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इन्ग्रोन टोनेल (Ingrown toenail)

सामग्री

इन्ग्रोन टोनेल यानी अंदर की तरफ मुड़े नाखूनों की समस्या क्या है?

यह समस्या पैर के नाखून के आसपास की त्वचा में विकसित होती है। नाखून त्वचा के अंदर घुसकर चुभने लगता है जिसके परिणामस्वरूप उस जगह पर लाली और सूजन जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं, साथ ही त्वचा नर्म पड़ने लगती है। इस जगह को दबाने पर दर्द होने लगता है।

अमूमन पैर का अंगूठा ही अंदर की तरफ मुड़े नाखून की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित होता है। इसके दोनों किनारों में कहीं भी यह विकार उभर सकता है।

इन्ग्रोन टोनेल के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

इसका मेडिकल नाम ‘नाइकोसाइप्राइटिस’ (onychocryptosis) है।

इनग्रोन टोनेल जैसी समस्या के कारण

यह कई कारणों से हो सकता है, जैसे-

  • नाखूनों को गलत तरीके से काटना
  • तंग जूते या तंग जुराबें, अत्यधिक पसीना, पैरों की स्वच्छता के प्रति लापरवाही
  • पैर में घाव इत्यादि
  • नाखून का संक्रमण
  • पैर के नाखून का प्राकृतिक स्वरूप

इन्ग्रोन टोनेल (ingrown toenail) के कारणों के बारे में आप और ज्यादा पढ़ें।

इन्ग्रोन टोनेल ( ingrown toenail) समस्या का उपचार

अनेक ऐसे उपाय हैं जिन्हें अपनाकर साधारण अवस्था वाले अंदर की तरफ मुड़े नाखूनों की समस्या का स्वयं उपचार किया जा सकता है और इसे खतरनाक स्थिति में पहुंचने से रोका जा सकता है। इनमें शामिल हैं-

  • पैरों का भरपूर ख्याल रखते हुए इनकी स्वच्छता और आरोग्यता पर ध्यान दें। इन्हें नियमित तौर पर साबुन और पानी से धोएं।
  • नाखून को इस तरह काटें ता‌कि यह किनारे की त्वचा में अंदर की ओर न मुड़े।
  • इस क्रम में रूई का फोहा लेकर त्वचा को आहिस्ता से दबाते हुए नाखून से अलग करें। प्रभावित हुई कोमल त्वचा पर जैतून का तेल मलकर आप ऐसा आसानी से कर सकेंगे।
  • आरामदायक जूते पहनें जो कि अधिक तंग न हों और पैर के आसपास जगह रहे।
  • दर्द से आराम पाने के लिए पेरासिटामोल जैसी दर्दनिवारक दवा ली जा सकती है। (16 साल से कम उम्र के बच्चों को एस्प्रिन नहीं लेनी चाहिए)।

गंभीर स्थिति में पहुंचने पर इस समस्या का सर्जरी से छुटकारा पाया जा सकता है। सर्जरी के द्वारा उस जगह को नाखून मुक्त किया जाता है जहां इसका संक्रमण है या फिर पूरा ही नाखून हटाया जा सकता है।

इन्ग्रोन टोनेल ( ingrown toenail)के उपचार के बारे में आप और अधिक पढ़ें।

इसके इलाज में लापरवाही बरतने पर आपका पूरा पंजा संक्रमित हो सकता है।

डॉक्टर के पास कब जाएं

स्वयं उपचार के प्रयासों के बावजूद यदि अंदर की तरफ मुड़े नाखूनों की समस्या पहले जैसी ही बनी हुई है तो अपने चिकित्सक या पोडियाट्रिस्ट (podiatrist) की सलाह लें। ये पेशेवर चिकित्सक होते हैं जो पैरों में रोग का पता लगाने और तदनुसार चिकित्सा करने में विशेषज्ञता लिए हुए होते हैं।

सर्जरी की आवश्यकता इस बात पर निर्भर करती है कि आपका इन्ग्रोन टोनेल किस कदर गंभीर है।

