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होर्डिंग

कंपल्सिव होर्डिंग(Compulsive hoarding ) का मतलब है - ऐसी बहुत सी चीजें जुटाना, जिनकी कोई कीमत नहीं है या बहुत कम कीमत है और जिन्हें आप फेंक नहीं पा रहे हैं। नतीजा ये कि- जमा की गयी चीज़ें इतनी अव्यवस्थित हो जाती है, जिसे संभालना आपके लिए मुश्किल हो जाए।

यह तब एक बड़ी समस्या बन जाती है, जब:

कोई व्यक्ति हर रोज बहुत सी चीजें ले आता है और बहुत कम चीजों को फेंकता है, तो यह अव्यवस्था और बढ़ जाती है। जिससे रोज़मर्रा की जिंदगी मुश्किल होने लगती है। बतौर उदाहरण- इतना ज्यादा सामान हो जाता है कि वे किचन, बाथरूम व कमरों का इस्तेमाल तक ठीक से नहीं कर पाते।

होर्डिंग की समस्या वाले लोग अक्सर ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डरOCD) से पीड़ित होते हैं, जो उनकी अव्यवस्था की समस्या से सीधा जुड़ा हो भी सकता है और नहीं भी। होर्डिंग का संबंध अक्सर चिंता और निराशा से भी जुड़ा होता है।

कंपल्सिव होर्डिंग का इलाज चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि कई लोग, जो इससे पीड़ित होते हैं, उन्हें यह कोई समस्या ही नहीं लगती। या वे इस विकार और वह उनकी जिंदगी को कैसे प्रभावित कर रहा है, इसके प्रति बहुत कम जागरूक होते हैं।

हालांकि, यह सच में बेहद जरूरी है कि होर्डर को मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। क्योंकि उनकी सनक न सिर्फ अकेलेपन और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करेगी, बल्कि सेहत और सुरक्षा का खतरा भी बढ़ा देगी। अगर इसका इलाज न किया जाए तो बहुत संभव है कि यह समस्या कभी दूर न हो पाए।

इस पेज में यह बताया गया है:

  • कोई भी व्यक्ति होर्डर कैसे बन जाता है?
  • कंपल्सिव होर्डर की पहचान क्या होती है?
  • कंपल्सिव होर्डिंग समस्या क्यों है?
  • अगर आपको संदेह होता है कि कोई होर्डर है तो आप क्या कर सकते हैं?
  • कंपल्सिव होर्डिंग का इलाज कैसे होता है?

कोई भी व्यक्ति होर्डर कैसे बन जाता है?

कोई भी व्यक्ति एक होर्डर कैसे बनता है, इसके कारण अभी पूरी तरह नहीं समझे जा सके हैं। हालांकि, इन वजहों से ये समस्या हो सकती है:

किसी व्यक्ति को चीजें हटाने में परेशानी होना

  • उन्हें चीजों को ठीक से व्यवस्थित करने में दिक्कत हो सकती है और निर्णय लेने की क्षमता में कमी हो सकती है
  • इसके चलते जितनी चीजें फेंकते हैं, उससे ज्यादा चीजें जमा कर लेते हैं
  • ऐसा शख्स कुछ बेकार की बातों पर विश्वास करते हैं। जैसे- “मुझे किसी न किसी दिन इस चीज की जरूरत पड़ सकती है। अगर मैंने इसे फेंक दिया तो मैं उसकी कमी महसूस करने से उभर नहीं पाऊंगा”
  • अगर मैंने ये चीज खरीदी तो ये मुझे खुशी देगी।
  • जब भी किसी चीज को फेंकने की कोशिश करते हैं तो इतने ज्यादा भावुक हो जाते हैं कि अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते। इसलिए होर्डर किसी भी चीज को फेंकने के फैसले को या तो रद्द कर देते हैं या उससे बचते रहते हैं।

अक्सर वे बहुत सी ऐसी चीजें भी जुटाकर रखे रहते हैं, जिनकी कीमत या तो बहुत कम होती है या कुछ भी नहीं होती। अधिकांश लोग उसे कूड़ा-करकट ही समझेंगे। ऐसे लोग एक जैसी ही चीज बहुत ज्यादा मात्रा में जमा कर लेते हैं क्योंकि उन्हें किस चीज भी जरूरत है, वे इस बात को नहीं समझ पाते। कुछ मामलों में खाना या कपड़ों का भंडार जुटाकर भी रख सकते हैं।

किसी व्यक्ति के कंपल्सिव होर्डर का शिकार होने की आशंका बहुत ज्यादा होती है, अगर

  • उनके परिवार में कोई होर्डिंग करने वाला व्यक्ति रहा हो
  • उन्होंने बहुत ज्यादा गरीबी देखी हो।
  • वे एक अव्यवस्थित घर में पले-बढ़े हों।
  • वे किसी दूसरी मानसिक स्थिति के शिकार हों, जैसे- चिंता, निराशा या सोशल फोबिया (सामाजिक आयोजनों का डर)
  • वे जिंदगी में किसी तनावपूर्ण घटनाक्रम से संघर्ष कर रहे हों, जैसे- किसी चाहने वाले की मौत
  • उनका शराब पर निर्भरता का इतिहास रहा हो
  • वे अकेले हों (होर्डिंग से राहत मिलती हो)

कंपल्सिव होर्डर को कैसे पहचाना जा सकता हैं?

