मूत्राशय शोथ (ब्लैडर संक्रमण)

प्रस्तावना

ब्लैडर की सूजन को मूत्राशय शोथ कहते है जो प्राय: ब्लैडर संक्रमण से होता है।

ब्लैडर की सूजन को मूत्राशय शोथ कहते है, जो प्राय: ब्लैडर संक्रमण से होता है।

यह एक आम प्रकार का मूत्रीय मार्ग का संक्रमण **(UTI),** विशेषत: महिलाओं में, और प्राय: गंभीर चिन्ता के स्थान पर परेशानी का कारण होता है। अक्सर हल्के मामले कुछ दिनों के भीतर स्वयं ही अपने आप ठीक हो जाते हैं।

ऐसा होने पर भी, कुछ व्यक्तियों में मूत्राशय शोथ की घटनायें बारंबार होती रहती है और उन्हें नियमित और दीर्घकालिक उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

कुछ मामलों में मूत्राशय शोथ से अधिक गंभीर गुर्दा संक्रमण होने की संभावना भी उत्पन्न हो सकती है, अत: यदि आपके लक्षणों में सुधार नहीं होता है तो चिकित्सीय परामर्श प्राप्त करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

मूत्राशय शोथ के चिन्ह और लक्षण

मूत्राशय शोथ के मुख्य लक्षणों में निम्न सम्मिलित हैं :

  • मूत्र करते समय दर्द, जलन अथवा चुभन
  • सामान्य से अधिक और अविलंब मूत्र करने की आवश्यकता
  • गहरे रंग, धुंधला अथवा अत्यधिक बदबूदार मूत्र
  • पेट के निचले भाग में दर्द
  • सामान्यत: अस्वस्थ, दर्द, बीमार और थका-थका महसूस करना

छोटे बच्चों में संभावित लक्षणों में 38से. (100.4फे.) अथवा अधिक का उच्च ताप (ज्वर), कमजोरी, चिड़चिड़ापन, कम भूख और उल्टी करना सम्मिलित है।

मूत्राशय शोथ के लक्षण के बारे में अधिक अध्ययन करें।

अपने डॉक्टर तो कब संपर्क करें

मूत्राशय शोथ होने पर महिलाओं द्वारा अपने डॉक्टर को संपर्क करना आवश्यक नहीं होता है क्योंकि इस रोग के हल्के मामलों में अक्सर बिना उपचार के ही सुधार हो जाता है। आप स्व-सहायता वाले निम्न उपायों का प्रयोग अथवा अपने औषधिविक्रेता से परामर्श ले सकती/सकती हैं।

अपने डॉक्टर से संपर्क करें यदि :

  • आप मूत्राशय शोथ होने के बारे में निश्चित नहीं हैं
  • आपके लक्षणों में कुछ ही दिनों में सुधार होना आरम्भ नहीं होता है
  • आपको बारंबार मूत्राशय शोथ होता है
  • आपके मूत्र में रक्त, ज्वर अथवा आपकी साइड में दर्द जैसे दु:खदायक लक्षण उत्पन्न होते हैं
  • आप गर्भवती हैं और आप में मूत्राशय शोथ के लक्षण हैं
  • आप पुरुष हैं और आप में मूत्राशय शोथ के लक्षण हैं
  • आपके बच्चे को मूत्राशय शोथ के लक्षण हैं

आपके डॉक्टर लक्षणों के बारे में पूछ कर मूत्राशय शोथ का रोग-निदान कर सकते हैं। वे रोग-निदान की पुष्टि करने में सहायता हेतु जीवाणुओं की उपस्थिती जानने के लिए आपके मूत्र के सैंपल का परीक्षण कर सकते हैं।

मूत्राशय शोथ किस कारण होता है?

