क्या आप कोरोना वायरस को लेकर चिंतित हैं? इसके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हमारे कोरोनावायरस हब पर जाएँ.

×
Your.MD के सभी लेखों (A-Z) की समीक्षा प्रमाणित डॉक्टरों द्वारा की जाती है

स्तंभन दोष ( Erectile dysfunction, नपुंसकता)

नपुंसकता का क्या अर्थ है?

स्तंभन दोष जिसे नपुंसकता भी कहते हैं, संतोषजनक यौन क्रिया के लिए पर्याप्त स्तंभन (erection) को प्राप्त करने की तथा उसे बनाए रखने की असमर्थता है।

स्तंभन दोष के लक्षणों के बारे में और पढ़ें।

नपुंसकता एक बहुत आम स्थिति है, विशेष रूप से अधिक आयु के पुरुषों में। यह अनुमानित है की 40 से 70 वर्ष की आयु के सभी पुरुषों मे से आधे में यह किसी स्तर तक होगा।

ऐसा क्यों होता है?

नपुंसकता के अनेक कारण हो सकते हैं जो शारीरिक तथा मनोवैज्ञानिक दोनों हो सकते हैं।

शारीरिक कारणों में शामिल हैं:

  • लिंग मे जाने वाली रक्त नलिकाओं का संकुचित होना - यह साधारणतः उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल या मधुमेह से संबंधित होता है।
  • हार्मोनल समस्याएं
  • ऑपरेशन या चोट लगना

स्तंभन दोष के मनोवैज्ञानिक कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं :

  • चिंता
  • अवसाद
  • संबंधों में समस्याएं

स्तंभन दोष के कारणों के बारे में अधिक पढ़ें|

यदि मुझे नपुंसकता है तो मुझे क्या करना चाहिए?

आप शर्मिंदा महसूस कर सकते हैं लेकिन स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ द्वारा नपुंसकता का निदान किया जाना अत्यंत आवश्यक है जिससे इसके कारणों का पता लगाया जा सके।

आमतौर पर इसका परीक्षण अपने डॉक्टर के साथ परामर्श करके किया जा सकता है। इसमें आप के लक्षणों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देने के साथ साथ शारीरिक जांच करना तथा कुछ साधारण परीक्षण करना शामिल होगा |

नपुंसकता के परीक्षण बारे में और पढ़ें|

नपुंसकता का इलाज कैसे किया जाता है?

स्तंभन दोष की मुख्य चिकित्सा इस समस्या के कारणों का पता लगाकर की जाती है, कि वह शारीरिक है अथवा मनोवैज्ञानिक।

नपुंसकता के सबसे सामान्य कारणों में से एक धमनियों का संकुचित हो जाना (जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं) है। इन मामलों में आपके डॉक्टर जीवनशैली में परिवर्तन करने की सलाह दे सकते हैं जैसे वजन कम करना, जिससे आप में कार्डियोवेस्कुलर(हृदय) रोग के जोखिम को कम करने का प्रयास किया जा सके। इससे आपको लक्षणों में राहत मिलने के साथ-साथ अपने सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाने मे मदद मिल सकती ह। एथेरोस्क्लेरोसिस की चिकित्सा के लिए आपको कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाली स्टेटिन्स जैसी दवाईयां तथा आपके रक्तचाप को कम करने वाली दवाईयां दी जा सकती हैं।

स्तंभन दोष के लिए अनेक चिकित्सा विकल्प हैं जो अत्यंत सफल साबित हुए हैं। सिल्डेनाफिल (जो वियाग्राके रूप मे बिकती है) जैसी दवाई का प्रयोग करके कम से कम दो तिहाई पुरुषों मे इसे सफलतापूर्वक प्रबंधित किया जा सकता है। 90% मामलों में, लिंग में रक्त प्रवाह को बढ़ाने वाले तथा इरेक्शन उत्पन्न करने वाले वेक्यूम पम्प भी सफल होते हैं।

मनोवैज्ञानिक चिकित्सा में कोगनीटिव बिहेवियरल थेरेपी(सीबीटी, CBT) तथा सेक्स थेरेपी शामिल है। कुल मिलाकर, हाल के कुछ वर्षों में स्तंभन दोष के उपचारों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है| इन दिनों अधिकतर लोग अंततः एक सफल यौन क्रिया में समर्थ हो जाते हैं |

नपुंसकता के उपचार के बारे में और पढ़ें|

नपुंसकता के क्या लक्षण हैं?

स्तंभन दोष(erectile dysfunction) का मुख्य लक्षण एक संतोषजनक यौन क्रिया के लिए स्तंभन प्राप्त करने तथा उसको बनाए रखने में असमर्थता है।

नपुंसकता को शीघ्र पतन जैसी स्खलन समस्याओं से भ्रमित नही करना चाहिए, जो वह स्थिति है जिसमें उत्तेजना, चरम आनंद (ओर्गास्म) तथा स्खलन की प्रक्रिया बहुत जल्दी हो जाती है।

क्या आप इरेक्शन बनाए रखने में असमर्थ हैं?

कभी-कभी स्तंभन दोष या नपुंसकता केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही होता है। जैसे हस्तमैथुन के दौरान आप स्तंभन प्राप्त करने में समर्थ हो सकते हैं, अथवा कभी कभी आप सोकर उठने पर इरेक्शन पाते हैं लेकिन अपने यौन साथी के साथ इसे प्राप्त करने में असमर्थ होते है।

इन परिस्थितियों में, यह संभव है कि स्तंभन दोष का मूल कारण मुख्यतः मनोवैज्ञानिक (तनाव से संबंधित) हो। लेकिन यदि आप किसी भी परिस्थिति में इरेक्शन प्राप्त करने में असमर्थ हैं तो यह संभव है कि इसका मूल कारण मुख्यतः शारीरिक हो।

चिकित्सीय परामर्श लेने का प्रयास करें

यदि स्तंभन दोष कुछ हफ्तों से अधिक समय तक लगातार बना रहता है तो अपने डॉक्टर से मिलें। वे आपके सामान्य स्वास्थ्य का आकलन करेंगे क्योंकि यह स्थिति किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का पहला चिन्ह हो सकती है जैसे हृदय रोग (जब हृदय की रक्त आपूर्ति अवरुद्ध अथवा बाधित हो जाती है)।

