआती चरणों में, आपके डॉक्टर के लिए यह कहना मुश्किल हो साक्ता है कि आपको निश्चित तौर पर यह रोग है क्योंकि लक्षण आम तौर पर हल्के होते हैं।

यदि आपके डॉक्टर को पार्किंसन रोग की शंका होती है, तो आपको एक विशेषज्ञ (एक न्यूरोलॉजिस्ट या जराचिकित्सक) के पास रिफ़र कर दिया जाएगा। यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि आप पार्किंसन रोग की शुरुआती अवस्थाओं में हो सकते हैं, तो आपको छह सप्ताह के भीतर एक विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। यदि उन्हें लगता है कि आप पार्किंसन रोग की बाद की अवस्थाओं में हो सकते हैं, तो आपको दो सप्ताह के भीतर एक विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।

विशेषज्ञ संभावित रूप से आपको विभिन्न शारीरिक गतिविधियाँ पूरी करने को कहेगा ताकि वह यह मूल्यांकन कर सके कि क्या आपके शरीर में गतिविधि को प्रभावित करने वाले कोई लक्षण (मोटर लक्षण) मौजूद हैं।

शरीर में कम से कम तीन में से दो लक्षणों के होने पर, रोग की पहचान पार्किंसन रोग के रूप में होने की संभावना होती है:

  • शरीर के किसी हिस्से का अनियंत्रित रूप से थरथराना (कँपकँपी) जो आम तौर पर आराम करते वक्त होता है
  • गतिविधि का धीमा होना (ब्रैडीकाइनेशिया)
  • मांसपेशियों का कड़ापन (अकड़न)

पार्किंसन रोग की पहचान करने और अन्य बीमारियों की संभावना खारिज़ करने के लिए अक्सर लेवोडोपा दवा निर्धारित की जाती है।

यदि लेवोडोपा दवा लेने के बाद आपके लक्षणों में तेजी से सुधार होता है तो इस बात की अत्यधिक संभावना होती है कि आपको पार्किंसन रोग है।

निदान प्राप्त करना

यह बताया जाना कि आपको पार्किंसन रोग है, भावनात्मक रूप से तबाह करने वाला हो सकता है, और खबर को ग्रहण करना अक्सर कठिन हो सकता है। इसलिए, इस समय, यह महत्त्वपूर्ण होता है कि आपको अपने परिवार और देखभाल टीम का साथ मिले, जो निदान के साथ सामंजस्य बिठाने में आपकी मदद करेंगे।

उपचार

उपचार का संक्षिप्त विवरण

पार्किंसन रोग की शुरुआती अवस्थाओं में आपको किसी उपचार की जरूरत नहीं पड़ सकती है क्योंकि लक्षण आम तौर पर हल्के रहते हैं। हालाँकि, आपको अपने विशेषज्ञ से नियमित तौर पर मिलना पड़ सकता है ताकि आपकी स्थिति की निगरानी की जा सके।

वर्तमान समय में, पार्किंसन रोग का कोई उपचार नहीं है। हालाँकि लक्षणों को नियंत्रित करने और आपके जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कई सारे उपचार उपलब्ध हैं। ये सहायक थेरेपी हो सकती हैं जो दैनिक जीवन के साथ तालमेल बिठाए रखने में आपकी सहायता करती हैं, या आपके लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवाइयाँ हो सकती हैं। कुछ विशेष लक्षणों वाले व्यक्तियों के लिए, सर्जरी एक विकल्प हो सकता है।

आपको अपने स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों और अपने परिवार या देखरेख कर्ता के साथ एक देखभाल योजना पर सहमति बनानी चाहिए, और इसकी नियमित रूप से समीक्षा की जानी चाहिए।

सहायक थेरेपी

ऐसी कई थेरेपी मौजूद हैं जो पार्किंसन रोग के साथ जीवन को आसान बना सकती हैं और दैनिक जीवन में अपने लक्षणों से निपटने में आपकी सहायता कर सकती हैं।

फ़िजियोथेरेपी

एक फ़िजियोथेरेपिस्ट आपकी मांसपेशियों की अकड़न और जोड़ों के दर्द में आराम पहुँचाने के लिए आपके साथ काम कर सकता है। एक फ़िजियोथेरेपिस्ट का उद्देश्य गतिविधि आसान करना और आपकी चाल और लचीलेपन में सुधार करना होता है। वे आपके फ़िटनेस के स्तर और स्वयं द्वारा चीजों को प्रबंधित करने की आपकी योग्यता को भी बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।

ऑक्युपेशनल थेरेपी

एक ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट आपके दैनिक जीवन में कठिनाई भरे क्षेत्रों की पहचान कर सकता है, जैसे कि खुद से कपड़ पहनना या आसपास की दुकानों तक जाना। वह आपके लिए व्यावहारिक हल निकालने में सहायता कर सकता है और सुनिश्चित कर सकता है कि आपका घर सुरक्षित है और आपके लिए समुचित रूप से व्यवस्थित है। इससे आपको ज्यादा से ज्यादा लंबे समय तक सामान्य रहने में सहायता मिलेगी।

वाक और भाषा थेरेपी

पार्किंसन रोग से जूझने वाले आधे लोगों को संचार में समस्या होती है, जैसे कि अस्पष्ट वाक या खराब बॉडी लैंग्वेज। यदि आपको संचार संबंधी समस्याएँ हैं, तो एक वाक और भाषा थेरेपिस्ट आपके वाक और भाषा उपयोग को सुधारने में मदद कर सकता है। खुद को स्पष्ट ढंग से अभिव्यक्त करने में आपकी सहायता करने के लिए वे मौखिक व्यायामों और उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं।

आहार सलाह

पार्किंसन रोग से पीड़ित कुछ लोगों को कब्ज(मल त्याग में परेशानी) का अनुभव हो सकता है। अपने आहार में फ़ाइबर की मात्रा बढ़ा कर और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सुनिश्चित करके इसमें सुधार किया जा सकता है। फ़ाइबर फलों, सब्जियों और अनाजों में पाया जाता है। आपको हर दिन छह से आठ गिलास (1.2 लीटर) पानी पीना चाहिए।

एक अन्य आम समस्या है आर्थोस्टेटिक या पोस्चरल हाइपोटेंशन। यह अपने शरीर की मुद्रा बदलते समय होने वाला अल्प रक्त दाब होता है, खास तौर से एक दम से खड़ा होने के बाद। यदि आपको आर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन है, तो आपका डॉक्टर आपको अपने आहार में नमक और पानी की मात्रा बढ़ाने की सलाह दे सकता है।

निम्नलिखित का पालन करके भी हाइपोटेंशन में मदद मिलती है:

  • शाम को कैफ़ीन के सेवन से बचना
  • बड़ी मात्रा में खाने की बजाय कई बार, छोटी-छोटी मात्रा में खाना
  • मदिरा से परहेज करना

पार्किंसन रोग से ग्रस्त लगभग 50% लोग अनचाहे रूप से वजन में कमी का अनुभव करते हैं। आपका डॉक्टर आपको एक डाइटीशियन (एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर जो आहार संबंधी सलाह देने के लिए प्रशिक्षित होता है) के पास भेज सकता है।

दवाइयाँ

पार्किंसन रोग के लक्षणों का उपचार करने के लिए दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है सभी दवाइयाँ हर किसी के लिए उपयोगी नहीं होती हैं, और प्रत्येक के अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव अलग-अलग होते हैं। सामान्य तौर पर तीन प्रमुख प्रकार की दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। ये हैं लेवोडोपा, डोपामैन एगोनिस्ट और मोनोएमाइन ऑक्सीडेज-बी इनहिबिटर। पार्किंसन रोग से ग्रस्त अधिकांश लोगों को अंततोगत्त्वा लेवोडोपा लेनी पड़ेगी, जिसे असर बढ़ाने के लिए अन्य दवाओं के साथ में लिया जा सकता है।

प्रत्येक दवा को दवा लेने वाले व्यक्ति की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिखा जाता है। कौन सी दवा लिखी जाएगी, इसको प्रभावित करने वाले घटक निम्नलिखित हैं:

  • आपकी उम्र
  • आपके लक्षणों की गंभीरता
  • उपचार का आप पर कितना अच्छा असर पड़ता है
  • क्या आपको कोई साइड इफ़ेक्ट होता है

