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जेंडर डिस्फोरिया

परिचय

जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) वह स्थिति है जिसमे व्यक्ति को यह महसूस होता है कि उसका प्राकृतिक लिंग उसके लैंगिक पहचान से मेल नहीं खाता।

बच्चे के शरीर की बनावट के आधार पर जन्म के समय प्राकृतिक लिंग नियुक्त होता है। लैंगिक पहचान वह है जैसा एक व्यक्ति अपने को “पहचानता” है या स्वयं को महसूस करता है।

उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति की शारीरिक रचना पुरुष की हो सकती है लेकिन लैंगिक पहचान एक महिला की। कुछ अन्य लोग स्वयं को ना तो स्त्री मानते हैं और ना ही पुरुष , अथवा स्वयं को अलैंगिक के रूप मे वर्णित कर सकते हैं।

इस बेमेलता के कारण एक असुविधा का अनुभव होता है जिसे जेंडर डिस्फोरिया (gender dysphoria) कहते हैं। जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) एक स्वीकृत स्थिति है जिसके लिए कभी कभी चिकित्सा उपयुक्त रहती है। यह कोई मानसिक रोग नही है।

यह स्थिति कभी कभी निम्न नामों से भी जानी जाती है :

  • लैंगिक पहचान विकार
  • लैंगिक विषमता
  • ट्रांसजेंडरिस्म

जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) से ग्रसित कुछ लोगों मे प्राकृतिक लिंग की बजाय अपनी लैंगिक पहचान के अनुसार रहने की एक निरंतर एवं प्रबल इच्छा होती है। इन लोगों को कभी कभी ट्रांससेक्सुअल(transsexual) या ट्रांस व्यक्ति कहते हैं। कुछ ट्रांस व्यक्ति अपनी शारीरिक बनावट को अपने लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने के लिए उपचार भी करवाते हैं।

अधिक जानकारी के लिए जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) की परिभाषा देखें।

प्रारम्भिक लक्षण

जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) के लक्षण बहुत कम आयु मे प्रकट हो सकते हैं। उदाहरण के लिए एक बच्चा लड़कों या लड़कियों के विशिष्ट कपड़े पहनने से मना कर सकता है अथवा लड़कों या लड़कियों वाले विशिष्ट खेल या क्रियाओं को करने से मना कर सकता है।

अधिकतर मामलों मे, इस प्रकार का व्यवहार बढ़ने के क्रम मे होने वाला केवल एक सामान्य भाग होता है,लेकिन जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) के मामलों मे ये बचपन के बाद तथा वयस्क होने पर भी बना रहता है।

जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) से ग्रसित वयस्कों को ऐसा महसूस हो सकता है कि वो किसी ऐसे शरीर में कैद हो गए हैं जो उनकी लैंगिक पहचान से मेल नहीं खाता। इसके कारण बेहद असहज तथा चिंतित महसूस कर सकते हैं। वे उन सामाजिक अपेक्षाओं के कारण इतने दुखी हो सकते हैं कि वे अपनी लैंगिक रचना के अनुसार जीने लगते हैं और ना कि उस लिंग के अनुसार जिसका वो अनुभव करते हैं। वे अपने प्राकृतिक लिंग से जुड़े शारीरिक चिन्हों जैसे चेहरे के बाल या वक्षस्थल को बदलने या उनसे मुक्त होने की प्रबल इच्छा का अनुभव कर सकते हैं।

जैंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) के लक्षणों के बारे मे और जानें।

जैंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) कितना आम है?

ऐसा अनुमानित है की 11,500 व्यक्तियों में से 1 व्यक्ति जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) का अनुभव करेगा हालांकि, इस स्थिति से ग्रसित ऐसे बहुत लोग हो सकते हैं जो सहायता नहीं माँगते। औसतन, महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों मे जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) का 5 गुना अधिक पाया जाता है।

यद्यपि जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) बहुत कम देखने को मिलता है, लेकिन इस स्थिति के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ने के कारण इससे निदानित लोगों की संख्या बढ़ रही है

हालांकि जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) से ग्रसित अनेक लोग अभी भी अपनी इस स्थिति के कारण पूर्वाग्रह तथा विरोध का सामना करते हैं।

जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) के कारणों के बारे जानें।

जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) का निदान

यदि आपको लगता है की आपको जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) है तो आपको अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।

अनेक देशों मे डॉक्टर ऐसे लोगों को जेंडर डिस्फोरिया क्लिनिक (Gender dysphoria clinic) के लिए रेफर कर सकते हैं जो आपको व्यक्तिगत मूल्यांकन प्रदान कर सकते हैं।

जैंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) के निदान के बारे मे और पढ़ें।

जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) का इलाज

जेंडर डिस्फोरिया के इलाज का उद्देश्य लोगों मे से प्राकृतिक लिंग तथा लैंगिक पहचान के बेमेल होने की भावना को निकालने मे मदद करना है |

अलग अलग लोगों के लिए इसका अर्थ अलग अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए कुछ लोगों के लिए इसका अर्थ अपने पसंदीदा लिंग के अनुसार कपड़े पहनना तथा रहना हो सकता है।

वही दूसरों के लिए, इसका अर्थ हॉर्मोन्स लेकर या ऑपरेशन द्वारा अपनी शारीरिक बनावट को बदलना हो सकता है| कई ट्रांस लोग अपने शरीर को स्थाई रूप से बदलने के लिए ट्रीटमेंट लेने की कोशिश करते हैं ताकि वे अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप बन सकें।

जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) की चिकित्सा के बारे मे और जानें।

लक्षण

जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) का कोई शारीरिक लक्षण नहीं होते है लेकिन इस स्थिति से ग्रसित लोग अनेक प्रकार की भावनाओं का अनुभव तथा व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं।

अनेक मामलों में, जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) से ग्रसित व्यक्ति बचपन से ही प्राकृतिक लिंग और अपनी लैंगिक पहचान के बीच की बेमेलता का अनुभव करना शुरू कर देता है।

दूसरों में, यह व्यस्क होने तक नहीं हो पाता।

बच्चे

यदि आपके बच्चे को जेंडर डिस्फोरिया है तो उनके व्यवहार में निम्न बातें शामिल हो सकती हैं:

  • अपने विपरीत लिंग का होने पर ज़ोर देना
  • अपने लिंग वाले विशिष्ट कपड़ों को नापसंद करना अथवा पहनने से मना करना तथा विपरीत लिंग द्वारा पहने जाने वाले विशिष्ट कपड़ों को पहनने की मांग करना
  • उन खेलों तथा क्रिया कलापों में भाग लेने से मना करना या नापसंद करना जो विशेष रुप से उसी लिंग वालों के लिए होते हैं तथा विपरीत लिंग द्वारा खेले जाने वाले विशिष्ट खेलों तथा क्रियाकलापों में भाग लेने की इच्छा करना
  • अपने प्राकृतिक लिंग वाले अन्य साथियों की तरह मूत्र त्याग के लिए मना करना या उसे नापसंद करना,  उदाहरण के लिए एक लड़के का बैठकर तथा एक लड़की का खड़े होकर मूत्र त्याग करने की इच्छा होना
  • अपने जननांगों को बदलने की जिद करना अथवा उनके बदलने की आशा रखना, उदाहरण के लिए एक लड़के का अपने लिंग से मुक्ति चाहना तथा एक लड़की का लिंग विकसित करने की कामना करना
  • युवावस्था के समय शारीरिक बदलावों से अत्यंत तनाव ग्रसित हो जाना

जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) से ग्रसित बच्चे उपरोक्त में से कुछ अथवा सारे व्यवहार प्रकट कर सकते हैं। लेकिन बहुत से मामलों में इस प्रकार का व्यवहार केवल बचपन का एक भाग होता है तथा अनिवार्य रूप से इसका अर्थ यह नहीं है कि आपके बच्चे को जेंडर डिस्फोरिया है।

उदाहरण के लिए, कई लड़कियाँ लड़कों जैसा व्यवहार करती हैं जिसे  “टॉमबॉय“ नाम से वर्णित किया जा सकता है जिसे अक्सर एक सामान्य महिला विकास के रूप मे देखा जाता है। लड़कों को भी लड़कियों के रूप मे भूमिका निभाते हुए तथा अपनी माँ या बहन के कपड़ों को पहनते देखना असामान्य नही है। आमतौर पर यह एक अवस्था से अधिक कुछ नहीं होता।

इस प्रकार का व्यवहार करने वाले ज्यादातर बच्चों को जेंडर डिस्फोरिया नहीं होता तथा ना ही वे ट्रांससेक्सुअल (transsexual) बन जाते हैं। बहुत ही कम मामलों में इस प्रकार का व्यवहार किशोरावस्था तथा व्यस्क होने तक बना रहता है।

एक मेंटल हेल्थ चैरिटी के अनुमान के अनुसार जो लोग जेंडर रीसाइनमेंट सर्जरी(व्यक्ति के शारीरिक लिंग को बदलने के लिए किया जाने वाला ऑपरेशन) के लिए आवेदन करते हैं उनकी संख्या पुरुषों मे लगभग 30000 मे से 1 तथा महिलाओं मे 100000 मे से 1 होती है।

किशोर तथा वयस्क

यदि आपके बच्चे के किशोर अथवा वयस्क होने तक भी उनमें जेंडर डिस्फोरिया की भावना है, तो यह संभव है कि वे विकास के एक चरण या पड़ाव मात्र से नही गुज़र रहे हैं|

यदि आप एक किशोर या वयस्क हैं जिसमें जेंडर डिस्फोरिया की भावना बचपन में ही शुरू हो गई थी, तो आपको अब अपनी लैंगिक पहचान का तथा उसका सामना करने का अंदाज़ा हो गया होगा। जेंडर डिस्फोरिया की प्रबल भावना वाले अनेक लोग अपनी किशोरावस्था आने तक पूर्ण रूप से ट्रांससेक्सुअल हो जाते हैं।

जेंडर डिस्फोरिया से किशोरों तथा वयस्कों के प्रभावित होने का तरीका, बच्चों के प्रभावित होने के तरीके से बिलकुल अलग होता है। यदि आप जेंडर डिस्फोरिया से ग्रसित एक किशोर अथवा वयस्क हैं, तो आप निम्न बातों का अनुभव कर सकते हैं:

  • अपने निर्धारित लिंग तथा लैंगिक पहचान मे असमानता का अनुभव बिना किसी शंका के होना
  • अपने लैंगिक पहचान वाले लिंग की भूमिका मे ही सहज होना
  • अपने लिंग के शारीरिक चिन्हों जैसे वक्षस्थल, शरीर के बालों तथा मांसपेशिय स्पष्टता को छुपाने या उनसे मुक्ति पाने की प्रबल इच्छा होना
  • अपने प्राकृत जननांग से अत्यंत घृणा करना तथा उन्हे बदलने या उनसे मुक्त होने की अत्यधिक चाह रखना

कई बार इन भावनाओं से निपटना बहुत मुश्किल हो सकता है, इसके परिणाम स्वरूप कई ट्रांससेक्सुअल तथा जेंडर डिस्फोरिया से ग्रसित लोग अवसाद अथवा आत्महत्या की भावना का अनुभव कर सकते हैं।

यदि आप अवसाद या आत्महत्या की भावना का अनुभव कर रहे हों तो आप जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से मिलें। वे आपको मदद एवं सहयोग प्रदान करने मे समर्थ होंगे।

एक स्थिति जो आपके प्राकृत लिंग तथा आपकी लैंगिक पहचान के बीच के अनुपयुक्त मेल की भावना को बताती है। आपकी व्यक्तिगत संवेदना कि आप किस लिंग के हैं अथवा आप स्वयं को किस तरीके से देखते है,यह लैंगिक पहचान कहलाती है।

जेंडर डिस्फोरिया की गहन एवं लंबे समय तक रहने वाली भावना वाले व्यक्ति ट्रांससेक्सुअल होते हैं जो प्राकृत लिंग को अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने के लिए उसे बदलने की इच्छा रखते हैं।

कारण

जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) के कारणों को अभी पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है।

परंपरागत रूप से जेंडर डिस्फोरिया

को मनोरोग स्थिति समझा जाता था, जिसका अर्थ था कि इसको उत्पन्न करने वाले कारण मन मे होते हैं। इसका अर्थ यह नही है कि जेंडर डिस्फोरिया एक मानसिक रोग है।

लेकिन, नये अध्ययनों से पता लगता है कि जेंडर डिस्फोरिया के, जन्म से पहले लैंगिक पहचान के विकसित होने से संबंधित बायोलॉजिकल कारण भी हो सकते है।

जेंडर डिस्फोरिया के कारणों को पूर्ण रूप मे समझने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।

विशिष्ट लिंग विकास

आपकी लैंगिक पहचान के निर्धारण का अधिकतर विकास - अर्थात आप अपने को जिस लिंग का मानते हैं-गर्भ मे होता है।

आपके प्राकृत/जैविक लिंग का निर्धारण क्रोमोज़ोम (chromosomes) से होता है। क्रोमोज़ोम(Chromosomes) कोशिका के वह भाग होते हैं जिसमे जीन (आनुवांशिक सामग्री की इकाई जिससे आपकी विशेषता निर्धारित होती है) होते हैं। आपमें दो सेक्स क्रोमोजोम होते हैं: एक आपकी माता से एक आपके पिता से।

प्रारंभिक गर्भावस्था के दौरान, सभी अजन्मे बच्चे स्त्री जाति के होते हैं क्योंकि उस समय उनमे अपनी माता से से प्राप्त, स्त्री सेक्स क्रोमोजोम(x chromosome) ही सक्रिय होता है। गर्भावस्था के आठवें हफ्ते में पिता से प्राप्त सेक्स क्रोमोजोम सक्रिय हो जाता है, यह X क्रोमोजोम(स्त्री) या Y क्रोमोसोम( पुरुष) हो सकता है।

यदि पिता से प्राप्त सेक्स क्रोमोजोम X होता है तो अजन्मे बच्चे का स्त्री हार्मोन की वृद्धि के साथ स्त्री रूप में ही विकास होना जारी रहेगा। यह स्त्री हार्मोन मस्तिष्क, जनन ग्रंथियों(यौन अंगों), तथा प्रजनन अंगों पर समानता से कार्य करते हैं, जिससे सेक्स तथा जेंडर दोनों स्त्री के होते हैं।

यदि पिता से प्राप्त सेक्स क्रोमोजोम Y होता है तो अजन्मा बच्चा प्राकृतिक रूप से पुरुष मे विकसित होगा। Y क्रोमोजोम के कारण टेस्टोस्टेरोन(testosterone) तथा अन्य पुरुष हार्मोन में वृद्धि होती है, जिससे पुरुष लिंग की विशेषताओं का विकास होता है जैसे वृषण।

टेस्टोस्टेरोन(testosterone) तथा अन्य हार्मोन्स मस्तिष्क, जनन ग्रंथियों तथा प्रजनन अंगों पर समानता से कार्य करते हैं जिससे सेक्स तथा जेंडर दोनों पुरुष जाति के होते हैं।

