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बुलस पेंफिगोइड (Bullous pemphigoid)

बुलस पेंफिगोइड (Bullous pemphigoid) त्वचा की एक ऐसी बीमारी है, जिसमें त्वचा में खुजली वाले फफोले पड़ जाते हैं। यह ज्यादातर अधिक उम्र के लोगों को होता है।

यह शरीर के इम्यून सिस्टम (immune system) से संबंधित रोग है, जो अधिकतर कुछ वर्षों में अपने आप ही ठीक हो जाती है। इस दौरान फफोलों (blisters) को दवाइयों की सहायता से नियंत्रित किया जा सकता है।

लक्षण क्या हैं?

फफोलों (blisters) में मुख्य रूप से त्वचा में लाल, खुजली वाले निशान पड़ते हैं, जो देखने में दाद या खुजली जैसे दिखाई देते हैं जो कई सप्ताह या महीनों तक ऐसे ही रहते हैं।

उसके बाद बड़े- बड़े खुजली वाले छाले उन लाल निशानों के स्थान पर दिखाई देने लगते हैं । ये त्वचा की बाहरी परत के नीचे होते हैं। इनका व्यास 5 सेंटीमीटर तक हो सकता है। इनके अंदर पानी जैसा द्रव भरा होता है। फफोलों का बाहरी हिस्सा सख्त और मोटा होता है जो द्रव को मज़बूती से संभाले हुए होता है।

त्वचा के अंदर का द्रव अधिकतर पानी की तरह साफ होता है जो बाद में मटमैला या रक्त के रंग जैसा भी हो सकता है।

यह फफोले कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं और इनका कोई निशान भी नहीं पड़ता लेकिन ये चक्र शुरू हो जाता है जिस्मीं और फफोले बन जाते हैं।

यह फफोले और चक्कते , हाथों के ऊपरी भागों में या जांघों पर दिखाई देते हैं। कभी कभी शरीर की सिलवटों पर भी जहाँ त्वचा मुड़ती है या पेट पर भी दिखाई देते हैं।

हालांकि कुछ लोगों में यह लक्षण दिखाई नहीं देते । केवल हल्के लाल निशान और खुजली ही होती है।

इससे कौन प्रभावित होता है?

यह बीमारी अधिकतर अधिक उम्र वाले लोगों, 70 वर्ष से अधिक आयु वालों को ही होती है, लेकिन बहुत कभी कभी यह रोग बच्चों और कम आयु के वयस्कों में भी हो जाता है।

पुरुषों और स्त्रियों दोनों को यह रोग सामान्य रूप से प्रभावित करता है।

इस रोग का क्या कारण है?

त्वचा में फफोले पड़ने की यह बीमारी शरीर की ऑटोइम्यून सिस्टम (autoimmune condition) की ही देन है। इसमें हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली ही शरीर के अपने ऊतकों(tissues) और शरीर के भागों को प्रभावित करती है।

इस रोग में व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली ही त्वचा के विरुद्ध प्रतिरक्षा तत्व बनाने लग जाती है। यह प्रतिरक्षा तत्व ही त्वचा की आंतरिक झिल्लियों पर आक्रमण करते हैं जो कि त्वचा की ऊपरी सतह(epidermis) और उसके नीचे वाली सतह(dermis) के बीच में स्थित होती हैं। ये त्वचा की दोनों सतहों को मजबूती से जोड़े हुए होती हैं। त्वचा की दोनों परतें अलग होने लगती हैं और उनके बीच में तरल पदार्थ भर जाता है।

यह समझ में नहीं आता है कि बुलस पेंफिगोइड जैसे ऑटोइम्यून रोग कैसे उत्पन्न हो जाते हैं, लेकिन यह अनुमान लगाया जा सकता है कि ऐसी कोई वस्तु है जो हमारे इम्यून सिस्टम को, शरीर के अपने ही ऊतकों(tissues) पर आक्रमण करने के लिए विवश करती है। कुछ दवाइयाँ और सूरज की गर्मी से झुलसने से भी यह रोग सक्रिय हो सकता है।

इस रोग के लक्षण अचानक ही प्रकट हो जाते हैं।

बुलस पेंफिगोइड (Bullous pemphigoid)

निम्न नहीं होते:

  • संक्रामक
  • एलर्जी से होने वाले रोग
  • भोजन या जीवनशैली से होने वाले रोग

इसका निदान कैसे होता है?

डॉक्टर त्वचा को देख कर ही इस रोग का अनुमान लगा सकते हैं।

इसकी पुष्टि करने के लिए संक्रमित त्वचा का एक भाग लेकर (बायोप्सी) उसे प्रयोगशाला में यह देखने के लिए भेजा जाता है कि त्वचा की दोनों परतें अलग- अलग तो नहीं हो गई हैं।

विशेष स्टेनिंग (Special staining (immunofluorescence)) का प्रयोग एंटीबॉडीज की उपस्थिति देखने के लिए किया जा सकता है, रक्त के नमूने की भी जांच की जा सकती है कि रक्त में पेम्फिगोएड एंटीबॉडीज (pemphigoid antibodies) तो नही हैं।

इसका इलाज कैसे करते हैं?

