फोड़ा

फोड़ा, मवाद का एक पीड़ादायक जमाव होता है जो अक्सर किसी जीवाणु संक्रमण के कारण होता है।

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अंतर्वस्तु

फोड़ा

फोड़ा, मवाद का एक पीड़ादायक जमाव होता है जो अक्सर किसी जीवाणु संक्रमण के कारण होता है।फोड़े शरीर में कहीं भी हो सकते हैं।

यह लेख मुख्यत: दो प्रकार के फोड़ों पर केन्द्रित है:

  • त्वचा के फोड़ें – जो त्वचा के नीचे बनते हैं
  • आंतरिक फोड़ें – जो शरीर के भीतर, किसी अंग अथवा दो अंगो के बीच, बनते हैं

इस में निम्न पहलु सम्मिलित है:

लक्षण

अपने डॉक्टर को कब दिखायें

कारण

उपचार

रोक-थाम

अन्य प्रकार के फोड़ें

फोड़ें के लक्षण

त्वचा का फोड़ा अक्सर त्वचा की सतह के नीचे मवाद से भरी सूजी हुई गांठ जैसा दिखता है। आपको उच्च ताप (ज्वर) और ठंड लगने जैसे संक्रमण के अन्य लक्षण भी हो सकते हैं।

शरीर के भीतर उत्पन्न फोड़ें की पहचान करना अधिक कठिन होता है, परन्तु लक्षणों में निम्न सम्मिलित होते हैं:

  • प्रभावित क्षेत्र में पीड़ा
  • उच्च ताप
  • आमतौर पर अस्वस्थ महसूस करना

फोड़ें के लक्षणों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें।.

अपने डॉक्टर को कब दिखायें

यदि आपको फोड़ें के होने का आभास हो तो अपने डॉक्टर को दिखायें। वे किसी त्वचा के फोड़े का निरीक्षण कर सकते हैं अथवा आपको किसी अस्पताल के विचारार्थ भेज सकते हैं।

किसी फोड़े की मौजूदगी के स्थान के आधार पर उसकी पहचान के लिये कई प्रकार के परीक्षण उपलब्ध हैं।

फोड़ें की पहचान के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें।.

फोड़ों के कारण

अधिकतर फोड़ें किसी जीवाणु संक्रमण के कारण होते हैं।

जब आपके शरीर में जीवाणु प्रवेश करता है तो आपका प्रतिरक्षी तंत्र संक्रमण-रोधक सफ़ेद कोशिकाओं को प्रभावित क्षेत्र में भेजता है।

जब सफ़ेद रक्त कोशिकाओं द्वारा जीवाणु पर आक्रमण होता है तो कुछ आस-पास के मांस-तंतु मर जाते हैं, जिससे एक छिद्र हो जाता है और जिसमें मवाद भर जाने से फोड़ा बन जाता है। मांस-तंतुओं, सफ़ेद रक्त कोशिकाओं और जीवाणुओं के मिश्रण से मवाद बनती है।

अक्सर आपके शरीर के किसी अन्य भाग में संक्रमण होने से मौजूदा हालातो की खराबी के कारण आंतरिक फोड़ें बनते हैं। उदाहरणार्थ, अगर उण्डुक-शोथ (अपेंडिसाइटिस) , के कारण आपका उण्डुक (अपेंडिक्स) फट जाता है तो आपके पेट के अंदर जीवाणु फैल सकता है और फोड़ा बना सकता है।

फोड़ों के कारणों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें।.

फोड़े का उपचार

कोई छोटा त्वचा का फोड़ा स्वत: ही निकल सकता है, अथवा स्वत: ही सिकुड़ अथवा सूख सकता है और बिना किसी उपचार के स्वयं ही लुप्त हो जाता है।

परन्तु, बड़े फोड़ों का संक्रमण साफ करने के लिये एंटीबायोटिक दवाओं से उपचार करने की आवश्यकता हो सकती है, और मवाद को निकालना पड़ सकता है। यह अक्सर आपके शरीर में कोई सुई डाल कर अथवा त्वचा में फोड़े के ऊपर कोई छोटा सा चीरा लगा कर किया जाता है।

फोडें के उपचार के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें।.