अधिकांश मामलों में यह माना जाता है कि आंतड़ी में जीवाणुओं का अहानिकारक ठहराव अथवा मूत्रमार्ग (आपके शरीर से मूत्र बाहर ले जाने वाली ट्यूब) के माध्यम से ब्लैडर में त्वचा प्रवेश होने से मूत्राशय शोथ होता है।

इसके कारण सदैव स्पष्ट नहीं होते हैं, परन्तु यह निम्न कारणों से हो सकता है :

  • संभोग करना
  • टॉयलेट जाने के उपरांत अपना निचला भाग पोंछना विशेषत: यदि आप पीछे से आगे की ओर पोंछते/पोंछती हैं
  • रुई का फाहा अथवा मूत्रीय कैथेटर (ब्लैडर खाली करने के लिए एक पतली ट्यूब) डालना
  • गर्भनिरोधण के लिए डायाफ्राम का उपयोग करना

पुरुषों के तुलना में महिलाओं को मूत्राशय शोथ होने की संभावना अधिक होती है क्योंकि उनकी गुदा (पिछला निकास) उनके मूत्रमार्ग के निकट और अत्यंत छोटी होती है, जिसका अर्थ है कि जीवाणु का ब्लैडर में प्रवेश अत्यंत सरलतापूर्वक हो सकता है।

मूत्राशय शोथ के कारण के बारे में अधिक अध्ययन करें।

मूत्राशय शोथ के उपचार

यदि मूत्राशय शोथ होने पर आप अपने डॉक्टर से संपर्क करते/करती हैं, तो आमतौर पर संक्रमण के उपचार के लिए आपको एंटीबायोटिक्स का नुस्खा दिया जाता है। एक अथवा दो दिनों में इनका प्रभाव आरम्भ होना चाहिए।

यदि आपको पहले भी मूत्राशय शोथ हुआ है और डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता महसूस नहीं करते/करती हैं, तो आप अपने लक्षणों का उपचार घर पर ही करने का चयन कर सकते/सकती हैं।

ठीक होने तक, निम्न उपाये करना लाभप्रद हो सकता है :

लेना

  • अत्यधिक पानी पीना
  • अपने पेट पर अथवा जांघों के बीच गर्म पानी की बॉटल रखना
  • संभोग करने से दूर रहना

कुछ व्यक्तियों को मूत्र में अम्लता (जैसे की सोडियम बैकार्बोनेट अथवा पोटेशियम साइट्रेट) कम करने वाले बिना नुस्खे के लिए गए उत्पाद लेना लाभप्रद लगते हैं, परन्तु उनकी प्रभावकारिता के साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।

यदि आपको मूत्राशय शोथ होते रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में आपके डॉक्टर आपको एक एंटीबायोटिक का नुस्खा दे सकते हैं जिसे आप लक्षण उत्पन्न होने पर बिना किसी डॉक्टर से संपर्क किए, किसी औषधिविक्रेता के पास ले जा सकते/सकती हैं। आपके डॉक्टर लगातार कई महीनों तक एंटीबायोटिक्स की कम मात्रा की खुराक लेने का नुस्खा भी दे सकते हैं।

मूत्राशय शोथ का उपचार के बारे में अधिक अध्ययन करें।

मूत्राशय शोथ की रोकथाम

यदि आपको बार-बार मूत्राशय शोथ होता है, तो इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए आप कुछ उपाय कर सकते/सकती हैं। यद्यपि, इनमें से अधिकांश उपायों की प्रभावकारिता स्पष्ट नहीं है।

इन उपायों में निम्न सम्मिलित हैं :