एक कंपल्सिव होर्डर खासतौर से ये चीजें करता है:

  • वह ऐसी चीजें जुटा सकता है, जिनकी कोई कीमत नहीं है। जैसे- जंक मेल और सामान लाने के थैले या ऐसी चीजें जिन्हें वो दोबारा इस्तेमाल करने या उनकी मरम्मत कराने की सोचता हो
  • किसी भी चीज को फेंकना उसके लिए मुश्किल होता है और वो उन्हें एक जगह से दूसरी जगह रखता रहता है
  • उसके लिए चीजों को वर्गीकरण के हिसाब से रखना या व्यवस्थित करना मुश्किल होता
  • निर्णय करने में परेशानी होने लगती है और रोज़मर्रा के कामों में भी संघर्ष करता है, जैसे- खाना बनाना, सफाई और बिलों का भुगतान करना
  • चीजों से इतना ज्यादा लगाव होना कि किसी और को छूने या उधार देने से भी इनकार कर दे
  • दूसरे लोगों के साथ सामाजिक नहीं होना।

कुछ अध्ययनों के मुताबिक होर्डिंग अक्सर 13 या 14 साल की छोटी उम्र से ही शुरू हो जाती है, तब बच्चे टूटे हुए खिलौने या स्कूल के पेपर जमा कर सकते हैं। उम्र के साथ-साथ होर्डिंग बदतर होती चली जाती है।

कंपल्सिव होर्डिंग एक समस्या क्यों है?

कंपल्सिव होर्डिंग कई कारणों से एक समस्या है।

क्योंकि अव्यवस्था होने की वजह से वह व्यक्ति अपने घर में कमरों का इस्तेमाल ठीक से नहीं कर सकता है। यहां तक कि कुछ चीजों को इधर-उधर हटाए बिना कुर्सी पर भी नहीं बैठ सकता।

गंभीर मामलों में इस अव्यवस्था की वजह से आग लग सकती है, और होर्डर कहीं पैर फंसने की वजह से गिर भी सकता है। क्योंकि ऐसे घर को साफ करना नामुमकिन है तो यहां रहना सेहत के लिए भी ठीक नहीं है। चूहे-छिपकली जैसे जानवरों का संक्रमण बढ़ सकता है, नालियां जाम हो सकती हैं और दूसरी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं, जो पड़ोसियों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा सकती है।

होर्डर सामान्यत: किसी मेहमान को घर बुलाने के खिलाफ होते हैं या किसी जरूरी मरम्मत के लिए कारीगर को भी अंदर बुलाने में हिचकिचाते हैं।

वे बहुत जल्दी सबसे कट जाते हैं और अकेले रहते हैं। अक्सर वे चिंता और निराशा से घिरे रहते हैं। शायद होर्डिंग से उन्हें कुछ सुकून मिलता है लेकिन अंदर से वे नाखुश ही होते हैं।

वे परिवार और दोस्तों की मदद करने की गुज़ारिश को भी नज़रअंदाज़ कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि ये कोई समस्या है या वे इसे खुद से ठीक नहीं कर सकते हैं।

होर्डिंग सम्पूर्ण रूप से व्यक्ति के जीवन को कब्ज़े में ले लेता है। इसकी वजह से उनके काम का प्रदर्शन, व्यक्तिगत सेहत और सामाजिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है।

अगर आपको लगे कि कोई होर्डर है तो आप क्या कर सकते हैं:

अगर आपके परिवार का कोई सदस्य या कोई जानने वाला कंपल्सिव होर्डर है तो उसे डॉक्टर को दिखाने के लिए मनाइए। यह आसान नहीं होगा चूंकि जो व्यक्ति इससे पीड़ित है, वो ये नहीं सोच सकता कि उसे मदद की जरूरत है। इसलिए वह इलाज भी नहीं कराना चाहता है।

अपने डॉक्टर से बात करें और स्थानीय कम्युनिटी मेंटल हेल्थ टीम के पास जाएं, जहां हेल्थ प्रोफेशनल होते हैं, जो ओसीडी के विशेषज्ञ होते हैं और होर्डिंग की समस्या से अच्छी तरह वाक़िफ़ होते हैं।

अपने दोस्त या चाहने वाले को ये सुनिश्चित कराएं कि कोई भी उसके घर जाकर उसकी चीजों को नहीं फेंकने जा रहा। आप सिर्फ उसकी होर्डिंग के बारे में डॉक्टर से बात करने जा रहे हैं। ताकि यह पता लग सके कि क्या किया जा सकता है और इस अव्यवस्था को ठीक करने की प्रक्रिया के लिए किस तरह का समर्थन मिल सकता है।