अनेक वेबसाइट स्तंभन दोष की चिकित्सा प्रदान करने का दवा करती हैं लेकिन इनका उपयोग करने की सलाह नहीं दी जाती। इन वेबसाइट द्वारा प्रदान की गई दवाईयां नकली तथा घातक हो सकती हैं| यदि दवाईयां प्रामाणिक भी हों, तो हो सकता है कि वे आपके लिए उपयुक्त ना हो।

यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि स्तंभन दोष के लिए आप अपने डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाइयों का ही सेवन करें।

स्तंभन दोष के इलाज के बारे में और पढ़ें।

स्तंभन दोष (इरेक्शन आने में दिक्कत) का कारण

कुछ मेडिकल स्थितियां, खास दवाइयाँ या फिर तनाव से संबंधित समस्याएं(मनोवैज्ञानिक) आदि स्तंभन दोष(ईडी) के कई कारण हो सकते हैं।

स्तंभन दोष के बारे में और समझने से पहले ये जानना कारगर रहेगा कि ये समझ लिया जाए कि तनाव कैसे होता है।

लिंग में तनाव

जब एक पुरुष कामोत्तेजित हो जाता है तो उसका दिमाग तंत्रिकाओं के जरिए लिंग को संदेश भेजना शुरु कर देता है। ये तंत्रिका लिंग में रक्त का प्रवाह बढ़ा देती हैं जिससे टिशुस मिलकर इसे बड़ा और कठोर बनाना शुरु कर देते हैं। लिहाजा जो कुछ भी इस तंत्रिका के तंत्र या रक्त प्रवाह में दखल देता है वो नपुंसकता या स्तंभन दोष का कारण बन सकता है।

जो कुछ भी कामेच्छाओं के स्तर को प्रभावित कर सकता है वो स्तंभन दोष या नपुंसकता का कारण बन सकता है। क्योंकि कामेच्छाएं कम हो जाएं तो दिमाग के लिए तंत्रिकाओं को जागृत करना और स्तंभन का संदेश पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। अवसाद जैसे मानसिक या मनोवैज्ञानिक समस्याओं से भी कामेच्छाओं में कमीं आ सकती है। मसलन हार्मोन का स्तर (शरीर जो रसायन तैयार करता है) कम हो सकता है।

शारीरिक दिक्कतें

चार मुख्य स्वास्थ्य की समस्याएं ऐसी होती हैं जिनके कारण स्तंभन दोष की समस्या सामने आ सकती है। ये निम्नलिखित हैं।

संवहनी जन्य(vasculogenic) – वो समस्याएँ जिनसे लिंग में रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है।

तंत्रिकाजन्य (neurogenic)- वो समस्याएं जिनमें आपका तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। ये दिमाग, तंत्रिका और स्पाइनल कॉर्ड से मिलकर बनता है।

हार्मोनल- वो समस्याएं जो आपके हार्मोन्स के स्तर को प्रभावित करते हैं।

शरीर रचना संबंधी- वो समस्याएं जो आपके लिंग की शारीरिक संरचना को नुकसान पहुँचाती है।

संवहनीतंत्र जन्य समस्याएं

संवहनीतंत्र(वेस्क्युलोजेनिक) जन्य समस्याओं के कारण स्तंभन दोष के उदाहरण में इन्हें शामिल किया जा सकता है।

हृदयरक्तवाहिनी या नलियों की बीमारियाँ- दिल की या रक्त वाहिनियों की वो बीमारियाँ मसलन धमनी का कठोर हो जाना।

उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)

मधुमेह-रक्त में शर्करा(ग्लूकोज) की मात्रा बढ़ जाने से होने वाली दिक्कतें। इससे रक्त के संचार और लिंग में जाकर खत्म होने वाली तंत्रिका दोनों में दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए ये तंत्रिकाजन्य दिक्कत भी है।

स्तंभन दोष हृदय-रक्त वाहिनी बीमारियों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इसीलिए जब भी डॉक्टर आपकी बीमारी को पहचानने की कोशिश करते हुए आपका इलाज शुरु करेगा सबसे पहले वो इसी कारण पर विचार कर सकता है।

तंत्रिकाजन्य समस्या (Neurogenic conditions)

तंत्रिकाजन्य बीमारियों जिनसे नपुंसकता हो सकती है, के उदाहरण:

  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस - एक ऐसी परेशानी, जिससे शरीर की कार्रवाई और गतिविधियों के बीच तालमेल बिगड़ जाता है जैसे संतुलन बिगड़ना।
  • पार्किन्सन की बीमारी- एक ऐसी बीमारी जिसमें दिमाग शरीर की गतिविधियों ,मसलन चलना, बोलना या फिर लिखना आदि पर नियंत्रण नहीं रख पाता है।
  • रीढ़ की हड्डी में चोट या विकार
  • स्ट्रोक - एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या जिसमें दिमाग तक रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है।

हार्मोन्स से संबंधित दिक्कतें

हार्मोन्स से संबंधित समस्याओं से भी इरेक्शन ना होने की परेशानी हो सकती है।

अल्पजननग्नन्थिता (हायपोगोनडिस्म, hypogonadism) – एक ऐसी समस्या जिसमें पुरुष हार्मोन्स, टेस्टोस्टेरोन के बनने में दिक्कत होती है जिससे उसका स्तर बहुत ही कम हो जाता है।

थाईराइड ग्रन्थि की अतिसक्रियता इसमें थाइरॉइड हार्मोन बहुत ज्यादा मात्रा बनता है।

थाइराइड ग्रन्थि की अल्पसक्रियता - जहां पर्याप्त मात्रा में थाइराइड हार्मोन नहीं बन पाता है।

कुशिंग विकार(Cushing's syndrome) - एक ऐसी समस्या जिसमें कोर्टिसोल(cortisol, एक प्रकार का हॉर्मोन) के निर्माण प्रभावित करती है

शरीर रचना संबंधी दिक्कतें

पैरोनी रोग जिसस लिंग के ऊतक प्रभावित हो जाते हैं, शरीर की रचना संबंधी दिक्कतों के कारण स्तंभन दोष का होने का एक उदाहरण है।