यदि आप डायबिटिक हैं और इस समस्या से ग्रसित हैं तो आपको चि‌कित्सक के पास अवश्य जाना चाहिए। डायबिटीज के कारण आपके घाव भरने में मुश्किल आती है, खासकर यदि आपकी डायबिटीज नियंत्रण में न हो।

इन्ग्रोन टोनेल समस्या को होने से रोकना

अनेक ऐसे उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने पैरों को स्वस्थ रख सकते हैं ताकि यह समस्या न पनप सके।

उदाहरण के लिए अपने नाखूनों को ‌आड़े-तिरछे या नीचे दबाकर काटने की बजाय बिल्कुल सीधे काटें। पांवों की स्वच्छता से जुड़े मानकों का पालन करें। पांवों को नियमित रूप से धोएं और उन्हें हमेशा सूखा रखें। यह भी जरूरी है कि आपके जूते पांवों में आरामदायक ढंग से आएं।

इन्ग्रोन टोनेल से बचाव के बारे में और ज्यादा पढ़ें।

लक्षण

यह समस्या के अलग-अलग लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि मामला कितना गंभीर है।

हल्के लक्षण

 इन्ग्रोन टोनेल के मामूली लक्षण इस तरह के हो सकते हैं- 

  •  अंगूठे के छोर की त्वचा में जलन
  •  अंगूठे को दबाने पर दर्द
  •  प्रभावित जगह पर लालिमा
  •  अंगूठे के आसपास सूजन

मध्यम लक्षण

 इस समस्या में मध्यम लक्षण इस तरह के हो सकते हैं- 

  •  अंगूठे के छोर की त्वचा में तेज जलन
  •  प्रभावित जगह पर पीले रंग के पस का रिसाव
  •  रक्तस्राव
  •  अंगूठे पर संक्रमण

गंभीर लक्षण

वहीं गंभीर लक्षण इस तरह के हो सकते हैं- 

  •  तेज दर्द, लाली और जलन
  •  प्रभावित जगह पर त्वचा में असमान्य वृद्ध‌ि (हाइपरथैरेपी/ hypertrophy)
  • अंगूठे पर गंभीर संक्रमण

यदि आप सख्त या खतरनाक इन्ग्रोन टोनेल से ग्रसित हैं तो आपको अपने चिकित्सक या पिडियाट्रिस्ट (पैरों की देखभाल करने वाले विशेषज्ञ) के पास जाना चाहिए।

कारण

यह समस्या अनेक कारणों से हो सकती है, जिनमें हैं-

  •  नाखूनों को गलत ढंग से काटना
  •  तंग जूते और जुराब
  •  अत्यधिक पसीना या पैरों को गंदा रखना
  •  धाव इत्यादि
  •  संक्रमित नाखून
  •  अंगूठे का अप्राकृतिक आकार

इन्हें विस्तारपूर्वक नीचे समझाया गया है-

 नाखूनों को गलत तरीके से काटने के कारण इस समस्या के विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

नाखूनों को गहराई तक काटने या किनारों को अंदर तक काटने से नाखून को मुड़ने का मौका मिल जाता है और यह आसपास की त्वचा के अंदर विकसित होने लगता है।

तंग जूते, मौजे और टाइट्स    

तंग जूते, मौजे और तंग टाइट्स पहनने के कारण आपके पैर के अंगूठे के आसपास की त्वचा पर दबाव बढ़ जाता है।

यदि आपके अंगूठे के आसपास की त्वचा पर दबाव बढ़ेगा तो नाखून के लिए इसे छिद्रत करना आसान हो जाएगा। तंग जूते, मौजे और तंग टाइट्स के कारण भी नाखूनों को अंदर की ओर जगह बनाने का मौका मिल सकता है, जिसके परिणामस्वरूप इन्ग्रोन टोनेल विकसित होचे हैं।

पसीना और पैरों में गंदगी

अधिक पसीना या गंदगी जैसे कि जुराबों को नियमित तौर पर साफ न करने के कारण आपके पांवों की  त्वचा गीली और मुलायम बनी रह सकती है।

अंगूठे के नाखून के आसपास त्वचा के मुलायम पड़ने से नाखून को आसानी से त्वचा के अंदर घुसने का मौका मिल जाता है और यह अंदर अपनी जगह बना लेता है।