जब लोग अपनी दवा समय पर नहीं लेते हैं, या इसे लेना पूरी तरह बंद कर देते हैं, तो वे बहुत बीमार पड़ सकते हैं। यदि आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो अस्पताल के स्टाफ़ को अपनी दवा के बारे में बताएँ। यदि आपको पेट में गड़बड़ी या उल्टी की शिकायत होती है, तो अपने डॉक्टर को बताएँ क्यों इससे आपके शरीर में दवा का स्तर प्रभावित हो सकता है।

आपका विशेषज्ञ आपको दवा के विकल्पों के बारे में विस्तार से समझा सकता है और बता सकता है कि आपके लिए कौन सा सर्वश्रेष्ठ रहेगा। बीमारी बढ़ने और आपकी आवश्यकताओं में परिवर्तन होने के साथ नियमित समीक्षाएँ आवश्यक होंगी।

लेवोडोपा

लेवोडोपा आपके मष्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा अवशोषित किया जाता है और डोपामाइन में परिवर्तित किया जाता है। आम तौर पर इसे एक टैबलेट या लिक्विड के रूप में लिया जाता है। लेवोडोपा को अक्सर दूसरी दवाओं के साथ मिलाकर दिया जाता है, जैसे बेनसेराज़ाइड या कार्बिपोडा। ये दवाएँ लेवोडोपा को मष्तिष्क में पहुँचने से पहले आँतों में टूटने से रोकती हैं। ये लेवोडोपा के साइड इफ़ेक्ट भी कम करती हैं, जिनमें जी मचलाना, उल्टी, थकान और सर चकराना शामिल हैं।

यदि आपको लेवोडोपा दवाई लिखी जाती है, तो शुरुआती खुराक सामान्य रूप से बहुत छोटी होगी और असर दिखाने तक इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। शुरुआत में, लेवोडोपा लक्षणों में नाटकीय ढंग से सुधार कर सकती है। हालाँकि, समय के साथ धीरे-धीरे यह कम असरदार होती जाती है। यह इसलिए होता है कि मष्तिष्क में अधिक तंत्रिका कोशिकाओं के मरने के कारण, दवा को अवशोषित करने के लिए कम तंत्रिका कोशिकाएँ शेष रहती हैं। इसका मतलब यह है कि खुराक को समय-समय पर बढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

दीर्घावधि के लिए लेवोडोपा का इस्तेमाल करने पर साइड इफ़ेक्ट होना निश्चित माना जाता है। इनमें “चालू-बंद” प्रभाव, जिसमें आप अचानक से हिलने-डुलने में सक्षम होने की अवस्था (चालू) से शिथिल अवस्था (बंद) में आ जाते हैं, और मांसपेशीय समस्याएँ, जिनकी वजह से मांसपेशियाँ अनियंत्रित ढंग से हिलती हैं (डिस्किनीशिया) शामिल हैं।

डुओडोपा

यह विशेषज्ञ उपचार गंभीर चालू-बंद प्रभावों से पीड़ित मरीज़ों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उदर भित्ति के जरिए एक ट्यूब को आंत में प्रवेश कराया जाता है। एक छोटे पंप की सहायता से, जिसे आपकी बेल्ट से लगाया जाता है, लेवोडोपा जेल को लगातार पहुँचाया जाता है। यूके में केवल कुछ ही केंद्र यह उपचार देते हैं, जिसके लिए आपके प्राथमिक देखभाल ट्रस्ट को पैसों का प्रबंध करने की आवश्यकता पड़ेगी।

डोपामाइन एगोनिस्ट

डोपामाइन एगोनिस्ट मष्तिष्क में डोपामाइन की जगह लेकर उनके स्थानापन्न का काम करते हैं और इनका प्रभाव लेवोडोपा के समान होता है। इनका उपयोग पार्किंसन रोग की शुरुआती अवस्था के लिए किया जाता है क्योंकि लेवोडोपा की अपेक्षा इनसे मांसपेशीय समस्याएँ उत्पन्न होने की संभावना कम होती है। इन्हें अक्सर टैबलेट के रूप में लिया जाता है, किंतु एक इंजेक्शन के माध्यम से नस में भी प्रवेश कराया जा सकता है। कभी-कभार, डोपामाइन एगोनिस्ट को लेवोपोडा लेते समय साथ में लिया जाता है। इसकी वजह से लेवोडोपा की कम खुराक लेनी पड़ती है।

डोपामाइन एगोनिस्ट के संभावित साइड इफ़ेक्ट हैं जी मचलाना, उल्टी, थकान और सर चकराना। डोपामाइन एगोनिस्ट की वजह से भ्रांति या दृष्टि भ्रम के दौरे पड़ सकते हैं, इसलिए इन्हें एहतियात के साथ लिया जाना चाहिए, खास कर के बुजुर्ग मरीजों द्वारा, जिनके साथ इसकी अधिक संभावना होती है।

कुछ लोगों में, डोपामाइन एगोनिस्ट का संबंध, खास कर उच्च खुराकों में लेने पर, बाध्यकारी व्यहारों के विकास के साथ पाया गया है, जिसमें रोगात्मक गैंबलिंग, बढ़ी हुई कामेच्छा और यौन लत। ये बहुत जटिल विकार होते हैं। अगर आपको लगता है कि आप इनका अनुभव कर रहे हैं तो अपने स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञ से बात करें। चूँकि संभव है कि व्यक्ति स्वयं समस्या को पहचान न पाए, इसलिए यह महत्त्वपूर्ण है कि देखभाल करने वाले और परिवार के सदस्य किसी असामान्य व्यवहार पर ध्यान दें और मौका मिलते ही उचित चिकित्सक से इस पर बात करें।

यदि आपको डोपामाइन एगोनिस्ट का एक कोर्स लिखा जाता है, तो जी मचलाना रोकने के लिए, शुरुआती खुराक बहुत छोटी होती है। खुराक को कुछ हफ़्तों के साथ धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। यदि जी मचलाने की समस्या होती है, तो आपका डॉक्टर आपको मितली-रोधी दवाएँ दे सकता है, जैसे डोमपेरिडोन। डोपामाइन एगोनिस्ट का कोई प्रकार लिखे जाने से पहले आपको खून की जाँचें और छाती का एक्सरे कराने की आवश्यकता पड़ सकती है।

मोनोएमाइन ऑक्सीडेज-बी इनहिबिटर

सेलेगिलीन और रसगिलीन सहित, मोनोएमाइन ऑक्सीडेज-बी (MAO-B) इनहिबिटर शुरुआती पार्किंसन रोग का उपचार करने के अन्य विकल्प हैं। ये मष्तिष्क में मोनोएमाइन ऑक्सीडेज-बी नामक रसायन का प्रभाव रोकते हैं। यह रसायन डोपामाइन को नष्ट करता है। इसे रोककर, MAO-B इनहिबिटर मष्तिष्क में डोपामाइन को अधिक देर तक टिकने देते हैं।

सेलेगिलीन और रसगिलीन दोनों ही पार्किंसन रोग के लक्षणों में सुधार कर सकते हैं, हालाँकि लेवोडोपा की तुलना में इनका प्रभाव कम होता है। इन्हें लेवोडोपा या डोपामाइन एगोनिस्ट के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।

MAO-B इनहिबिटर कई साइड इफ़ेक्ट को जन्म दे सकते हैं, जिसमें जी मचलाना, सर दर्द और पेट में दर्द शामिल हैं, हालाँकि हर कोई इन्हें अनुभव नहीं करता है।

कैटेकोल-ओ-मिथाइलट्रांसफ़रेज इनहिबिटर

कैटेकोल-ओ-मिथाइलट्रांसफ़रेज (COMT) इनहिबिटर उन लोगों को लिखे जाते हैं जो पार्किंसन रोग की बाद की अवस्थाओं में होते हैं। ये COMT एंजाइम से लेवोपोडा को टूटने से बचाते हैं।

COMT इनहिबिटर के साइड इफ़ेक्ट में जी मचलाना, उल्टी, दस्त और पेट दर्द शामिल हैं। यदि COMT इनहिबिटर टोल्कापोन का इस्तेमाल किया जाता है, तो आपको हर दो सप्ताह में अपने लिवर की जाँच करानी पड़ेगी।

सर्जरी

पार्किंसन रोग से ग्रस्त अधिकांश लोगों का उपचार दवाओं से होता है। हालाँकि, दीर्घावधि के मरीजों का इलाज करने के लिए कभी-कभार सर्जरी सहारा लिया जाता है।

