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लाइम रोग(Lyme disease)

परिचय

लाइम रोग एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो एक प्रकार के संक्रमित कीड़ों(टिक्स) से इंसानों में फैलता है।

टिक्स छोटे अरचिन्ड होते हैं जो पेड़ों पौधों वाली जगहों पर पाए जाते हैं और स्तनधारी जानवरों, जैसे मनुष्यों के खून पर जीवित रहते हैं।

इन कीड़ों का काटना कई बार पता नहीं चल पता और ये कीड़े शरीर से बाहर गिरने से पहले कई दिनों तक ख़ून चूस सकते हैं। जितने समय तक ये कीड़ा शरीर पर रहेगा संक्रमण फैलने का खतरा उतना बना रहेगा।

लाइम रोग के कारणों के बारे में और पढ़ें।

लाइम रोग आपकी त्वचा, जोड़ों, दिल और नर्वस सिस्टम पर असर करता है।

लाइम रोग के लक्षण क्या हैं?

लाइम रोग का शुरुआती और सबसे आम लक्षण है किसी कीड़े के काटने के तीन से 30 दिन के अंदर काटी गई जगह के आसपास एक गुलाबी या लाल रंग का गोल चकत्ता बनना। यह रैश कई बार किसी डार्ट बोर्ड पर बुल्स-आई की तरह दिखता है।

आपको फ़्लू जैसे लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे थकावट, सिरदर्द और मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द होना।

अगर लाइम रोग को इलाज के बिना छोड़ दिया जाए तो कुछ और लक्षण कुछ महीनों या वर्षो के बाद उभर कर सामने आ सकते हैं, जैसे:

  • मांसपेशियों में दर्द
  • जोड़ों में दर्द और जोड़ों में सूजन
  • न्यूरोलॉजिकल लक्षण, जैसे चेहरे की मांसपेशियों का अस्थायी लकवा

लाइम रोग अपनी बाद के स्टेजेस में फाइब्रोमाइलगिया(fibromyalgia) या क्रोनिक फटीग सिंड्रोम(chronic fatigue syndrome) जैसे लक्षणों का कारण बन सकता है। इसे क्रोनिक लाइम रोग(chronic Lyme disease) कहा जाता है। हालांकि लाइम रोग के इस स्टेज पर और अधिक शोध किए जाने की जरूरत है।

लाइम रोग से ग्रस्त व्यक्ति रोग को फैला नहीं सकता क्योंकि संक्रमण केवल टिक्स द्वारा ही फैलता है।

लाइम रोग के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।
जबतक शुरुआती चरण में रैश मौजूद ना हो तब तक लाइम रोग की पहचान करना कई बार मुश्किल होता है क्योंकि कई लक्षण अन्य रोगों के समान ही होते हैं। यदि लाइम रोग होने का संदेह है तो ख़ून जाँच से उसकी पहचान करना संभव हो सकता है लेकिन ऐसा कुछ हफ़्तों के बाद किया जाना चाहिए जिससे ग़लत रिपोर्ट आने की सम्भावना ना रहे।

लाइम रोग की जाँच(diagnose) के बारे में और पढ़ें।

पुष्टि होने के बाद लाइम रोग का इलाज एंटीबायोटिक्स से किया जा सकता है। लाइम रोग किस चरण में है, इस आधार पर आपको एंटीबायोटिक्स का कोर्स दिया जाएगा। आमतौर पर आपको उन्हें दो से चार हफ्ते तक लेना होगा।

लाइम रोग के इलाज के बारे में और पढ़ें।

लाइम रोग कितना आम है?

लाइम रोग यूरोप और उत्तरी अमेरिका में कीड़ों(टिक्स) से होने वाला सबसे आम संक्रमण है। जो लोग पेड़ों या झाड़ियों वाली जगहों पर अपना समय बिताते हैं उनमें लाइम रोग होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं, क्योंकि ये इलाके ऐसे होते हैं जहां पर इन कीड़ों को फैलाने वाले जानवर ज़्यादा होते हैं जैसे हिरण और चूहे।

ज्यादातर कीड़े बसंत के आख़िर हफ़्ते, गर्मी के शुरूवती हफ़्ते और पतझड़ के मौसम में काटते हैं क्योंकि यह वर्ष का वह समय होता है जब ज्यादातर लोग बाहरी गतिविधियों जैसे हाइकिंग या कैंपिंग में हिस्सा लेते हैं।