त्वचा के फोड़े की रोक-थाम

अधिकतर किसी छोटे से घाव, बाल की जड़ अथवा चिकनाई-रोधक अथवा पसीने की गिल्टी में जीवाणु के घुसने से त्वचा के फोड़ें होते हैं।

अपनी त्वचा को साफ, स्वस्थ ओर जीवाणु-मुक्त रख कर त्वचा में फोड़ें होने के खतरे से बचाव किया जा सकता है।

निम्न तरीकों से आप जीवाणु विस्तार के खतरे को कम कर सकते हैं:

  • अपने हाथों को समय-समय पर धोकर
  • अपने परिवार के लोगो को समय-समय पर हाथों को धोने के लिये प्रोत्साहित करके
  • अलग तौलिए का प्रयोग करके और साझा स्नान न करके
  • किसी भी सामाजिक उपकरण जैसे की जिम उपकरण, वाष्प स्नान अथवा तरणतालों के प्रयोग करने से पूर्व अपने त्वचा के फोड़े का पूर्ण उपचार व ठीक होने तक प्रतीक्षा करके

फोड़े से मवाद को दबा कर स्वयं ही न निकालें क्योंकि ऐसा करने से यह जीवाणु आसानी से आपकी त्वचा के अन्य क्षेत्रों में फैल सकते हैं। यदि आप अपने फोड़े से मवाद साफ करने के लिये किसी टिशू का प्रयोग करते हैं तो किटाणुओं को फैलने से रोकने के लिये उन्हें तुरन्त ही फेंक दें। टिशू को फेंकने के पश्चात अपने हाथों को धोयें।

अपनी त्वचा को खरोंच से बचाने के लिये अपने चेहरे, टांगों, बगल अथवा बिकिनी क्षेत्र की शेव करते समय ध्यान रखें। अपने घावों को तुरन्त साफ करें और यदि आपको अपनी त्वचा में कुछ अटका होने का आभास होता है तो अपने डॉक्टर अथवा स्थानीय एनएचएस वाक-इन केन्द्र में तुरन्त दिखायें। उस्तरों अथवा दांत के ब्रुशों को साझा न करें।

निम्न सावधानियां भी त्वचा पर फोड़ें होने के खतरों को कम कर सकती हैं:

  • स्वस्थ और संतुलित आहार लेना
  • मोटे होने पर वजन घटाना
  • धूम्रपान रोकना

आंतरिक फोड़ों की रोक-थाम करना कठिन होता है क्योंकि वे अक्सर अन्य हालातो की खराबी के कारण होते हैं।

फोड़ों की अन्य प्रकारें

Tनिम्न प्रकार के फोड़ों की कई अन्य किस्में होती है जिनका यहां पूरा विवरण नहीं किया गया है:

  • गुदा एवं मलाशय संबंधी फोड़ा
  • a बार्थोलिन फोड़ा – योनी के बाहर दोनों ओर स्थित किसी बार्थोलिन गिल्टी के भीतर मवाद का बनना
  • a दिमागी फोड़ा – खोपड़ी के भीतर विरला लेकिन खतरनाक मवाद बनना
  • a दांत का फोड़ा – दांत की नीचे अथवा सहायक मसूड़ों और हड्डियों में मवाद बनना
  • a पिलोनिडल फोड़ा – कूल्हे फटन (जहां कूल्हे अलग होते हैं) के स्थान पर त्वचा में मवाद बनना
  • मेरुदंड का फोड़ा – रीढ़ की हड्डी के इर्द-गिर्द मवाद बनना

लक्षण

किसी फोड़े के लक्षण आपके शरीर में फोड़ा होने के स्थान पर निर्भर करते हैं।

त्वचा के फोड़ें

त्वचा के फोड़ें में निम्न लक्षण हो सकते हैं:

  • आपकी त्वचा के नीचे समतल सूजन जो कठोर अथवा स्थिर महसूस हो
  • प्रभावित क्षेत्र में पीड़ा और नरमी
  • प्रभावित क्षेत्र में गर्मी और लाली
  • प्रभावित क्षेत्र में त्वचा के नीचे सफ़ेद अथवा पीली मवाद के बनने का दिखना
  • उच्च ताप (ज्वर)
  • ठंड लगना

कोई छाला किसी फोड़े का आम उदाहरण है।

आंतरिक फोड़ें

किसी अंग के भीतर अथवा अंगो के बीच बनने वाले फोड़ों की पहचान त्वचा के फोड़ों की पहचान से अधिक कठिन होती है। उनके लक्षण अस्पष्ट व समस्या के प्रत्यक्ष बाहरी लक्षणों की गैर-मौजूदगी हो सकते हैं।