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक सर्जरी की तकनीक है जिसका इस्तेमाल कभी-कभार पार्किंसन रोग का उपचार करने के लिए किया जाता है। आपकी छाती की दीवार में एक पल्स जनरेटर (एक हार्ट पेसमेकर के समान) प्रविष्ट कराया जाता है और त्वचा के नीचे एक पतला तार लगाया जाता है और आपके मष्तिष्क से जोड़ा जाता है। पल्स जनरेटर से थोड़ी मात्रा में विद्युत करेंट निर्मित किया जाता है, जो तार में जाता है और आपके मष्तिष्क के पार्किंसन रोग से ग्रसित हिस्से को उद्दीप्त करता है।

हालाँकि सर्जरी पार्किंसन रोग से रोगमुक्त नहीं करती है, लेकिन कुछ व्यक्तियों में यह लक्षणों में आराम दे सकती है।

चिकित्सकीय परीक्षण

पार्किंसन रोग के उपचार में काफी प्रगति चिकित्सकीय परीक्षणों के कारण हुई है, जिनमें नए उपचारों और उपचार के संयोजनों की तुलना मानक उपचारों के साथ की जाती है।

यदि आपसे किसी परीक्षण में हिस्सा लेने को कहा जाता है, तो आपको परीक्षण के बारे में एक सूचना पत्रक दिया जाएगा और एक सहमति फ़ॉर्म पर हस्ताक्षर करने को कहा जाएगा। आप हिस्सा लेने से इंकार कर सकते हैं या चिकित्सकीय परीक्षण से बाहर हो सकते हैं और इससे आपकी देखभाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अनुपूरक थेरेपी

पार्किंसन रोग से पीड़ित कुछ लोग अनुपूरक थेरेपी को उन्हें बेहतर महसूस कराने में सहायक पाते हैं। कई अनुपूरक उपचार और थेरेपी पार्किंसन रोग के लक्षणों में आराम देने का दावा करते हैं। हालाँकि उनके प्रभावशाली होने का कोई चिकित्सकीय प्रमाण नहीं है।

बहुत से लोग सोचते हैं कि अनुपूरक उपचारों का कोई नुकसानदायक प्रभाव नहीं होता है। हालाँकि, ये नुकसानदायक हो सकते हैं, और अपने डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं की जगह पर इनका इस्तेमाल करना समझदारी नहीं होगी। यदि आप अपनी लिखी गई दवाओं के साथ में किसी वैकल्पिक उपचार का इस्तेमाल करने का निर्णय लेते हैं, तो यह महत्त्वपूर्ण है कि आप अपने डॉक्टर को यह बता दें।

उपचार

आपकी उपचार योजना

पार्किंसन रोग की शुरुआती अवस्थाओं में आपको किसी उपचार की जरूरत नहीं पड़ सकती है क्योंकि लक्षण आम तौर पर हल्के रहते हैं। हालाँकि, आपको अपने विशेषज्ञ से नियमित तौर पर मिलना पड़ सकता है ताकि आपकी स्थिति की निगरानी की जा सके।

वर्तमान समय में, पार्किंसन रोग का कोई उपचार नहीं है। हालाँकि, आपके लक्षणों को नियंत्रित करने और आपके जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कई सारे उपचार उपलब्ध हैं। ये सहायक थेरेपी हो सकती हैं जो दैनिक जीवन के साथ तालमेल बिठाए रखने में आपकी सहायता करती हैं, या आपके लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवाइयाँ हो सकती हैं। कुछ विशेष लक्षणों वाले व्यक्तियों के लिए, सर्जरी एक विकल्प हो सकता है।

आपको अपने स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों और अपने परिवार या देखरेख कर्ता के साथ एक देखभाल योजना पर सहमति बनानी चाहिए, और इसकी नियमित रूप से समीक्षा की जानी चाहिए।

देखभाल योजना में निम्नलिखित चीजें शामिल होनी चाहिए:

  • आपकी वर्तमान आवश्यकताएँ क्या हैं और इन्हें किस तरह पूरा किया जा सकता है
  • भविष्य में आपकी क्या आवश्यकताएँ हो सकती हैं
  • क्या कोई ऐसी चीज है जो आपका दैनिक जीवन आसान बनाने के लिए की जा सकती है

आपकी देखभाल टीम

चूँकि पार्किंसन रोग उपचार के लिहाज से अक्सर एक जटिल बीमारी हो सकती है इसलिए आपको मिलने वाला उपचार साथ में काम करने वाले विभिन्न पेशेवरों की एक टीम द्वारा प्रदान किया जाएगा। इसे एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम या MDT कहते हैं।

आपकी देखभाल टीम के सदस्य निम्नलिखित होते हैं:

  • एक न्यूरोलॉजिस्ट (तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली बीमारियों का उपचार करने वाला विशेषज्ञ)
  • एक फ़िजियोथेरेपिस्ट (लोगों को उनके समन्वयन और गतिविधि क्षेत्र को बेहतर बनाता है)
  • एक वाक और भाषा थेरेपिस्ट
  • एक ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट (उन कौशलों को सुधारने में लोगों की मदद करता है जो दैनिक गतिविधियों के लिए आवश्यक होती हैं, जैसे कपड़े धुलना या पहनना)
  • एक इनकॉन्टिनेंस सलाहकार
  • एक साइकोलॉजिस्ट
  • एक सामाजिक कार्यकर्ता
  • एक डाइटीशियन
  • एक विशेषज्ञ न्यूरोलॉजी नर्स (जो बाकी की टीम से संपर्क करने का पहला संपर्क बिंदु है)

दवाएँ

पार्किंसन रोग के लक्षणों का उपचार करने के लिए दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है सभी दवाइयाँ हर किसी के लिए उपयोगी नहीं होती हैं, और प्रत्येक के अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव अलग-अलग होते हैं। सामान्य तौर पर तीन प्रमुख प्रकार की दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है।

ये हैं लेवोडोपा, डोपामैन एगोनिस्ट और मोनोएमाइन ऑक्सीडेज-बी इनहिबिटर।

पार्किंसन रोग से ग्रस्त अधिकांश लोगों को अंततोगत्त्वा लेवोडोपा लेनी पड़ेगी, जिसे असर बढ़ाने के लिए अन्य दवाओं के साथ में लिया जा सकता है।

प्रत्येक दवा को पार्किंसन रोग से ग्रस्त व्यक्ति की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिखा जाता है।

कौन सी दवा लिखी जाएगी, इसको प्रभावित करने वाले घटक निम्नलिखित हैं:

  • आपकी उम्र
  • आपके लक्षणों की गंभीरता
  • उपचार का आप पर कितना अच्छा असर पड़ता है
  • क्या आपको कोई साइड इफ़ेक्ट होता है

जब लोग अपनी दवा समय पर नहीं लेते हैं, या इसे लेना पूरी तरह बंद कर देते हैं, तो वे बहुत बीमार पड़ सकते हैं। यदि आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो अस्पताल के स्टाफ़ को अपनी दवा के बारे में बताएँ। यदि आपको पेट में गड़बड़ी या तबियत खराब होने की शिकायत होती है, तो अपने डॉक्टर को बताएँ क्यों इससे आपके शरीर में दवा का स्तर प्रभावित हो सकता है।

आपका विशेषज्ञ आपको दवा के विकल्पों के बारे में विस्तार से समझा सकता है और बता सकता है कि आपके लिए कौन सा सर्वश्रेष्ठ रहेगा।

बीमारी बढ़ने और आपकी आवश्यकताओं में परिवर्तन होने के साथ नियमित समीक्षाएँ आवश्यक होंगी।

लेवोडोपा

लेवोडोपा आपके मष्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा अवशोषित किया जाता है और डोपामाइन में परिवर्तित किया जाता है। आम तौर पर इसे एक टैबलेट या लिक्विड के रूप में लिया जाता है। लेवोडोपा को हमेशा दूसरी दवाओं के साथ मिलाकर दिया जाता है, या तो बेनसेराज़ाइड या कार्बिपोडा के साथ।

ये दवाएँ लेवोडोपा को मष्तिष्क में पहुँचने से पहले आँतों में टूटने से रोकती हैं।

ये लेवोडोपा के शुरुआती साइड इफ़ेक्ट भी कम करती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • तबियत खराब होना
  • सर चकराना
  • दिन में उनींदा महसूस करना

