टेंशन-टाईप सिरदर्द

टेंशन-टाईप सिरदर्द

टेंशन-टाईप सिरदर्द दबाव, थकावट अथवा शोर के कारण वाला दैनिक सिरदर्द है। दर्द-निवारक अथवा विश्राम से यह ठीक हो जाता हैं।

टेंशन-टाईप सिरदर्द अत्यंत सान्या प्रकार का सिरदर्द है और हम इसे आम प्रकार या , प्रतिदिन सिरदर्द के रूप में मानते हैं।

यह लगातार दर्द जैसा महसूस होता है जो सिर की दोनों ओर को प्रभावित करता है। आप गर्दन की मांसपेशियों में अकड़न और आँखों के पीछे दबाव भी महसूस कर सकते/सकती हैं।

टेंशन सिरदर्द इतना कष्टदाई नहीं होता कि यह आपको दैनिक गतिविधियां करने से रोक सके।

समान्यत: यह 30 मिनट से कई घंटों तक रहता है परंतु कभी कभी यह कई दिन तक भी रह सकता है।

टेंशन सिरदर्द किसको होते हैं?

अधिकतर व्यक्तियों को कभी न कभी टेंशन सिरदर्द ज़रूर हुआ है। यह किसी भी आयु में हो सकता हैं, परन्तु किशोरों और व्यस्कों में अधिक देखा जाता है. । पुरुषों की तुलना में महिलाएं इससे अधिक ग्रसित होती हैं।

अनुमान के अनुसार UK में लगभग आधे व्यस्कों को महीने में एक अथवा दो बार, और लगभग एक-तिहाई व्यस्कों को महीने में 15 बार तक टेंशन-टाईप सिरदर्द होते हैं।

प्रत्येक 100 में से 2 अथवा 3 व्यस्कों को महीने में 15 बार से अधिक लगातार तीन महीनों के लिये टेंशन-टाईप सिरदर्द होते हैं। इसे क्रोनिक टेंशन-टाईप सिरदर्द के रूप में जाना जाता है।

चिकित्सीय सहायता कब लेनी चाहिये

यदि आपको कभी- कबार ही सिरदर्द होता है तो आम तौर पर आपको डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी, यदि आपको सप्ताह में कई बार सिरदर्द होता रहे अथवा आपका सिरदर्द कष्टदाई हैं तो आप डॉक्टर से संपर्क करें।

आपके डॉक्टर आपके सिरदर्द के प्रकार का निदान करने हेतु आपके सिरदर्दों, पारिवारिक इतिहास, खानपान और जीवनशैली के बारे में प्रश्न करेंगे।

आपको निम्न प्रकार के सिरदर्दों के बारे में तुरन्त चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिये :

  • जो अचानक से आये और ऐसा दर्द जिसका आपने पहले कभी अनुभव न किया हो
  • जो अत्यंत अकड़ी गर्दन, बुखार, मिचली, उल्टी और व्याकुलता के साथ हो
  • जो किसी दुर्घटना के पश्चात हो, विशेषत: यदि आपके सिर पर चोट लगी हो
  • जो कमजोरी, संवेदनशून्यता, अस्पष्ट बोली अथवा व्याकुलता के साथ हो

ये लक्षण दर्शाते हैं कि समस्या अत्यंत चिंताजनक हो सकती है जिसके लिये अतिरिक्त जांच-पड़ताल और संकटकालीन उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

टेंशन सिरदर्द के कारण

टेंशन-टाईप सिरदर्दों के सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, परन्तु इनके कारणों में निम्न सम्मिलित हैं :

  • मानसिक तनाव और उत्सुकता
  • भेंगापन
  • बुरी मुद्रा
  • थकावट
  • पानी की कमी
  • खाना न खाना
  • शारीरिक गतिविधि में कमी
  • चमकदार सूर्य-रोशनी
  • शोर
  • विशिष्ट गंध

टेंशन-टाईप सिरदर्दों को प्राथमिक सिरदर्द कहते है, अर्थात वे किसी अन्तर्निहित बीमारी के कारण उत्पन्न नहीं होते हैं। अन्य प्राथमिक सिरदर्दों में गुच्छा सिरदर्द और माइग्रेन सम्मिलित हैं।

