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चिकित्सीय रूप से अस्पष्ट लक्षण

बहुत से व्यक्ति लगातार रहने वाली कुछ समस्याओं जैसे कि चक्कर आना या दर्द का अनुभव होना से पीड़ित रहते हैं जिसका डॉक्टर द्वारा स्पष्ट रूप से कोई कारण नहीं बताया जा सकता। ऐसे रोग या लक्षण को चिकित्सीय रूप से अस्पष्ट लक्षण यानी " Medically Unexplained Symptoms" कहा जाता है। इसके विषय में डॉक्टर द्वारा शरीर में किसी रोग की उपस्थिति का होना नहीं कहा जा सकता।

इसका अर्थ यह नहीं है कि यह लक्षण झूठे हैं या केवल दिमाग की उपज हैं- ऐसे लक्षण वास्तव में होते हैं और शरीर को सही तरीके से काम करने में रुकावट डालते करते हैं। इन लक्षणों के कारणों का पता न होने से व्यक्ति को बहुत चिंता होती है और इन लक्षणों से अपने को संभालना बहुत परेशानी पैदा करता है।

ऐसे रहस्यमय लक्षण आश्चर्यजनक तरीके से बहुत अधिक पाए जाते हैं।

ऐसा क्यों होता है?

बहुत से लोग जो चिकित्सीय रूप से अस्पष्ट लक्षण जैसे कि थकावट, दर्द और दिल में घबराहट होने से पीड़ित होते हैं, वो बहुत चिंता से घिरे रहते हैं। अधिकतर ऐसे लोगों का मनोवैज्ञानिक इलाज करने पर उनके शारीरिक रोग के लक्षणों में भी आराम मिलता है।

अन्य लोगों में , ये लक्षण किसी ठीक से न समझे गए विकार का हिस्सा हो सकते हैं जैसे क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम(chronic fatigue syndromeC, CFS) , पेट खराब होना (irritable bowel syndrome, IBS) रहना या जोड़ों का पुराना दर्द आदि।

मनोवैज्ञानिक या ख़राब जीवनशैली का भी ऐसे मामले में अहम योगदान होता है। उदाहरण के रूप में कई लोगों का पेट खराब रहने (IBS ) का कारण उनके जीवन में रहने वाला तनाव होता है। उनके तनाव को नियंत्रित करते ही उनकी बीमारी के लक्षणों में भी कमी आ जाती है। कुछ अन्य कारण भी होते हैं जिनसे यह लक्षण प्रकट होते हैं (जैसे कि किसी संक्रमण के कारण होने वाली पेट की ख़राबी या लगातार थकान, क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम)

कभी कभी एक डॉक्टर के लिए इन लक्षणों को समझ पाना या इनका कारण बताना बहुत कठिन होता है।यह चिकित्सा के क्षेत्र में कोई नई बात नहीं है लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं है कि आपकी सहायता के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है। (मेरा डॉक्टर कैसे मेरी सहायता कर सकता है) इस विषय में भी पढ़ें।

किस प्रकार की शिकायतें एवं लक्षणों को स्पष्ट नहीं किया जा सकता?

बहुत सी सामान्य समस्याओं को चिकित्सीय रूप से स्पष्ट नहीं किया जा सकता जैसे कि:

  • थकावट
  • दर्द
  • दिल का घबराना
  • सुस्ती और चक्कर आना

यह समस्याएं अधिकतर अवसाद और चिंताग्रस्त लोगों में पाई जाती हैं। (नीचे "मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य में सम्बन्ध" विषय को भी पढ़ें)

यह लक्षण अलग अलग लोगों में अलग-अलग रूप से प्रभाव डालते हैं-कुछ व्यक्ति तो छोटी सी समस्या को लेकर अपने डॉक्टर से नियमित परामर्श करते हैं , जबकि कुछ लोग इन समस्याओं के कारण अपने आप को शारीरिक रूप से असमर्थ बना देते हैं।

इनके होने की अधिक संभावना किसे होती है?

स्पष्ट न होने वाले इन लक्षणों ये लक्षण इन लोगों में ज़्यादा पाए जाते हैं:

  • महिलाएं
  • युवा व्यक्ति (लक्षण अधिकतर 30 वर्ष की आयु से पहले प्रकट होते हैं)
  • जिनको कुछ समय पहले संक्रमण या शारीरिक अस्वस्थता हुई है या उनके परिजनों की मृत्यु हुई है
  • जिनको पहले भी अवसाद जैसे समस्या हुई है

हालांकि यह बात खास ध्यान में रखने योग्य है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं इन संकेतों के विषय में डॉक्टर से अधिक परामर्श करती हैं। जबकि कुछ बुजुर्ग अपने डॉक्टर से इन संकेतों या समस्याओं पर बात करके, उन्हें परेशान नहीं करना चाहते ।

शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं में क्या संबंध है?