यदि आपको लेवोडोपा लिखी जाती है, शुरुआती खुराक बहुत छोटी होती है। प्रभाव लेने तक खुराक को धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। शुरुआत में, लेवोडोपा पार्किंसन रोग के लक्षणों में नाटकीय ढंग से सुधार कर सकती है। हालाँकि, समय के साथ धीरे-धीरे यह कम असरदार हो सकती है।

यह इसलिए होता है क्योंकि शरीर लेवोडोपा के चयापचय (तोड़ने) का अभ्यस्त हो जाता है इसलिए कई मरीजों को अपनी दवा और भी जल्दी-जल्दी लेने की आवश्यकता पड़ेगी।

दीर्घावधि के लिए लेवोडोपा का इस्तेमाल करने पर साइड इफ़ेक्ट होना निश्चित माना जाता है। इनमें “चालू-बंद” प्रभाव, जिसमें आप अचानक से हिलने-डुलने में सक्षम होने की अवस्था (चालू) से हिलनें में बहुत कठिनाई की अवस्था (बंद) में आ जाते हैं, और मांसपेशीय समस्याएँ, जिनकी वजह से मांसपेशियाँ अनियंत्रित ढंग से हिलती हैं (डिस्किनीशिया) शामिल हैं। डोपामाइन एगोनिस्ट भी डिस्किनीशिया का कारण हो सकते हैं या इसे बढ़ा सकते हैं।

डुओडोपा

यह विशेषज्ञ उपचार गंभीर चालू-बंद प्रभावों से पीड़ित मरीज़ों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उदर भित्ति के जरिए एक ट्यूब को आंत में प्रवेश कराया जाता है। एक छोटे पंप की सहायता से, जिसे आपकी बेल्ट से लगाया जाता है, लेवोडोपा जेल को लगातार पहुँचाया जाता है।

डोपामाइन एगोनिस्ट

डोपामाइन एगोनिस्ट मष्तिष्क में डोपामाइन की जगह लेकर उनके स्थानापन्न का काम करते हैं और इनका प्रभाव लेवोडोपा के समान होता है। इनका उपयोग पार्किंसन रोग की शुरुआती अवस्था के लिए किया जाता है क्योंकि लेवोडोपा की अपेक्षा इनसे मांसपेशीय समस्याएँ उत्पन्न होने की संभावना कम होती है। इन्हें अक्सर टैबलेट के रूप में लिया जाता है, किंतु एक इंजेक्शन के माध्यम से नस में भी प्रवेश कराया जा सकता है। कभी-कभार, डोपामाइन एगोनिस्ट को लेवोपोडा लेते समय साथ में लिया जाता है। इसकी वजह से लेवोडोपा की कम खुराक लेनी पड़ती है।

मितली और थकान डोपामाइन एगोनिस्ट के संभावित साइड इफ़ेक्ट हैं।

इसकी वजह से भ्रांति या दृष्टि भ्रम के दौरे पड़ सकते हैं, इसलिए इन्हें एहतियात के साथ लिया जाना चाहिए, खास कर के बुजुर्ग मरीजों द्वारा, जिनमें इन लक्षणों से प्रभावित होने का जोखिम अधिक होता है।

यदि आपको डोपामाइन एगोनिस्ट का एक कोर्स लिखा जाता है, तो मितली की भावना रोकने के लिए, शुरुआती खुराक बहुत छोटी होती है। खुराक को कुछ हफ़्तों के साथ धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। यदि जी मचलाने की समस्या होती है, तो आपका डॉक्टर आपको मितली-रोधी दवाएँ दे सकता है, जैसे डोमपेरिडोन। डोपामाइन एगोनिस्ट का कोई प्रकार लिखे जाने से पहले आपको खून की जाँचें और छाती का एक्सरे कराने की आवश्यकता पड़ सकती है।

इंपल्सिव कंट्रोल डिसऑर्डर और पंडिंग

कुछ लोगों में डोपामाइन एगोनिस्ट, खास कर उच्च खुराकें लेने पर, एक विकार उत्पन्न कर सकता है जिसे इंपल्सिव कंट्रोल डिसऑर्डर (आईसीडी) कहते हैं। कुछ कम हद तक यह लेवोडोपा के लिए भी लागू होता है।

आईसीडी की वजह से व्यक्ति किसी, सामान्यतः नुकसानजनक, लालसा या आवेग पर काबू नहीं कर पाता है और जबर्दस्ती की गतिविधियों में हिस्सा लेता है जैसे रोगात्मक गैंबलिंग या लगातार खाते रहना।

यह अनुमान है कि डोपामाइन एगोनिस्ट लेने वाले 5 में से 1 व्यक्ति और लेवोडोपा लेने वाले 14 में से 1 व्यक्ति में एक आईसीडी विकसित हो जाता है।

डोपामाइन एगोनिस्ट लेने वाले कुछ व्यक्ति सनकपूर्ण-बाध्यकारी व्यहारों में भी शामिल होते हैं, जैसे ऐसी चीजें इकट्ठा करना और रखना जिनका कोई वास्तविक महत्त्व नहीं है और लंबी दूरी पर टहलने निकल जाना (दिशाहीन भटकना)।

इस ओसीडी के जैसे इस व्यवहार को पंडिंग कहते हैं।

आईसीडी और पंडिंग, दोनों जटिल विकार हैं इसलिए यदि आपको लगता है कि आप इनका अनुभव कर रहे हैं तो आपको अपने स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञ से बात करनी चाहिए।

चूँकि संभव है कि व्यक्ति स्वयं समस्या को पहचान न पाए, इसलिए यह महत्त्वपूर्ण है कि देखभाल करने वाले और परिवार के सदस्य किसी असामान्य व्यवहार पर ध्यान दें और जितना जल्दी से जल्दी हो सके, उचित चिकित्सक से इस पर बात करें।

मोनोएमाइन ऑक्सीडेज-बी इनहिबिटर

सेलेगिलीन और रसगिलीन सहित, मोनोएमाइन ऑक्सीडेज-बी (MAO-B) इनहिबिटर शुरुआती पार्किंसन रोग का उपचार करने के अन्य विकल्प हैं। ये मष्तिष्क में मोनोएमाइन ऑक्सीडेज-बी नामक रसायन का प्रभाव रोकते हैं। यह रसायन डोपामाइन को नष्ट करता है। इसे अवरुद्ध करके, MAO-

B इनहिबिटर मष्तिष्क में डोपामाइन को अधिक देर तक टिकने देते हैं।

सेलेगिलीन और रसगिलीन दोनों ही पार्किंसन रोग के लक्षणों में सुधार कर सकते हैं, हालाँकि लेवोडोपा की तुलना में इनका प्रभाव कम होता है। इन्हें लेवोडोपा या डोपामाइन एगोनिस्ट के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।

MAO-B इनहिबिटर कई साइड इफ़ेक्ट को जन्म दे सकते हैं, जिसमें तबियत खराब होना, सर दर्द और पेट में दर्द शामिल हैं, लेकिन ये आम नहीं हैं।

कैटेकोल-ओ-मिथाइलट्रांसफ़रेज इनहिबिटर

कैटेकोल-ओ-मिथाइलट्रांसफ़रेज (COMT) इनहिबिटर उन लोगों को लिखे जाते हैं जो पार्किंसन रोग की बाद की अवस्थाओं में होते हैं। ये COMT एंजाइम से लेवोपोडा को टूटने से बचाते हैं।

COMT इनहिबिटर के संभावित साइड इफ़ेक्ट में जी मचलाना, तबियत खराब होना, दस्त और पेट दर्द शामिल हैं।

यदि COMT इनहिबिटर टोल्कापोन का इस्तेमाल किया जाता है, तो आपको हर दो सप्ताह में अपने लिवर की जाँच करानी पड़ेगी।

नॉन-मोटर लक्षणों का उपचार

पार्किंसन रोग के कई नॉन-मोटर लक्षणों जैसे अवसाद और अनिद्रा के लिए उपचार के ढेरों विकल्प उपलब्ध हैं। इन्हें नीचे बताया गया है।

अवसाद

यह सिद्ध हो चुका है कि व्यायाम से अवसाद में सहायता मिलती है, और यह हल्के अवसाद के प्रमुख उपचारों में से एक है।

अधिक गंभीर अवसाद के लिए अक्सर एंटीडिप्रेसेंट दवाओं और संज्ञानात्मक व्यवहारपरक थेरेपी (CBT) नामक एक वाक थेरेपी की साथ में आवश्यकता पड़ती है