  • सुगंधित बुलबलों का स्नान, अपने जननांगो के इर्द-गिर्द साबुन अथवा टैलकम पाउडर का प्रयोग न करना – सादे, गैर-सुगंधित प्रकारों का प्रयोग करें
  • स्नान के स्थान पर शावर लेना इससे आपके सफाई उत्पादों में उपस्थित रसायनों का आपके जननांगो से काफी समय के लिए संपर्क होने से बचा जा सकता है
  • मूत्र करने की आवश्यकता होने पर शिघ्रातिशीघ्र टॉयलेट जाना और अपने ब्लैडर को पूरा खाली करना
  • अच्छी तरह हाइड्रेटेड रहना अत्यधिक तरल पदार्थ पीना जो आपके ब्लैडर में जीवाणुओं की वृद्धि रोकने में सहायक हो सकता है
  • टॉयलेट जाने पर अपने निचले भाग को सदैव आगे से पीछे की ओर पोंछना
  • संभोग करने के पश्चात यथासंभव शिघ्रातिशीघ्र अपने ब्लैडर को खाली करना
  • गर्भनिरोधण के लिए डायाफ्राम का उपयोग न करना इसके स्थान पर आप कोई अन्य गर्भनिरोधण उपाय का प्रयोग कर सकते/सकती हैं
  • नायलॉन जैसे कृत्रिम पदार्थ के स्थान पर सूती कपड़े से बने अंडरवियर पहनना, और तंग जीनें और पैंटें न पहनना

मूत्राशय शोथ होने की संभावनाएं कम करने के लिए पारंपरिक रूप से करोंदे का रस पीने की अनुशंसा की जाती है। हालांकि, कई अध्ययनों के अनुसार इससे कोई महत्वपूर्ण अन्तर नहीं पड़ता है।

मूत्राशय शोथ के लक्षण

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मूत्राशय शोथ के कारण मूत्र करने में समस्याएं उत्पन्न हो सकती है और आप अस्वस्थ महसूस कर सकते/सकती हैं।

वयस्कों में मूत्राशय शोथ के लक्षण

वयस्कों में मूत्राशय शोथ निम्न लक्षण उत्पन्न कर सकता है :

  • मूत्र करते समय दर्द, जलन अथवा चुभन
  • सामान्य से अधिक और अविलंब मूत्र करने की आवश्यकता
  • टॉयलेट जाने के तुरन्त बाद पुन: मूत्र करने की आवश्यकता महसूस करना
  • गहरे रंग, धुंधला अथवा अत्यधिक बदबूदार मूत्र
  • पेट के निचले भाग में दर्द
  • सामान्यत: अस्वस्थ, दर्द, बीमार और थका महसूस करना
  • आपके मूत्र में रक्त

साधारणत: वयस्कों में मूत्राशय शोथ से उच्च ताप (ज्वर) नहीं होता है। यदि आपको 38से. (100.4फे.) अथवा अधिक का उच्च ताप है अथवा पीछे अथवा साइडों में नीचे की ओर दर्द है, तो यह गुर्दा संक्रमण का चिन्ह हो सकता है।

बच्चों में मूत्राशय शोथ के लक्षण

किसी बच्चे में मूत्राशय शोथ का निर्धारण करना कठिन हो सकता है क्योंकि लक्षण अस्पष्ट हो सकते है और छोटे बच्चे सरलता से व्यक्त नहीं कर सकते है कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं।

छोटे बच्चों में संभावित मूत्राशय शोथ के लक्षणों में निम्न सम्मिलित हो सकते हैं :

कभी-कभी मूत्र करते समय दर्द, सामान्य से अधिक बार मूत्र करना और पेट में दर्द जैसे प्राय: वयस्कों में पाये जाने वाले लक्षण मूत्राशय शोथ से ग्रसित बच्चों में भी उत्पन्न हो सकते हैं।

डॉक्टर से कब संपर्क करें

यदि आपको अथवा आपके बच्चे को पहली बार ही मूत्राशय शोथ के लक्षण उत्पन्न होते हैं, तो भी आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

आमतौर पर मूत्राशय शोथ एक गंभीर चिंता का कारण नहीं होता है, परन्तु उसके लक्षण कई अन्य रोगों जैसे ही हो सकते हैं; अत: यदि आप इसके बारे में निश्चित नहीं है को एक उचित रोग-निदान करवाना महत्वपूर्ण होता है।