इसलिए, अधिकतर मामलों में एक स्त्री शिशु में XX क्रोमोजोम तथा पुरुष शिशु में XY क्रोमोजोम होते हैं।

लैंगिक विकास में बदलाव

लैंगिक विकास जटिल होता है और इसके कई प्रकार संभव हैं जिसके कारण एक व्यक्ति मे प्राकृतिक लिंग तथा उसकी लैंगिक पहचान के बीच बेमेलता की भावना उत्पन्न हो सकती है।

हॉर्मोनल असमानता

कुछ असाधारण मामलों मे, सेक्स तथा जेंडर के विकास को सक्रिय करने वाले हार्मोन्स मस्तिष्क, जनन ग्रंथियों तथा प्रजनन अंगों पर ठीक से कार्य नहीं कर सकते हैं, जिसके कारण उनके बीच में विषमता उत्पन्न हो जाती है। उदाहरण के लिए प्राकृतिक लिंग(जो जनन ग्रंथियों तथा प्रजनन अंगों द्वारा शारीरिक रूप से निर्धारित होता है) पुरुष का हो लेकिन लैंगिक पहचान(मस्तिष्क द्वारा निर्धारित होने वाला) स्त्री की हो सकती है।

यह माता के शरीर मे अतिरिक्त हॉर्मोन्स होने के कारण अथवा हॉर्मोन्स के प्रति भ्रूण की असंवेदनशीलता के कारण हो सकता है, इसे एंड्रोजन असंवेदनशीलता सिंड्रोम(androgen insensitivity syndrome, AIS) कहते हैं। इस प्रकार, गर्भाशय में हॉर्मोन्स के ठीक से कार्य न करने के कारण जेंडर डिस्फोरिया उत्पन्न हो सकता है।

इस स्थिति के बारे में और जानकारी के लिए एंड्रोजन असंवेदनशीलता सिंड्रोम (androgen insensitivity syndrome) देखें।

अन्य असाधारण स्थितियां

अन्य असाधारण स्थितियाँ जैसे कंजेनिटल एड्रेनल हाइपरप्लासिया(congenital adrenal hyperplasia (CAH)) तथा इंटरसेक्स स्थितियाँ(hermaphroditism) भी जेंडर डिस्फोरिया का कारण हो सकती हैं।

सीएएच(CAH) मे, एड्रेनल(adrenal) ग्रंथियां (त्रिकोणाकार दो छोटी ग्रंथियां जो किडनी के ऊपर स्थित होती हैं) एक मादा भ्रूण में पुरुष हार्मोन का अत्यधिक मात्रा में उत्पादन करती हैं। इससे स्त्री जननांग बढ़ जाते हैं। कुछ मामलों में, यह इतने बढ़ सकते हैं कि स्त्री शिशु के जन्म होने पर उसे प्राकृतिक रूप में पुरुष समझ लिया जाता है।

इंटरसेक्स स्थिति के कारण बच्चे दोनों प्रकार के जननांग के साथ पैदा (अथवा अस्पष्ट जननांग) होते हैं। ऐसे मामलों में, यह निर्देशित किया जाता था की बच्चे के माता पिता अपने बच्चे का किस लिंग के रूप मे पालन पोषण चाहते हैं वे इसका निर्णय करें। लेकिन, अब यह माना जाता है कि इसका निश्चय करने के लिए किसी भी प्रकार का ऑपरेशन करने से पहले बच्चे द्वारा अपनी लैंगिक पहचान का निर्धारण करने तक प्रतीक्षा करना ही बेहतर है। 

किडनी के ऊपर स्थित त्रिकोणाकार दो छोटी ग्रंथियां,जो उदर की भित्ति के पीछे के भाग मे ऊपर की ओर होती हैं। वे एड्रेनालाईन (adrenaline), स्टेरॉयड हार्मोन्स तथा पुरुष एवं स्त्री सेक्स हॉर्मोन्स, टेस्टोस्टेरोन तथा एस्ट्रोजन का उत्पादन करती हैं।

क्रोमोज़ोम शरीर की कोशिका का वह भाग हैं जिनमे जीन होते हैं। सामान्यतः एक मानव कोशिका में क्रोमज़ोम के 23 जोड़े होते हैं।

भ्रूण - गर्भावस्था के आठवें हफ्ते से लेकर जन्म के समय तक के अजन्मे बच्चे को भ्रूण कहते हैं।

इस लेख मे जेंडर का अर्थ है पुरुष या महिला होने की अनुभूति (भावना) |

एक स्थिति जो आपके प्राकृत लिंग तथा आपकी लैंगिक पहचान के बीच के अनुपयुक्त मेल की भावना को बताती है।

लैंगिक पहचान यह जानने की आपकी व्यक्तिगत समझ है कि आप किस लिंग से संबंधित हैं अथवा आप स्वयं को किस रूप मे देखते है।

जीन -आनुवंशिक सामग्री की इकाई जो आपके शरीर की विशेषता निर्धारित करती है।

हॉर्मोन्स ऐसे शक्तिशाली रसायन हैं जो शरीर द्वारा उत्पादित किए जाते हैं तथा जिनका व्यापक प्रभाव होता है।

इस लेख मे, सेक्स का अर्थ है पुरुष या स्त्री, आप जिस प्राकृतिक लिंग के साथ जन्मे थे।

ट्रांससेक्सुअल (transsexual) वे होते हैं जिनमे जेंडर डिस्फोरिया की स्थिति अत्यधिक प्रबल तथा लंबे समय से होती है, जो अपने प्राकृत लिंग को अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने के लिए उसे बदलने की इच्छा रखते हैं।

गर्भाशय(जिसे कोख भी कहते हैं) महिलाओं मे पाया जाने वाला एक खोखला ,नाशपाती के आकार का अंग होता है जहां गर्भावस्था के दौरान बच्चे का विकास होता है।

परीक्षण

यदि आपको लगता है कि आपको या आपके बच्चे को जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) है तो अपने डॉक्टर से मिलें। अनेक देशों मे डॉक्टर ऐसे व्यक्तियों अथवा उनके बच्चों को जेंडर डिस्फोरिया क्लिनिक (Gender dysphoria,GD) clinic रेफर कर सकते हैं।

ऐसे क्लिनिक जेंडर डिस्फोरिया से ग्रसित लोगों को विशेष सहयोग तथा सहायता एवं आंकलन तथा निदान प्रदान करते हैं।

जेंडर डिस्फोरिया का परीक्षण करने के बहुत कड़े मानदंड हैं, ये बच्चों तथा वयस्कों के लिए अलग अलग होते हैं। लेकिन, ये मानदंड इस पूर्वानुमान पर आधारित हैं कि जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) विशुद्ध रूप से एक मनोरोग स्थिति है (मन से संबंधित), जिसको अब एक गलत धारणा के रूप मे माना जा रहा है।

इस कारण से, तथा जेंडर डिस्फोरिया के अत्यंत जटिल होने के तथ्य के कारण , विशेषज्ञ अब इसका निदान केवल मानदंडों की अपेक्षाकृत प्रत्येक व्यक्ति के आधार पर करते हैं।

जेंडर डिस्फोरिया का हर मामला विशिष्ट होता है तथा उसकी चिकित्सा भी उसी प्रकार करनी चाहिए। बच्चों तथा वयस्कों मे जेंडर डिस्फोरिया के निदान का परंपरागत मानदंड नीचे वर्णित किया जा रहा है:

बच्चों के लिए मानदंड

बच्चों में जैंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) होने के लिए निम्न बातें होनी चाहिए:

  • विपरीत लिंग का बनने के लिए या विपरीत लिंग का होने पर बार-बार ज़ोर देना तथा विपरीत लिंग की तरह व्यवहार करना (विपरीत लिंग का होने पर कोई विशेष लाभ पाने के लिए ही ऐसा करने का कारण नही होना चाहिए)
  • उनके लिंग द्वारा पहने जाने वाले विशिष्ट कपड़ों को नापसंद करना अथवा पहनने से मना करना तथा विपरीत लिंग द्वारा पहने जाने वाले विशिष्ट कपड़ों को पहनने की मांग करना अथवा अपने जननांगों के प्रति अप्रियता या अप्रसन्नता दिखाना तथा उनके विपरीत लिंग मे बदलने की जिद करना(उदाहरण के लिए अपने लिंग के अन्य सदस्यों की तरह सामान्यतः मूत्र त्याग करने के लिए मना करना)
  • अभी तक यौवनावस्था (जब एक बच्चा लैंगिक रूप से विकसित वयस्क मे प्रगति करता है) पर ना पहुँचना
  • कम से कम 6 महीनों तक इस प्रकार का व्यवहार करना

किशोरों तथा वयस्कों के लिए मानदंड

किशोरों तथा व्यस्को में जैंडर डिस्फोरिया का निदान करने के लिए निम्न बातें आवश्यक हैं :

  • गलत लिंग का होने का प्रबल तथा लगातार अनुभव करना तथा विपरीत लिंग का होने का अनुभव करना
  • अपने लिंग तथा उसकी भूमिका में अत्यंत असहज महसूस करना तथा अपने लिंग की शारीरिक विशेषताओं को अत्यंत नापसंद करना तथा उनसे मुक्त होने की इच्छा रखना जैसे वक्ष स्थल, चेहरे तथा शरीर के बालों एवं जननांग
  • ऐसी स्थिति का ना होना जिसके कारण वह विपरीत लिंग की शारीरिक विशेषताओं को प्रदर्शित करते हों (हालांकि इसके बारे में प्रश्न बहुत बढ़ रहे हैं)

अपनी इस स्थिति के कारण लंबे समय से चिंता, तनाव तथा सामाजिक एवं व्यवसायिक क्षेत्रों में हानि का अनुभव करना

मूल्यांकन

इन मानदंडों के साथ, जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria)  का निदान आपके अथवा आपके बच्चे की लैंगिक पहचान तथा पसंदीदा लैंगिक भूमिका के पूर्ण तथा अत्यंत व्यक्तिगत मूल्यांकन पर आधारित होगा।

आपके जीडी(GD) विशेषज्ञ आपके बचपन तथा यौवनावस्था के समय आपके लैंगिक विकास अथवा आपके बच्चे के बचपन के शुरुआती समय में लैंगिक विकास का आकलन करेंगे। वे आपके या आपके बच्चे मे विपरीत लिंग की पहचान के स्तर का निर्धारण करने के लिए आपका या उनका मनोवैज्ञानिक आकलन करेंगे।

इस स्थिति का सामना करने के लिए आपको या आपके बच्चे को काउंसलिंग तथा सहायता समूहों की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की जाएगी।

इस लेख मे, जेंडर का अर्थ है पुरुष या महिला होने की अनुभूति (भावना)।

एक स्थिति जो आपके प्राकृत लिंग तथा आपकी लैंगिक पहचान के बीच के अनुपयुक्त मेल की भावना को बताती है।

लैंगिक पहचान आपकी यह जानने की व्यक्तिगत समझ है कि आप किस लिंग से संबंधित हैं अथवा आप स्वयं को किस रूप मे देखते है|

इस लेख मे, सेक्स का अर्थ है पुरुष या स्त्री, आप जिस प्राकृतिक लिंग के साथ जन्मे थे।

ट्रांससेक्सुअल (transsexual) (परलैंगिक) वे होते हैं जिनमे जैंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) की स्थिति गहन तथा लंबे समय से होती है, जो अपने प्राकृत लिंग को अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने के लिए उसे बदलने की इच्छा रखते हैं।

इलाज

जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) की चिकित्सा का उद्देश्य इस स्थिति के ग्रसित लोगों को उनके तरीके से, उनकी पसंदीदा लैंगिक पहचान मे रहने मे सहायता करना है |

इसका अर्थ हर व्यक्ति के लिए अलग होगा तथा कुछ लोगों को दूसरों से ज्यादा चिकित्सा की आवश्यकता होगी।

एक बार जब आपमे या आपके बच्चे में जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) का परीक्षण हो जाएगा, तब विभिन्न चिकित्साओं पर विचार किया जा सकता है। चिकित्सा के उपलब्ध विकल्पों के बारे मे तथा उनके निहितार्थ के बारे मे आपको या आपके बच्चों को काउंसलिंग प्रदान की जाएगी। अधिक जानकारी के लिए काउंसलिंग देखें।

बच्चों में चिकित्सा

यदि आपका बच्चा 18 वर्ष से कम आयु का है, तो अनेक देशों मे उनको विशेषज्ञ के पास भेजा जा सकता है।

ये क्लिनिक जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) वाले बच्चों का आकलन कर सकते हैं तथा बच्चों एवं उनके परिवारों को विशेष चिकित्सा तथा सहायता प्रदान कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की चिकित्सा को शुरू करने से पहले बच्चे का पूर्ण रूप में आकलन किया जाएगा।

आपके बच्चे की चिकित्सा मल्टी डिसप्लनिरी टीम (multi-disciplinary team) (MDT) द्वारा व्यवस्थित की जाएगी, एक दल जिसमे विभिन्न स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ के एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। आपके बच्चे की MDT मे निम्न सम्मिलित किए जा सकते हैं:

एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, जो बच्चों तथा किशोरों में जेंडर डिस्फोरिया को समझने मे प्रशिक्षित होता है। बाल चिकित्सा एंडोक्रिनोलॉजिस्ट(paediatric endocrinologist), बच्चों में हॉर्मोन स्थिति के विशेषज्ञ।

यौवनावस्था से पहले वाले बच्चे

यदि आपके बच्चे के यौवनावस्था (जब एक बच्चा लैंगिक रूप से विकसित वयस्क मे प्रगति करता है) में पहुंचने से पहले उनमें जेंडर डिस्फोरिया का निदान होता है, तो उनको एंडोक्राइन(endocrine) चिकित्सा नहीं दी जाएगी। एंडोक्राइन(Endocrine) चिकित्सा का अर्थ है हॉर्मोन्स(शक्तिशाली रसायन) से चिकित्सा करना। अपने पसंदीदा लिंग के शारीरिक चिन्हों को उत्पन्न करने का यह पहला उपाय होता है।

कुछ चिकित्सा संस्थाओ की ओर से जारी दिशानिर्देशों मे एंडोक्राइन (endocrine) चिकित्सा को कम उम्र के बच्चों मे निर्देशित नहीं किया जाता क्योंकि बच्चों के यौवनावस्था मे पहुँचने से पहले उनके ट्रांसेक्सुअलिस्म (transsexualism) की पुष्टि नही किया जा सकती।

ट्रांसेक्सुअलिस्म(Transsexualism) मे जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) की गहन तथा लंबे समय तक रहने वाली भावना सम्मिलित होती है जिसके कारण कोई अपना लिंग बदलने की चाह रख सकता है।

इन संस्थाओं ने पाया है कि यौवनावस्था मे पहुंचने से पहले जितने बच्चों मे जेंडर डिस्फोरिया(Gender dysphoria) का निदान होता है उनमें से 75-80% बच्चों मे यह स्थिति यौवनावस्था के बाद नही रहती। इसलिए यौवनावस्था के बाद तब तक एंडोक्राइन(endocrine) चिकित्सा निर्देशित नहीं की जाती, जब तक जेंडर डिस्फोरिया (Gender dysphoria) का निदान सुनिश्चित नही हो जाता।