लाइम रोग के कारणों के बारे में पढ़ें।

लाइम रोग की रोकथाम

लाइम रोग के इलाज के लिए वर्तमान में कोई टीका उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2002 में अमेरिका में एक टीका बनाया गया था, लेकिन साइड इफेक्टस की वजह से उसका इस्तेमाल नहीं किया गया।

लाइम रोग को रोकने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि जिस वक्त आप पेड़ पौधों के बीच जाएँ या किसी झाड़ियों वाली जगह, जहाँ इन कीड़ों के होने की सम्भावना हो, तो आप ख़ुद को इन कीड़ों के द्वारा काटे जाने से बचाए रखें। निम्नलिखित सावधानियां आपको लाइम रोग से बचा सकती हैं-

  • लंबे बाजुओं वाली कमीज़ पहनें।
  • अपनी पैंट जुराबों में अंदर डाल कर रखें।
  • कीड़ों भगाने वाले रेपलेंट का प्रयोग करें।
  • शरीर पर चिपके कीड़ों की खुद जांच करें।
  • अपने बच्चों और पालतू जानवरों के शरीर पर चिपके कीड़ों की जांच करें।

अगर आपको अपने या अपने बच्चे की त्वचा पर कोई कीड़ा मिलता है तो उसे धीरे से पकड़ते हुए, जितना संभव हो सके त्वचा के पास से निकालें, धीरे से खींच कर। इसके लिए एक तेज दांतों वाला ट्वीजर प्रयोग करना ठीक रहेगा।

कभी भी उसे हटाने के लिए जलती हुई सिगरेट, माचिस की तीली या एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल न करें।

लाइम रोग की रोकथाम के बारे में और पढ़ें।

लक्षण

लाइम रोग के प्रारंभिक स्तर के सबसे आम लक्षणों में शामिल हैं त्वचा पर गोलाकार चकत्ते जिन्हें एरिथेमा मिगरान्स(erythema migrans) कहा जाता है।

संक्रमित कीड़े के काटे जाने के बाद इलाज ना किए जाने पर लाइम रोग से आने वाले हफ्तों या कई बार कुछ महीनों बाद भी कुछ गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं।

अगर शुरुआत में ऐंटीबायोटिक्स द्वारा इलाज नहीं किया गया तभी आगे चलकर आपको बाद के लक्षण नज़र आएँगे।

लाइम रोग के शुरुआती लक्षण

लाइम रोग के शुरुआती लक्षण किसी संक्रमित कीड़े के काटे जाने के तीन से 30 दिन बाद तक विकसित हो सकते हैं।

कीड़े के काटे जाने की जगह पर चकत्ता उभर आता है और कई बार यह दिखने में डार्ट बोर्ड पर बनी बुल्स आई जैसा होता है। त्वचा का प्रभावित हिस्सा लाल और छूने पर हल्का सा उभरा हुआ महसूस होता है।
इस चकत्ते का आकार 2 सेंटीमीटर से 30 सेंटीमीटर (0.7 से 12 इंच) के बीच हो सकता है और ज्यादातर लोगों में यह कई दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक भी आकार में बढ़ सकता है। कई लोगों में सिर्फ़ चकत्ते ही लाइम रोग के लक्षण होते हैं।

कुछ लोगों को शुरुआत में फ्लू जैसे लक्षण होते हैं जैसे-

  • थकावट
  • मांसपेशियों में दर्द
  • जोड़ों में दर्द
  • सिरदर्द
  • बुखार या कंपकंपाहट
  • गर्दन में अकड़न

लाइम रोग के बाद के लक्षण

अगर इसका इलाज न किया जाए तो आगे चलकर गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यह जोड़ों, तंत्रिकाओं और कुछ मामलों में दिल पर भी असर कर सकता है।

अगर आपको निम्नलिखित कोई भी लक्षण महसूस हो है तो आप डॉक्टर से सहायता लें।

जोड़ों में दर्द

कुछ व्यक्तियों को इंफ्लेमेट्री आर्थराइटिस (जोड़ों में सूजन और दर्द) की शिकायत हो सकती है। पर जोड़ों में दर्द जैसे लक्षणों को अगर बिना उपचार छोड़ दिया जाए तो भी ये अपने आप ठीक हो जाते हैं।

