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प्राकृतिक परिवार नियोजन

प्राकृतिक परिवार नियोजन क्या हैं ?

इसमें किसी महिला के प्राकृतिक लक्षणों जैसे शरीर का ताप मापकर यह अंदाज़ा लगाया जाता है कि वह अपने मासिक चक्र के दौरान किस समय सबसे कम एवं सबसे अधिक प्रजनन योग्य होगी। इससे गर्भावती होने या गर्भावस्था को टालने में सहायता मिलती है। इसे प्रजनन जागरूकता भी कहते हैं।

ऐसे से बहुत से तरीके हैं, जिनके ज़रिये यह पता लगाया जा सकता है कि क्या आप इस समय प्रजनन के लिए तैयार हैंI आप हिसाब लगा सकती है कि:

फ़िलहाल आप अपने मासिक चक्र के किस चरण में हैं (पिछले मासिक धर्म को कितना समय हुआ) - अधिकतर महिलाएं अण्डोत्सर्ग (अन्डाशय में अंडे का बनना, जो प्रजनन के लिए तैयार है) मासिक धर्म के शुरू होने से 10-16 दिन पहले करती हैं।

गर्भाशय ग्रीवा(सर्विक्स) में म्यूकस (चिपचिपा पदार्थ ) का गाढ़ापन जांचें- अगर म्यूकस का रंग सफ़ेद और क्रीम जैसा दिख रहा है तो सामान्य तौर पर आप इस समय प्रजनन के लिए तैयार हैं।

रोज अपना तापमान जांचें- यदि कुछ दिन आप का तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर रहता है तो इसका मतलब है कि अब प्रजनन समय खत्म हो चुकी है।

प्राकृतिक परिवार नियोजन कैसे किया जाता है अधिक जानने के लिए पढ़े

क्या यह भरोसेमंद है ?

एक अनुमान के मुताबिक, प्राकृतिक परिवार नियोजन 99 प्रतिशत मामलो में अवांछित गर्भावस्था से बचाता है।

हालाकिं इसे वास्तविक रूप से उपयोग में लाना काफी जटिल प्रक्रिया हो सकती है। अक्सर प्रजनन समय पता करने में गलती भी हो जाती हैं।

वास्तव में प्राकृतिक परिवार नियोजन का तरीक़ा 75% प्रतिशत तक प्रभावी माना गया है - इसलिए 4 में से कोई 1 महिला इस गर्भ निरोधक तरीके को इस्तेमाल करने के बावजूद गर्भवती हो सकती है।

गर्भनिरोध के अन्य तरीकों पर भी ये बात सही साबित होती है जैसे- पुरुष कंडोम अवांछित गर्भावस्था से बचने के लिए, थ्योरी के अनुसार 98 प्रतिशत तक प्रभावशाली बताया गया है , जबकि असल में यह 85 प्रतिशत के आस पास है। इसका मतलब 7 में से 1 महिला इस तरीके को इस्तेमाल करने के बावजूद गर्भ धारण कर सकती है।

अन्य तरीकों से तुलना करने पर प्राकृतिक परिवार नियोजन के परिणामों के बारे में और पढ़े।

कौन इस्तेमाल कर सकता है ?

अगर इसे अच्छे तरीके से अमल में लाया जाए (खासतौर पर किसी प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा दिए गए सही निर्देशों का पालन करके) तो अधिकतर महिलाएं प्राकृतिक परिवार नियोजन को प्रभावशाली तरीके से इस्तेमाल कर सकती हैं।ऐसी कुछ परिस्थितियाँ भी हैं, जिनमे इस विधि को उपयोग करने से मना किया जाता है जैसे:

अगर आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य परेशानी है, जो गर्भधारण करने के कारण और भी ज्यादा गंभीर हो जाएं या फिर आपकी या आपके बच्चे में से किसी की जान खतरे में पड़ जाए। उदाहरण के लिए- दिल की बीमारी - ऐसी स्थिति में गर्भनिरोध का कोई अन्य तरीका जो ज्यादा उपयुक्त हो, अपनाने की सलाह दी जाती है।

अगर आपको ऐसी कोई स्वास्थ्य परेशानी है जिसकी वजह से आपका सामान्य प्रजनन चक्र बिगड़ सकता है जैसे पोल्य्सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या सर्वाइकल कैंसर।

प्राकृतिक परिवार नियोजन मे किसी जोड़े के दोनों सदस्यों में समर्पण की भावना होना जरूरी है इसलिए यह विधि तभी कारगर साबित हो सकती है जब आप एक स्थायी रिश्ते में हो।