घाव

आपके अंगूठे पर हुआ घाव कई बार इस समस्या के विकसित होने का कारण बन सकता है। नाखून को काटने या इसके किसी दुर्घटना में टूट जाने से भी घाव हो सकता है। 

नाखून में संक्रमण

कई बार फंगल-नेल के कारण संक्रमित होने पर पैर के अंगूठे का नाखून अधिक मोटा और चौड़ा हो सकता है। जैसा कि किसी एथलीट का पांव।

यदि आपका नाखून नाजुक है तो यह हिस्सों में टूटकर आसानी से आसपास की त्वचा के अंदर घुस सकता है। परिणामस्वरूप इन्ग्रोन टोनेल समस्या विकसित हो सकती है।

आपके पैर के नाखून का प्राकृतिक आकार

यदि आपके पैर का नाखून कुदरती रूप से अर्द्धवृत्ताकार है तो इस समस्या के बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए कि किनारे की त्वचा में नाखून के दबने की अधिक संभावना रहती है।

उपचार

यदि आपमें नाखून में इस समस्या के विकसित होने की मामूली आशंका है तो आप स्वयं देखभाल के उपाय अपनाकर इसका उपचार कर सकते हैं। सर्जरी की आवश्यकता अत्यधिक गंभीर मामलों में ही पड़ती है।

स्वयं की देखभाल

यदि आपका इन्ग्रोन टोनेल प्रारंभिक अवस्था में है और इसमें मामूली सी जलन है तो आप अनेक उपायों से इसे बढ़ने से रोक सकते हैं। ये उपाय हैं-

  • अपने पांवों की समुचित देखभाल करें और इन्हें नियमित तौर पर साबुन और पानी से धोकर स्वच्छ रखें।
  •  नाखून आसपास की त्वचा में न गड़ने पाए, इसके लिए इसे सीधे आरपार ट्रिम करते रहें।
  • रूई के फोहे का इस्तेमाल कर त्वचा को आहिस्ता से दबाते हुए नाखून से अलग करें। (थोड़ा सा जैतून का तेल मलकर आप ऐसा आसानी से कर सकेंगे)।
  • आरामदायक जूते पहनें जो कि अधिक तंग न हों ताकि अंगूठे के आसपास जगह रहे। दर्द से आराम पाने के लिए पेरासिटामोल जैसी दर्दनिवारक दवा ली जा सकती है। (16 साल से कम उम्र के बच्चों को एस्प्रिन नहीं लेनी चाहिए)।

नाखून की सर्जरी  

यदि आपके अंगूठे में सुधार नहीं आता तो आपका डॉक्टर नाखून के एक हिस्से या समूचा नाखून हटाने के लिए सर्जरी की सिफारिश कर सकता है।

नाखून को आंशिक रूप से अलग करना

नाखून को आंशिक रूप से अलग करना, इन्ग्रोन टोनेल के उपचार की आम सर्जिकल विधि है। यह 98 प्रतिशत सफल होती है।

इस प्रक्रिया के तहत लोकल एनेस्थेटिक ( दर्द निवारक दवा ) के रूप में आपके अंगूठे के नीचे इंजक्शन दिया जाता है। नाखून को दोनों किनारों से काटकर छोटा किया जाता है और एक सीधा किनारा बना देते हैं। इससे नाखून के आसपास की त्वचा में घुसने की संभावना कम हो जाती है।

नाखून के दोनों किनारों को काटने के पश्चात प्रभावित क्षेत्र में फिनोल (phenol) नामक कैमिकल मला जाता है ताकि नाखून वापस बढ़े तो इस समस्या की आशंका न रहे।

इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह का पस यदि जमा है तो उसे भी निकाल दिया जाता है ताकि प्रभावित जगह किसी किस्म के संक्रमण से बची रहे। यदि आपका अंगूठा संक्रमण से ग्रस्त है तो एंटीबॉयोटिक्स दिया जा सकता है। 

नाखून को पूरा अलग करना

इस विधि के तहत आपका पूरा नाखून हटा दिया जाता है ताकि भविष्य में इस समस्या के उभरने की कोई आशंका न रहे।