दवाइयों के कारण

कुछ पुरुषों में दवाइयों के कारण भी इरेक्शन में परेशानी हो सकता है। इसमें इनको सम्मिलित किया जा सकता है।

मूत्रवर्धक दवा(Diuretics) – एक ऐसी दवाई जिससे मूत्र का उत्पादन बढ़ जाता है। ऐसी दवाइयाँ उच्च रक्तचाप(अत्यधिक चिंता), हार्ट फेलियर होने या फिर किडनी की बीमारियों में दी जाती हैं

अत्यधिक चिंताओं को दूर करने वाली दवाईयां(antihypertensives) जैसे बीटा अवरोधक। इनका उपयोग उच्च रक्तचाप के इलाज में किया जाता है

फाईब्रेट्स – इन दवाइयों का इस्तेमाल कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए किया जाता है

एंटीसायीकोटिक्स (antipsychotics) - मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को दूर करने के लिए इन दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे स्किजोफ्रीनिया (schizophrenia)

अवसादरोधी या एंटीडिप्रेसेंट्स- इन दवाइयों का इस्तेमाल अवसाद या एक तरह के दर्द का इलाज करने के लिए किया जाता है

कॉर्टिकोस्टिरॉइड्स (corticosteroids) – स्टेरॉइड्स वाली दवाइयां जो एक तरह का हार्मोन होती हैं

एच २ विरोधी या एच २-एँटागोनिस्ट्स(H2-antagonists)- पेट के अल्सर्स या फोड़ों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाइ

आक्षेपरोधी या एंटीकैन्वूलसेंट्स(anticonvulsants)- मिर्गी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाई

एंटीहिस्टामिन(antihistamines)- सूक्ष्मग्राही या एलर्जी, जैसे हे फ़ीवर की बीमारी में दी जाने वाली दवाई

एंटी-एंड्रोजेंस (anti-androgens)– एंड्रोजेंस (पुरुष यौन हार्मोन्स) को दबाने वाली एक दवाई

साईटोटोक्सिस(cytotoxics)– कीमोथैरेपी में दी जाने वाली दवाई ये कैंसर की कोशिकाओं को और बढ़ने से रोकती है।

अगर आपको दी गई कोई दवाई आपके स्तंभन दोष का कारण बनती है तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी होगी। इसकी वैकल्पिक दवाई भी उपलब्ध हो सकती है। बहरहाल ये बेहद ज़रुरी है कि जब तक डॉक्टर या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी सलाहकार आपको दी जा रही कोई दवाई बंद करने के लिए ना कह दें तब तक आप दवाई लेना बंद ना करें।

मनोवैज्ञानिक कारण

स्तंभन दोष के पीछे मनोवैज्ञानिक कारणों में इन्हें सम्मिलित किया जा सकता है:

  • अवसाद - लंबे अरसे तक चलने वाली गहरे दुख की अनुभूति
  • बेचैनी- चिंता या डर जैसी परेशान कर देने वाली कोई अनुभूति

अक्सर स्तंभन दोष के लिए मनोवैज्ञानिक और शारीरिक दोनों कारण जिम्मेदार होते हैं। मसलन अगर आपको मधुमेह है तो आपके लिए उत्तेजित होना कठिन हो सकता है। इसकी वजह से आपको परेशानी और चिंता भी हो सकती है। मधुमेह और बेचैनी के मिलेजुले लक्षण आपके स्तंभन दोष का कारण बन सकता है।

ऐसे बहुत से भावुक मामले हैं जो आपकी शारीरिक क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं जिसकी वजह से स्तंभन बनाए रखने में दिक्कत हो सकती है। इनमें निम्नलिखित को सम्मिलित किया जा सकता है:

  • संबंधों में परेशानियां जैसे कि अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करने में दिक्कत महसूस होना
  • यौन संबंधों की जानकारी की कमी
  • कोई पुरानी यौन समस्या
  • गुज़रे वक्त में यौन संबंधी दुर्व्यवहार
  • किसी नए संबंध में होना
  • अन्य कारण

स्तंभन दोष के दूसरे संभव कारणों में शामिल है:

  • अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन
  • थकान होना
  • गैर कानूनी नशे जैसे कि भांग हीरोइन और कोकेन का सेवन करना।

नपुंसकता की पहचान कैसे होती है?

डॉक्टर आसानी से आपके स्तंभन दोष को पहचान सकते हैं। वह आपसे आपकी स्थिति के बारे में बात करेंगे और हो सकता है वह आपका शारीरिक परीक्षण भी करें।

कुछ चीजें जिसके बारे में डॉक्टर आपसे पूछ सकते है उनमें शामिल है:

  • आपके लक्षण
  • आपका सामान्य शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य
  • आपके शराब के सेवन के बारे में
  • अगर आप कोई नशा करते हैं
  • अगर आजकल कोई दवाएँ ले रहे हैं

अगर आप स्तंभन दोष के बारे में अपने डॉक्टर से बात नहीं करना चाहते तो आप किसी यौन रोगों के क्लीनिक में अपनी जांच करा सकते हैं।

यौन इतिहास

डॉक्टर को आपसे, आपके यौन इतिहास के बारे में जानने की भी आवश्यकता होगी। कोशिश करें कि आप शर्माएं नहीं, क्योंकि ये एक आम समस्या है। यदि आप चाहें तो आप अपनी सर्जरी के लिए एक पुरुष डॉक्टर के लिए भी अनुरोध कर सकते हैं।

आपका डॉक्टर आपसे इन बातों के बारे में पूछ सकता है:

  • आपके पूर्व और वर्तमान यौन संबंधों के बारे में
  • आपके यौन उन्मुखीकरण(झुकाव) के बारे में
  • आप ये कितने समय से अनुभव कर रहे हैं
  • क्या आप स्खलन और संभोग कर पाने में सक्षम हैं
  • आपके कामेच्छा का स्तर(लीबीदो) के बारे में

हर वक्त रहने वाला नपुंसकता एक अंतर्निहित जिस्मानी कारण की ओर संकेत दे सकता है। यदि ईडी केवल अपने साथी से यौन संबंध बनाने का प्रयास करते वक्त होता है, तो यह किसी अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक(मानसिक) कारण से होने का संकेत देता है।