16 वर्ष तक के बच्चों मे

यदि आपके बच्चे में ट्रांसेक्सुअलिस्म (transsexualism) का निदान हो जाता है तथा वे यौवनावस्था तक पहुँच चुके हों, तो उनको gonadotrophin-releasing hormone(GnRH) analogues चिकित्सा दी जा सकती है। ये कृत्रिम (मानव निर्मित) हॉर्मोन्स होते हैं जो आपके शरीर द्वारा प्राकृतिक रूप में बनाए जाने वाले हॉर्मोन्स को दबा देते हैं।

एंडोक्राइन(Endocrine) चिकित्सा का निर्देश किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा होना चाहिए तथा आपके बच्चे की होने वाली देखभाल में उनकी भूमिका बनी रहनी चाहिए। एक Endocrinologist (हार्मोन स्थितियों के विशेषज्ञ) द्वारा भी आपके बच्चे के निदान को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

यौवनावस्था (puberty) चरणों में विभाजित होती है। इन्हें टैनर स्टेजेज़(Tanner stages) कहते हैं, जिसका नाम इसको पहचानने वाले पहले व्यक्ति James Mourilyan Tanner पर रखा गया था।

GnRH analogues का प्रयोग उन बच्चों के लिए उपयुक्त हो सकता है जो Tanner stage 2 पर पहुंच चुके हों, जिसका अर्थ है की कुछ शारीरिक बदलाव होने लगे हैं, जैसे जननागों के बालों का उगना। लड़कियों में, यह लगभग 11 वर्ष की आयु में तथा लड़कों में यह लगभग 12 वर्ष की आयु में होता है।

यौवनावस्था के विभिन्न स्तरों तथा उन में होने वाले बदलावों के बारे में जानकारी के लिए प्यूबर्टी के लक्षण देखें।

यौवनावस्था में होने वाले कुछ बदलाव हॉर्मोन्स द्वारा संचालित होते हैं। उदाहरण के लिए, टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन, जो लड़कों के वृषणों द्वारा उत्पादित होता है, वह लिंग (penis) के विकास को प्रोत्साहित करता है। क्योंकि GnRH analogues आपके बच्चे के शरीर द्वारा उत्पादित हॉर्मोन्स को दबाते हैं, वे यौवनावस्था को भी दबा देते हैं।

GnRH analogues को आपके बच्चे द्वारा 16 वर्ष का होने तक लिया जा सकता है, जिसके बाद क्रॉस सेक्स(cross sex) हॉर्मोन्स लिये जा सकते हैं।

16 वर्ष से अधिक आयु के बच्चे

यदि आपका बच्चा कई वर्षों से GnRH analogues ले रहा है तथा अभी भी उसका निदान ट्रान्ससेक्शूअल के रूप मे होता है तो उन्हे क्रॉस सेक्स हारमोंस दिये जा सकते हैं। यह आपके बच्चे के शरीर को उनकी लैंगिक पहचान के अनुरूप करने के लिए परिवर्तित कर सकते हैं। हॉर्मोन्स के इन प्रभावों को केवल आंशिक रूप में ही उलट किया जा सकता है इसलिए 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों में इसका प्रयोग नहीं किया जाता।

जब एक बार आपका बच्चा 18 वर्ष की आयु मे वयस्कता तक पहुँच जाता है, तो वे जेंडर कॉन्फ़र्मेशन सर्जरी (gender confirmation surgery) की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं, जिससे उनका लिंग अपरिवर्तनीय ढंग से (जिसे ट्रैंज़िशन भी कहते हैं) बदल जाएगा। जेंडर डिसफ़ोरिया का अनुभव करने वाले सभी बच्चे ट्रैंज़िशन तक नही पहुँचते। वास्तव मे, जो बच्चे ट्रान्स सेक्शूअल बनते हैं उनकी संख्या बहुत कम होती है।

क्रॉस सेक्स हॉर्मोन चिकित्सा तथा जेंडर कॉन्फ़र्मेशन सर्जरी के बारे मे अधिक जानकारी के लिए, नीचे दिए गए वयस्कों की चिकित्सा भाग को देखें।

आपके बच्चे में चिकित्सा की मात्रा उनमे जेंडर डिसफ़ोरिया की भावना की प्रबलता तथा वह कितनी अवधि से है, इस पर निर्भर करेगी।

लेकिन सभी बच्चों तथा उनके परिवारों को जेंडर आयडेंटिटी क्लीनिक द्वारा काउंसलिंग तथा सहयोग प्रदान किया जाना चाहिए।

व्यस्कों का इलाज

जिन वयस्कों में जेंडर डिसफ़ोरिया का निदान किया जाता है, उन्हे तथा ट्रान्ससेक्शूअल लोगों को अनेक देशों मे विशेष जेंडर आयडेंटिटी क्लीनिक रेफर किया जाता है। ये क्लीनिक जेंडर डिसफ़ोरिया से ग्रसित लोगों को की जाँच करते हैं| वे अपने पसंदीदा लिंग की भूमिका मे जीने के विषय में सहयोग तथा सलाह भी प्रदान कर सकते हैं, इसके साथ साथ निम्नलिखित सहायता भी प्रदान करते हैं:

  • मानसिक स्वास्थ्य सहयोग
  • हॉर्मोन चिकित्सा
  • अपने पसंदीदा लिंग के कपड़े पहनने के तरीकों के बारे मे
  • अपने पसंदीदा लिंग के अनुसार व्यवहार करने के बारे मे
  • भाषा तथा बातचीत करने की थेरेपी
  • बाल हटाने की चिकित्सा
  • सहायता समूह द्वारा जेंडर डिसफ़ोरिया से ग्रसित अन्य लोगों से मिलवाने मे सहायता करना
  • आपके परिवार के लिए रिश्तेदारों का सहायता समूह बनवाने में

कुछ लोगों के लिए, अपनी लैंगिक पहचान में सहज महसूस करने के लिए केवल ऐसे क्लीनिक द्वारा सहयोग तथा सलाह मिलना काफी रहता है। लेकिन, दूसरों को अत्यंत व्यापक चिकित्सा की आवश्यकता होगी, जैसे एक लिंग से दूसरे में पूर्ण रूप से बदलना। चिकित्सा की मात्रा तथा उसकी सीमा पूर्ण रूप से आप पर निर्भर करती है।

एक बार जब आपको ऐसे क्लीनिक के लिए रेफर कर दिया जाता है, तो यह संभावना है कि लगभग तीन महीने के लिए आपका एक अन्य पूर्ण जाँच की जाएगी। आमतौर पर यह है एक मनोरोग विशेषज्ञ(मानसिक तथा भावनात्मक स्वास्थ्य स्थितियों की चिकित्सा करने वाले चिकित्सक) की सहायता से होगा। यह आंकलन आप के निर्णय की पुष्टि करने के लिए आवश्यक है तथा, यदि आप हॉर्मोन थेरेपी लेना चाहते हैं तो इसका अर्थ है कि आप पहले आवश्यक स्वास्थ्य जाँच करवा सकते हैं।

क्रॉस-सेक्स हार्मोन थेरेपी(Cross-sex hormone therapy)

क्रॉस-सेक्स हार्मोन थेरेपी का अर्थ है अपने पसंदीदा लिंग हेतु हॉर्मोन्स लेना:

  • एक ट्रांस पुरुष(स्त्री का पुरुष बनना) टेस्टोस्टरॉन लेगा
  • एक ट्रांस स्त्री (पुरुष का महिला बनना) एस्ट्रोजन(oestrogen) लेगी