आम तौर पर सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (SSRI) प्रकार के एंटीडिप्रेसेंट दिए जाते हैं क्योंकि अन्य एंटीडिप्रेसेंट की तुलना में ये कम साइड इफ़ेक्ट उत्पन्न करते हैं।

दुर्लभ मामलों में, SSRI लेने की वजह से पार्किंसन रोग के लक्षण गंभीर हो सकते हैं। ऐसा होने की स्थिति में आपकी देखभाल के इंचार्ज डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि आपकी दवा बदलने की आवश्यकता पड़ेगी।

CBT मुख्यतः इस बात पर केंद्रित होती है कि आप वर्तमान समय में अपने सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को किस तरह बदल सकते हैं। यह आपको सिखाती है कि नकारात्मक विचारों से कैसे जीतें, उदाहरण के लिए, निराशा की भावनाओं को चुनौती देने के लिए सक्रिय होना। CBT राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) पर अवसाद और उन सभी मानसिक समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए उपलब्ध है, जिनमें यह मददगार पाई गई है।

सामान्य तौर पर सत्रों का एक छोटा कोर्स करना होता है, जिसमें साधारणतः छह से आठ सत्र होते हैं, जिसमें आप CBT में प्रशिक्षित परामर्शदाता से 10-12 सप्ताह की अवधि में अकेले में संवाद करते हैं। कुछ मामलों में आपको सामूहिक CBT प्रदान की जा सकती है।

अवसाद के उपचार के बारे में अधिक पढ़ें।

चिंता

यदि आपको ‘ऑन-ऑफ़’ एपिसोड होते रहते हैं, तो पहला कदम है अपनी दवा की समीक्षा करना। आपको दवा लेने के समय में परिवर्तन करने की आवश्यकता हो सकती है, या कुछ अन्य दवाइयाँ जोड़नी पड़ सकती हैम।

अपने तनाव के स्तर को घटाने के लिए विभिन्न प्रकार के व्यावहारिक कदमों को उठाना भी मददगार हो सकता है, जैसे:

  • नियमित तौर पर व्यायाम करना
  • कॉफ़ी और चाय जैसे प्रेरक पदार्थों से परहेज करना
  • उन गतिविधियों में भाग लेना जो आपको आराम देने में मदद करें जैसे योग या ताई ची

यदि आपको काफी चिंता की भावनाएँ और/या पैनिक अटैक हो रहे हैं तो आपको सीबीटी और एंटीडिप्रेसेंट के एक संयोजन की आवश्यकता पड़ सकती है।

चिंता के उपचार के बारे में अधिक पढ़ें।

डिमेंशिया

यदि आप (या आपके किसी प्रियजन) में डिमेंशिया के लक्षण विकसित होने लगते हैं तो पहला कदम आम तौर पर उस दवाई की समीक्षा करना होता है जिसका उपयोग पार्किंसन रोग का उपचार करने के लिए किया जा रहा है।

ऐसा इसलिए क्योंकि इस्तेमाल होने वाली दवाओं में से कुछ दवाएँ डिमेंशिया के लक्षणों को और भी गंभीर बना सकती हैं, और इन दवाओं की खुराक घटाने से मोटर लक्षण गंभीर हो सकते हैं। इसलिए यह अक्सर पार्किंसन रोग के मोटर लक्षणों को नियंत्रित करने और डिमेंशिया के लक्षणों का उपचार करने के बीच का रास्ता ढूंढने के बारे में होता है।

रीवास्टिग्माइन (rivastigmine) विचार कौशलों (संज्ञानात्मक क्षमता) को सुधारने और असामान्य व्यवहार के प्रकरणों, जैसे अचानक गुस्सा फूटना, को घटाने में असरदार सिद्ध हुई है।

रीवास्टिग्माइन के सामान्य साइडइफ़ेक्ट्स में सर चकराना, बुखार आना और दस्त शामिल हैं।

डिमेंशिया से जुड़े साइकोसिस के उपचार में मदद के लिए बनाई गई दवा (एंटीसाइकोटिक्स) पार्किंसन रोग के मोटर लक्षणों को और भी गंभीर बना सकती है। इसलिए उन्हें आम तौर पर केवल तब इस्तेमाल किया जाता है यदि व्यक्ति को गंभीर साइकोसिस होता है।

पार्किंसन रोग के लिए कई मनोवैज्ञानिक उपचार भी हैं, जैसे:

  • कॉग्नीटिव स्टिमुलेशन और वास्तविकता अनुकूलन थेरेपी – जिसमें ऐसी गतिविधियों और व्यायामों में हिस्सा लेना शामिल है जिन्हें आपकी याददाश्त, समस्या हल करने के कौशल और भाषाई योग्यता में सुधार करने के लिए तैयार किया जाता है।
  • व्यवहार थेरेपी – जिसमें आक्रामकता जैसे कष्टकर व्यवहार से निपटने के लिए समस्या हल करने के दृष्टिकोण का उपयोग किया जाता है।

सोने की समस्याएँ

सोने की समस्याएँ (अनिद्रा) कभी कभार आपकी दवाओं का परिणाम हो सकती हैं जिससे रात के दौरान या तो आप जगे रहते हैं या आपकी नींद में खलल पड़ता रहता है। इसलिए दवाओं को बदलकर, खुराक में समायोजन करके और/या दवाओं को लेने के समय में परिवर्तन करके आपकी नींद को बेहतर करना संभव हो सकता है।

अपनी नींद को बेहतर बनाने के लिए आप निम्नलिखित अन्य विधियों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • दिन के दौरान शारीरिक रूप से सक्रिय रहें
  • शाम के समय चाय और कॉफ़ी जैसे प्रेरक पदार्थों से परहेज करें
  • सोने के समय से पहले आराम की कोशिश करें, जैसे गर्म पानी में नहाएँ

अवसाद भी अनिद्रा का कारण हो सकता है इसलिए किसी अंतर्निहित अवसाद का उपचार आपकी नींद की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद कर सकता है।

हालाँकि, पार्किंसन रोग से जुड़ी अनिद्रा को नियंत्रित करना चुनौती भरा हो सकता है और इसके बढ़ने के साथ आपको अनिद्रा के साथ अधिक मुश्किल देखने को मिल सकती है।

ऑटोनॉमिक डिसफ़ंक्शन

आपके स्वचालित तंत्रिका तंत्र में परेशानियों से उत्पन्न होने वाले लक्षणों (ऑटोनॉमिक डिसफ़ंक्शन) के लिए उपचार के विकल्पों का उल्लेख नीचे किया गया है।

यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस

यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस (अनैच्छिक ढंग से मूत्र का निकलना) में कभी-कभार रात के समय पानी आदि का सेवन कम करके सुधार किया जा सकता है।

आपके मूत्राशय को मजबूत बनाने के लिए तैयार किए गए व्यायाम (ब्लैडर ट्रेनिंग) भी मददगार साबित हो सकते हैं। यदि आपको रात में शौचालय जाने के लिए बार-बार उठना पड़ता है तो अपने बेडरूप में एक कमोड स्थापित करना आपको उपयोगी लगेगा। पुरुषों के लिए हाथों से पकड़े जाने वाले पात्र भी उपलब्ध हैं।

कुछ दवाइयाँ ब्लैडर को ढीला करने में सहायता कर सकती हैं जिसे पेशाब करने की आवश्यकता कम होती है।

कब्ज़

भरपूर मात्रा में पानी पीना और भरपूर फ़ाइबर युक्त आहार खाने से अक्सर कब्ज़ के लक्षणों में आराम मिलता है।

हालाँकि, पार्किंसन रोग से ग्रस्त कुछ लोगों को लैक्सेटिव नाम से जानी जाने वाली एक दवा लेनी पड़ती है जो मल को पतला करके इसका निकलना आसान बनाती है।

लंबे समय के लिए लिए जाने पर कुछ लैक्सेटिव खतरनाक हो सकते हैं इसलिए अगर आपको लगातार पाचन संबंधी समस्याएँ हो रही हैं, तो आपको अपनी देखभाल टीम से सलाह मांगनी चाहिए।

यौन समस्याएँ

यदि आपको लिंग में कड़ापन प्राप्त करने और / या बनाए रखने में समस्या हो रही है (स्तंभन दोष) तो कई ऐसी दवाएँ हैं जो लिंग में रक्त की आपूर्ति बढ़ाकर कड़ापन प्रदान कर सकती हैं।

आर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन

बैठने या लेटने की मुद्रा से अचानक उठने की मुद्रा में आते समय रक्त दाब में अचानक कमी (आर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन) को अक्सर कुछ निवारक उपाय करके रोका जा सकता है, जैसे:

  • लंबी अवधियों के लिए बैठने से बचें; खास कर गर्म परिस्थितियों में
  • अपना समय लेकर खड़े हों; दरवाजे, टेलीफ़ोन या अन्य का जवाब देने के लिए कभी जल्दबाजी में नहीं उठें
  • जब तक आपको लगे नहीं कि आप स्थिर हो गए हैं, तब तक शांत खड़े रहने की कोशिश करें
  • अपने आहार में नमक की मात्रा बढ़ाना कभी-कभार मददगार हो सकता है – आपका डॉक्टर संभवतः इसकी सलाह देगा।
  • शाम को कैफ़ीन के सेवन से बचना
  • बड़ी मात्रा में खाने की बजाय कई बार, छोटी-छोटी मात्रा में खाना
  • मदिरा से परहेज करना
  • ढेर सारा पानी पिएँ, हर दिन कम से कम डेढ़ लीटर (3 पाइंट) और सुबह बिस्तर छोड़ते ही आधा लीटर पानी पिएँ

अत्यधिक पसीना

अधिकांश मामलों में दवाओं में समायोजन करने से अत्यधिक पसीने (हाइपरहाइड्रोसिस) से आराम मिलता है। समस्या अगर बनी रहती है तो उपचार के निम्नलिखित विकल्प उपलब्ध होते हैं:

  • निर्देशित एंटीपर्सपिरेंट
  • प्रभावित स्वेद ग्रंथियों से जुड़े हुए कुछ तंत्रिका ऊतकों को निकालने के लिए सर्जरी का इस्तेमाल

निगलने में या लार संबंधी समस्याएँ

निगलने में परेशानी (डिस्फेजिया) और अत्यधिक लार का निर्माण (ड्रूलिंग) होने पर आम तौर पर आपको एक वाक और भाषा थेरेपिस्ट (SLT) के पास भेजे जाने की आवश्यकता पड़ेगी।

आपका SLT आपको सिखा सकता है कि किस तरह से शारीरिक मुद्राओं में बदलाव करने से निगलना आसान हो सकता है।

आपको अपने आहार में परिवर्तन करके मुलायम भोजन और गाढ़े तरल पदार्थ लेने की सलाह भी दी जा सकती है।

डिस्फेजिया के बहुत ही गंभीर मामलों में एक फ़ीडिंग ट्यूब की आवश्यकता पड़ सकती है।

डिस्फेजिया के उपचार के बारे में अधिक पढ़ें।

अत्यधिक लार का निर्माण इस तथ्य का परिणाम होता है कि पार्किंसन रोग से ग्रस्त लोगों में निगलने की प्राकृतिक प्रतिक्रिया धीमी हो जाती है। इसलिए, शरीर असल में नियमित समयांतरालों पर निगलना ‘भूल जाता है’ जिसकी वजह से मुँह में लार इकट्ठा हो जाती है, जो व्यक्ति का ध्यान विचलित होने पर बाहर बह सकती है।

आपका SLT आपको ढेरों ऐसे व्यायाम सिखा सकता है जो ड्रूलिंग से रोकथाम कर सकते हैं। साथ ही साथ, वह ऐसी तकनीकें भी बता सकता है जो आपको ज्यादा जल्दी-जल्दी निगलने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। ऐसे उपकरण उपलब्ध हैं जो आपको बार-बार निगलने रहने की याद दिला सकते हैं।

अधिक गंभीर मामलों में, दवा की आवश्यकता पड़ सकती है, और कुछ मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। इस बारे में आपकी देखभाल टीम आपको सलाह दे सकती है।

सहायक थेरेपी

ऐसी कई थेरेपी मौजूद हैं जो पार्किंसन रोग के साथ जीवन को आसान बना सकती हैं और दैनिक जीवन में अपने लक्षणों से निपटने में आपकी सहायता कर सकती हैं।

फ़िजियोथेरेपी

एक फ़िजियोथेरेपिस्ट आपकी मांसपेशियों की अकड़न और जोड़ों के दर्द में आराम पहुँचाने के लिए आपके साथ काम कर सकता है। एक फ़िजियोथेरेपिस्ट का उद्देश्य गतिविधि आसान करना और आपकी चाल और लचीलेपन में सुधार करना होता है।

वे आपके फ़िटनेस के स्तर और स्वयं द्वारा चीजों को प्रबंधित करने की आपकी योग्यता को भी बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।

ऑक्युपेशनल थेरेपी

एक ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट आपके दैनिक जीवन में कठिनाई भरे क्षेत्रों की पहचान कर सकता है, जैसे कि खुद से कपड़ पहनना या आसपास की दुकानों तक जाना। वह आपके लिए व्यावहारिक हल निकालने में सहायता कर सकता है और सुनिश्चित कर सकता है कि आपका घर सुरक्षित है और आपके लिए समुचित रूप से व्यवस्थित है। इससे आपको ज्यादा से ज्यादा लंबे समय तक सामान्य रहने में सहायता मिलेगी।

वाक और भाषा थेरेपी

पार्किंसन रोग से जूझने वाले आधे लोगों को संचार में समस्या होती है, जैसे कि अस्पष्ट वाक या खराब बॉडी लैंग्वेज। अतः आपके वाक और भाषा के उपयोग को सुधारने में भी एक SLT आपकी सहायता कर सकता है।

खुद को स्पष्ट ढंग से अभिव्यक्त करने में आपकी सहायता करने के लिए वे मौखिक व्यायामों और उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं।

आहार सलाह

पार्किंसन रोग से ग्रस्त लगभग 50% लोग अनचाहे रूप से वजन में कमी का अनुभव करते हैं। आपका डॉक्टर आपको एक डाइटीशियन (एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर जो आहार संबंधी सलाह देने के लिए प्रशिक्षित होता है) के पास भेज सकता है।

यदि आप कब्ज और/या आर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन का अनुभव कर रहे हैं तो एक डाइटीशियन आपको अतिरिक्त सलाह दे सकता है।

सर्जरी

पार्किंसन रोग से ग्रस्त अधिकांश लोगों का उपचार दवाओं से होता है। हालांकि, कभी-कभार सर्जरी का उपयोग उन लोगों का उपचार करने के लिए किया जाता है जिन्हें लंबे समय से पार्किंसन रोग होता है। यह सर्जरी संपूर्ण यूके में विशेषज्ञ केंद्रों में उपलब्ध है। हालाँकि, यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं होती और आपका विशेषज्ञ आपसे इस प्रकार के उपचार के जोखिमों और फायदों की चर्चा करेगा।

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक सर्जरी की तकनीक है जिसका इस्तेमाल कभी-कभार पार्किंसन रोग का उपचार करने के लिए किया जाता है। आपकी छाती की दीवार की त्वचा में एक पल्स जनरेटर (एक हार्ट पेसमेकर के समान) प्रविष्ट कराया जाता है और त्वचा के नीचे एक पतला तार लगाया जाता है और आपके मष्तिष्क में इलेक्ट्रोड से जोड़ा जाता है। पल्स जनरेटर से थोड़ी मात्रा में विद्युत करेंट निर्मित किया जाता है, जो तार में जाता है और आपके मष्तिष्क के पार्किंसन रोग से ग्रसित हिस्से को उद्दीप्त करता है।

हालाँकि सर्जरी पार्किंसन रोग से रोगमुक्त नहीं करती है, लेकिन कुछ लोगों में यह लक्षणों में आराम दे सकती है।

चिकित्सकीय परीक्षण

पार्किंसन रोग के उपचार में काफी प्रगति चिकित्सकीय परीक्षणों के कारण हुई है, जिनमें नए उपचारों और उपचार के संयोजनों की तुलना मानक उपचारों के साथ की जाती है।

यदि आपसे किसी परीक्षण में हिस्सा लेने को कहा जाता है, तो आपको परीक्षण के बारे में एक सूचना पत्रक दिया जाएगा। यदि आप हिस्सा लेना चाहते हैं, तो आपसे एक सहमति फ़ॉर्म पर हस्ताक्षर करने को कहा जाएगा। आप हिस्सा लेने से इंकार कर सकते हैं या चिकित्सकीय परीक्षण से बाहर हो सकते हैं और इससे आपकी देखभाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