टेंशन सिरदर्दों की उपचार विधि

टेंशन-टाईप सिरदर्द जानलेवा नहीं होती है और सामान्यत: दर-्दनिवारक दवाइयों अथवा जीवनशैली में परिवर्तन करके उनसे मुक्ति पाई जा सकती है।

जीवनशैली में परिवर्तन

अक्सर विश्राम तकनीकें तनाव -संबधित सिरदर्दों में सहायक होती हैं। इनमें निम्न सम्मिलित हो सकती हैं :

  • योग
  • मालिश
  • व्यायाम
  • अपने माथे अथवा गर्दन पर गरम फलालैन लगाने से

दबाव से मुक्ति पाने हेतु विश्राम टिप्स के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें।

दर्द-निवारक दवाइयां

पैरासिटामोल अथवा इबुप्रोफेन जैसी दर्द-निवारक दवाइयाँ दर्द से मुक्ति में सहायक हो सकती है। कभी-कभी एस्पेरिन भी अनुशंसित की जा सकती है।

यदि आप ये औषधियाँ ले रहे/रही हैं, तो आपको पैकेट पर दिये निर्देशों का सदैव अनुसरण करना होगा। गर्भवती महिलाओं को तीसरी तीमाही में इबुप्रोफेन नहीं लेना चाहिये क्योंकी इससे बच्चे को हानि हो सकती है और 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को भी एस्पिरिन नहीं दी जानी चाहिये।

एक समय पर कुछ दिनों से अधिक औषधियां नहीं लेनी चाहिये और डॉक्टर की अनुशंसा के बिना को-कोडामोल जैसे कोडीन युक्त औषधियां लेने से बचना चाहिये।

दर्द-निवारक सिरदर्द

दर्द-निवारक दवाइयों का लम्बे समय (समान्यत: 10 दिन अथवा अधिक) तक सेवन करने से औषधि के अति-उपयोग से होने वाला सिरदर्द हो सकता है। आपके शरीर को औषधियां लेने की आदत पड़ सकती है जिसके कारण उन्हें छोड़ने पर भी सिरदर्द हो सकता है।

यदि आपके डॉक्टर को शक होता है कि सिरदर्द का कारण औषधि का लगातार प्रयोग है तो वे आपको उन्हें रोकने के लिये कह सकते हैं। ऐसा होने पर भी, डॉक्टर से परामर्श लिये बिना आपको अपनी औषधियां लेना छोड़ना नहीं चाहिये।

दर्द-निवारक सिरदर्द के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें

टेंशन सिरदर्दों की रोक-थाम

यदि आपको बारंबार टेंशन-टाईप सिरदर्द हो रहे हैं, तो आपको एक डायरी रखनी चाहिये ताकि आप उनके प्रेरक कारणों की पहचान कर सकें। इसके पश्चात आपको अपने खानपान और जीवनशैली में परिवर्तन करना संभव हो सकेगा ताकि उनकी बार बार होने से रोक-थाम की जा सके।

सिरदर्द उत्पन्न करने वाले तनाव और टेंशन को कम करने के लिये निरंतर व्यायाम और विश्राम भी महत्वपूर्ण उपाय हो सकते हैं। अच्छी मुद्रा बरकरार रखना व अच्छी तरह विश्राम और हाईड्रेट रखने (पानी पीने) को सुनिश्चित करना भी सहायक हो सकता है।

National Institute for Health and Care Excellence (NICE) के दिशानिर्देश वर्णित करते हैं कि 5-8 सप्ताह की अवधि के दौरान एक्यूपंचर के 10 सत्रों तक की अवधि क्रोनिक टेंशन-टाईप सिरदर्दों को रोकने में लाभकारी हो सकती है।

कुछ मामलों में, एमीट्रिपटाइलिन नाम की हताशारोधी औषधि का नुस्खा दिया जा सकता है ताकि क्रोनिक टेंशन-टाईप सिरदर्दों को रोका जा सकें, हालांकि इसकी प्रभावकारिता सिद्ध करने हेतु सीमित साक्ष्य ही उपलब्ध है। यह औषधि किसी सिरदर्द का तुरन्त उपचार नहीं करती है, परन्तु सिरदर्द कम होने तक इसे कई महीनों तक प्रतिदिन लेना चाहिये।

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