यदि आपको इस बीमारी की पुष्टि हो गई है तो आप को चर्म रोग विशेषज्ञ के पास इलाज के लिए भेजा जाता है।

इस इलाज का लक्ष्य नए फफोलों को बनने से रोकना है और जो फफोले पहले से हैं उनको ठीक करने का प्रयास करना है।

विशेषज्ञ डॉक्टर बहुत शक्तिशाली दवाई भी दे सकता है, जिसके दुष्परिणाम हो सकते हैं इसलिए इन दवाओं के दुष्परिणाम कम करने के लिए इन दवाइयों को कम सम्भावित मात्रा में दिया जाता है।

आपको अधिकतर कोर्टिकोस्टेरॉयड (corticosteroids, गोलियां या त्वचा में लगाने की क्रीम के रूप में) दी जाती हैं, कई बार स्टेरॉयड के स्थान पर दी जाने वाली अन्य दवाएँ भी साथ में ही दी जाती हैं, ताकि स्टेरॉयड की कम मात्रा की आवश्यकता पड़े। आपको एंटीबायोटिक भी दी जा सकती हैं।

कोर्टिकोस्टेरॉयड्स (Corticosteroids)

कोर्टिकोस्टेरॉयड्स या स्टेरॉयड्स एक प्रकार की ऐंटीइन्फ़्लैमटॉरी दवाई होती है जो कई प्रकार के रोगों और लक्षणों में कारगार होती है।

यदि त्वचा का कम भाग ही प्रभावित है तो आपको स्टेरॉइडयुक्त क्रीम उस स्थान पर लगाने के लिए दी जा सकती है।

यदि फफोलों का आकार व मात्रा अधिक है तो आप को स्टेरॉइड युक्त गोलियां जैसे प्रिडेनिसोलोन (prednisolone) दी जा सकती हैं।

स्टेरॉइड दवाओं और उनके अच्छे और बुरे परिणाम के विषय में पढ़ें।

यदि फफोले बहुत कष्टदायक हैं, तो पहले आपको स्टेरॉयड की अधिक मात्रा की खुराक दी जाती है , ताकि आपकी अवस्था को जल्दी नियंत्रण में लाया जा सके और फफोले दिखने बंद हो जाएं। इस क्रम में आपको कई सप्ताह लग सकते हैं। इसके बाद औषधि की मात्रा धीरे धीरे कम की जाती है, आपकी स्टेरॉयड की खुराक बिल्कुल बंद भी की जा सकती है या काफी अधिक समय तक बहुत कम मात्रा में इसे लेना भी पड़ सकता है।

आपको कम से कम मात्रा में स्टेरॉयड देने के लिए इसके स्थान पर आवश्यकता अनुसार दूसरी दवाइयाँ भी दी जा सकती हैं, जिनका वर्णन नीचे किया गया है।

आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने के लिए गोलियाँ

आपके प्रतिरोध तंत्र की क्रिया को कम करने के लिए आपको एजाथिओप्राइन (azathioprine) या मेथोट्रेक्सेट (methotrexate) युक्त दवाइयां भी स्टेरॉयड के साथ-साथ ही दी जा सकती हैं जो कि आपके शरीर द्वारा एंटीबॉडीज बनाने की क्रिया को कम करेंगी।

इसका कारण यह है कि यदि एक स्टेरॉयड की अधिक मात्रा के स्थान पर कम मात्रा में स्टेरॉयड दी जाए और स्टेरॉयड के स्थान पर प्रयोग की जाने वाली सहायक दवाइयाँ साथ में दी जायें तो इन दवाओं का दुष्प्रभाव कम से कम होगा। इस विधि को "स्टेरॉयड स्पेरिंग" ('steroid sparing') कहा जाता है।

आपकी त्वचा की देखभाल

त्वचा में दिखने वाले फफोलों को वैसे ही रहने दिया जाता है ताकि इनमें किसी प्रकार का संक्रमण न फैले।

फिर भी यदि त्वचा के फफोले बहुत अधिक बड़े हैं और ऐसे स्थानों पर हैं जहाँ आपको कष्ट अधिक हो रहा है - जैसे कि पैरों के तलवों पर, तो इन फफोलों को सावधानीपूर्वक स्टेरायल सुई की सहायता से फोड़ कर इनके अंदर का द्रव निकाल दिया जाता है और फफोलों की बाहरी परत को ऐसे ही छोड़ दिया जाता है।

यदि फफोले फट जाते हैं तो वह जल्दी ठीक हो जाते हैं।

दृष्टिकोण

बीमारी की इस अवस्था को इलाज द्वारा ठीक करना संभव नहीं है लेकिन अधिकतर अवस्था में यह रोग 5 से 6 वर्षो में अपने आप ठीक हो जाता है।

लेकिन इस अवधि के दौरान फफोलों को नियंत्रित करने के लिए दवाई लेना प्रभावशाली होता है।

सामग्री का स्त्रोतNHS लोगोnhs.uk

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