प्राकृतिक परिवार नियोजन का उपयोग करना किनके लिए सही रहता है अधिक जानने के लिए पढ़े।

फायदे और नुकसान

प्राकृतिक परिवार नियोजन के फायदे:

  • एक बार विधि को अच्छे से सीख जाने के बाद इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते
  • इसमें स्वास्थ्य परामर्शदाता या डॉक्टर की मदद हमेशा नहीं चाहिए होती
  • प्राकृतिक परिवार नियोजन हर प्रकार की संस्कृति और विश्वास के लोगो में सामान रूप से अपनाई जाती है

प्राकृतिक परिवार नियोजन के नुकसान:

  • यह विधि यौन संकृमित बीमारियाँ जैसे एच.आई.वी(HIV) या क्लैमिडिया (chlamydia) से सुरक्षा नहीं करती
  • मासिक चक्र में प्रजनन समय के दौरान जोड़े को सेक्स से दूर रहना पड़ता है, यह कई जोड़ों को काफी कठिन महसूस होता है
  • यह गर्भनिरोध की अन्य विधियों की तुलना में कम प्रभावशाली है जैसे - कंट्रासेप्टिव इम्प्लांट

प्राकृतिक परिवार नियोजन के फायदे और नुकसान कर बारे में अधिक जानने के लिए पढ़ें

प्राकृतिक परिवार नियोजन का उपयोग कौन-कौन कर सकते है ?

अधिकतर महिलाएं प्राकृतिक परिवार नियोजन विधि का उपयोग करने में सक्षम होती हैं, हालाकिं ऐसी बहुत सी स्थितियाँ हैं जिनमे इस विधि को गर्भनिरोध के तौर पर सिर्फ एक मात्र यही विधि अपनाना नहीं सुझाया जाता।

इसकी व्याख्या नीचे की गई हैं।

  • आपको ऐसी कोई मेडिकल स्थिति हैं, जिसके कारण गर्भवती होना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है जैसे- अनियंत्रित उच्च रक्तचाप या अन्य कोई दिल की बीमारी। यदि आप शराब पीती हैं या ड्रग लेती हैं तो ऐसी स्थिति में गर्भ धारण करने से बच्चे में कोई विकार पैदा हो सकता है। सबसे ज्यादा विश्वसनीय तरीका कंट्रासेप्टिव इंजेक्शन या इम्प्लांट इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
  • अगर आपको अनियमित मासिक धर्म हो रहे हैं तो सही प्रजनन समय का पता लगाना काफी कठिन और असंभव हो जाता है। अनियमित मासिक धर्म होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे उम्र (युवा एवं वयस्क महिलायें दोनों में यह स्थिति मिल जाती है), तनाव, तेजी से वजन का कम या ज्यादा होना, अत्यधिक व्यायाम करना, थाइरोइड ग्रंथि का अधिक सक्रिय होना।
  • आपको कोई अस्थायी बीमारी हो गई है। ऐसी स्थिति में प्रजनन संकेतों में बदलाव हो जाता है जिस कारण प्रजनन जागरूकता विधि का इस्तेमाल करना कठिन हो जाता है । जैसे- पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (pelvic inflammatory disease), सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन (एसटीआई, STI) या बैक्टिरिया से योनि में होने वाले संक्रमण। आपको इस विधि का उपयोग करने के लिए संक्रमण के ठीक होने तक का इंतज़ार करना पड़ेगा।
  • आपको कोई लम्बी स्वास्थ्य परेशानी है तो यह सामान्य प्रजनन संकेतों में बदलाव ले आता है जैसे लिवर की बीमारी, ज्यादा या कम सक्रिय थाइरोइड ग्रंथि या सर्वाइकल कैंसर। हाल ही में यदि बच्चे को जन्म दिया हो या गर्भपात हुआ हो तब भी लक्षणों में बदलाव हो जाता है
  • अगर आप ऐसी दवाइयाँ ले रही हैं जो ग्रीवा में म्यूकस(चिपचिपा पदार्थ ) के बनने में बाधा उत्पन्न करती है जिस कारण इस विधि का इस्तेमाल करना कठिन हो जाता है जैसे लिथियम (गंभीर मानसिक विकारों का इलाज करने के लिए दी जाने वाली दवाई जैसे बाइपोलर डिसऑर्डर) और कुछ पुराने प्रकार की डिप्रेशन की दवाइयाँ।
  • यौन संबंधित संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है उदाहरण के तौर पर यदि आप एक से अधिक साथी के साथ यौन सम्बन्ध बनाते हैं या फिर आप दुनिया में ऐसी जगह घूमने जाने का विचार कर रहे हैं जहाँ अत्यधिक यौन संक्रमित फैला हुआ है जैसे सब-सहारन अफ्रीका।

प्राकृतिक परिवार नियोजन कितना प्रभावशाली होता है ?