हार्मोन थेरेपी चिकित्सा का उद्देश्य आपको आपकी शारीरिक बनावट में तथा आप मनोवैज्ञानिक(मानसिक) रूप से कैसा अनुभव करते हैं, दोनों तरह से आपको सहज करवाना है। ये हॉर्मोन्स आपकी लैंगिक पहचान के आधार पर आपके शरीर को अधिक स्त्री रूप मे या अधिक पुरुष रूप में बदलने की प्रक्रिया को शुरू करते हैं।

आपको अपने जेंडर डिसफ़ोरिया के साथ रहने मे समर्थ बनाने के लिए केवल हॉर्मोन चिकित्सा की ही आवश्यकता हो सकती है। हॉर्मोन्स से आपकी भावनाओं मे सुधार आ सकता है जिसका अर्थ है कि आपको अपने पसंदीदा लिंग मे रहने की अथवा ऑपरेशन करवाने की आवश्यकता नही रहेगी|

प्रजननशक्ति

हार्मोन थेरेपी को शुरू करने से पहले, आपके विशेषज्ञ को आपसे यह विचार विमर्श करना चाहिए की आपकी प्रजनन शक्ति पर इसका क्या प्रभाव हो सकता है।

एस्ट्रोजन(oestrogen) लेने वाली ट्रांस महिलाओं की प्रजनन क्षमता कम हो सकती है क्योंकि एस्ट्रोजन से शुक्राणुओं की संख्या तथा शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम हो सकती है। कुछ ट्रांस महिलाएं हार्मोन थेरेपी शुरू होने से पहले अपने शुक्राणुओं को शुक्राणु बैंक में रखने का निर्णय करती हैं, जिससे यदि वे बाद में बच्चा करना चाहे तो इस शुक्राणु का प्रयोग कर सकें।

टेस्टोस्टेरोन का सेवन करने वाले ट्रांस पुरुष भी कम प्रजननक्षम हो सकते हैं।

ट्रांस पुरुष तथा महिलाओं में, इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि यदि हॉर्मोन्स लेना बंद कर दिया जाए तो उनकी प्रजनन क्षमता पुनः सामान्य हो जाएगी।

ट्रांस महिला

यदि आप एक ट्रांस महिला हैं, तो हार्मोन चिकित्सा के कारण आप कुछ बदलाव महसूस कर सकती हैं,जिसमे शामिल हैं :

  • आपका लिंग (penis) तथा अंडकोष छोटे हो सकते हैं
  • आपकी मांसपेशियाँ घट सकती हैं
  • आपके नितंबों पर चर्बी जमा हो सकती है
  • आपके स्तन गांठयुक्त हो सकते हैं तथा आकार मे थोड़ा बढ़ सकते हैं
  • आपके चेहरे तथा शरीर के बाल कम हो सकते हैं
  • हॉर्मोन चिकित्सा से ट्रांस महिला की आवाज़ प्रभावित नहीं होगी| आवाज़ को भारी बनाने के लिए, ट्रांस महिला को वोकल थेरपी की आवश्यकता होगी और संभवतः स्वर तंत्र (vocal cord) या trachea (वायुनली )के ऑपरेशन की।
  • हॉर्मोन चिकित्सा के कारण लिंग के उत्तेजित(erection) होने मे तथा चरमोत्कर्ष (orgasm) प्राप्त करने मे कठिनाई हो सकती है|

ट्रांस पुरुष

यदि आप एक ट्रांस पुरुष हैं, तो हार्मोन चिकित्सा के कारण आप कुछ बदलाव महसूस कर सकते हैं, जिसमे शामिल हैं :

  • आपके चेहरे तथा शरीर पर बाल अधिक हो सकते हैं
  • आपकी मांसपेशियाँ बढ़ सकती हैं
  • आपका क्लिटरिस(clitoris, स्त्री जननांगों का एक छोटा एवं संवेदनशील भाग) बढ़ सकताहै
  • आपकी माहवारी रुक सकती है
  • आपमे कामेच्छा (libido) बढ़ सकती है

हॉर्मोन चिकित्सा के कारण ट्रांस पुरुषों मे गंजापन तथा मुहाँसे हो सकते हैं। आपकी

आवाज थोड़ी भारी हो सकती है लेकिन यह अन्य पुरुषों की जितनी भारी नही होगी।

नियंत्रण

इन हॉर्मोन्स को लेते समय, अनेक देशों मे उस व्यक्ति को जेंडर आयडेंटिटी क्लीनिक में जांच के लिए नियमित रूप से जाना होगा। वहाँ हॉर्मोन चिकित्सा से आपको लाभ हो रहा है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए आप की जांच होगी, क्योंकि कुछ लोगों को हार्मोन चिकित्सा के प्रभाव अप्रिय लग सकते हैं।

यदि आपको लगता है कि हॉर्मोन चिकित्सा आपके लिए सही नहीं है, तो इस बारे में आपकी चिकित्सा कर रहे स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ से अवश्य बात करें| यदि आवश्यकता हो, तो आप हॉर्मोन्स लेना बंद कर सकते हैं, हालांकि इससे होने वाले बदलाव अपरिवर्तनीय होते हैं जैसे:

  • ट्रांस पुरुषों में आवाज भारी होना
  • ट्रांस महिलाओं में स्तनों का विकास होना

वैकल्पिक रूप मे, आप इसके परिणाम मिलने मे लगने वाले लंबे समय से हताश हो सकते है क्योंकि इस चिकित्सा से बदलावों के विकसित होने में कुछ महीनों का समय लग सकता है। हॉर्मोन्स से आपके अस्थि पंजर(skeleton) के आकार में बदलाव नहीं होता, उदाहरण के लिए आपके कंधों या आपके नितंबों की चौड़ाई मे बदलाव नहीं होता। इससे आपकी लंबाई भी नहीं बदलती।

जेंडर डिस्फोरिया के लिए हारमोंस आपको इंटरनेट जैसे अन्य स्रोतों से भी उपलब्ध हो सकते हैं तथा अपने क्लिनिक से लेने की जगह यहाँ से लेना अधिक लुभावना हो सकता है। लेकिन अन्य स्रोतों के हॉर्मोन्स मान्यता प्राप्त (licensed) नही होते, इसलिए यह सुरक्षित नहीं हो सकते| यदि आप इन हारमोंस को लेने का निर्णय कर लेते हैं तो अपने क्लीनिक को इस बारे में अवश्य बताएं ताकि वे आप की स्थिति की निगरानी कर सकें।

वास्तविक अनुभव Real life experience (RLE)

यदि आप जेंडर कॉन्फ़र्मेशन सर्जरी(gender confirmation surgery) करवाना चाहते हैं, तो आपको अपनी पसंद की लैंगिक पहचान (gender identity) मे कम से कम 1 साल तक हर समय रहना होगा। इसे वास्तविक जीवन अनुभव(Real life experience-RLE) कहते हैं तथा स्थाई ऑपरेशन करवाना सही निर्णय है या नही यह सुनिश्चित करने मे मदद मिलेगी।

जब आपकी हॉर्मोन चिकित्सा चल रही हो, तो आप स्वयं के तैयार होने पर अपने चिकित्सक के सहयोग से इसे शुरू कर सकते हैं। RLE की अवधि हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है लेकिन अक्सर ये 1 से 2  वर्ष के बीच होती है।

पूर्ण लिंग बदलने के ऑपरेशन की तैयारी के लिए आप RLE के दौरान अन्य विभिन्न ऑपरेशन करवा सकते हैं,जिसमे शामिल है:

ट्रांस पुरुषों के लिए mastectomy (स्तनों को हटाना )

ट्रांस महिलाओं के लिए mammoplasty (cosmetic breast surgery)

ट्रांस महिलाओं के लिए चेहरे का ऑपरेशन  (feminising facial surgery)