केवल खराब शारीरिक स्वास्थ्य से आप दुखी रह सकते हैं और मनोवैज्ञानिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसका उल्टा भी सत्य है अर्थात अच्छे स्वास्थ्य से आप प्रसन्न भी रह सकते हैं और आप मनोवैज्ञानिक रूप से स्वस्थ भी रहते हैं।

कुछ स्थितियाँ जैसे कि कमर के निचले भाग में दर्द रहना, पेट खराब रहना, खुजली की समस्याएं आपको तनाव, बेचैनी और अवसाद की मनोवैज्ञानिक अवस्था में होने पर अचानक बढ़ जाती है।

यह आपको एक दुष्चक्र में फंसा सकता है-उदाहरण के रूप में यदि आप लगातार रहने वाले दर्द से परेशान हो जाते हैं तो यह आपको अवसादग्रस्त बना सकता है । यह अवसाद आपकी अन्य शारीरिक परेशानियों को पैदा कर सकता है।

डॉक्टर मेरी सहायता कैसे कर सकते हैं?

आपके डॉक्टर का पहला उद्देश्य होता है कि आपके लक्षणों के आधार पर यह बताना कि आप को कोई बड़ी बीमारी तो नहीं है। शायद वह आपकी शारीरिक जांच एवं खून की जांच भी करवा सकता है।

इस बात को ध्यान में रखना भी जरूरी है कि कहीं ये लक्षण आप को दी जाने वाली दवाइयों से तो उत्पन्न नहीं हो रहे हैं।

आपके डॉक्टर को यह भी जांच करनी होती है कि आपको बेचैनी या अवसाद की समस्या तो नहीं है जिस कारण आप की स्थिति और खराब होने के लक्षण नज़र आ रहे हों।

आपको यह भी बताना होगा:

  • जब आपको यह समस्या शुरू हुई तो क्या आपको ये लक्षण थे और किन अवस्था में आपको अच्छा लगता है और कब आपकी अवस्था बिगड़ती है
  • आप अपनी बीमारी के कारण और लक्षणों के बारे मे क्या सोचते हैं और आप कौन से परीक्षण और इलाज कराना चाहते हैं
  • यह लक्षण आपके कार्यकलापों को कैसे प्रभावित कर रहे हैं
  • यह लक्षण आपको कैसे परेशान कर रहे हैं

ऐसी बहुत सी वस्तुएँ हैं जिन्हें अच्छी तरह से कर आपको मदद मिल सकती है।

आप और आपके डॉक्टर को एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य की योजना बनाने की आवश्यकता पड़ सकती है- जिसका अर्थ है कि कुछ जीवनशैली और अपने लक्ष्यों में परिवर्तन करने पर आपको सहमत होना होगा।

आपको बातचीत के द्वारा इलाज कराने के लिए, जैसे कि CBT (संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा) भेजा जा सकता है। CBT का उद्देश्य आपकी बीमारी के लक्षणों पर चर्चा करके आपके लक्षणों, संकेतों, चिंताओं, अनुभूतियों और व्यवहार का सही प्रबंधन करना होता है।

दवाइयाँ जैसे कि अवसाद रोधी दवाइयाँ (antidepressants) भी लाभदायक हो सकती हैं। हालांकि दवाइयाँ खाना हमेशा उपयोगी नहीं होता। उदाहरण के तौर पर दर्दनिवारक या शरीर को शांत करने वाली दवाइयाँ भी आपको दवाइयों की आदत डाल देती हैं। दवाइयों से होने वाले फायदे और उनके शरीर पर होने वाले बुरे प्रभाव को हमेशा जांचते रहना चाहिए।

मैं अपने लक्षणों में सुधार लाने के लिए स्वयं क्या कर सकता हूँ?

कुछ चीजें हैं जो आप स्वयं कर सकते हैं जैसे कि नियमित कसरत करना और तनाव को नियंत्रण में रखना। इससे आपके लक्षणों में सुधार होगा।

नियमित व्यायाम करना: -उदाहरण के लिए एक सप्ताह में 20 -20 मिनट के तीन व्यायाम के सत्र कम से कम आपको स्वस्थ रखने और अन्य कार्यों से दूर रहने का या घर से बाहर निकलने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। इससे बहुत से व्यक्तियों को अपनी मानसिक स्थिति में सुधार लाने में बहुत लाभ मिलता है।

व्ययाम और आपके कार्यकलापों की मात्रा आपके वर्तमान स्वास्थ्य और आपके शरीर की क्षमता पर निर्भर करती है।

तनाव नियंत्रण में रखना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे शरीर का दर्द और पेट खराब रहना जैसी समस्याओं का सीधा संबंध होता है।

आमतौर पर कुछ आरामदायक व्यक्तिगत क्रियाकलापों में सम्मिलित होकर अपने आप को बंधन से मुक्त महसूस कर सकते हैं - जो आपको कुछ सीमा तक शांत रखने में सहायक होता है। चाहे वह योग की कक्षाएँ हो या ध्यान की मुद्रा या देश विदेश की यात्राएँ हों।

आपके शरीर की एक बहुत महत्वपूर्ण क्षमता ख़ुद को स्वस्थ करने की शक्ति है और इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि आपके लक्षणों में बिना किसी विशेष इलाज के सुधार आने लगे।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk

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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।