आंतरिक फोड़े के लक्षण शरीर में फोड़ा बनने वाले स्थान पर निर्भर करते हैं। उदाहरणार्थ, किसी लीवर में फोड़ें से पीलिया हो सकता है, जबकी फेफड़ों में अथवा उनके निकट होने वाले फोड़े से खांसी अथवा सांस लेने की तकलीफ हो सकती है।

आंतरिक फोड़ों में निम्न आम लक्षण हो सकते हैं:

  • फोड़े वाले क्षेत्र में असहजता
  • ज्वर
  • अत्यधिक पसीना
  • अस्वस्थ महसूस करना
  • उल्टी आना
  • ठंड लगना
  • पेट में पीड़ा अथवा सूजन
  • lभूख अथवा वजन में कमी
  • अत्यधिक थकान
  • दस्त अथवा कब्ज़

कारण

अधिकांश फोड़ें स्तफिलोकोकल जीवाणु द्वारा उत्पन्न संक्रमण से होते हैं।

जब जीवाणु शरीर के भीतर प्रवेश करते हैं तो प्रतिरक्षी तंत्र संक्रमण रोकने हेतु सफ़ेद कोशिकाओं को भेजता है। इससे संक्रमण स्थल पर सूजन और इर्द-गिर्द के मांस-तंतुओं की मौत हो जाती है। एक छिद्र बन जाता है जिसमें मवाद भर कर फोड़ा बन जाता है।

मवाद में मांस-तंतुओं, सफ़ेद रक्त कोशिकाओं और जीवाणुओं का मिश्रण होता है। संक्रमण चालू रहने व अधिक मवाद बनने से फोड़ा अधिक बड़ा और पीड़ादायक हो सकता है।

स्तफिलोकोकल जीवाणुओं की कुछ प्रकारें सफ़ेद रक्त कोशिकाओं को नष्ट करने वाले पांतों-वेलेंताइन लिउकोसिदिन (पीवीएल) नाम का विष तैयार करती हैं जो शरीर में संक्रमण से लड़ने के लिये अतिरिक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है और त्वचा संक्रमणों को बार-बार उत्पन्न करता है।

कभी-कभी किन्हीं स्तिथियों में कोई फोड़ा किसी विषाणु, फफुंद अथवा पैरासाइटों के कारण से भी उत्पन्न हो सकता है।

त्वचीय फोड़ें

जब संक्रमण त्वचा की सतह के नीचे प्रवेश करता है तो कोई फोड़ा हो सकता है। यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है, हालांकि निम्न अंगो में त्वचीय फोड़ा होने की संभावना अधिक होती है:

  • बगल
  • हाथ और पैर
  • धड़
  • गुप्तांग
  • कूल्हें

यदि आपकी त्वचा में कोई छोटा चीरा अथवा खरोंच जैसा कोई घाव हो जाता है अथवा चिकनाई-रोधक अथवा पसीने की गिल्टी के कारण त्वचा में अवरोध आता है तो उसमें जीवाणु घुस सकते है और फोड़ा हो सकता है।

आंतरिक फोड़े

शरीर के काफी अन्दर टिशू जाने से संक्रमण होने की स्थिति में पेट के भीतर फोड़ें बन सकते हैं। ऐसा निम्न कारणों से हो सकता है:

  • चोट
  • पेट की सर्जरी
  • किसी नजदीकी क्षेत्र से संक्रमण का फैलाव

संक्रमण के पेट में फैलने और फोड़ा बनने के कई कारण हो सकते है।

उदाहरणार्थ, आपके फेफड़ों में निउमोनिया जैसे किसी जीवाण्विक संक्रमण के पश्चात आपके पेट में कोई उण्डुक फटने के कारण फेफड़े में फोड़ा हो सकता है।

अधिक खतरा

उपरोक्त विशिष्ट कारणों के अतिरिक्त निम्न कारण भी फोड़ा बनने के संभावना को बढ़ाते है:

  • कमजोर प्रतिरक्षी तंत्र का होना – यह एचआईवी अथवा कैमोथैरेपी के उपचार के पश्चात चिकित्सीय हालत के कारण हो सकता है
  • मधुमेह का होना
  • हिद्रादेनिटिस सुपुरातिवा जैसी अंतर्निहित सूजन-संबंधी हालातों का होना
  • स्तफिलोकोकल जीवाणु के वाहक होना