पार्किंसन रोग के साथ जीवन

पार्किंसन रोग की पहचान होने पर जीवन बदल जाता है। अपने लक्षणों के नियंत्रण करने के लिए आपको दीर्घावधि के उपचार की आवश्यकता पड़ेगी और आपको दैनिक कार्यों को करने के तरीकों में फेरबदल करना पड़ सकता है।

खुद की देखभाल

खुद की देखभाल दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। इसका मतलब है कि आप आपकी देखभाल में लगे लोगों की मदद से अपने शरीर और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी स्वयं उठाते हैं। खुद की देखभाल में वे चीजें शामिल होती हैं जिन्हें आप फ़िट रहने, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रखने, बीमारी या दुर्घटनाओं की रोकथाम करने, और छोटी-मोटी परेशानियों और लंबे समय की बीमारियों से प्रभावशाली ढंग से निपटने के लिए करते हैं।

अगर लंबे समय की बीमारियों से जूझने वाले लोगों को खुद की देखभाल के लिए समर्थन दिया जाए, तो यह उनके लिए काफी फ़ायदेमंद हो सकता है। वे अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं, उनका दर्द, चिंता, अवसाद और थकान कम हो सकता है, जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और वे अधिक सक्रिय और स्वतंत्र हो सकते हैं।

नियमित समीक्षाएँ

चूँकि पार्किंसन रोग एक लंबे समय की बीमारी है, इसलिए आप अपनी स्वास्थ्य देखभाल टीम के साथ नियमित संपर्क में रहेंगे। टीम के साथ अच्छे संबंध होने पर आप अपने लक्षणों या चिंताओं पर अधिक आसानी के साथ चर्चा कर सकेंगे। टीम को जितना अधिक पता होगा, उतना अधिक वे आपकी मदद कर सकेंगे।

स्वस्थ रहना

पार्किंसन रोग जैसी दीर्घावधि से ग्रस्त प्रत्येक व्यक्ति को हर पतझण ऋतु में फ़्लू (इनफ़्लुएंजा) से रक्षा के लिए टीकाकरण करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्हें कोई एंटी-न्यूमोकोकल टीका लगवाने की भी सलाह दी जाती है, जो न्यूमोकोकल न्यूमैनिया नामक एक गंभीर छाती संक्रमण से रक्षा करता है।

स्वस्थ आहार और व्यायाम

नियमित व्यायाम और स्वस्थ आहार की सलाह सभी को दी जाती है, न केवल पार्किंसन रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को।

ऐसा करके कई बीमारियों से रक्षा हो सकती है, जिसमें दिल की बीमारियाँ और कैंसर के कई प्रकार भी शामिल हैं। अपने शरीर को आवश्यक पोषण देने के लिए सभी खाद्य समूहों वाला एक संतुलित आहार लें।

नियमित व्यायाम करने से तनाव कम करने में सहायता मिलती है और थकावट घटती है।

दूसरों के साथ संबंध

पार्किंसन रोग जैसी लंबे समय की बीमारी के साथ तालमेल बिठाने से आप, आपका परिवार और आपके दोस्तों पर तनाव पड़ सकता है। लोगों के साथ अपनी बीमारी के बारे में बात करना मुश्किल भरा हो सकता है, भले ही वे आपके करीबी हों।

खराब होते लक्षणों, जैसे कि गतिविधि करने में अधिक मुश्किल और कँपकँपी, आदि से निपटते हुए पार्किंसन रोग से ग्रस्त लोग अत्यधिक कुंठित और अवसादग्रस्त महसूस कर सकते हैं। लाजिमी है कि उनके साथी, सहचर या देख भाल करने वाले व्यक्ति भी चिंतित और कुंठित महसूस करेंगे।

आप कैसा महसूस करते हैं इस बारे में खुले रहें और अपने परिवार और दोस्तों को बताएँ कि वे किस तरह सहायता कर सकते हैं। अगर आप कुछ देर के लिए अकेले रहना चाहते हैं, तो उन्हें यह बताने में संकोच नहीं करें।

सपोर्ट

यदि आपका कोई प्रश्न है, तो आपका डॉक्टर या पार्किंसन रोग विशेषज्ञ नर्स आपकी सहायता कर सकते हैं। एक प्रशिक्षित परामर्शदाता या साइकोलॉजिस्ट या किसी विशेषज्ञ हेल्पलाइन पर किसी से बात करना आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकता है।

कुछ लोग पार्किंसन रोग से ग्रस्त अन्य लोगों से बात करना उपयोगी पाते हैं, चाहें यह किसी स्थानीय सपोर्ट समूह में हो या एक इंटरनेट चैटरूम में हो।

पैसे और वित्तीय सहायता

पार्किंसन रोग की वजह से यदि आपको काम बंद करन पड़ता है या पार्ट टाइम काम करना पड़ता है, तो वित्तीय स्थिति को संभालना आपके लिए कठिन हो सकता है। आप वित्तीय सहायता के पात्र हो सकते हैं।

ड्राइविंग

यदि डॉक्टर ने आपको पार्किंसन रोग बताया है, तो आपको अपने ड्राइविंग लाइसेंस जारीकर्ता और अपनी बीमा कंपनी को सूचित करना चाहिए।

संभवतः आपको ड्राइविंग बंद करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आपको एक फ़ॉर्म पूरा करने को कहा जाएगा जिसमें आपको अपनी बीमारी के बारे में अधिक जानकारी और अपने डॉक्टरों और विशेषज्ञों का विवरण देना होगा। आपका ड्राइविंग लाइसेंस जारी करता इसका उपयोग यह निर्णय लेने के लिए करेगा कि आप वाहन चलाने के लिए फ़िट हैं या नहीं।

उन्नत पार्किंसन रोग

पार्किंसन रोग के बढ़ने के साथ, आपको अपनी स्वास्थ्य देखभाल टीम के साथ यह चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा कि अपने जीवन के अंतिम पड़ाव के दौरान आप किस तरह की देखभाल चाहते हैं।

प्रशामक देखरेख क्या है?

प्रशामक देखरेख लक्षणों के लिए उस समय प्रदान की जाने वाली सहायता और देखभाल होती है जब बीमारी का कोई उपचार संभव नहीं होता है, आम तौर पर, जब व्यक्ति की मृत्यु होने वाली होती है। आपका डॉक्टर या नर्स आपको एक प्रशामक देखरेख वाले विशेषज्ञ या नर्स, या परामर्शदाता के पास जाने की सलाह दे सकते हैं।

हमारी प्रशामक देखरेख टीम आपके लक्षणों को नियंत्रित करने, आपको यथासंभव आराम से और दर्द-मुक्त रखने, और आप और आपके लिए शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक समर्थन प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

कारेन की कहानी

पार्किंसन रोग को अक्सर एक बूढ़े व्यक्ति को होने वाली बीमारी माना जाता है लेकिन जब कारेन रोज़ के पार्किंसन रोग की पहचान हुई तब वह मात्र 34 साल की थीं। वह बताती हैं कि पिछले 10 वर्षों के दौरान इसका उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है।

“जब मैं 34 साल की थी तब मुझे पार्किंसन रोग के लक्षण दिखाई दिए। उस समय मेरे पिता ने ध्यान दिया कि मैं सही से चल नहीं रही थी और मैं अपनी दाईं हाथ नहीं हिला रही थी। और ऑफ़िस में कंप्यूटर पर काम करते समय मैं गलत बटनें दबा रही थी।

“लगभग एक साल बाद मैं एक कार दुर्घटना का शिकार हो गई है और मेरे शरीर में कँपकँपी होने लगी। अगले वर्ष मुझे महसूस हुआ कि मैं ठीक नहीं हूँ। जब भी मैं चिंतित या व्यथित होती, कँपकँपी शुरू हो जाती।

“मेरा डॉक्टर नहीं जानता था कि मुझे क्या परेशानी थी इसलिए उसने मुझे एक न्यूरोलॉजिस्ट के पास भेजा, जिसने मुझे एक टैबलेट आजमाने के लिए दी। इसने असर दिखाया और मेरे लक्षणों में सुधार हुआ जिससे पुष्टि हो गई कि मुझे पार्किंसन था।

“मैं परामर्शदाता से मिलने दोबारा गई और उसने मुझे कुछ दवाएँ दीं जो मझे अपने जीवन भर हर दिन लेनी थीं।

“लोग पार्किंसन को बूढ़े लोगों की बीमारी मानते हैं। जब भी मैं बोलती हूँ कि मुझे पार्किंसन है, लोग हमेशा कहते हैं, ‘तुम इतनी बूढ़ी नहीं हो, तुम ठीक लग रही हो।’