सामान्य तौर पर यह एक अच्छा विचार नहीं है कि किसी काउंसिल या पर्यावरण हेल्थ को कॉल करके व्यर्थ की चीजों की साफ-सफाई करा दी जाए क्योंकि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा और जल्द ही दोबारा वही सब अव्यवस्था फैल जाएगी। हालांकि, अगर इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो स्थानीय प्राधिकरण यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई भी कर सकते हैं कि वह जगह साफ हो गई है या नहीं।

अतिरिक्त भंडारण के लालच में न रहें - यह सिर्फ तुरंत के लिए ठीक लग सकता है लेकिन यह महंगा है और इससे किसी समस्या का हल नहीं होने वाला। समस्या ये नहीं है कि चीजें रखने के लिए जगह कम है, समस्या ये है कि सामान बहुत ज्यादा है।

कंपल्सिव होर्डिंग का इलाज कैसे होता है?

अगर पीड़ित व्यक्ति तैयार भी हो जाए, तब भी कंपल्सिव होर्डिंग का इलाज आसान नहीं है। लेकिन कंपल्सिव होर्डिंग से छुटकारा पाया जा सकता है।

कंपल्सिव होर्डिंग का सबसे प्रमुख इलाज है- काग्निटिव बिहेवियर थेरेपी(सीबीटी, CBT)। थेरेपिस्ट पीड़ित व्यक्ति को यह समझाने में मदद करेंगे कि चीजों को फेंकने में क्यों परेशानी हो रही है और इस अव्यवस्था के कारण क्या हैं। इसमें प्रायोगिक कार्य भी शामिल होंगे और एक योजना पर काम करना होगा (नीचे देखें)। यह जरूरी है कि व्यक्ति खुद अपने घर से अव्यवस्था को हटाने की ज़िम्मेदारी ले। थेरेपिस्ट उसे इसके लिए प्रोत्साहित करेगा और उसका साथ भी देगा।

एक प्रकार का अवसादरोधी(anti-depressent) - सिलेक्टिव सेरोटोनिन रिअपटेक इन्हिबिटर्स (एसएसआरआईज,SSRIs) - कुछ लोगों को ये देकर भी मदद की जाती है लेकिन सभी तरह के कंपल्सिव होर्डर को ये नहीं दी जाती।

काग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी, CBT)

CBT एक प्रकार की थेरेपी है, जिसका मकसद आपके सोचने और काम करने के तरीके में बदलाव करना है, ताकि आपको अपनी समस्याएं निपटाने में मदद मिल सके। इसमें आप अपने बारे में, दुनिया के बारे में और दूसरे लोगों के बारे में क्या सोचते हैं, इस बारे में बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। और आप अपने विचार और भावनाओं को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, इन चीजों के बारे में बात करके सीबीटी, आप कैसे सोचते हैं(काग्निटिव) और क्या करते हैं (बिहेवियर) इसमें बदलाव में मदद कर सकता है। इससे आपको जिंदगी के बारे में अच्छा महसूस करने में मदद मिल सकती है।

लंबे समय तक नियमित रूप से सीबीटी के सेशन करना आवश्यक हो सकता है और इसमें कुछ घर पर आधारित सेशन भी शामिल होने चाहिए, जिसमें आप सीधे अव्यवस्थित चीजों पर काम करते हैं। इसके लिए प्रेरणा, वचनबद्धता और धैर्य की जरूरत होती है, क्योंकि इलाज का लक्ष्य हासिल करने में कई महीने भी लग सकते हैं।

इसका लक्ष्य व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता और चीजों को व्यवस्थित करने की काबिलियत को बेहतर करना है ताकि वे एक-एक करके सभी कमरों से अव्यवस्था हटाने मे सक्षम हो सकें।

थेरेपिस्ट खुद किसी चीज को नहीं फेंकेगा बल्कि उस व्यक्ति को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करेगा और दिशा-निर्देश देगा। साथ ही थेरेपिस्ट होर्डिंग की समस्या बढ़ाने वाले मूलभूत विश्वासों की पहचान करके और उन्हें चुनौती देकर उस व्यक्ति में निर्णय लेने की रणनीतियां विकसित करने में भी मदद कर सकता है।

वह व्यक्ति धीरे-धीरे बेकार चीजों को हटाने में बेहतर होने लगता है। वह महसूस करता है कि ऐसा करने से कुछ भी बुरा घटित नहीं होता। और चीजों को व्यवस्थित करने में सुधार आने लगता है।

उन्हें इस चीज के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है कि वे रोज़ाना खरीदी जाने वाली चीजों को भी रोज डायरी में लिखें ताकि जमा होने वाली चीजों की निगरानी की जा सके।

इलाज के अंत में हो सकता है कि वह व्यक्ति पूरी तरह से अव्यवस्था को हटाने में समर्थ न हो पाए लेकिन इस समस्या को वह बेहतर तरीके से समझने ज़रूर लगता है। थेरेपिस्ट एक योजना भी देगा ताकि उन्हें लगातार अपनी सफलता को कायम रखने में मदद मिल सके और वह फिर उन्हीं पुराने दिनों में वापस जाने से बच सके।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk

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