परन्तु, कई फोड़े उन व्यक्तियों में भी हो जाते हैं जो आम-तौर पर स्वस्थ रहते हैं।

रोग-निदान

यदि आपको स्वयं में कोई फोड़ा होने का आभास हो तो डॉक्टर को दिखायें। फोड़ा होने के स्थल के आधार पर फोड़े के रोग-निदान हेतु कई परीक्षण हो सकते हैं।

त्वचीय फोड़े

यदि आपको कोई त्वचीय फोड़ा है तो सर्वप्रथम आपके डॉक्टर प्रभावित क्षेत्र का परीक्षण करेंगे और आपसे निम्न प्रश्न करेंगे:

  • फोड़े की समयावधि कितनी है?
  • उस भाग में कोई चोट आई है?
  • क्या कोई अन्य लक्षण भी हैं?

आपके फोड़े से मवाद का सैंपल लिया व परीक्षण के लिये भेजा जा सकता है। इससे फोड़ा उत्पन्न करने वाले विशिष्ट जीवाणु की पहचान होती है और इसके लिये उचित उपचार का निर्धारण करने में सहायता मिलती है।

यदि आपके एक से अधिक फोड़े है तो आपको पेशाब का सैंपल देने के लिये भी कहा जा सकता है। इसके परीक्षण से मधुमेह के चिन्ह ग्लूकोस की मात्रा जानी जा सकती है। मधुमेह के रोगीयों में त्वचा फोड़े होने का खतरा अधिक होता है।

यदि आपको बार-बार छाले और फोड़े होते है तो आपके डॉक्टर प्रयोगशाला से जीवाणुओं के लिये अतिरिक्त परीक्षण की मांग कर सकते है ताकि यह निर्धारण किया जा सके कि यह कोई वेलेंताइन लिउकोसिदिन (पीवीएल) नाम का विष तो तैयार नहीं कर रहा है। शरीर में इस प्रकार के जीवित जिवाणुओं को रोकने के लिये शरीर की धुलाई अथवा किसी एंटिबायोटिक क्रीम जैसे अन्य उपचारों की अनुशंसा भी की जा सकती है।

आंतरिक फोड़ें

शरीर के भीतर बनने वाले फोड़ों का रोग-निदान त्वचा फोड़ों के रोग-निदान करने से अधिक कठिन होता है क्योंकि वह दिखते नही हैं।

आपके डॉक्टर आपको लक्षणों और अन्य कोई निजी स्वास्थ्य हालातों के बारे में पूछ सकते हैं। आवश्यकतानुसार, वे आपको अस्पताल में विशेषज्ञ से विचारार्थ हेतु भेज सकते हैं।

उपचार

फोड़ों की प्रकार और आकार के आधार पर विभिन्न तरीकों से उनका उपचार किया जा सकता है।

मुख्य उपचार विकल्पों में निम्न सम्मिलित हैं:

त्वचीय फोड़े

कुछ छोटे फोड़े स्वत: ही सूख जाते हैं व बिना किसी उपचार के ही ठीक हो जाते हैं। गर्म फलालैन से गर्म दबाव की प्रक्रिया गर्मी करने पर सूजन में कमी व इलाज में तेजी लाने में सहायक हो सकती है।

परन्तु, संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिये फलालैन को अच्छे से धोना और अन्य व्यक्तियों पर उपयोग नहीं करना चाहिये।

बड़े अथवा स्थायी त्वचा फोड़ों की स्थिति में संक्रमण को दूर करने और उसके फैलाव को रोकने के लिये आपके डॉक्टर एंटिबायोटिक्स से उपचार का नुसखा दे सकते हैं।

कभी-कभी, विशेषत: बारम्बार होने वाले संक्रमणों की स्थिति में पुन:संक्रमण रोकने (डीकॉलोनीसेशन) के लिये आपको सभी जीवाणुओं को अपने शरीर से धोना होगा। यह आपके शरीर पर एंटिसेप्टिक साबुन का प्रयोग और नाक के भीतर एंटिबायोटिक क्रीम के प्रयोग करने से हो सकता है।

परन्तु, त्वचा फोड़ों को साफ करने के लिये केवल एंटिबायोटिक्स पर्याप्त नहीं हो सकता है, और संक्रमण को साफ करने हेतु मवाद को निकालने की आवश्यकता हो सकती है। यदि किसी फोड़े को खाली नहीं किया जाता है तो इसके फटने तक इसका बढ़ना और मवाद का भरना चालू रह सकता है जो अत्यन्त पीड़ादायक हो सकता है व संक्रमण का फैलाव अथवा पुनरावृत्ति हो सकती है।