आपके हृदय संबंधी स्वास्थ्य का आकलन

रक्त वाहिकाओं का संकीर्ण होना ईडी का एक महत्वपूर्ण कारण है। यह समस्या ह्रदय रोग(ऐसी स्थिति जो हृदय और रक्तप्रवाह को प्रभावित करती है) से भी जुड़ी हुई है। इसलिए आपका डॉक्टर आपमें ह्रदय रोग संबंधी लक्षणों की जांच करके, आपके हृदय स्वास्थ्य का आकलन करेगा। यदि आप में यह समस्या पाई जाती है, तो संभव है कि यही आपकी नपुंसकता का कारण हो।

डॉक्टर इन बातों का परीक्षण कर सकते हैं:

  • यह देखने के लिए आपके रक्तचाप की जांच करेंगे कि कहीं आपको उच्च रक्तचाप (हाईपरटेंशन) तो नहीं है
  • किसी भी विषमता की जांच के लिए आपकी हृदय गति को सुनेंगे
  • आपकी लंबाई के अनुसार आपका वजन सही है अथवा नहीं, यह जांचने के लिए आप की लंबाई, वजन और कमर के घेरे का नाप लेंगे
  • आपसे आपकी खुराक और जीवनशैली के बारे में जानकारी लेंगे , उदाहरण के लिए, आप कितना व्यायाम करते हैं

आपके रक्त में शर्करा(ग्लूकोज) और लिपिड (वसायुक्त पदार्थ) की जांच के लिए रक्त परीक्षण करेंगे, क्योंकि इनका उच्च स्तर यह दर्शा सकता है कि आपमें हृदय और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली स्थितियां हो सकती हैं

शारीरिक जांच और परीक्षण

संरचनात्मक कारणों(ऐसी स्थितियां जो आपके लिंग के आकार को प्रभावित कर सकती हैं) की जांच के लिए डॉक्टर आपके लिंग का परीक्षण कर सकते हैं।

यदि आपकी उम्र 50 से अधिक है, तो डॉक्टर आपको डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन(digital rectal examination (DRE)) की सलाह दे सकता है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर दस्ताने पहनकर अपनी उंगली आपकी गुदा में डालता है। प्रोस्टेट या पौरुष ग्रंथि (लिंग और मूत्राशय के बीच मौजूद एक छोटी ग्रंथि) की समस्याओं जैसे, प्रोस्टेट कैंसर के निदान के लिए, डीआरईउपयोगी हो सकता है।

किसी भी संभावित अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं की जांच के लिए रक्त परीक्षण भी किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर की जांच करके, हाइपोगोनाडीज्म (टेस्टोस्टेरोन का सामान्य से निम्न स्तर) जैसी हार्मोन परिस्थितियों का पता लगाया जा सकता है।

आगे की जांच

कुछ मामलों में आपको आगे की जांच के लिए एक विशेषज्ञ के पास भेजा जा सकता है, हालांकि आमतौर पर इसकी तभी आवश्यकता होती है जब आप इरेक्टायिल डिसफ़ंकशन का अनुभव करने के लिए असामान्य रूप से युवा हों। क्योंकि आमतौर पर 40 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में यह अपेक्षाकृत दुर्लभ है।

यदि ऐसा लगता है कि आपकी ये समस्या, ह्रदय रोग से सम्बंधित है, तो शायद ही इन परीक्षणों की आवश्यकता हो।

इंट्राकैवर्नस इंजेक्शन टेस्ट

इंट्राकैवर्नस इंजेक्शन परीक्षण प्रक्रिया में रक्त प्रवाह को बढ़ाने के लिए आपके लिंग में एक मानव निर्मित (कृत्रिम) हार्मोन इंजेक्ट किया जाता है। इसका इस्तेमाल लिंग में किसी भी असामान्यता के आकलन और सर्जरी की योजना बनाने के लिए किया जा सकता है।

यदि इंजेक्शन, इरेक्शन उत्पन्न करने में विफल होता है, तो यह पता चल सकता है कि आपके लिंग में रक्त आपूर्ति में समस्या है। यदि इंट्राकैवर्नस इंजेक्शन परीक्षण के दौरान आप में इरेक्शन होता है, तब भी रक्त आपूर्ति में समस्या होने की संभावना हो सकती है। इसलिए आपको अल्ट्रासाउंड स्कैन की भी आवश्यकता हो सकती है।

आर्टिरियोग्राफी और डायनामिक इन्फ्यूजन कैवर्नोसोमेट्रि या कैवर्नोसोग्राफी (Arteriography and dynamic infusion cavernosometry or cavernosography)

यह विशिष्ट परीक्षण है जिसमें आपके लिंग की रक्त वाहिकाओं में एक डाई डाला जाता है और इसका एक स्कैनर पर अध्ययन किया जाता है। आपकी सर्जरी पर विचार किए जाने अथवा रक्त आपूर्ति में किसी समस्या का पता चलने पर ही इसका इस्तेमाल किए जाने की संभावना होती है।

मनोवैज्ञानिक आकलन

यदि आपकी इस समस्या का कोई अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक कारण हो, तो डॉक्टर आपको मनोवैज्ञानिक आकलन के लिए भेज सकते हैं। यह इनमें से किसी के साथ हो सकता है :

  • एक मनोवैज्ञानिक - एक स्वास्थ्य सेवा पेशेवर जो मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के आकलन और उपचार में निपुण होता है
  • एक मनोचिकित्सक - एक योग्य डॉक्टर जिसने मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार में ट्रेनिंग प्राप्त की हो

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का इलाज क्या है?