किसी भी गर्भनिरोधक तकनीक की प्रभावशीलता दो तरीके से पता चलती है पहला सही, सटीक उपयोग और दूसरा आम उपयोग।

सही उपयोग की प्रभावशीलता मापने का आधार इस बात पर निर्भर करता है कि विधि को उपयोग करने के लिए दिए गए सभी दिशा निर्देशों का कितनी सही तरह से पालन किया गया है।

मगर, असल दुनिया में ग़लतियाँ होती हैं, निर्देश भूले जासकते हैं या कोई दूसरी परेशानी हो सकती है, इसलिए आम उपयोग को मापने का आधार इस बात पर निर्भर करता है कि इसके असल तौर पर इसके इस्तेमाल से आपको क्या उम्मीदें हैं। सही उपयोग कि प्रभावशीलता का प्रतिशत बहुत अच्छा यानी 99 प्रतिशत है। इस विधि का इस्तेमाल करने वाली 100 महिलाओं में से केवल 1 के ही गर्भवती होने की सम्भावना होती है।

मगर आमतौर पर इसके प्रभावशाली उपयोग का प्रतिशत- जटिलताएँ होने के कारण 75% तक प्रभावशाली है। 100 में से 25 महिलाओं में इस विधि का उपयोग करने के बावजूद गर्भ ठहर सकता है।

सही तरीक़े से उपयोग एवं असल रूप से प्रभावशाली उपयोग का प्रतिशत अन्य गर्भनिरोधक विधि के साथ नीचे दिया गया है:

  • गर्भनिरोधक गोली(संयुक्त मौखिक गर्भनिरोधक गोली एवं ओन्ली प्रोजेस्टोजेन (progesterone)) गर्भ निरोधक गोली) - सही उपयोग 99.7% और आमतौर पर 91%
  • गर्भनिरोधक इंजेक्शन - सही उपयोग 99.7% और आमतौर पर 97%
  • कंट्रासेप्टिव इम्प्लांट (Contraceptive Implant)- सही एवं आमतौर पर उपयोग दोनों में 99.5%
  • कंट्रासेप्टिव पैच और रिंग - सही उपयोग 99.7% और आमतौर पर उपयोग 91%
  • इंट्रायूटरिन डिवाइस (intrauterine device, अन्तःगर्भाशयी यंत्र, IUD और IUS) - सही उपयोग 99.4% और आमतौर पर उपयोग 99.2%
  • पुरुष निरोध(कंडोम)- सही उपयोग 98% और आमतौर पर उपयोग 85%
  • महिला निरोध (कंडोम)- सही उपयोग 95% और आमतौर पर उपयोग 79%

अगर आप प्राकृतिक परिवार नियोजन विधि का उपयोग करते समय अवांछित गर्भावस्था के खतरे को कम करना चाहते हैं तो किसी प्रशिक्षक से पहले अच्छे से इसे सीख लें और फिर उनकी सलाह और दिशा निर्देशों का पालन करें।

प्राकृतिक परिवार नियोजन के फायदे और नुकसान

प्राकृतिक परिवार नियोजन के इस्तेमाल से होने वाले फायदे एवं नुकसान नीचे दिए गए हैं ।

फायदे

प्राकृतिक परिवार नियोजन का उपयोग करने से होने वाले फायदे:

  • अधिकतर महिलाएं इस विधि को उपयोग में ला सकती हैं बशर्ते उन्होंने किसी प्रशिक्षित व्यक्ति से प्रजनन जागरूकता और सही तरह से रिकॉर्ड लिखना इत्यादि अच्छे से सीखा हो
  • एक बार अच्छे से सीख लेने के बाद ,आपको आगे चलकर डॉक्टर या किस अन्य स्वास्थ्य परामर्शदाता की सलाह या निर्देशों की आवश्यकता नहीं पड़ती
  • अपनी इच्छानुसार यह गर्भनिरोधक एवं गर्भवती होने जैसी दोनों क्रियाओं के लिए उपयोग में लाई जा सकती है
  • इसमें किस तरह का कोई केमिकल या अन्य मशीनी उपकरण शामिल नहीं होता इसलिए इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता
  • यह योनि से सामान्य या असामन्य तरीके से किसी पदार्थ के रिसने को समझने में भी मदद करता है जिससे आप यौन संक्रमणों को लेकर अधिक जागरूक हो जाते हैं
  • यह हर तरह की संस्कृति और विश्वास वाले लोगो में अपनायी जाती है
  • इस विधि में आपके साथी का भी पूरा सहयोग होने की वजह से रिश्ते में अधिक विश्वास और नज़दीकी बढ़ती है
  • यह तुरंत रद्द किया जा सकता है मतलब जैसे ही विधि का इस्तेमाल बंद कर दिया जाता है वैसे ही आप गर्भवती हो सकती है (गर्भनिरोधक इंजेक्शन के विपरीत जहां आपकी प्रजनन क्षमता को वापस ठीक होने में कुछ समय लग जाता है)

नुकसान

प्राकृतिक परिवार नियोजन के नुकसान में शामिल है:

  • यह अन्य गर्भनिरोधक विधियों की तुलना में वास्तविक तौर पर कम प्रभावशाली पाया गया है-4 मे से 1 महिला एक साल में गर्भवती हो सकती है
  • यह दोनों साथियों के परस्पर सहयोग और निरंतर सामंजस्य के बिना काम नहीं कर सकता
  • अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए इसे आपको किसी प्रशिक्षित व्यक्ति से सीखने की जरूरत पड़ेगी
  • कई मासिक चक्र निकल जाने के बाद कहीं जाकर आप अपनी प्रजनन समय को सही से पहचान पाएंगे - यदि शरीर के ताप और योनि ग्रीवा को जांचने का तरीका इस्तेमाल करते हैं तो 2 से 3 मासिक चक्र लगते हैं और यदि केलेंडर के तरीके का उपयोग करें (इस दौरान आपको बैरियर गर्भनिरोधक जैसे कंडोम का इस्तेमाल करना होगा) तो 6 मासिक धर्म चक्र लग जाते हैं
  • अनियमित मासिक धर्म के मामले में यह प्रभावी नहीं होता
  • आपको अपने प्रजनन लक्षणों का रोज़ ब्यौरा रखना होगा
  • कई प्रकार के फ़ैक्टर्स जैसे तनाव, बीमारी, यात्रा, जीवनशैली और हार्मोनल इलाज आपके प्रजनन लक्षणों को बदल सकते हैं। इसमें शामिल है- आपातकालीन मौखिक गर्भनिरोधक गोली, अगर आपने यह ली है तो आपको पूरे 2 चक्र तक रुकना होगा ताकि फिर से प्राकृतिक परिवार नियोजन विधि इस्तेमाल में लायी जा सके
  • प्रजनन समय के दिनों में या तो आपको सेक्स से दूर रहना होगा या फिर बाहरी तरीकों से गर्भ धारण रोकने वाले तरीकों का उपयोग करना होगा
  • अगर आप सेक्स न करने की सोच रहे है तो यह कम से कम 16 दिन का समय होगा जिस दौरान आप सेक्स नहीं कर पाएंगे (यह कई बार रिश्तों में परेशानी खड़ी कर देता है)

प्राकृतिक परिवार नियोजन किस तरह कार्य करती है ?

यह महत्वपूर्ण है की आपको प्राकृतिक परिवार नियोजन को किसी प्रशिक्षित व्यक्ति से सीखना चाहिए।

इस भाग में दी गई जानकारी सिर्फ संक्षिप्त विवरण भर है इसे उचित निर्देशों या प्रशिक्षण के स्थान पर इस्तेमाल न करे।

प्रजनन जागरूकता

इस विधि का अहम बिंदु अपने शरीर के बदलते संकेतो और लक्षणों को जाँच कर यह पता लगाना है की क्या आप अभी प्रजनन कर सकती हैं और सेक्स करने पर गर्भवती होने की कितनी संभावना है।

कई तरह के तरीके मिलाजुलाकर, इस विधि की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं जैसे:

  • आप अपने मासिक चक्र के कौन से चरण में है, इसका पता लगाना
  • रोज शरीर का तापमान जांचना
  • योनि ग्रीवा(cervix) की समय समय पर जांच करे खासतौर पर उसमे से निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ(mucas) की जांच करे