न्यूरोलॉजिक्ल लक्षण

न्यूरोलॉजिक्ल लक्षणों (जो नर्वस सिस्टम पर असर डालते हैं) में शामिल हो सकते हैं-

आपके अंगों में सुन्नपन और दर्द

आपके चेहरे की मांसपेशियों में आंशिक लकवा-जिससे आमतौर पर चेहरे का आधा भाग प्रभावित होता है (इसे कई बार बेल्स पाल्सी(Bell’s palsy) भी कहते हैं)

याददाश्त कमजोर होना

ध्यान लगाने में परेशानी

व्यक्तित्व में परिवर्तन

कुछ दुर्लभ मामलों में लोगों को एक प्रकार का बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस हो जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें मैनिंजिस (दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड के घेरने वाले रक्षात्मक मेम्ब्रेन) सूज जाते है। इसके लक्षण हैं-
तेज सिरदर्द

गर्दन में अकड़न

रोशनी को लेकर संवेदनशीलता (फोटोफोबिया)

ह्रदय सम्बंधी स्थितियाँ

कुछ दुर्लभ मामलों में लाइम रोग का उपचार न होने पर दिल की मांसपेशियों (माइयोकारडिटिस) में सूजन की समस्या हो सकती है।

माइयोकारडिटिस से आपकी धड़कन अनियमित हो सकती है और कई बार ह्रदय में ब्लॉकेज हो सकता है।

लक्षणों में शामिल हैं-

सांस फूलना

बेहोशी

कारण

लाइम रोग बोरिलिया बर्गोडोरफेरी(Borrelia burgdorferi) बैक्टीरिया की वजह से होता है। यह बैक्टीरिया चूहों, हिरण, तीतर और ब्लैकबर्ड्स सहित कई तरह के जानवरों के खून में मौजूद होता है।

यदि कोई कीड़ा किसी जानवर को काटता है और उसमें बैक्टीरिया हो तो वह कीड़ा भी संक्रमित हो जाता है। जब संक्रमित कीड़ा इंसान को काटता है और ख़ून चूसता है तो बैक्टीरिया उस इंसान में प्रवेश कर जाता है।

ये कीड़े काफी छोटे होते हैं और उनका काटने से किसी प्रकार का दर्द महसूस नहीं होता इसलिए आपको उनका काटना महसूस नहीं होता। बहरहाल, अगर यह कीड़ा 24 घंटे से ज्यादा समय तक आपके शरीर से चिपका रहा हो तो संक्रमित होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।

एक बार संक्रमित होने पर बैक्टीरिया आपकी त्वचा से आपके खून और लिम्फेटिक सिस्टम में प्रवेश कर जाता है।

लिम्फेटिक सिस्टम संक्रमण से लड़ने में मदद करता है और वैसल्स और ग्लैंड्स (लिम्फ नोड्स) के समूह से बना होता है।

उपचार किए बिना छोड़ दिए जाने पर ये बैक्टीरिया जोड़ों और नर्वस सिस्टम को भी क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। इससे आगे चलकर लाइम रोग के बाक़ी लक्षण भी नज़र आने लगेंगे।

ये कीड़े कहां पाए जाते हैं?

ये कीड़े घनी या ज्यादा बढ़ चुकी वनस्पतियों में पाए जा सकते हैं जहां पर वे उन पशुओं तक पंहुच सकें जिनसे उन्हें अपना भोजन मिले।

वैसे तो वे आमतौर पर लकड़ियों और झाड़ियों वाली जगहों पर होते हैं लेकिन वे गार्डन या पार्क में भी हो सकते हैं जहां पर इस तरह की वनस्पतियां मौजूद होती हैं।

किन्हें ज़्यादा ख़तरा है?

लाइम रोग से ज़्यादा ख़तरा उन लोगों को है जो लकड़ी वाली जगहों और झाड़ियों वाले इलाकों में जाते हैं और इन स्थानों पर होने वाली गतिविधियों में भाग लेते हैं। उदाहरण के लिए:
हाइकर्स

कैम्पर्स

किसान

वनकर्मी

सैनिक

गेमकीपर्स

ज्यादातर कीड़े बसंत के आख़िरी दिनों, गर्मियों की शुरुआत और पतझड़ के मौसम में काटते हैं, क्योंकि वर्ष के इसी समय लोग बाहरी

गतिविधियों में भाग लेते हैं जैसे हाइकिंग और कैंपिंग।

लाइम रोग की रोकथाम के बारे में और पढ़ें।

रोग की पहचान

लाइम रोग एक ऐसी बीमारी है जिसकी पहचान करना मुश्किल होता है खासकर बाद के चरण में। वह इसलिए क्योंकि उसके लक्षण और भी सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं, जैसे संक्रमण और आर्थराइटिस।