यदि आपको इरेक्टाइल डिस्फंक्शन है, तो आपको दिया जाने वाला उपचार, स्थिति के अंतर्निहित कारणों पर निर्भर करेगा।

उपचार के विकल्पों की नीचे समझाया गया है

अंतर्निहित स्थितियों का उपचार

यदि आपका ईडी किन्ही अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों के कारण है, जैसे ह्रदय रोग अथवा मधुमेह, तो ईडी का उपचार शुरू करने से पहले, इन स्थितियों के उपचार की आवश्यकता होगी। कुछ मामलों में अंतर्निहित कारणों का इलाज करने से ईडी की समस्या भी हल हो जाती है।

यदि आप कोई ऐसी दवा ले रहे हैं जो ईडी का कारण हो सकती है, और जिसका कोई विकल्प उपलब्ध है, तो आपका डॉक्टर आपसे इस बारे में चर्चा करेगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप, डॉक्टर या अन्य योग्य स्वास्थ्य पेशेवर, जो भी आपकी देखभाल का उत्तरदाई हो, उसके द्वारा निर्धारित किसी भी दवा को लेना तब तक बंद ना करें जब तक वह आपको ऐसा करने की सलाह ना दें।

जीवनशैली में बदलाव

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या नपुंसकता के लक्षणों को अक्सर जीवनशैली में बदलाव करके बेहतर बनाया जा सकता है। निम्न तरीकों से आप इसके जोखिम को कम कर सकते हैं:

  • वजन अधिक होने पर वजन कम करना
  • धूम्रपान छोड़ना
  • शराब का सेवन कम करना
  • अवैध दवाओं का इस्तेमाल छोड़ना
  • नियमित व्यायाम करना
  • तनाव कम करना

इस समस्या के समाधान के साथ-साथ, यह बदलाव आपके सामान्य स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में उपयोगी होंगे। उदाहरण के लिए, वजन कम करना, आपके हृदय रोग (स्थिति जो आपके हृदय और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है) के जोखिम को भी कम करने में मदद करेगा।

हृदय रोग की रोकथाम के बारे में और पढ़ें।

फॉस्फोडिएस्टरेज़-5 (पीडीई-5) इन्हिबटर

इसके इलाज में फॉस्फोडिएस्टरेज़ -5 (पीडीई -5) इन्हिबटर सबसे प्रभावी और सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाई जाने वाली दवा है । इसकी मदद से आपके लिंग में रक्त प्रवाह को अस्थायी रूप से बढ़ाकर काम करते हैं।

इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के इलाज के लिए पीडीई-5 इन्हिबटर उपलब्ध हैं। वो हैं:

  • सिल्डेनाफिल (Sildenafil )- यह वियाग्रा ब्रांड के नाम से बेची जाती है
  • टैडालाफिल (Tadalafil) – यह सियालीस ब्रांड के नाम से बेची जाती है
  • वर्देनाफिल (Vardenafil) – यह वालिफ़ ब्रांड के नाम से बेची जाती है।

सिल्डेनाफिल, टैडालाफिल और वर्देनाफिल

सिल्डेनाफिल और वर्देनाफिल करीब 8 घंटे काम करती हैं, जिन्हें 'मांग अनुसार' काम करने के लिए तैयार किया गया है। वहीं, टैडालाफिल 36 घंटे तक काम करती है । यदि आपको लंबे समय तक के लिए उपचार की जरूरत है, उदाहरण के लिए, सप्ताहांत में, तो आपके लिए यह ज्यादा उपयुक्त रहेगी।

अब पीडीई-5 इन्हिबटर के प्रकार और उसकी खुराक पर निर्भर करता है। इसका काम शुरू होने में करीब 30-60 मिनट लगेंगे। सिल्डेनाफिल और वर्देनाफिल दवाएँ लेने के एक घंटे से लेकर 10 घंटे तक आप सेक्स करने में सक्षम होंगे। वहीं टैडालाफिल लेने के बाद, इसका असर 36 घंटे तक रहेगा।

अगर आप खाना खाने के बाद इस दवा को खाएंगे तो इसका असर होने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप पीडीई -5 इन्हिबटर को खाली पेट लें। इस दवा को खाने के एक घंटे बाद आप खाना खा सकते हैं।

ध्यान रहे कि आप 24 घंटे की समयावधि में मात्र एक ही गोली खाएँ।

आपके पास यह विकल्प रहेगा कि आप पीडीई-5 इन्हिबटर के रूप में सिल्डेनाफिल, टैडालफिल और वर्देनाफिल में से किसी भी दवा को चुन सकते हैं । डॉक्टर आपको हर दवा के फ़ायदों के बारे में बता सकते हैं ये भी कि यह कैसे काम करती हैं। चुनाव इन बातों पर निर्भर हो सकता है:

  • आप कितनी बार यौन क्रियाओं में सक्रिय होते हैं
  • क्या आपने पहले भी कोई दवाई लेने की कोशिश की है

सिल्डेनाफिल, टाडालाफिल और वॉर्डनफिल दवाओं की क्षमताओं की जांच करने के लिए कई तरह की रिसर्च की गई हैं। सामान्य तौर पर पाया गया है कि एक दवा लेने के बाद कम से कम दो-तिहाई लोगों की नपुंसकता में सुधार आया है।

अगर आपको ऐसा लगता है कि पीडीई-5 इन्हिबटर आपके लिए प्रभावी साबित नहीं हुई है तो इसका कारण हो सकता है:

  • आपने दवा लेने के बाद पर्याप्त इंतजार नहीं किया है
  • आपने दवा लेने के बाद बहुत देर तक इंतजार किया है
  • आपकी दवा की डोज़ पर्याप्त नहीं है
  • आपमें पर्याप्त यौन उत्तेजना नहीं हुई

ये दवाएं यौन उत्तेजना से सक्रिय होती हैं , इसलिए आपको दवा को सक्रिय बनाने के लिए उत्तेजित भी होना चाहिए।

चेतावनी

ध्यान रहे कि पीडीई -5 इन्हिबटर का इस्तेमाल, ऐसे लोगों को बड़ी सावधानी से करना चाहिए , जो हृदय रोग से पीड़ित हैं। जैसे कोरोनरी हृदय रोग(जब आपके दिल में खून की आपूर्ति अवरुद्ध या बाधित होती है)। हालांकि, यौन गतिविधियों से आपके दिल की बीमारियों को लाभ मिलने की संभावना है। डॉक्टर को चाहिए कि वह आपको इन दवाओं के दुष्परिणामों और लाभ के बारे में बताएं। अगर आप पर्याप्त रूप से फिट हैं तो ही आपको पीडीई -5 इन्हिबटर लेने की सलाह दो जाएगी।