प्रत्येक तरीके की व्याख्या नीचे दे गई है

आपका मासिक चक्र

आपके मासिक धर्म की शुरूआत पीरियड के पहले दिन से होती है अगले महीने के पीरियड तक, अगले महीने के पिरीयड का पहला दिन शामिल नहीं होता। प्रत्येक महिला के मासिक धर्म की लम्बाई अलग अलग हो सकती है। 24 से 35 दिनों का मासिक धर्म सामान्य समझा जाता है हालाकिं यह इससे छोटा और लम्बा भी हो सकता है। औसतन यह 28 दिनों का होता है।

अण्डोत्सर्ग(ओवुलेशन)

मासिक चक्र के दौरान कुछ होर्मोनस, अंडाशय को अंडे बनाने के लिए प्रेरित करते है। अंडाशय में मौजूद अंडे धीरे-धीरे बढ़ना शुरू करते है और जब वह बड़े हो जाते हैं तो अंडाशय से निकल कर फैलोपियन ट्यूब्स (गर्भाशय नाल) तक पॅहुचते हैं।

कभी-कभी एक से ज्यादा अंडे भी निकलते हैं

अण्डोत्सर्ग (ओवुलेशन) या अंडे का बाहर आना सामान्यतः चक्र के बीच में यानी अगला मासिक धर्म शुरू होने से 10 से 16 दिन पहले शुरू हो जाता है

हारमोन्स, गर्भाशय को अंडे को प्राप्त करने के लिए एक मोटी परत बनाकर तैयार कर देते हैं। अगर अंडा शुक्राणु के साथ नहीं मिल पाता तो गर्भाशय में बनी यह मोटी परत टूट जाती है जिसकी वजह से मासिक धर्म होते हैं।

कोई अंडा गर्भाशय में सिर्फ 24 घंटे तक ही जीवित रह सकता है मगर वीर्य गर्भाशय में 7 दिनों तक जीवित रह सकता है, इसलिए यह इस बात पर निर्भर करता है की अण्डोत्सर्ग की क्रिया वीर्य स्खलन होने के बाद कितनी जल्दी होती है, अतः आपके गर्भ धारण की सम्भावना अगले 8 दिनों तक हो सकती है।

अपने प्रजनन समय की गणना करते समय यह ध्यान रखने की जरूरत है कि मासिक चक्र के दौरान अण्डोत्सर्ग या अंडे के बाहर आना होने की क्रिया अनियमित हो सकती है।

मासिक चक्र की लम्बाई समय के साथ बदल सकती है इसलिए सही गणना करने के लिये करीब 6 महीने तक अपने मासिक चक्र पर निगरानी रखनी होगी ।

यह करने के लिए कलेंडर के तरीकों का उपयोग किया जाता है इसमें नीच दिए गए चरण शामिल है:

6 महीने के लिए अपने मासिक चक्र की अवधि का आकलन करें - इसमें आपके पीरियड के पहले दिन से लेकर अगले पीरियड के पहले दिन तक का समय शामिल होता है, यह अक्सर 28 दिन का होता है मगर यह अलग अलग भी हो सकता है

अपने मासिक चक्र का सबसे छोटा और सबसे बड़ा चक्र ले

अपने सबसे छोटे चक्र में से 18 दिन हटा दे यह आपके प्रजनन समय का पहला दिन है

अपने सबसे लम्बे चक्र में से 11 दिन हटा दे यह आपके प्रजनन समय का आखिरी दिन है

अपने प्रजनन समय के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक सेक्स नहीं करना है

उदाहरण के तौर पर यदि आपका सबसे छोटा चक्र 25 दिन का है और सबसे लम्बा चक्र 33 दिन का:

तो आपको 25 में 18 हटाकर 7 दिन मिलेंगे

तो आपको 33 में से 11 हटाकर 22 दिन मिलेंगे

तो इसका मतलब आपको अपने मासिक चक्र के 7वें दिन से 22वें दिन तक सेक्स नहीं करना चाहिए।

तापमान जांचने का तरीका

तापमान जांचने का आधार यह है कि ऐसा माना जाता है अण्डोत्सर्ग या अंडे का बाहर आना के समय शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है। आप डिजिटल थर्मामीटर या फिर प्राकृतिक परिवार नियोजन में विशेष तौर पर इस्तेमाल होने वाले थर्मामीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह दवाखाने पर आसानी से मिल जाते हैं। कान और माथे वाला थर्मामीटर इस में उपयोग नहीं किया जा सकता।

तापमान जाँचने संबंधी तरीकों में शामिल हैं:

  • आप अपने शरीर का तापमान रोज सुबह उठते ही नापते हैं, यह खाना खाने से पहले या कुछ पीने से पहले या फिर धूम्रपान से पहले और रोज सुबह एक ही समय पर नापना होता है
  • लगातार क्रम से 3 दिन देंखें जब आपका तापमान पिछले 6 दिनों में सबसे अधिक हो, तापमान में वृद्धि बुहत कम जैसे 0.2C (0.4F) - आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि इस समय आप प्रजनन नहीं कर सकते

गर्भाशय ग्रीवा(सर्विक्स) पर ध्यान देना

मासिक धर्म के विभिन्न चरणों में म्यूकस के प्रकार (गाढ़ेपन) में बदलाव होता रहता है।

इसकी जांच के लिए आप अपनी बीच वाली ऊँगली को बहुत सावधानी के साथ योनि में डाल कर और उसे थोड़ा आगे धकेल कर आधी ऊँगली तक अंदर ले जायें।

पीरियड के बाद कुछ दिनों तक आप देखेंगे की आपकी योनि बिलकुल सूखी हुई है और किसी भी तरह का म्यूकस महसूस नहीं होगा। कुछ समय बाद जब होर्मोनस आपके शरीर को अण्डोत्सर्ग या अंडे का बाहर आना के लिये तैयार कर रहे होंगे तब गर्भाशय ग्रीवा म्यूकस बनाने लगता है, जो की थोड़ा गीला और चिपचिपा होता है। इसका रंग सफ़ेद और क्रीम की तरह होता है। यह आपके मासिक धर्म चक्र की प्रजजन अवधि की शुरुआत है।

अण्डोत्सर्ग या अंडे का बाहर आना के तुरंत बाद म्यूकस अधिक गीला, फिसलन वाला और साफ़ हो जाता है जैसे कच्चे अंडे की सफेदी। यह वह समय है जब आप सबसे अधिक प्रजनन क्षमता की स्थिति में होती हैं।

म्यूकस धीरे-धीरे फिर से मोटा गाढ़ा और चिपचिपा होने लगता है और तीन दिनों के बाद प्रजनन समय खत्म हो जाता हैI

मिलेजुले तरीके

ऐसे बहुत से कारक है, जो सामान्य प्रजनन संकेतो को प्रभावित करते है इसलिए सिर्फ किसी एक तरीके पर निर्भर रहना ठीक नहीं माना जाता ।

तीनों तरीकों को मिलाकर इस्तेमाल करना ज्यादा सही होता है। इससे काफी हद तक सही प्रजनन समय का अंदाज़ा लग पाता है ।

कई प्रजनन चार्ट भी मौजूद है जो आपको इन तीनों तरीकों से मिली जानकारी का ब्यौरा रखने में मदद करते है। इनकी सहायता से आप प्रत्येक मासिक धर्म चक्र पर निगरानी रख सकते हैं।

प्रजनन चार्ट्स के नमूने और संबंधित जानकारी जैसे इन्हे कैसे इस्तेमाल किया जाए, प्रजनन शिक्षा से जुडी वेब साइट पर मिल जाएगी।

ऐसे स्मार्टफोन्स के लिए कई ऐप एवं कम्प्यूटर्स के लिए सॉफ्टवेयर भी मौजूद है, जिनकी सहायता से आप इन जानकारियों पर नजर रख सकते हैं।

प्रजनन संकेतों पर विपरीत प्रभाव डालने वाले कारक

आपके प्रजनन संकेतों में बदलाव आ सकते है यदि:

  • आपके पीरियड्स अनियमित हैं
  • हार्मोनल गर्भनिरोध का इस्तेमाल हाल ही में बंद किया है
  • हाल ही में गर्भपात हुआ हो
  • हाल ही में बच्चे को जन्म दिया हो या स्तनपान कराती हो
  • निरन्तर विभिन्न समय जोन में सफर करती हों
  • योनि में किसी तरह का संक्रमण हो जैसे थ्रश या यौन संक्रमण।

अन्य कारक जो शरीर के प्राकृतिक संकेतों को बदलते हैं:

  • तापमान लेने के तरीके में बदलाव करना
  • शराब पीना
  • कुछ विशेष दवाइयाँ लेना
  • बीमार होना
  • प्राकृतिक परिवार नियोजन का उपयोग कौन- कौन नहीं कर सकते अधिक जानने के लिए पढ़े

अंडाशय प्रजनन अंगों का एक जोड़ा होता है जो स्त्रियों में अंडे और सेक्स होर्मोनेस को बनाने का काम करता है।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk

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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।