इस विधि की सिफारिश तब की जाती है यदि आपका अंगूठा मोटा होता जा रहा है और आसपास की त्वचा पर दवाब बढ़ रहा है। नाखून को आंशिक रूप से अलग करने की तर्ज पर ही लोकल एनेस्थीसिया देकर पूरे नाखून को भी अलग किया जाता है। 

इस प्रक्रिया के दौरान आपका टोनेल को हटा दिया जाता है और अंगूठे वाली जगह का इनडेंटेशन (indentation) कर छोड़ दिया जाता है। अंगूठे के नाखून का न होना पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे अंगूठा सामान्य रूप से कार्य करता रहता है।

नाखून की सर्जरी के बाद

सर्जरी के बाद घाव की पट्टी कर दी जाती है। पट्टी इसलिए जरूरी है ताकि खून न बहे और संक्रमण से बचा जाए। ऑपरेशन के एक-दो रोज तक आराम के बाद आप अपना पैर उठा सकते हैं।

पांव में लगे एनेस्थीसिया के इंजेक्शन का असर खत्म होने के उपरांत आप का अंगूठा दर्द कर सकता है और वहां कमजोरी सी महसूस हो सकती है। दर्द को कम करने के लिए आपको पेरासिटामोल जैसे पेनकिलर की आवश्यकता पड़ सकती है। सर्जरी के शुरुआती दिनों में आप मुलायम जूते या खुले सैंडिल पहन सकते हैं।

आप सर्जरी के दो दिन बाद पट्टी खोल सकते हैं। अंगूठे को अम्लीय घोल में डुबोकर रखने से घाव जल्द भरने में मदद मिलती है।     

इन्ग्रोन टोनेल की रोकथाम कैसे की जाए

आप अपने पांवों को स्वस्थ रखने और इन्ग्रोन टोनेल जैसी समस्याओं से बचने के लिए अनेक उपाय कर सकते हैं।

नाखूनों को काटना

नाखूनों को भली-भांति काटते रहने से अंदर की तरफ मुड़े नाखूनों की समस्या विकसित होने की आशंका कम हो जाती है।

 आपको अपने नाखून आड़े-तिरछे या किनारों को नीचे की ओर दबाकर काटने की बजाय सीधे आर-पार काटने चाहिए।

स्वच्छ पांव, अच्छे पांव

नहाने के बाद नाखून काटना आसान रहता है क्योंकि ये मुलायम हो जाते हैं।

 पांवों को स्वच्छ बनाए रखने की आदत अपनाकर आप इन्हें किसी भी तरह की बीमारी से बचा सकते हैं।

 पांवों को हर रोज साबुन और पानी से धोएं। इन्हें जहां तक संभव हो सूखा रखें और माइस्चरिंग क्रीम  (बॉडी लोशन नहीं) लगाएं। सख्त त्वचा को हटाने के लिए नियमित तौर पर फुट-फाइल या झांवा इस्तेमाल करें। आपको अपने मौजों को हर रोज बदलना चाहिए। इससे आपके पांव जहां तक हो सके, स्वच्छ और तरोताजा रहेंगे।

सही फिटिंग वाले फुटवेयर

 पांवों को आरोग्य बनाए रखने और ऐसी समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है कि सही फिटिंग वाले आरामदायक जूते पहने जाएं।

 यदि आपके जूते तंग और छोटे हैं तो स्वाभाविक रूप से आपके अंगूठे पर भार बढ़ जाएगा। अधिक ढीले जूतों के कारण आपके अंगूठे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

 जूतों को दोपहर में खरीदना बेहतर रहता है। इस दौरान आपके पांव थोड़ा फूले हुए होते हैं। लिहाजा यदि दोपहर में कोई जोड़ी जूता आपके पैर पर फिट आता है तो अधिक संभावना है कि ऐसा जूता आपके लिए आरामदायक साबित होगा।

मेडिकल सहायता

यदि आपके पांव में कोई समस्या है तो आप अपने डॉक्टर के पास जा सकते हैं। वे आपके पांव को देखेंगे और आपको आपकी समस्या से निजात दिलाने के वास्ते सही जूता पहनने जैसी सलाह देंगे।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk

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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।