ट्रांस महिलाओं को स्तनों के विकास मे चिकित्सा के अधिकतम प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए, mammoplasty करवाने से पहले कम से कम 18 महीनों तक हॉर्मोन चिकित्सा लेनी चाहिए।

Gender confirmation surgery

जब आपने अपना RLE पूरा कर लेते हैं तथा आप और आपकी multi-disciplinary team (MDT) को यह लगता है कि आप तैयार हैं, तब आप अपने लिंग को स्थाई रूप से बदलवाने के लिए ऑपरेशन करवाने का निर्णय कर सकते हैं।

इसके सबसे आम विकल्प नीचे दिए जा रहे हैं, लेकिन आप अपने टीम के सदस्यों तथा सर्जन से इसके संपूर्ण विकल्पों के बारे में बात कर सकते हैं।

ट्रांस पुरुष ऑपरेशन

ट्रांस पुरुषों के लिए, ऑपरेशन मे निम्न सम्मिलित हो सकते हैं :

  • गर्भाशय को निकलवाना(hysterectomy),
  • डिंबवाही नलियों तथा अंडाशयों को निकलवाना(salpingo-oophorectomy)
  • phalloplasty or a metoidioplasty द्वारा लिंग (penis) निर्माण
  • Phalloplasty मे मौजूदा योनि ऊतकों तथा बाजू के अंदर के हिस्से से त्वचा को लेकर लिंग (penis) निर्माण किया जाता है
  • Metoidioplasty मे हॉर्मोन चिकित्सा के परिणाम स्वरूप बढ़े हुए clitoris से लिंग का निर्माण करना शामिल है

इस प्रकार की शल्यक्रिया का उद्देश्य एक कार्यशील लिंग का निर्माण करना होता है, जिससे आप खड़े होकर मूत्र त्याग कर पाए तथा यौन उत्तेजना को बनाए रख पाये। इसके लिए आपको एक से अधिक ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है।

ट्रांस महिला ऑपरेशन

ट्रांस महिला बनने के लिए ,निम्न ऑपरेशन किये जा सकते है :

  • वृषणों को निकलवाना(orchidectomy )
  • लिंग को निकलवाना(penectomy)
  • लिंग के बचे हुए ऊतकों से योनि का निर्माण (जिसे  Vaginoplasty कहते हैं)
  • योनि का निर्माण तथा उसकी सतह लिंग की त्वचा से बनाई जाती है, scrotum (एक थैला नुमा रचना जिसमे वृषण होते हैं) के ऊतकों का प्रयोग कर labia का निर्माण किया जाता है
  • मूत्रमार्ग को छोटा करके पुनः स्थापित किया जाता है

इस प्रकार के ऑपरेशन का उद्देश्य एक कार्यशील योनि का निर्माण करना होता है जो देखने मे स्वीकार्य हो तथा यौन उत्तेजना को बनाए रख पाये।

ऑपरेशन के बाद

ऑपरेशन के बाद अधिकतर ट्रान्स सेक्शूअल अपने नए लिंग से प्रसन्न होते हैं तथा अपनी लैंगिक पहचान में सहज महसूस करते हैं। पिछले 20 सालों में कराई गई  जेंडर बदलने की सर्जरी (gender reassignment surgery) के अनेक अध्ययनों की समीक्षा से यह पता चलता है कि इसे करवाने वाले 96% लोग संतुष्ट थे। हालांकि, इनमें से कुछ अध्ययन उच्च गुणवत्ता वाले नही हो सकते।

Gender confirmation surgery के पश्चात, एक संभावित जटिलता यह है कि लोगों को उनकी स्थिति के कारण पूर्वाग्रह या पक्षपात का सामना करना पड़ सकता है। चिकित्सा के कारण कभी-कभी लोगों में निम्न भावनाएं आ सकती है:

  • अकेलापन- यदि वे ऐसे लोगों के साथ नहीं हैं जो यह समझ पाएं कि वे किस स्थिति से गुजर रहे हैं तो वे बहुत अकेलापन महसूस करते हैं
  • सामाजिक रूप में स्वीकार्य ना हो पाने के बारे मे बहुत चिंतित होना अथवा डरना
  • कार्यक्षेत्र में भेदभाव का सामना
  • भेदभाव से बचने के लिए कानूनी संरक्षण होता है (gender dysphoria के दिशानिर्देशों को देखें), लेकिन अन्य प्रकार के पूर्वाग्रहों सामना करना मुश्किल हो सकता है, यदि आप चिकित्सा कराने के बाद चिंतित या अवसाद ग्रसित महसूस कर रहे हैं तो स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ से मिलें अथवा अपने चिकित्सक से बात करें।

यौन उन्मुखीकरण(Sexual orientation)

एक बार इस प्रक्रिया के पूरा होने पर यह संभव है कि ट्रांस पुरुष या महिला अपने यौन अभिविन्यास में बदलाव महसूस करें। उदाहरण के लिए, एक ट्रांस महिला जो ऑपरेशन से पहले महिलाओं की ओर आकर्षित होती थी वह ऑपरेशन के बाद पुरुषों की ओर आकर्षित होने लगे। हालांकि यह प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न होता है तथा अनेक transsexuals का यौन

उन्मुखीकरण के बाद नहीं बदलता।

यदि आप ट्रान्स सेक्शूअल हैं जो इस परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजर रहे हों, तो यह संभावित है कि इसके पूरा होने तक आपको अपनी यौन प्राथमिकता के बारे में पता ना लगे। लेकिन आपको प्रयास करना चाहिए कि आप इस कारण चिंतित ना हो। कई लोगों के लिए, यौन

उन्मुखीकरण का विषय बदलाव की प्रक्रिया से कम महत्त्व का होता है।

इस लेख मे जेंडर का अर्थ है पुरुष या महिला होने की अनुभूति |

Gender dysphoria एक ऐसी स्थिति है जो आपके प्राकृतिक लिंग तथा लैंगिक पहचान के बीच बेमेलता की भावना को बताती है|

लैंगिक पहचान यह जानने की आपकी व्यक्तिगत समझ है कि आप किस लिंग से संबंधित हैं अथवा आप स्वयं को किस रूप मे देखते हैं|

हॉर्मोन्स शक्तिशाली रसायनो का समूह है जो शरीर द्वारा उत्पादित किए जाते हैं तथा जिनका व्यापक प्रभाव होता है।

ovaries (अंडाशय)- यह स्त्री प्रजनन तंत्र मे दो छोटे, गोलाकार अंग होते हैं जो प्रत्येक महीने एक डिंब(egg) को मुक्त करते हैं।

इस लेख मे, सेक्स का अर्थ पुरुष या स्त्री, आप जिस प्राकृतिक लिंग के साथ जन्मे थे|

वृषण पुरुष प्रजनन तंत्र का भाग होते हैं। यह शुक्राणुओं का उत्पादन करते हैं तथा लिंग के पीछे लटके हुए वृषणकोष की थैली (scrotum -त्वचा की एक ढीली थैली नुमा रचना) में स्थित होते हैं।

Transsexual वे होते हैं जिनमे Gender dysphoria की स्थिति अत्यंत प्रबल तथा लंबे समय से होती है, जो अपने प्राकृत लिंग को अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने के लिए उसे बदलने की इच्छा रखते हैं।

योनि मांसपेशियों की एक नली होती है जो गर्भाशय का मुख का भाग(cervix) से लेकर योनि मुख(vulva) का फैली होती है।

गर्भाशय(या कोख) महिलाओं में पाए जाने वाला एक खोखला, नाशपाती के आकार का अंग होता है जहां गर्भावस्था के दौरान बच्चे का विकास होता है।