यदि आप एक महिला हैं और आपको पहले भी मूत्राशय शोथ हुआ है, तो आपको आवश्यक रूप से अपने डॉक्टर से पुन: संपर्क करने की आवश्यकता नहीं है। महिलाओं में मूत्राशय शोथ अत्यन्त आम है और अक्सर हल्के मामलें स्वयं ही ठीक हो जाते हैं। यदि आपको मूत्राशय शोथ का उपचार के बारे में किसी परामर्श की आवश्यकता है तो किसी औषधिविक्रेता से बात करें।

ऐसा होने पर भी, यदि आपके लक्षण विकट हैं अथवा कुछ दिनों में सुधार होना आरम्भ नहीं होता है, मूत्राशय शोथ बार-बार होता है, अथवा आप गर्भवती हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मूत्राशय शोथ के लक्षण उत्पन्न होने पर, बच्चों और पुरुषों की सदैव किसी डॉक्टर द्वारा जांच की जानी चाहिए क्योंकि इन ग्रुपों में यह रोग कम प्रचलित परन्तु अत्यंत गंभीर हो सकता है।

मूत्राशय शोथ के कारण

प्राय: जीवाणु संक्रमण से मूत्राशय शोथ उत्पन्न होता है, हालांकि कभी-कभी यह ब्लैडर में किसी अन्य कारण से जलन अथवा खराबी के कारण भी हो सकता है।

जीवाणु-संबंधी संक्रमण

अधिकांश मामलों में यह माना जाता है कि आंतड़ी में जीवाणुओं का अहानिकारक ठहराव अथवा मूत्रमार्ग (आपके शरीर से मूत्र बाहर ले जाने वाली ट्यूब) के माध्यम से ब्लैडर में त्वचा प्रवेश होने से मूत्राशय शोथ होता है।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को मूत्राशय शोथ होने की संभावना अधिक होती है क्योंकि उनकी गुदा (पिछला निकास) उनके मूत्रमार्ग के निकट और अत्यंत छोटी होती है।

यह सदैव स्पष्ट नहीं है कि ब्लैडर में जीवाणु को प्रवेश कैसे होता है, परन्तु यह निम्न कारणों से हो सकता है :

  • संभोग करना
  • टॉयलेट जाने के उपरांत अपना निचला भाग पोंछना विशेषत: यदि आप पीछे से आगे की ओर पोंछते/पोंछती हैं
  • रुई का फाहा अथवा मूत्रीय कैथेटर (ब्लैडर खाली करने के लिए एक पतली ट्यूब)
  • गर्भनिरोधण के लिए डायाफ्राम का उपयोग करना

आपके जोखिम को कौन बढ़ा सकता है?

आपके ब्लैडर में संक्रमण होने की संभावनाओं को कई चीजे बढ़ा सकती हैं। इनमें से कुछ की रूप-रेखा नीचे प्रस्तुत है।

अपने ब्लैडर को खाली करने में असमर्थता

यदि आप टॉयलेट जाने पर अपने ब्लैडर को पूरी तरह खाली नहीं कर पाते/पाती हैं, तो किसी अन्दर पहुँच गए जीवाणु का पूरा बाहर न निकलना और उसमें सरलता से वंश-वृद्धि की संभावना होती है।

अपने ब्लैडर को पूरी तरह खाली नहीं कर पाना संभावित है यदि :

रजोनिवृत्ति

ओएस्ट्रोजेन हारमोन के कमी के कारण रजोनिवृत्ति अवस्था से गुजरी अथवा उसमें रहने वाले महिलाओं के मूत्रमार्ग की परत सिकुड़ सकती है और पतली बन सकती है।

योनि में जीवाणुओं के प्राकृतिक संतुलन में भी परिवर्तन आ सकता है, जिससे संभावित हानिकारक जीवाणु अधिक कॉमन हो सकते हैं।