“जब मेरी दवा असर कर रही होती है, मैं वाकई ठीक लगती हूँ, लेकिन लोग मुझे तब नहीं देखते जब दवा का असर खत्म हो जाता है और मैं चालफेर करने या हर वो चीज़ करने के लिए संघर्ष कर रही होती हूँ, जिन्हें लोग कोई महत्त्व नहीं देते हैं।

“सुबह के समय मैं अकड़न और धीमा महसूस करती हूँ और मुश्किल से एक कदम के आगे दूसरा कदम रखपाती हूँ। दवा मुझे शुरुआत करने में सहायता करती है। लक्षणों को रोकने के लिए मैं इसे दिन भर लेती रहती हूँ। सीढ़ियाँ समस्या नहीं हैं क्योंकि उन्हें मैं आसानी से दौड़कर चढ़ सकती हूँ। मुझे समस्या चलने में होती है।

"टैबलेट का असर खत्म होने के साथ मेरी हालत बदतर होती जाती है। मैं जिस फड़कन से पीड़ित हूँ, वह दवा का एक साइड इफ़ेक्ट है, लेकिन मुझे यह हर दिन लेनी पड़ती है। अगर मैं दवा न लूँ, तो मैं धीमी पड़ जाती हूँ, जकड़ जाती हूँ और जो मैं करना चाहती हूँ वह कर नहीं पाती हूँ। इसलिए समय पर दवाई लेते रहना बहुत जरूरी है। मेरे पास एक पिल टाइमर है, जो मुझे याद दिलाता है कि मुझे कोई टैबलेट कब लेना है

“मेरा परिवार वाकई में मेरा सहयोग देता है। मेरे पति और बच्चों को मेरे लिए घर के ढेर सारे काम करने पड़ते हैं, लेकिन उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं।

“काम पर मैं भाग्यशाली रही। मेरे बॉस काफ़ी सहायक हैं और उन्होंने सुनिश्चित किया कि मैं वही काम करूँ जो उस समय मेरे हिसाब से उपयुक्त थे। अगर मेरा दिन बुरा गुजर रहा होता, तो मेरे बॉस मुझे वह काम करने देते जो मैं कर सकती थी और उन्होंने मुझ पर कभी कोई दबाव नहीं डाला।

“जब पहली बार मेरे पार्किंसन रोग की पहचान हुई तब मैं अपने हमउम्र किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानती थी जिसे पार्किंसन रोग था, केवल बहुत बूढ़े लोग ही थे। फिर मेरे पड़ोस के अस्पताल की एक नर्स विशेषज्ञ ने मुझे पार्किंसन रोग सोसाइटी (PDS) की ब्रिस्टल शाखा से अवगत कराया।

“PDS के लोगों ने मुझे सहारा दिया। मैं उनकी समिति में शामिल हो गई ताकि मैं कम उम्र में पार्किंसन से ग्रस्त हो जाने वाले अन्य लोगों की मदद कर सकूँ।

“जब आपको पता चले कि आपको पार्किंसन है तो बात करना महत्त्वपूर्ण है। अपने डॉक्टर से पूछें कि क्या वे किसी नजदीकी सपोर्ट के बारे में जानते हैं या फिर PDS से संपर्क करें। उनकी वेबसाइट पर उन लोगों के फ़ोन नंबर दिए गए हैं जिनसे आप बात कर सकते हैं।

"मुझे नहीं लगता कि आप कभी भी स्वीकार करते हैं कि आपको पार्किंसन रोग है, लेकिन इसके साथ जीने के लिए आपको सीखने की आवश्यकता होती है। अपनी ज़िंदगी की लगाम इसके हाथों में न जाने दें। वह सब करें जो आप कर सकते हैं, जब भी आप कर सकते हैं, और सकारात्मक रहें क्यों इससे हमेशा मदद मिलेगी।”

अर्नी की कहानी

69 वर्षीय अर्नी के पार्किंसन रोग की पहचान चार साल पहले हुई थी। वह हमें अपनी कहानी सुनाते हैं।

“पीछे पलट कर देखूँ तो, पहचान होने से दो वर्ष पहले से मैं पार्किंसन रोग के लक्षणों का अनुभव कर रहा था। मैं टहलते हुए कई बार ‘जम’ चुका था - वाकई में चलना बंद कर देता था - और मुझे अपने चेहरे की मांसपेशियों में समस्या आ रही थीं और उनकी वजह से बुरी तरह से मेरी लार बह रही थी।

किशोरावस्था में गठिया होने कारण मैं कई वर्षों तक दाएँ कूल्हे में दर्द से पीड़ित रहा था। मेरे हिसाब से ‘जमने’ की वजह यही थी, जो गलत था। कुछ बुनियादी टेस्ट करने के बाद, मेरे डॉक्टर ने बताया कि मेरे चेहरे की मांसपेशियों के साथ कुछ गलत नहीं था और मेरी लार बहने का मूल कारण मेरे डेंटिस्ट द्वारा इस्तेमाल की गई फ़िलिंग का प्रकार हो सकता था।

“2005 की शुरुआत में मेरे दाएँ कूल्हे का पूरा प्रत्यारोपड़ हुआ। हालाँकि शुरुआत में मैं अच्छे से स्वास्थ्य लाभ कर रहा था, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि जिन मरीजों के साथ मैं भर्ती हुआ था, उनकी तुलना में मेरी प्रगति पिछड़ रही थी। वे जल्द ही घर चले गए, जबकि मेरी क्रियाशीलता में कोई सुधार नहीं हो रहा था।

“मुझे एक पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ पर बस अभिव्यक्तिहीन चेहरे को देखकर ही एक डॉक्टर को शक हुआ कि मुझे पार्किंसन था। मुझे एक परामर्शदाता को रिफ़र किया गया, जिसने पार्किंसन रोग की पुष्टि की। उसके साथ में एक पार्किंसन रोग नर्स विशेषज्ञ (PDNS) थी, जिसने मुझे पार्किंसन रोग सोसाइटी से इस बीमारी के बारे में कुछ जानकारी दी।

“इस समय मेरा स्वास्थ्य वाकई अच्छा है। सुबह के समय मेरे जोड़ों, खासकर मेरे टखनों में बहुत अकड़न रहती है और मेरी गतिविधि धीमी रहती है। मैं जितना ज्यादा हो सके व्यायाम करने की कोशिश करता हूँ जिससे मेरी क्रियाशीलता में सहायता मिलती है। मेरा मानना है कि अगर आपको पार्किंसन है तो यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि आप ज्याद से ज्याद सक्रिय रहें, इसलिए मैं सप्ताह में तीन बार जिम जाने की कोशिश करता हूँ।

"सौभाग्यवश मेरे बाएँ हाथ बहुत हल्की सी कँपकँपी होती है, जो स्वयं में कोई समस्या नहीं है। इस समय मेरी सबसे बड़ी समस्या कुर्सी से उठना है। साथ ही, मेरी हैंडराइटिंग इतनी छोटी है कि मैं इसे पढ़ नहीं पाता हूँ, तो मैं लोगों को यही बताता हूँ कि अब मैं लिख नहीं सकता! हाल ही में मुझे बोलने में तकलीफ़ें हो रही हैं, जो वाकई कुंठित कर देने वाला होता है क्योंकि अक्सर लोग मुझे अच्छी तरह से सुन नहीं पाते।

“मैं हर तीन महीने में अपने परामर्शदाता से मिलता हूँ और PDNS भी वहाँ मौजूद होती है। वह मुझे अपने लक्षणों को प्रभावशाली ढंग से नियंत्रित करने के लिए आवश्यक जानकारी देती है ताकि मैं जितना ज्यादा से ज्याद करना चाहूँ, कर पाऊं और जीवन पूरी तरह जी पाऊँ, भले ही थोड़ी धीमी गति से।

“मैं अपनी स्थानीय पार्किंसन रोग सोसाइटी सपोर्ट समूह का सचिव भी हूँ, जिसकी स्थापना मेरी बीमारी के पहचान के आठ महीने बाद हुई थी। समूह का हिस्सा होना काफी उपयोगी होता है क्योंकि वहाँ ऐसे लोग होते हैं जो समान परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं।

“इस बीमारी के साथ रहन बेहद कठिन हो सकता है, लेकिन पार्किंसन बीमारी की पहचान के साथ जीवन खत्म नहीं हो जाता। मुझे बस हर चीज करने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है।”

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