लाइम रोग की पहचान करने में, गुलाबी या लाल रंग का बुल्स आई रैश काफी महत्वपूर्ण होता है और क़रीब 90 फीसदी लोगों में काटे जाने के 30 दिनों के अंदर रैश विकसित हो जाता है ।

अगर अपको रैश न हुआ हो लेकिन लाइम रोग के बाद में होने वाले लक्षण महसूस हो रहे हों, जैसे जोड़ों का दर्द या फ्लू जैसे लक्षण तो अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएँ, अगर आपने किसी घने पेड़ों वाले या झाड़ियों वाले स्थान पर समय बिताया है।
यदि संभावना है कि आपको कीड़े ने काट लिया है तो आपका डॉक्टर लाइम रोग की पुष्टि या उसे खारिज करने के लिए आपको टेस्ट के लिए बोल सकता है।

जाँच

लाइम रोग की जाँच कीड़े के काटने के कुछ सप्ताह के बाद किए जाने की जरूरत होती है क्योंकि संक्रमण के विकसित होने में इतना समय लगता है। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी अगर लाइम रोग के लक्षण दिख रहे हों तो फिर से टेस्ट करवाने की जरूरत होगी।

लाइम रोग की पहचान के लिए किए जाने वाले टेस्ट हैं-
एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसोर्बेंट एसे (ELISA) टेस्ट

वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट

इनके बारे में यहाँ बताया गया हैं।

ELISA टेस्ट
पहली तरह के ब्लड टेस्ट को एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसोर्बेंट एसे (ELISA) टेस्ट के नाम से जाना जाता है। ये टेस्ट बोरिलिया बर्गोडोरफेरी बैक्टीरिया(Borrelia burgdorferi) को मारने के लिए आपके इम्यून सिस्टम द्वारा पैदा की जाने वाली खास एंटीबॉडीज की जांच करता है।

एलीसा टेस्ट 100 फीसदी सही नहीं होता क्योंकि लाइम रोग से पीड़ित न होते हुए भी कई बार यह पॉजिटिव रिजल्ट दे देता है (इसे फाल्स-पॉजिटिव रिजल्ट कहते हैं)।ऐसा तब होता है जब किसी अन्य स्थिति की वजह से आपमें लक्षण दिख रहे हों जैसे सिफिलिस(syphilis), ग्लैंडूलर फीवर(glandular fever) या रयूमेटॉयड आर्थराइटिस(rheumatoid arthritis)।

इसकी वजह से पॉजिटिव ELISA टेस्ट के बाद वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट किया जाता है।

वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट(Western Blot test)

वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट में खून का एक छोटा नमूना लिया जाता है। खून में मौजूद प्रोटीन को अलग किया जाता है और पारगम्य सामग्री से बनी एक पतली शीट पर रखा जाता है। इसके बाद लाइम रोग के कारण बोरिलिया बर्गोडोरफेरी बैक्टीरिया से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम द्वारा इस्तेमाल होने वाली एंटीबॉडीज के लिए प्रोटीन का अध्ययन किया जाता है।

अगर ELISA टेस्ट और वेस्टर्न ब्लॉट टेस्ट दोनों के परिणाम पॉजिटिव आते हैं तो लाइम रोग की पुष्टि की जा सकती है।

उपचार

लाइम रोग के उपचार के लिए ओरल एंटीबायोटिक्स (गोलियां, कैप्सूल और लिक्विड) लेने की सलाह दी जाती है। ज्यादातर लोगों को उनकी हालत के हिसाब से दो से चार हफ़्तों का कोर्स लेना होता है।

अगर आपको एंटीबायोटिक्स दी गयी है तो स्थिति बेहतर होने के बाद भी आपको उसका कोर्स पूरा करना होगा क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि बैक्टीरिया पूरी तरह से खत्म हो जाए।

अगर आपके लक्षण थोड़े गंभीर हैं और आर्थराइटिस या न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ हो रही हैं तो एंटीबायोटिक्स इंजेक्शन (इंट्रावेनस एंटीबायोटिक्स) का इस्तेमाल किया जा सकता है।

लाइम रोग के बाद के लक्षणों वाले ज्यादातर लोगों को इंट्रावेनस एंटीबायोटिक्स(intravenous antibiotics) लेना पड़ता है।