यह मूत्रमार्ग को अधिक कमजोर बना सकता है और ब्लैडर तक फैल सकता है।

मधुमेह

यदि आपको मधुमेह है एक रोग जिसमें आपके शरीर में शर्करा का स्तर अत्यंत अधिक हो जाता है – तो आपको मूत्राशय शोथ की अधिक संभावना है।

आपके मूत्र में जीवाणुओं की वृद्धि हेतु शर्करा के स्तर अच्छा वातावरण प्रस्तुत कर सकता है, अत: ब्लैडर में पहुंच गए किसी भी जीवाणु द्वारा मूत्राशय शोथ उत्पन्न करने के संभवाना अत्यधिक होती है।

मूत्राशय शोथ के अन्य कारण

मूत्रमार्ग और ब्लैडर में खराबी और जलन से भी मूत्राशय शोथ हो सकता है।

यह निम्न का परिणाम भी हो सकता है :

  • संभोग से घर्षण
  • सुगंधित साबुन अथवा बुलबुला स्नान में उपस्थित रासायनिक उत्तेजक पदार्थ
  • आपके ब्लैडर में किसी कैथेटर अथवा शल्य-चिकित्सा द्वारा उत्पन्न खराबी
  • आपको कूल्हे पर रेडियो थेरेपी अथवा कुछ कीमोथेरेपी औषधियाँ
  • सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक कारणों से किसी महिला के जननांगों को विचारपूर्वक काटना अथवा बदलना (एक अवैध प्रथा जिसे महिला जननांग विकृति अथवा **FGM** कहते है)

मूत्राशय शोथ को ड्रग केटामाइन के मनोरंजनात्मक उपयोग के साथ भी जोड़ा गया है।

मूत्राशय शोथ का उपचार

आमतौर से हल्के मूत्राशय शोथ स्वयं ही कुछ दिनों के भीतर साफ हो जाते हैं, हालांकि कभी-कभी आपको एंटीबायोटिक्स लेने की आवश्यकता हो सकती है।

परामर्श और उपचार के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें यदि :

  • यह निश्चित नहीं है कि आपको मूत्राशय शोथ है
  • कुछ दिनों के भीतर आपके लक्षणों में सुधार आना आरम्भ नहीं होता है
  • आपको बार-बार मूत्राशय शोथ होता है
  • आपके मूत्र में रक्त जैसे विकट लक्षण उपस्थित हैं
  • आप गर्भवती है और आप में मूत्राशय शोथ के लक्षण हैं
  • आप पुरुष हैं और आप में मूत्राशय शोथ के लक्षण हैं
  • आपके बच्चे को मूत्राशय शोथ के लक्षण हैं

यदि महिलाओं को पहले कभी मूत्राशय शोथ हुआ हो तो उन्हें रोग के पुनरावृत्ति के स्थिति में अपने डॉक्टर को आवश्यकरूप से संपर्क करना नहीं होता हैं, क्योंकि हल्के मामलों में अक्सर बिना एंटीबायोटिक्स लिए ही सुधार हो जाता है। आप स्व-सहायता वाले निम्न उपायों का प्रयोग अथवा अपने औषधिविक्रेता से परामर्श ले सकती हैं।

आपके स्वयं द्वारा किए जा सकने वाले प्रयास

यदि आपको पहले कभी मूत्राशय शोथ हुआ हो और आप डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता महसूस नहीं करते/करती हैं, तो रोग समाप्त होने तक लक्षणों से छुटकारा पाने में निम्न परामर्श सहायक हो सकते हैं :