इन दवाओं का उपयोग उन लोगों को भी बड़ी सावधानी से करना चाहिए, जिन्हें लिंग से जुड़ी शारीरिक समस्या हैं जैसे कि पेरोनी की बीमारी(Peyronie's disease, एक ऐसी स्थिति जो लिंग के ऊतक को प्रभावित करती है)। हालाँकि, यह आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा और कुछ मामलों में, इन दवाओं का उपयोग करना सुरक्षित होगा ।

इनके साथ ही इन पीडीई-5 इन्हिबटर का उपयोग उन लोगों को भी बड़ी सावधानी से करना चाहिए:

जिन्हें प्रियपिस्म (Priapism)  (लिंग के लगातार तनाव में रहने की स्थिति) होने का ख़तरा है - यह एक दर्दनाक स्थिति होती है, जो कई घंटों तक रहती है

जो अल्फा-ब्लॉकर्स का इस्तेमाल करते हैं - यह एक दवा है ,जो कई परिस्थितियों का इलाज करने के लिए उपयोग में लाई जाती है । जैसे कि उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)

उन लोगों को भी पीडीई-5 इन्हिबटर नहीं लेनी चाहिए , जो दवाएँ ले रहे हों , या मनोरंजन वाली ड्रग्स ले रहे हों , जिनमें नाइट्रेट होता है । ऐसी स्थिति में, दो पदार्थों के संयोजन से आपके दिल पर खतरनाक असर पड़ सकता है।

ऑर्गेनिक नाइट्रेट का इस्तेमाल अक्सर एनजाइना(angina) के इलाज में किया जाता है । वहीं ब्यूटाइल नाइट्रेट एक मनोरंजक ड्रग है, जिसे आमतौर पर 'पॉपपर्स' के रूप में जाना जाता है।

आपको चेतावनी दी जाती है कि आपको पीडीई-5 इन्हिबटर नहीं लेना चाहिए, यदि:

आपको यौन गतिविधियों में या ऐसी गतिविधियों में लिप्त रहने से मना किया गया हो ,जिससे आपकी रक्त वाहिकाएं चौड़ी हों

अगर आप निम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन) से पीड़ित हैं

हाल में आपको स्ट्रोक आया हो - एक चिकित्सीय आपात स्थिति ,जो आपके मस्तिष्क में खून की सप्लाई बाधित होने पर होती है

अगर आपको अस्थिर एनजाइना है - एक अंतर्निहित हृदय की स्थिति ,जो छाती में दर्द जैसे लक्षणों का कारण बनती है

दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा है - यह चिकित्सीय आपात की स्थिति है, जिसमें हार्ट को खून की आपूर्ति अचानक रुक जाती है

अगर आपका नॉन ऑप्टिक एंटीरियर इश्केमिक ऑप्टिक न्युरोपेथी  (non arteritic anterior ischaemic optic neuropathy )इतिहास है - यह आंख की एक स्थिति है, जिसमें अचानक आंखों से दिखना बंद हो जाता है

हालांकि कुछ मामलों में,पीडीई-5 इन्हिबटर का उपयोग उस दौरान भी किया जा सकता है, जब आप इनमें से किसी एक स्थिति से प्रभावित हों। उदाहरण के लिए, विशेषज्ञ से परामर्श के बाद, डॉक्टर आपको सलाह दे सकते हैं कि हार्ट अटैक आने के तीन से छह महीने के बाद आपके लिए येपीडीई -5 इन्हिबटर सुरक्षित हैं।

दुष्प्रभाव

पीडीई -5 इन्हिबटर कुछ दुष्प्रभाव भी सामने लाते हैं । इनमें शामिल हैं:

  • सिरदर्द और माइग्रेन
  • फ़्लशिंग (लालिमा)
  • अपच
  • मतली
  • उल्टी होना
  • बंद या बहती हुई नाक
  • पीठ दर्द
  • देखने में परेशानी
  • मांसपेशियों में दर्द

(नपुंसकता के लिए दवाओं की जानकारी देखें)

वैक्यूम पंप

इस समस्या के लिए वैक्यूम पंप एक अन्य उपचार का तरीका है। इसमें एक प्लास्टिक ट्यूब होती है, जो एक पंप से जुड़ी होती है। ये हाथ या बैटरी से चलती है।

इसमें आप अपने लिंग को इस ट्यूब में रखते हैं और उसमें बाहर से हवा भरी जाती है। इससे एक वैक्यूम बनता है , जिससे खून आपके लिंग में आ जाता है और आपका लिंग सीधा हो जाता है । फिर आप अपने लिंग के चारों ओर एक रबर की अंगूठी रखें, ताकि खून को करीब 30 मिनट तक , उसी स्थिति में बनाए रखा जा सके ।

हालांकि इस पंप को सही से चलाना सीखने के लिए कई बार प्रयास करना पड़ सकता है, लेकिन आमतौर पर ये बहुत प्रभावी होते हैं। इस वैक्यूम पंप का उपयोग करने के बाद, 10 में से 9 पुरुष अपने नपुंसकता के विभिन्न कारणों के बाद भी सेक्स करने में सक्षम होते हैं।

ध्यान रखने योग्य बात

यदि आपको रक्तस्राव विकार है या यदि आप थक्कारोधी(anticoagulant) दवाएं ले रहे हैं, तो आपको इस वैक्यूम पंप का उपयोग नहीं करना चाहिए । यह आपके रक्त के थक्के बनने की क्षमता को कम करता है।

इस वैक्यूम पंप के दुष्परिणामों में दर्द होना या चोट लगना शामिल हैं। हालांकि ये एक तिहाई लोगों से भी कम को होता है।

सेक्सुअल एडवाइस असोसिएशन बहुत सी जानकारी प्रदान करता है और उन कंपनियों का विवरण भी देता है जो वैक्यूम पम्प आदि बनाती हैं।

एलप्रोस्टेडिल(Alprostadil)

यदि आपको स्तंभन दोष(ईडी ) दूर करने वाली दवाइयों से लाभ नहीं हो रहा है,या आप पीडीई-5 दवाएं या वैक्यूम पंप को नहीं ले सकते या लेना नहीं चाहते ,तो आपको एलप्रोस्टेडिल नाम की दवाई दी जा सकती है। यह एक मानव द्वारा निर्मित सिंथेटिक हार्मोन है जो लिंग में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है।

एलप्रोस्टेडिल निम्न रूप से प्रयोग किया जाता है:

  • लिंग में सीधे इंजेक्शन द्वारा-इसको इंट्राकेवर्नोसॉल इंजेक्शन कहा जाता है
  • मूत्र मार्ग(वह नली जो मूत्राशय को लिंग के अग्र भाग से जोड़ती है) मे छोटी सी गोली डालकर - इस विधि को यूरेथ्रल एप्लिकेशन कहा जाता है ।

आपको इसका प्रशिक्षण दिया जाता है कि आपको कैसे इंजेक्शन द्वारा या मूत्र मार्ग में एलप्रोस्टेडिल गोली को डालना है। यदि आपकी पार्ट्नर गर्भवती है और आपने अपने मूत्र मार्ग में एलप्रोस्टेडिल दवाई का प्रयोग किया है तो संभोग क्रिया के समय कंडोम का प्रयोग करें। एलप्रोस्टेडिल दवाई से 5 से 15 मिनट के बीच लिंग कठोर हो जाता है। यह कठोरता कितने समय तक रहेगी यह दवाई की मात्रा पर निर्भर करती है।

पुरुषों में जिनको पीडीई-5 नामक स्तंभक दवाइयों से लाभ नहीं होता, उनको एलप्रोस्टेडिल के इंजेक्शन से लाभ होता है इसकी सफलता की दर 85% है।एलप्रोस्टेडिल की गोली जो मूत्र मार्ग में डाली जाती है वह दो तिहाई स्थितियों में सफल पायी जाती है।

चेतावनी

निम्न स्थितियों में एलप्रोस्टेडिल का प्रयोग नहीं करना चाहिए:

  • यदि व्यक्ति को प्रियपिज्‍म (जिसमें लिंग में कठोरता से दर्द होता है और ऐसा कई घंटों तक रहता है) हो - उदाहरण के तौर पर जो रक्त में लाल कोशिकाओं की कमी से पीड़ित हैं
  • अन्य नपुंसकता की दवाइयों के साथ
  • यदि आपके लिंग का प्रत्यारोपण किया गया हो और आपको यौन क्रीड़ा करने से मना किया गया हो
  • मूत्र मार्ग में डाले जाने वाली दवाई का प्रयोग निम्न स्थितियों में नहीं किया जाना चाहिए:
  • जिन व्यक्तियों के लिंग की संरचना में कोई दोष हो(वह स्थिति जिसमें लिंग की बनावट या माप में कोई कमी हो)
  • जिनको लिंग में किसी प्रकार का संक्रमण जैसे कि लिंग के अगले हिस्से में सूजन इत्यादि हो

दुष्परिणाम

एलप्रोस्टेडिल के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं जो निम्नलिखित हैं:

  • रक्तचाप में परिवर्तन
  • सिर चकराना
  • सिर में दर्द
  • लिंग में दर्द
  • मूत्र मार्ग में जलन या रक्त का आना
  • इंजेक्शन लगाने की जगह पर प्रतिक्रिया होना जैसे कि सूजन

अधिक जानकारी के लिए एलप्रोस्टेडिल के विषय में सूचनाएं पढ़ें।

हार्मोन चिकित्सा

यदि हार्मोन के कारण स्तंभन दोष हुआ है तो आपको हार्मोन विशेषज्ञ(endocrinologist) डॉक्टर के पास भेजा जा सकता है। यह विशेषज्ञ हार्मोन्स की स्थितियों का इलाज करता है।

हार्मोन एक प्रकार का रसायन होता है जो शरीर के अंदर ही बनता है। बहुत से हार्मोन के असंतुलन के कारण होने वाले रोगों का इलाज सिंथेटिक(मानव निर्मित) को देकर हार्मोन के निर्धारित स्तर को बनाये रखकर किया जाता है।

सर्जरी

अधिकतर मामलों में सर्जरी के लिए तभी कहा जाता है जब अन्य विधियों से लाभ नहीं होता है। इस विधि को निम्न स्थितियों में भी प्रयोग में लाया जा सकता है:

  • युवा व्यक्ति जिनको चोट या घाव हुआ हो और उनका लिंग इससे प्रभावित हुआ हो - उदहारण के लिए कार एक्सीडेंट से लगी चोट
  • वह व्यक्ति जिनकी लिंग की संरचना में प्रमुख शारीरिक दोष हो

पहले के समय में सर्जरी तभी की जाती थी जब यह निश्चित हो जाता था कि व्यक्ति के लिंग तक रक्त के प्रवाह में किसी स्थान पर रुकावट है। सर्जरी उस अवरोध करने वाले रक्त के कणों को हटाकर रक्त के प्रवाह को सुचारू करती थी।

लेकिन शोध द्वारा ये पता चला है कि इस प्रकार के इलाज थोड़े समय के लिए ही प्रभावकारी होते थे, जिनके दीर्घकालीन परिणाम बहुत ही निराशाजनक होते थे इसलिए अब इनका प्रयोग नहीं किया जाता।

लिंग प्रत्यारोपण(Penile implants)

लिंग प्रत्यारोपण एक प्रकार की सर्जरी है जिसका विचार किया जा सकता है।

जो इस प्रकार के होते हैं:

  • सेमी रिजिड इम्प्लांट - यह अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए उपयोगी होता है जो कभी कभी संभोग करते हैं
  • इन्फ्लेटेबलइम्प्लांट - इसमें दो या तीन पार्ट्स होते हैं जो फूलकर प्राकृतिक रूप से हुए लिंग को उत्तेजित करते हैं

लिंग प्रत्यारोपण अधिकतर सरकारी चिकित्सालयों में उपलब्ध नहीं होते हैं क्योंकि लिंग प्रत्यारोपण एक महंगी सर्जरी है, फिर भी तीन चौथाई व्यक्ति इस चिकित्सा के परिणामों से संतुष्ट हैं।

जटिलताएं 

प्रत्येक प्रकार की सर्जरी की तरह लिंग सर्जरी में भी संक्रमण का डर बना रहता है।यदि आप एंटीबायोटिक दवाइयाँ भी लेते हैं तो भी 100 में से 2 लोगों को संक्रमण हो ही जाता हैI पाँच प्रतिशत स्थिति में लिंग प्रत्यारोपण में यांत्रिक समस्या पाँच वर्ष के अंदर ही आ जाती है।