लाइम रोग के उपचार में प्रयोग होने वाले कुछ एंटीबायोटिक्स (दोनों ओरल और इंट्रावेनस) आपकी त्वचा को सूरज की रोशनी से संवेदनशील (फोटोसेंसिटिविटी) बना सकते हैं। आपको दवा के साथ आने वाले पर्चे में जांच लेना चाहिए कि ऐसा हो सकता है या नहीं। धूप में ज्यादा देर तक बैठने से बचें और कोर्स पूरा हो जाने तक टैनिंग उपकरणों का इस्तेमाल न करें।

गर्भावस्था और स्तनपान

सामान्य नियम के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान सावधानी के तौर पर एंटीबायोटिक्स नहीं दी जाती क्योंकि इससे बच्चे के विकास पर असर पड़ सकता है।

बहरहाल, अगर लाइम रोग का पॉजिटिव रिज़ल्ट आता है तो आपको गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक्स दी जा सकती है, जो सुरक्षित हो, जैसे एजिथ्रोमाइसिन( azithromycin) या क्लैरिथ्रोमाइसिन(clarithromycin)।

अगर एंटीबायोटिक्स नहीं प्रिस्क्राइब की जा सकती तो आपके लक्षणों की जाँच के लिए आपको फिर से डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा।

बोरिलिया बर्गोडोरफेरी बैक्टीरिया, जिसकी वजह से लाइम रोग होता है, स्तन के दूध से बच्चों को ट्रांसफर नहीं हो सकता है, इसलिए अगर आपको लाइम रोग है तो उसमें स्तनपान करवाने में कोई खतरा नहीं है।

रोकथाम

लाइम रोग की रोकथाम के लिए वर्तमान में कोई टीका उपलब्ध नहीं है। लाइम रोग से बचने का सबसे सही तरीका यही है कि जब आप उस इलाके में जा रहे हों जहां पर इसके होने का ख़तरा है, तो समुचित सावधानियां बरतें और सतर्क रहें।

यूरोपीय देशों या उत्तरी अमेरिका की यात्रा करते समय आप इसके होने के जोखिम को ध्यान में रखें।

आप संक्रमण के जोखिम इन तरीकों से कम कर सकते हैं:
इन कीड़ों से सावधान रहें और ये जिस इलाके में पाए जाते हैं उनकी जानकारी रखें।

बाहर निकलते समय फुटपाथ का प्रयोग करें और लंबी घास के बीच से न गुजरें

कीड़ों वाले इलाकों में अच्छी तरह से कपड़े पहनें( लंबी बांह वाली कमीज पहनें और पैंट आपकी जुराबों के बीच रखें)

हल्के रंग के कपड़े पहनें ताकि आप उन पर चिपके कीड़ों को देख सकें

कीड़ों से रक्षा के लिए रेपलैंट का प्रयोग करें

अपनी त्वचा पर कीड़ों की जांच करें खासकर दिन के अंत में साथ ही इन्हें अपने सिर, गर्दन और सकीं फ़ोल्ड्ज़(काँख, जाँघों के बीच और कमर) पर भी देखें

अपने बच्चों के सिर, गर्दन और उनके सर के ऊपर के हिस्से को भी चेक करें

यह सुनिश्चित करें कि कीड़ें आपके कपड़ों से चिपक कर आपके घर तो नहीं आ रहे।

अपने पालतू जानवरों की भी जांच करें कि उनके फ़र में कोई कीड़ा चिपक कर आपके घर तो नहीं घुस रहा

कीड़ों को कैसे हटाएं

अगर आपको अपने या अपने बच्चे की त्वचा पर कोई कीड़ा चिपका हुआ मिलता है तो उसे धीरे से त्वचा के पास से पकड़कर खींचें, एक तीखे दांत वाले ट्वीजर से यह काम करना बेहतर रहेगा। इसे त्वचा से दूर करते हुए धीरे धीरे खींचे।

कीड़ों को शरीर से दूर करने के लिए जलती हुई सिगरेट, माचिस की तीली या वोलेटाइल ऑयल का प्रयोग न करें। कुछ वेटेरनरी सर्जरी और पेट शॉप्स टिक हटाने के सस्ते उपकरण बेचते हैं और अगर आप बार-बार इन कीड़ों वाले इलाकों में जाते हैं तो यह आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकते हैं।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk

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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।