  • पैरासिटामोल अथवा इबुप्रोफेन जैसे बिना नुस्खे के दर्दनिवारक लें – सदैव औषधि जानकारी पत्र को पहले से ही पढ़े ताकि आप इसका लेना सुनिश्चित कर सके, परन्तु अनिश्चितता की स्थिति में अपने औषधिविक्रेता से बात करें
  • अत्यधिक पानी पीएं ऐसा सुझाव दिया गया है कि यह आपके ब्लैडर में से संक्रमण को बाहर निकालने में सहायक हो सकता है और कुछ व्यक्ति इसे लाभप्रद पाते हैं, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह वास्तव में कितना प्रभावकारी होता है।
  • गर्म पानी की बॉटल का प्रयोग अपने पेट पर अथवा जांघों के बीच में गर्म पानी की बॉटल रखना किसी बेचैनी को कम कर सकता है
  • स्वस्थ महसूस करने तक संभोग न करें, क्योंकि ऐसा करना रोग तो और अधिक खराब कर सकता है

कुछ व्यक्तियों के अनुसार करोंदे का रस पीना अथवा मूत्र में अम्लता (जैसे की सोडियम बैकार्बोनेट अथवा पोटेशियम साइट्रेट) का प्रयोग उनके लक्षणों को कम करता है, परन्तु उनकी प्रभावकारिता के साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।

ये उत्पाद सब व्यक्तियों के लिए उपयुक्त नहीं होते है। यदि आप कोई अन्य औषधि ले रहे/रही हैं तो उनका प्रयोग करने से पूर्व अपने डॉक्टर अथवा औषधिविक्रेता से बात करें।

एंटीबायोटिक्स

कुछ मामलों में, आपके डॉक्टर एक एंटीबायोटिक्स का नुस्खा दे सकते हैं। प्राय: इसमें तीन दिन के लिए दो से चार बार प्रति दिन एक गोली अथवा कैप्सूल लेना होता है।

एंटीबायोटिक्स का प्रभाव जल्दी ही दिखना प्रारम्भ हो जाना चाहिए। यदि कुछ ही दिनों में आपके लक्षणों में सुधार दिखना प्रारम्भ नहीं होता है तो अपने डॉक्टर के पास वापिस जायें।

अधिकांश लोगो में एंटीबायोटिक उपचार का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है, परन्तु संभावित दुष्प्रभावों में बीमार महसूस करना व होना, खुजलाहट, चकत्ता और दस्त सम्मिलित हो सकते हैं।

यदि मूत्राशय शोथ बार-बार होता है

यदि आपको मूत्राशय शोथ बार-बार (जिसे रिकरेंट साईस्टीटिस कहते है) होता है तो आपके डॉक्टर स्टैंड-बाई एंटीबायोटिक्स अथवा निरंतर एंटीबायोटिक्स का नुस्खा दे सकते हैं।

यदि आपको अगली बार मूत्राशय शोथ के लक्षण उत्पन्न हों तो पहले डॉक्टर के पास जाए बिना, आप स्टैंड-बाई एंटीबायोटिक्स नुस्खे को किसी औषधिविक्रेता के पास ले जा सकते हैं।

मूत्राशय शोथ की घटनायें रोकने के लिए निरंतर एंटीबायोटिक्स लगातार कई महीनों के लिए लेने होते हैं। निम्न स्थितियों में इनका नुस्खा दिया जाता है :

  • यदि मूत्राशय शोथ आम तौर पर संभोग करने के पश्चात उत्पन्न होता है आपको संभोग करने के दो घंटो के भीतर एंटीबायोटिक्स लेने का नुस्खा दिया जा सकता है
  • if मूत्राशय शोथ का संबंध संभोग करने के साथ नहीं है आपको छ: महीनों की परीक्षण अवधि के लिए कम-मात्रा की खुराक के एंटीबायोटिक्स लेने का नुस्खा दिया जा सकता है

आपके डॉक्टर आपके द्वारा लिए जा सकने वाले मूत्राशय शोथ रोकने के उपाय की अनुशंसा भी कर सकते हैं, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये कितने प्रभावकारी होते हैं।

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