मनोवैज्ञानिक चिकित्सा

यदि आपको ये समस्या मनोवैज्ञानिक कारणों से है तो आपको एक विधि जो कि सेन्सेट फोकस(sensate focus) कहलाती है के उपचार से लाभ हो सकता है।

यदि आपको अत्यधिक चिंता या अवसाद के कारण नपुंसकता है तो (बातचीत के द्वारा की जाने वाली चिकित्सा) कॉउंसिल से लाभ मिल सकता है।

सेन्सेट फोकस

सेन्सेट फोकस , एक प्रकार की सैक्स थैरेपी है, जो अपने साथी के साथ मिलकर ही करते हैं। इसके इलाज में पहले आप दोनों मिलकर यह तय करते हैं कि एक निश्चित समय जैसे कि महीने या सप्ताह तक संभोग नही करेंगे। इस अवधि में आप एक दूसरे के शरीर को तो स्पर्श कर सकते हैं लेकिन संवेदनशील अंगों जैसे (महिला के स्तनों को) जननांगों को स्पर्श नहीं करना है।

एक ऐसा समय निश्चित करें जिसमे बस आप दोनों होंI कपड़ो के या बिना कपड़ों केएक दूसरे की मालिश करें ,स्पर्श करें या, हाथ फिराएं लेकिन इसका उद्देश यही है कि आप के शरीर को यह पता होना चाहिये कि आपको संभोग नहीं करना है।

जब संभोग न करने का समय पूरा हो जाये तो आप एक दूसरे के यौन अंगों को स्पर्श करना प्रारंभ कर सकते हैं आप एक दूसरे के यौनांगों को स्पर्श करते हुए निरंतर कई सप्ताह बिता सकते हैंI आप इसका प्रारंभ अपने सहयोगी के मुँह को अपने मुँह से छू कर जैसे कि चाटना या चुम्बन लेना जो कि एक दूसरे को भेदन करने वाली रतिक्रिया तक पहुंच सकते हैं।

आप सेन्सेट फोकसके विषय में अधिक जानकारी कॉलेज ऑफ सेक्सुअल एंड रिलेशनशिप थेरेपिस्ट से भी ले सकते हैं।

मनोलैंगिक सलाह

जब स्तंभन दोष से जुड़े भावनात्मक और काम संबंधी मुद्दों पर आप अपने साथी के साथ सलाहकार से खुलकर बात करते हैं तो इसे मनोलैंगिक सलाह परामर्श कहते हैं। इन मुद्दों पर खुलकर बात करके आप बेचैनी से निजात पा सकते हैं। अक्सर बेचैनी और चिंता के कारण आप स्तंभन दोष का शिकार होते हैं। आपका सलाहकार आपको काम क्रियाओं को लेकर प्रयोगात्मक सलाह भी दे सकता है। मसलन स्तंभन दोष के इलाज के लिए काम-क्रिया की मुद्राएं या बाकी इलाज का प्रभावी इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है और अपना यौन जीवन सुधारा जा सकता है।

मनोलैंगिक सलाह के असर दिखाने में वक्त लग सकता है मगर इससे मिश्रित परिणाम मिले हैं।

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT)

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी  (सीबीटी )आपके लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है। सीबीटी इस अवधारणा पर काम करती है कि आप किसी चीज को लेकर जैसा सोचते हैं वो आंशिक रूप से उसी तरह हो जाती है। सीबीटी आपको ये समझाती है कि आपकी समस्याएं अक्सर आपके ही दिमाग का नतीजा होती हैं। आप की नाखुशी के पीछे कोई स्थिति का दोष नहीं होता बल्कि आप उस स्थिति में क्या सोचते हैं या किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं इससे फर्क पड़ता है।

आपको सीबीटी थेरेपिस्ट की मदद से अवास्तविक या मुश्किलें पैदा करने वाले उस विचार को पहचानने में मदद मिल सकती है जिसकी वजह से आपको स्तंभन दोष की समस्या हो रही है - जैसे:

  • आपका आत्म सम्मान(आप खुद के बारे में कैसा महसूस करते हैं)
  • आपकी कामुकता
  • आपके निजी रिश्ते

आपकी सीबीटी थेरेपिस्ट इन मुद्दों पर आपके लिए ज्यादा फायदेमंद और वास्तविक विचारों को पहचानने में आपकी मदद कर सकता है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी(सीबीटी)के बारे में और पढ़ें।

पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियों का व्यायाम(Pelvic floor muscle exercises)

कुछ शोध ये बताते हैं कि कुछ मामलों में पेल्विक फ़्लोर की मांस पेशियों के व्यायाम आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं। ये मूत्राशय और मलाशय के अंदर की मांसपेशियों का समूह होता है। इसी पर लिंग का आधार भी होता है।

पेट के नीचे की मांसपेशियों के व्यायाम में गुदा द्वार और मूत्र त्यागने पर नियंत्रण रखने वाली मांसपेशियों को भी शामिल किया जाता है। अगर आपके डॉक्टर को लगता है कि इस तरह के व्यायाम आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं तो आपको फिसीयोथेरपिस्ट से इस विषय में सलाह करके इन व्यायाम को सही से करने का तरीका सीखना चाहिए।

इन मांसपेशियों का व्यायाम करके आप स्तंभन दोष के लक्षणों को कम कर सकते हैं।

कॉम्प्लिमेंट्री थैरेपी

कुछ कॉम्प्लिमेंट्री थैरेपी ,जैसे एक्यूपंक्चर स्तंभन दोष का इलाज करने का दावा करती हैं। ]इसके बहुत ही कम सबूत हैं कि ये कारगर होती हैं। कुछ मामलों में,कुछ ऐसे  तत्व हो सकते हैं जो बाकि दवाओं के साथ मिलकर दुष्प्रभाव पैदा सकते हैं।

किसी भी कॉम्प्लिमेंट्री थैरेपी का इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरुर कर लें।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk

क्या ये लेख आपके लिए उपयोगी है?

ऊपर जाएँ

महत्वपूर्ण सूचना: हमारी वेबसाइट उपयोगी जानकारी प्रदान करती है लेकिन ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई निर्णय लेते समय आपको हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।