रूथ की कहानी

राहुल, 22 वर्ष, का जन्म एक पुरुष शरीर में हुआ था लेकिन वह 16 वर्ष की आयु से जान गई थी कि वह एक महिला बनना चाहती है।वह अपनी हार्मोन चिकित्सा तथा ऑपरेशन के बारे मे तथा वह अब कैसा महसूस करती हैं इस बारे में विस्तृत रूप में बताती हैं।

नीति दिशानिर्देश

विश्व के कुछ देशों में Gender Recognition Act लागू है जो ट्रांस पुरुष तथा महिलाओं को कुछ कानूनी अधिकार देता है|

आप निम्न जानकारी को जानने मे इच्छुक हो सकते हैं :

Gender Recognition Act के अंतर्गत ट्रांस पुरुष तथा महिलाएं निम्न के लिए योग्य हो सकते हैं:

  • अपनी लैंगिक पहचान को स्वीकार करने के Gender Recognition Certificate के लिए आवेदन करने तथा उसे प्राप्त करने के
  • नया जन्म प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेन्स तथा पासपोर्ट प्राप्त करने के
  • अपने नये लिंग मे विवाह करने के
  • Gender Recognition Certificate का आवेदन करने के लिए, आपकी आयु 18 वर्ष से अधिक होनी आवश्यक है

आवेदन की प्रक्रिया में आपको निम्न बातें प्रमाणित करनी होती हैं :

  • आपको gender dysphoria था अथवा है
  • आप पिछले 2 वर्षों तक अपने पसंदीदा लिंग के अनुसार रह चुके हों
  • आप अपने पसंदीदा लिंग मे स्थाई रूप से रहने का इरादा रखते हैं

Gender Recognition Act तथा Gender Recognition Certificate का आवेदन कैसे करें, इस बारे अधिक जानकारी प्राप्त करें।

Sex Discrimination Act 1975

विश्व के कुछ देशों मे लागू इस ऐक्ट के अंतर्गत जो लोग  gender reassignment surgery करवा चुके हैं, करवाने जा रहे हैं अथवा भविष्य मे करवाना चाहते हैं, यह उनको रोज़गार मे निम्न के विरुद्ध कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराता है:

  • अत्याचार
  • उत्पीड़न
  • भेदभाव

यदि आपको कार्यक्षेत्र में भेदभाव का सामना करना पड़ता है तो इसके बारे में तुरंत सूचित करें।

ट्रांसजेंडर हेल्थ के लिए वर्ल्ड प्रोफेशनल एसोसिएशन(World Professional Association for Transgender Health)

ट्रांसजेंडर हेल्थ के लिए वर्ल्ड प्रोफेशनल एसोसिएशन, ट्रान्सजेंडर लोगों के स्वास्थ्य के लिए प्रमाणों पर आधारित देखभाल को प्रोत्साहित करती है।

यह देखभाल के WPATH मापदंडों कों जारी करता है जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा ट्रान्स सेक्शूअल लोगों की चिकित्सा करने के क्लिनिकल दिशा निर्देश होते हैं।

इस लेख मे जेंडर का अर्थ है पुरुष या महिला होने की अनुभूति।

एक स्थिति जो आपके प्राकृत लिंग तथा आपकी लैंगिक पहचान के बीच के अनुपयुक्त मेल की भावना को बताती है।

लैंगिक पहचान यह जानने की आपकी व्यक्तिगत समझ है कि आप किस लिंग से संबंधित हैं अथवा आप स्वयं को किस रूप मे देखते हैं|

इस लेख मे, सेक्स का अर्थ पुरुष या स्त्री, आप जिस प्राकृतिक लिंग के साथ जन्मे हैं।

ट्रैन्सेक्शूअल वे होते हैं जिनमे Gender dysphoria की स्थिति बहुत प्रबल तथा लंबे समय से होती है, जो अपने प्राकृत लिंग को अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने के लिए उसे बदलने की इच्छा रखते हैं।

परिभाषा

Gender dysphoria एक ऐसी स्थिति है जिसमे व्यक्ति यह महसूस करता है कि उसके प्राकृतिक लिंग तथा लैंगिक पहचान के बीच मेल सही नहीं है।

प्राकृतिक लिंग का अर्थ है आप जिस लिंग के साथ पैदा हुए थे| इसका निर्धारण यौन अंगों की उपस्थिति से होता है, ये हैं :

  • पुरुषों मे वृषण (testes) 
  • महिलाओं में अंडाशय(ovaries )

Gender identity आपकी व्यक्तिगत संवेदना है कि आप स्वयं को किस लिंग का मानते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक व्यक्ति स्वयं को एक स्त्री के रूप में देखता है तो उनकी जेंडर आयडेंटिटी स्त्री की है।

अधिकतर लोगों में, उनका प्राकृतिक लिंग तथा जेंडर आयडेंटिटी या पहचान एक ही होती है| लेकिन कुछ लोग इन दोनों के बीच बेमेलता का अनुभव करते हैं और इसे gender dysphoria कहते हैं।

Gender dysphoria एक स्वीकृत चिकित्सीय स्थिति होती है। यह एक जटिल स्थिति हो सकती है तथा अलग-अलग लोगों को अलग प्रकार से प्रभावित करती है। यह कोई मानसिक रोग नहीं है|

Gender dysphoria का व्यक्ति की लैंगिकता से कोई संबंध नही होता| अन्य लोगों के समान ही, gender dysphoria से ग्रसित व्यक्ति heterosexual (विपरीत लिंग कामी), homosexual (समलिंगी), अथवा bisexual(उभयलिंगी) हो सकता है |

Cross-dressers (Transvestites-विलिंगी वेशधारी)

कभी कभी कुछ लोग विपरीत लिंग के सदस्यों के समान कपड़े आदि पहनकर तैयार होना पसंद करते हैं, किन्तु वह पूर्ण रूप से उस लिंग का सदस्य बनकर नही रहते। इन लोगों को विलिंगी वेशधारी (cross-dressers या transvestites) कहते हैं।

कुछ क्रॉस ड्रेसिंग यानी दूसरे जेंडर के कपड़े पहना कामोत्तेजना से संबंधित होती हैं तथा इस प्रकार की क्रॉस ड्रेसिंग को  ट्रान्स वेटिस्म कह सकते हैं| अन्य लोगों के लिए क्रॉस ड्रेसिंग कामोत्तेजना से संबंधित नहीं होती तथा इसे दोहरी भूमिका वाला ट्रान्सवेटिस्म कहते हैं।

ट्रान्ससेक्शूअल लोग

ट्रान्ससेक्शूअल(Transsexual) लोगों या ट्रांस लोगों मे gender dysphoria की प्रबल तथा लंबे समय तक रहने वाली भावना होती है।

ट्रान्ससेक्शूअल लोग प्राकृतिक पुरुष हो सकते हैं जो स्वयं को महिला के रूप में देखते हैं अथवा प्राकृतिक महिलाएं हो सकती हैं जो स्वयं को पुरुष के रूप में देखती हैं। कुछ लोग स्वट्रान्ससेक्शूअल ख़ुद को पुरुष अथवा महिला के रूप में नहीं देखते किन्तु वह दोनों के ही समान अनुभव करते हैं अथवा उन दोनों के बीच का मानते हैं।

अनेक ट्रान्ससेक्शूअल लोग हार्मोन चिकित्सा तथा ऑपरेशन द्वारा अपने प्राकृतिक लिंग को बदलवाने की इच्छा रखते हैं| इसे आमतौर पर “transitioning” कहते हैं।

ऐसा करवा चुके, करवा रहे या करवाने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को निम्न नामों से जाना जाता है:

  • ट्रांस पुरुष( महिला से पुरुष बनना )
  • ट्रांस महिला( पुरुष से महिला बनना )
सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk

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महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।