चीरा ओर निकासी

यदि आपके त्वचीय फोड़ों के लिये निकासी की आवश्यकता है तो संभवत: आपको एक अनेसथेटिक – आम तौर पर स्थानीय अनेसथेटिक, जिसमें आप सचेत रहते है व फोड़े के इर्द-गिर्द का क्षेत्र सुन्न किया जाता है - के प्रभाव में कोई छोटा ऑपरेशन करवाना होगा।

इस प्रक्रिया के दौरान, सर्जन मवाद को बाहर निकालने के लिये फोड़े के ऊपर एक चीरा लगाता है। वह परीक्षण के लिये मवाद का एक सैंपल भी ले सकते हैं।

मवाद को हटाने के पश्चात, सर्जन जीवाणुहीन नमकीन पानी का प्रयोग करते हुये फोड़ों द्वारा छोड़े गये छिद्र को साफ करेंगे।

फोड़ों को खुला परन्तु किसी घाव पट्टी से ढक कर छोड़ दिया जायेगा ताकि यदि कोई मवाद उत्पन्न होती है तो यह आसानी से बह सकें। यदि फोड़ा गहरा है तो इसे खुला रखने के लिये इसके भीतर कोई एंटिसैप्टिक पट्टी (जालीदार कपड़े की पट्टी) रखी जा सकती है।

यह प्रक्रिया कोई घाव का छोटा चिह्न छोड़ सकती है।

आंतरिक फोड़ें

किसी आंतरिक फोड़े से सामान्यतः त्वचा में सुई घुसा कर (त्वचीय फोड़े से निकासी) अथवा सर्जरी से मवाद को बाहर निकालने की आवश्यकता होती है।

आपके फोड़े के आकार और आपके शरीर में इसके स्थापन के आधार पर प्रयोग किये जाने वाले तरीके का निर्धारण किया जाता है।

संक्रमण को समाप्त करने और इसे फैलने से रोकने के लिये सामान्यतः उसी समय एंटिबायोटिक भी दिये जाते हैं। यह गोलियों के रूप में अथवा सीधे ही नसों में (इंट्रावेनुस ड्रिप) दिये जा सकते हैं।

त्वचीय निकासी

यदि आंतरिक फोड़े का आकार छोटा है तो आपके सर्जन एक बारीक सुई से इसे खाली कर सकते हैं। फोड़े के स्थल के आधार पर यह स्थानीय अथवा सामान्य अनेसथेटिक के प्रयोग से किया जा सकता है।

सुई को उचित स्थान तक पहुंचने हेतु गाइड करने के लिये सर्जन अल्ट्रासाउंड स्कैन अथवा कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी) का प्रयोग कर सकते हैं।

फोड़े के स्थल को ढूंढने के पश्चात, सुई का प्रयोग करते हुये सर्जन मवाद को बाहर निकाल लेते हैं। इसके लिये आपकी त्वचा पर फोड़े के ऊपर एक छोटा चीरा लगा सकते हैं और फिर इसमें एक ड्रेनेज कैथेटर के नाम वाली पतली प्लास्टिक ट्यूब डाल देते हैं।

कैथेटर से एक थैली में मवाद को निकाला जाता है और इसे ऐसे ही एक सप्ताह तक के लिये छोड़ा दिया जा सकता है।

यह प्रक्रिया एक दिवसीय पद्धति के रूप में की जा सकती है, अर्थात आप उसी दिन घर लोट सकते हैं, हालांकि कुछ व्यक्तियों के लिये कुछ दिनों के लिये अस्पताल में रहना आवश्यक हो सकता है।

त्वचीय फोड़ों के लिये चीरे और निकासी पद्धति की तरह, त्वचीय निकासी भी एक घाव का छोटा चिह्न छोड़ सकती है।

सर्जरी

निम्न परिस्थितियों में सर्जरी आवश्यक हो सकती है:

  • आपका आंतरिक फोड़ा अत्यन्त बड़ा है और सुई से खाली नहीं किया जा सकता है
  • फोड़े तक सुई सुरक्षापूर्वक नहीं पहुंच सकती है
  • सारी मवाद हटाने में निकासी करने वाली सुई प्रभावकारी नहीं है

सर्जरी की प्रकार आपके आंतरिक फोड़े और इसके स्थान पर निर्भर करती है। सामान्यत: इसमें मवाद को बाहर निकालने के लिये आपकी त्वचा में एक बड़ा चीरा लगाया जाता है।

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